today murli 29 january

BRAHMA KUMARIS MURLI TODAY 29 JANUARY 2019 : AAJ KI MURLI

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 29 January 2019

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29-01-2019
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन

 

“मीठे बच्चे – अभी तुम्हें शान्ति और सुख के टावर में चलना है इसलिए अपने स्वभाव और कैरेक्टर को सुधारते जाओ, पुराने को परिवर्तन करो”
प्रश्नः- दिमाग सदा रिफ्रेश रहे उसकी युक्ति क्या है?
उत्तर:- बाप जो सुनाते हैं उसका मंथन करो, विचार सागर मंथन करने से दिमाग सदा रिफ्रेश हो जाता है। जो सदा रिफ्रेश रहते हैं वह दूसरों की भी सर्विस कर सकते हैं। उनकी बैटरी सदा चार्ज होती रहती है क्योंकि विचार सागर मंथन करने से सर्वशक्तिमान् बाप के साथ कनेक्शन जुटा रहता है।
गीत:- नयनहीन को राह दिखाओ…. 

ओम् शान्ति। यह गीत भी मनुष्यों का गाया हुआ है। परन्तु अर्थ कुछ भी नहीं जानते। जैसे और प्रार्थना करते हैं, यह भी जैसे एक प्रार्थना है। परमात्मा को जानते नहीं। अगर परमात्मा को जानें तो सब कुछ जान जायें। सिर्फ परमात्मा कह देते हैं परन्तु उनके जीवन का कुछ भी पता नहीं। तो नैनहीन हुए ना। तुमको अब ज्ञान का तीसरा नेत्र मिला है, इसलिए तुमको त्रिनेत्री कहा जाता है। दुनिया में भल मनुष्य यह अक्षर कहते हैं त्रिनेत्री, त्रिकालदर्शी, त्रिमूर्ति.. परन्तु अर्थ कुछ भी नहीं जानते। जैसे कहते हैं साइंस और साइलेन्स का आपस में क्या संबंध है! भल प्रश्न पूछते हैं उत्तर खुद भी नहीं जानते। कहते हैं वर्ल्ड में पीस हो परन्तु वह कब हुई थी? किसने की थी? कुछ भी नहीं जानते। सिर्फ पूछते रहते हैं तो जरूर कोई जानने वाला चाहिए जो बताये। तुम बच्चों को बाप ने समझाया है यह सब खेल बना हुआ है। टावर आफ पीस, सुख का टावर, सबका टावर होता है, शान्ति का टावर है मूलवतन, जहाँ हम आत्मायें रहती हैं। उसको कहेंगे टावर आफ साइलेन्स। फिर सतयुग में है टावर आफ सुख, टावर आफ पीस, प्रासपर्टी। ऐसे कोई मुख से नहीं कहेंगे कि हम आत्माओं का घर मुक्तिधाम है। यह सब बातें बाप ही समझाते हैं, टीचर हो तो ऐसा हो। वह है टावर आफ नॉलेज। तुमको भी शान्ति और सुख के टावर में ले जाते हैं। यह फिर है टावर आफ दु:खधाम। हर बात में इनसालवेन्ट हैं। पवित्रता सुख शान्ति का वर्सा तुम इस समय ही पाते हो। बलिहारी इस पुरुषोत्तम संगमयुग की है, इनको कल्याणकारी युग कहा जाता है। कलियुग के बाद फिर होता है सतयुग। वह सुख का टावर है। वह शान्ति का टावर है। यह दु:ख का टावर है। यहाँ अथाह दु:ख हैं। सब दु:ख आकर इकट्ठे हुए हैं। कहते हैं ना दु:ख के पहाड़ गिरते हैं, जब अर्थक्वेक आदि होती है तो कितना त्राहि-त्राहि करते हैं।

बाप ने समझाया है बाकी टाइम थोड़ा है। बच्चों को याद की यात्रा में टाइम लगता है। बहुत हैं जो पूरा समझते ही नहीं। बिन्दी समझें, क्या समझें। अरे जैसी आत्मा है वैसे ही परमात्मा भी है। आत्मा को जानते हो ना, वह लक्की सितारा है। बिल्कुल सूक्ष्म है। इन ऑखों से नहीं देख सकते हैं। तो यह सब बातें बाप समझाते हैं। ऐसी बातों पर विचार सागर मंथन करने से भी दिमाग रिफ्रेश हो जाता है। कहाँ भी जायेंगे तो समझायेंगे कि टावर आफ शान्ति, टावर आफ सुख, टावर आफ पवित्रता है ही न्यु वर्ल्ड में। पुराने स्वभाव को, कैरेक्टर्स को सुधार कर बाप नई दुनिया का मालिक बनाते हैं। मनुष्य भल गाते हैं वेद शास्त्र गीता आदि पढ़ते हैं परन्तु समझते कुछ भी नहीं हैं। सीढ़ी तो नीचे उतरते ही आते हैं। भल अपने को शास्त्रों की अथॉरिटी समझते हैं परन्तु उनको उतरना ही है। आत्मा पहले सबकी सतोप्रधान होती है फिर धीरे-धीरे बैटरी खलास हो जाती है, इस समय सबकी बैटरी खलास है। अब फिर बैटरी चार्ज होती है। बाप कहते हैं मनमनाभव। अपने को आत्मा समझो। बाप है सर्वशक्तिमान्, उनको याद करने से तुम्हारे पाप कट जायेंगे और फिर बैटरी भर जायेगी। तुम अभी फील कर रहे हो, हमारी बैटरी भर रही है। कोई की नहीं भी भरती है। सुधरने के बदले और ही बिगड़ जाते हैं। बाप से प्रतिज्ञा भी करते हैं बाबा हम कभी विकार में नहीं जायेंगे। आपसे तो 21जन्मों का वर्सा जरूर लेंगे, फिर भी गिर पड़ते हैं। बाप कहते हैं काम विकार पर जीत पाने से तुम जगतजीत बनेंगे। फिर अगर विकार में गया तो अक्ल चट। यह काम महाशत्रु है। एक दो को देखने से काम की आग लगती है। बाप कहते हैं तुम काम चिता पर बैठ सांवरे बन गये हो, अब तुमको गौरा बनाते हैं। यह बाप ही तुम बच्चों को समझाते हैं। पढ़ाई से तुम्हारी बुद्धि खुलती है। झाड़ का वर्णन भी करते हैं। यह है कल्प वृक्ष। मनुष्य सृष्टि का वैराइटी झाड। इनको उल्टा झाड कहा जाता है। कितने वैराइटी धर्म हैं। इतनी करोड़ों आत्माओं को अविनाशी पार्ट मिला हुआ है। दो का एक जैसा पार्ट हो न सके। अभी तुमको ज्ञान का तीसरा नेत्र मिला है। विचार करो कितनी ढेर आत्मायें हैं। जैसे मछलियों का एक खिलौना होता है, तार पर ऐसे नीचे उतरती हैं, यह भी ऐसे ही है। हम भी ड्रामा की रस्सी में बँधे हुए हैं। ऐसे उतरते-उतरते कल्प आकर पूरा हुआ है फिर हम ऊपर जाते हैं। यह समझ भी बच्चों को अब मिली है। ऊपर से आत्मायें आती हैं, नम्बरवार एड होती जाती हैं। इस खेल में तुम पार्टधारी हो। मुख्य क्रियेटर, डायरेक्टर, एक्टर होते हैं ना। मुख्य तो है शिवबाबा। फिर कौन से एक्टर हैं? ब्रह्मा, विष्णु, शंकर। भक्ति मार्ग वालों ने अनेक चित्र बनाये हैं परन्तु अर्थ का कुछ भी पता नहीं। लाखों वर्ष कह देते हैं। अब बाप आकर सारी नॉलेज देते हैं। अब तुम समझते हो सतयुग में यह ज्ञान हमको नहीं होगा। जैसे यहाँ कारोबार चलती है, वैसे वहाँ पवित्रता, सुख शान्ति की राजधानी चलती है। बाप भी वन्डरफुल है, इतनी छोटी बिन्दी है। जैसे तुम्हारी आत्मा ऐसे इनकी आत्मा भी बाप से सारा ज्ञान ले रही है। बाबा फिर बड़ा थोड़ेही होगा। वह भी बिन्दी है। तुम्हारी आत्मा जो बिन्दी है, उनमें सारा ज्ञान धारण हो रहा है। यह ज्ञान कल्प के बाद फिर बाप देंगे। जैसे रिकार्ड भरा हुआ होता है जो रिपीट होता है ना। आत्मा में भी सारा पार्ट भरा हुआ है। कोई बहुत वन्डरफुल बात होती है तो उनको कुदरत कहा जाता है। इस अनादि ड्रामा के पार्ट से एक भी छूट नहीं सकता। सबको पार्ट बजाना ही है। यह बड़ी वन्डरफुल बातें हैं, जो अच्छी रीति समझकर धारण करते हैं तो खुशी का पारा चढ़ता है। तुमको कितनी स्कालरशिप मिलती है। तो पुरुषार्थ अच्छी रीति करना चाहिए। आप समान बनाना है। तुम सब टीचर हो। टीचर तुम्हें पढ़ाकर आप समान टीचर बनाते हैं। ऐसे नहीं कि गुरू भी बनना है। नहीं। तुम टीचर बनते हो क्योंकि राजयोग सिखलाते हो फिर तुम चले जायेंगे। यह भी तुम समझते हो। वो लोग तो जानते नहीं, न सद्गति दे सकते हैं। सर्व का सद्गति दाता तो एक बाप है ना। लिब्रेटर गाइड भी वही है। जब तुम वहाँ से आते हो तो बाप गाइड नहीं बनता है। बाप गाइड भी अभी बनता है। जब तुम घर से आते हो तो घर को ही भूल जाते हो। अभी तुम भी गाइड हो, पण्डे हो। सबको रास्ता बताते हो। अशरीरी भव। तुम्हारा नाम पाण्डव सेना भी है। शरीरधारी तो हैं ना। जब अकेले हो तो सेना नहीं कहेंगे। शरीर के साथ जब माया पर जीत पाते हो तब तुमको सेना कहते हैं। उन्होंने फिर लड़ाई की बातें लिख दी हैं। यह है बेहद की बात। वो लोग कान्फ्रेन्स आदि करते हैं, संस्कृत आदि के कालेज खोलते हैं। कितना खर्चा करते हैं। खर्चा करते-करते जैसेकि खाली हो पड़े हैं। चांदी, सोना, हीरा सब खलास हो गये हैं। फिर तुम्हारे लिए सब कुछ नया निकलेगा। तो तुम बच्चों को चलते फिरते बहुत खुशी होनी चाहिए। बाप को और वर्से को याद करना है। तुम्हारा पार्ट चलता रहता है। कभी बन्द होने वाला नहीं है। बाप समझाते हैं – तुम अपने जन्मों को नहीं जानते हो। 84 का हिसाब-किताब भी इनको बताते हैं, जो पहले-पहले आते हैं। तुम बच्चों को अथाह सुख मिलता है। टावर आफ हेल्थ, वेल्थ, हैपीनेस.. तो कितना नशा होना चाहिए। बाप हमको बेहद का वर्सा देते हैं। जितना तुम नज़दीक आते जायेंगे, उतनी आफतें भी आती जायेंगी। झाड की वृद्धि भी होनी है। झाड कच्चे हैं तो झट तूफान लगने से झड जाते हैं। यह तो होना ही है।

तुम्हारा एम आब्जेक्ट का चित्र सामने खड़ा है। तुम और कोई चित्र नहीं रख सकते। भक्ति मार्ग में मनुष्य ढेर चित्र रखते हैं। ज्ञान मार्ग में है एक। सो भी नॉलेज बुद्धि में है। बाकी बिन्दी का चित्र क्या निकालेंगे। आत्मा तो सितारा है ना। यह भी समझने की बातें हैं। आत्मा को तो इन ऑखों से देख नहीं सकते। बहुत कहते हैं बाबा हमको साक्षात्कार हो, वैकुण्ठ देखें। परन्तु देखने से मालिक थोड़ेही बनेंगे। मनुष्य कहते हैं फलाना स्वर्ग पधारा। परन्तु स्वर्ग है कहाँ, जानते थोड़ेही हैं। जो आत्मायें स्वर्ग में गई हैं वही कहती हैं। आत्मा को तो सब याद रहता है ना। अब तुमको ऊंचे ते ऊंचा बाप पढ़ा रहे हैं, जिससे तुम ऊंचे से ऊंचा पद पा रहे हो। नम्बरवार पुरुषार्थ अनुसार – नर से नारायण जरूर बनेंगे।

यह जो शान्ति मांगते हैं, तुम्हारा काम है उन्हें समझाना। कई समझते भी हैं कि यह एक्यूरेट कहते हैं। वह समय भी आयेगा, लिखा हुआ है कुमारियों द्वारा भीष्म पितामह आदि को ज्ञान के बाण मारे। बाकी ऐसे नहीं अर्जुन ने बाण मारा, गंगा निकली। ऐसी-ऐसी बातें सुनकर कह देते हैं यहाँ से गंगा निकल आई। गऊमुख भी बनाया है। अभी तुम बच्चे देखते हो तुम्हारा यादगार भी खड़ा है। वह जड़ देलवाडा, यह है चैतन्य। उसमें ऊपर वैकुण्ठ दिखाया है। नीचे तपस्या कर रहे हैं, ऊपर राजाई के चित्र हैं इसलिए मनुष्य समझते हैं स्वर्ग ऊपर है। बाम्बस बनाने वाले खुद भी समझते हैं यह हमारे ही विनाश के लिए हैं। कहते हैं ऐसे करेंगे तो जरूर विनाश होगा। लिखा भी हुआ है महाभारी लड़ाई में ऐसे हुआ था, सब खत्म हुए थे। सतयुग में है ही एक धर्म तो जरूर बाकी सब खत्म हो जायेंगे। यह भी बच्चे जानते हैं भक्ति करते-करते नीचे उतरते ही आते हैं, ड्रामा प्लैन अनुसार। वास्तव में यहाँ कोई आशीर्वाद आदि की बात नहीं है। जो ड्रामा में बना हुआ है वही होता है। कुछ ऐसी बात हो जाती है तो मनुष्य कह देते हैं जो ईश्वर की इच्छा। तुम ऐसे नहीं कहेंगे। तुम तो कहते हो भावी ड्रामा की। तुम ईश्वर की भावी नहीं कहेंगे। ईश्वर का भी ड्रामा में पार्ट है। सृष्टि चक्र कैसे फिरता है, यह भी बाप ही समझा सकते हैं। नॉलेजफुल भी बाप है। मनुष्य समझते हैं वह सबकी दिलों को जानते हैं। परन्तु हम जो करते हैं, उनका दण्ड तो जरूर हमको मिलेगा। बाप थोड़ेही बैठ दण्ड देंगे। यह ऑटोमेटिक बना बनाया ड्रामा है, जो चलता रहता है। इनके आदि-मध्य-अन्त का राज़ बाप ही समझाते हैं। तुम फिर औरों को समझाते हो। अब बाप कहते हैं बच्चे, तुम्हारी अवस्था ऐसी हो जो पिछाड़ी में कुछ भी याद न आये। अपने को आत्मा समझें, इसको कहा जाता है कर्मातीत अवस्था। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का यादप्यार और गुडमार्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) स्कॉलरशिप लेने के लिए अच्छी तरह से पुरुषार्थ करो। टीचर बन औरों को राजयोग सिखाओ। गाइड बन सबको घर का रास्ता दिखाने की सेवा करो।

2) सर्वशक्तिमान् बाप की याद से अपनी बैटरी चार्ज करनी है। बाप से प्रतिज्ञा करने के बाद कभी काम की चोट नहीं खानी है।

वरदान:- हज़ूर को सदा साथ रख कम्बाइन्ड स्वरूप का अनुभव करने वाले विशेष पार्टधारी भव
बच्चे जब दिल से कहते हैं बाबा तो दिलाराम हाज़िर हो जाता है इसीलिए कहते हैं हजूर हाज़िर है और विशेष आत्मायें तो हैं ही कम्बाइन्ड। लोग कहते हैं जिधर देखते हैं उधर तू ही तू है और बच्चे कहते हैं हम जो भी करते हैं, जहाँ भी जाते हैं बाप साथ ही है। कहा जाता है करनकरावनहार, तो करनहार और करावनहार कम्बाइन्ड हो गया। इस स्मृति में रहकर पार्ट बजाने वाले विशेष पार्टधारी बन जाते हैं।
स्लोगन:- स्वयं को इस पुरानी दुनिया में गेस्ट समझकर रहो तो पुराने संस्कारों और संकल्पों को गेट आउट कर सकेंगे।

ब्रह्मा बाप समान बनने के लिए विशेष पुरुषार्थ

समय प्रमाण अब ब्रह्मा बाप समान सदा अचल-अडोल सर्व खजानों से सम्पन्न बनो। थोड़ा भी डगमग हुए तो सर्व खजानों का अनुभव नहीं होगा। बाप द्वारा कितने खजाने मिले हैं, उन खजानों को सदा कायम रखने का साधन है सदा अचल अडोल रहना। अचल रहने से सदा ही खुशी की अनुभूति होती रहेगी।

TODAY MURLI 29 JANUARY 2019 DAILY MURLI (English)

Today Murli Brahma kumaris : 29 January 2019

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29/01/19
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, you now have to go to the towers of peace and happiness and you therefore have to continue to transform and reform your old natures and character s.
Question: What is the way for your head to be constantly refreshed?
Answer: Churn the things that the Father tells you. By churning the ocean of knowledge, your head becomes refreshed. Those who are always refreshed are also able to serve others. Their batter ies remain constantly charged because, their connection remains with the Almighty Authority Father by churning knowledge.
Song: Show the path to the blind dear God!

Om shanti. This song was sung by human beings, but they don’t know the meaning of it. This is also like a prayer just as they have other prayers. They don’t know the Supreme Soul. If they were to know the Supreme Soul, they would know everything. They speak of the Supreme Soul, but they don’t know His life story at all. So, they are blind, are they not? You have now each received the third eye of knowledge and you are therefore called trinetri. Although people in the world say the words “trinetri, trikaldarshi, trimurti” they don’t know the meaning of them. Similarly, they ask what the connection between science and silence is. Although they ask these questions, they themselves don’t know the answers to them. They say: There should be peace in the world, but when did that exist before? Who brought about peace? They don’t know anything at all. They simply continue to ask these questions, and so there definitely has to be someone who knows this and who could tell you. The Father has explained to you children that this play is predestined. There is the tower of peace, the towerof happiness; there is a tower for everything. The incorporeal world is the tower of peace where we souls reside. That is called the tower of silence. Then, in the golden age, there is the tower of happiness, the tower of peace and prosperity. No one else would actually say that the home of all of us souls is the land of liberation. Only the Father explains all of these things. The Teacher has to be someone like that. He is the Tower of Knowledge. He also takes you to the towers of peace and happiness. This then is the tower of the land of sorrow. People are insolvent in every respect. It is only at this time that you receive your inheritance of purity, peace and happiness. It is the greatness of this most auspicious confluence age. This is called the beneficial age. After the iron age, there is the golden age. That is the tower of happiness. The other is the tower of peace. This is the tower of sorrow. Here, there is plenty of sorrow. All types of sorrow have now come together. It is said: Mountains of sorrow are to fall. When there are earthquakes etc. everyone cries out in distress. The Father has explained that there is little time left. It takes you children time to stay on the pilgrimage of remembrance. There are many who don’t fully understand. Should they consider Him to be a point? What should they consider Him to be? Ah, but as is a soul, so the Supreme Soul. You know what a soul is. It is a lucky star; it is extremely subtle. You cannot see it with these eyes. So, the Father explains all of these things. By churning these things, your heads become refreshed. Wherever you go, you explain: There are the towers of peacehappiness and purity in the new world. The Father transforms your old natures and character sand makes you into the masters of the new world. Although people sing this and they study the Vedas, the scriptures and the Gita etc. they don’t understand anything at all. They continue to come down the ladder. Although they consider themselves to be authorities of the scriptures, they still have to come down. At first, all souls are satopradhan, and then their batter ies gradually discharge. At this time, everyone’s battery is flat. The batter ies are now being charged again. The Father says: Manmanabhav! Consider yourselves to be souls! The Father is the Almighty Authority. By remembering Him, your sins are cut away and the battery becomes full. You now feel that your batter ies are being charged. The batteries of some cannot be charged. Instead of being reformed, they become even more spoilt. They even promise the Father: “Baba, I will never indulge in vice. I will definitely claim my inheritance for 21 births from You”, and yet they fall! The Father says: By conquering the vice of lust, you will become conquerors of the world. If you then indulge in vice, all wisdom is lost. Lust is the greatest enemy. By looking at one another, there is the fire of lust. The Father says: By sitting on the pyre of lust, you have become ugly and I am now making you beautiful. Only the Father explains these things to you. Your intellects opens through this study. People also speak of the tree. This is the kalpa tree. This is the variety tree of the human world. It is called the inverted tree. There is a variety of religions. All the millions of souls have received imperishable parts. No two can have the same part. You have now each received the third eye of knowledge. Just think how many souls there are. It is like a toy fish on a string; they come down the string. This too is like that. We are also tied by the strings of the drama. We have been coming down in this way and the cycle has now come to an end and we have to go back up. It is only now that you children receive this understanding. Souls come down from up above. They are added here, numberwise. You are actors in this play. There is the Creator, Director and principal Actor. Shiv Baba is the principal One. Who are the other actors? Brahma, Vishnu and Shankar. People on the path of devotion have made many images, but they don’t know the meaning of them at all. They speak of hundreds of thousands of years. The Father has now come and is giving you all the knowledge. You now understand that you will not have this knowledge in the golden age. Just as the activities continue here, so too, the kingdom of purity, peace and happiness continues there. The Father is wonderful ! He is also such a tiny point! Just as you are souls, in the same way, this one’s soul is also receiving all the knowledge from the Father. Baba would not be any larger. He is a point. You souls are also points. All the knowledge is being imbibed by you souls. The Father will give you this knowledge again after a cycle. It is like a record that has been recorded and which then repeats. A whole part is recorded in the soul. Something wonderful is called nature. Not a single person can be liberated from his part in this eternal drama. Each one of you has to play your part. These are very wonderful matters. When you understand them clearly and imbibe them, your mercury of happiness rises. You are receiving such a scholarship. So, you should make great effort. You have to make others equal to yourselves. All of you are teachers. A teacher teaches you and makes you into a teacher, the same as himself. It isn’t that you also have to become a guru; no. You are teachersbecause you teach Raja Yoga and you will then go back home. Only you understand this. Neither do those people know this nor can they grant salvation. The Bestower of Salvation for All is the one Father. He is also the Liberator and the Guide. When you go from there, the Father doesn’t become your Guide at that time. It is now that the Father becomes your Guide. When you come down from your home, you even forget your home. You are now guides, the Pandavas. You show everyone the path: May you be bodiless. Your name is also the Pandava Army. You are bodily beings. When you are alone, you cannot be called an army. It is when you gain victory over Maya while in a body that you are called an army. People have written things about war. These are unlimited matters. Those people hold conferences etc. and open Sanskrit colleges etc. They spend so much money. By spending so much, they have become almost empty. All the silver, gold and diamonds have finished. Then, everything new will emerge for you. So, while walking and moving around, you children should have a lot of happiness. You have to remember the Father and the inheritance. Your parts continue all the time; they will never end. The Father explains: You do not know your own births. He also tells the account of 84 births to this one who comes first. You children receive a lot of happiness. You will have the towers of health, wealth and happiness and so you should have so much intoxication. The Father is giving us the unlimited inheritance. The closer you come, the more difficulties there will be. The tree has to grow. While a tree is still weak, it easily falls in a storm. This has to happen. The picture of your aim and objective is just in front of you. You cannot keep any other pictures. On the path of devotion, people keep so many pictures. On the path of knowledge, there is just the One. You have the knowledge in your intellects but how could you take a photograph of a point? A soul is a star. These, too, are matters that have to be understood. A soul cannot be seen with these eyes. Many say: Baba, I want to have a vision; I want to see Paradise. However, you cannot become the masters of that just by seeing it. People say that so-and-so has gone to heaven, but they don’t know where heaven is. Only souls who have been to heaven can say this. The soul remembers everything. The highest-on-high Father is now teaching you through which you claim the highest-on-high status. You will definitely become Narayan from an ordinary man, numberwise, according to the effort you make. It is your duty to explain to those who ask for peace. Many people will understand that what you say is accurate. That time will also come. It is written that Bhishampitamai etc. was shot with arrows of knowledge by the kumaris. It wasn’t that Arjuna shot an arrow and the Ganges emerged. When they hear such things, they say that the Ganges emerged there. They have also created a Gaumukh. You children can see that your memorial also exists here. That is the non-living Dilwala and this is the living one. They have shown Paradise up on the ceiling. Down below, they are doing tapasya and the images of the kingdom are up above. Therefore, people believe that heaven is up above. Even those who manufacture bombs understand that they are making them for their own destruction. They say: If we do this, destruction will definitely take place. It is also written that it happened in the same way in the great war. All were destroyed. In the golden age, there is just the one religion and so surely all the rest will be destroyed. You children also know that by performing devotion, they continue to come down, according to the drama plan. In fact, here, there is no question of receiving blessings etc. Whatever is fixed in the drama is what happens. When something unexpected happens, people say that it is the will of God. You would not say that. You would say that it is the destiny of the drama. You would not say that it is the will of God. God too has a part in the drama. Only the Father can explain to you how the world cycle turns. Only the Father is k nowledge -full. People think that He knows what is in the heart of everyone. However, we are the ones who would receive punishment for whatever we do. The Father would not sit and punish you. This is the automatic, predestined drama which continues. Only the Father explains to you the secrets of its beginning, middle and end. You then explain this to others. The Father now says: Children, your stage should be such that you don’t remember anything at the end; you consider yourselves to be souls. This is called the karmateet stage. Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. In order to receive a scholarship, make great effort. Become a teacher and teach others Raja Yoga. Become a guide and do the service of showing everyone the path home.
  2. 2. Charge your battery by having remembrance of the Almighty Authority Father. After making a promise to the Father, never be defeated by lust.
Blessing: May you be a special actor who experiences the combined form by constantly keeping the company of the Lord.
When children say “Baba” from their hearts, then Dilaram, the Comforter of Hearts, becomes present and this is why it is said that the Lord is present. Special souls are anyway combined. People say: Wherever I look, I see only You, and you children say: Whatever we do, wherever we go, the Father is with us. He is called Karankaravanhar (One who does and inspires others to do), and so karanhar (one who does) and Karavanhar (One who inspires) are combined. Those who play their parts with this awareness become special actors.
Slogan: Stay in this old world while considering yourself to be a guest and you will be able to say “G et out ! ” to the old sanskars and thoughts.

*** Om Shanti ***

Special effort to become equal to Father Brahma.

According to the time, now become constantly unshakeable, immovable and full of all treasures, the same as Father Brahma. If there is the slightest upheaval you will not be able to experience all treasures. You have received so many treasures from the Father and the means to keep those treasures with you for ever is to remain constantly unshakeable and immovable. By remaining unshakable you will constantly continue to experience happiness

TODAY MURLI 29 JANUARY 2018 DAILY MURLI (English)

Today Murli Brahma kumaris : 29 January 2018

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29-01-2018
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, anger causes a lot of sorrow.It causes pain to yourself and also to others.Therefore, conquer this evil spirit by following shrimat.
Question: Which children have a stain in them every cycle and what will be their destination?
Answer: Those who consider themselves to be very clever and do not follow shrimat completely. One vice or another remains in them in either an incognito way or in a visible form. They do not remove it. Maya continues to surround such souls. There is a flaw in such children every cycle. They will have to repent a great deal at the end. They make a great loss.
Song: Human beings of today are in darkness.

Om shanti. You children understand that the unlimited Father, who is called Heavenly God, the Father, is the Father of all. He sits and explains to you children face to face. The Father sees all the children through these eyes. He doesn’t need divine vision in order to see the children. The Father understands: I have come from the supreme abode to the children. The children have also become bodily beings and are playing their part s I teach these children face to face. You children understand that the unlimited Father, who establishes heaven, is once again liberating us from stumbling around on the path of devotion and is igniting our lights. You children at all the centres understand that you belong to God’s clan and that this is also the Brahmin clan. The Supreme Father, the Supreme Soul, is called the Creator of the world. The Father sits here and explains how the world is created. You children understand that the human world can never be created without the Mother and Father. It cannot be said that the world is created through the Father; no. It is said: You are the Mother and Father. This Mother and Father creates the new world and makes the children worthy of it. This is His great speciality. It is not the that deities come here from up above to establish their religion in the way that Christ established the Christian religion. Christians also call Christ their father. If there is a father, surely a mother is also needed. They say that Mary is the mother, but who was Mary? The new soul of Christ came and entered another’s body, and so Christians were created through the mouth of the one he entered. It has also been explained that that soul had not performed any such action that he would have to experience sorrow; it is a pure soul that comes. The Supreme Father, the Supreme Soul, cannot experience sorrow; it is this corporeal one who experiences sorrow and is insulted. Therefore, when Christ was crucified on a cross, it was the one whose body the Christ soul entered who had to endure that suffering. The pure soul of Christ would not have had to endure pain. Christ was the father, and so where could the mother have come from? They made Mary the mother. They have shown that the virgin Mary gave birth to Christ. All of that was taken from the scriptures. They have portrayed Kunti, a virgin, and Karna being born through her. Now, this was a matter of divine vision, but they copied it. Similarly, this Brahma is the mother through whose mouth you children have been born. Then Mama was made responsible for looking after everyone. The same happens with ChristChrist enters someone and establishes that religion. His followers would be called the mouth-born creation of Christ, brothers and sisters. Christ is the father of the Christians and the one whose body he enters and creates children with is the mother. Then, Mary was made responsible for looking after them, and so they have considered Mary to be the mother. Here, the Father says: I enter this one and create you children through his mouth; so this Mama is also a child born through the mouth. These are matters to be understood in detail. Secondly, the Father says that a group of people are coming to Abu today to preach vegetarianism. Therefore, explain to them that the unlimited Father is establishing the deity religion of those who were pure vegetarians. People of no other religion are such firm vegetarians. They are to speak about the benefits of becoming a Vaishnav. However, not everyone is able to become that because they are used to their own diet and find it difficult to leave it. So, you have to explain that all are Vaishnavs in the heaven that the unlimited Father creates; they are part of the dynasty of Vishnu. Deities are completely viceless, whereas vegetarians of today are vicious. Three thousand years before Christ , Bharat became heaven. Explain in this way. No human beings except you children understand what heaven was, when it was established and who used to rule there. They go to the Lakshmi and Narayan Temple and Baba also used to go, but none of them knows that the kingdom of Lakshmi and Narayan existed in heaven. They simply sing their praise, but who gave them the kingdom? They don’t know anything at all. Even now, they continue to build many temples because they think that Lakshmi gave them wealth. This is why business people worship Lakshmi at the time of Deepmala. You have to explain to those who built those temples. Similarly, you should also explain to the foreigners the praise of Bharat: Three thousand years before Christ Bharat was vegetarian. There can be nowhere else like that. At that time, there was a great deal of power; it was the kingdom of gods and goddesses. Now, once again, that same kingdom is being established. It is now that same period of time. Destruction through Shankar has also been remembered. Then it will be the kingdom of Vishnu again. If you want to claim your inheritance of heaven from the Father, you can come and do so. Both Ramesh and Usha are very interested in serving. They are a wonderful couple; they are very serviceable. Just see how new ones come and go ahead of the old ones. Baba shows you many methods but, if you have arrogance of any of the vices, Maya does not allow you to rise. A few have a little trace of lust, whereas many have anger. No one has as yet become totally complete. You are becoming that. Maya continues to bite internally. It was when Ravan’s kingdom began that these mice began to bite. Bharat has now become completely poverty-stricken. Maya has made everyone’s intellect like stone. Maya surrounds even good children in such a way that they don’t realize that every step they take is moving them backwards. However, they are given the life-giving herb and made conscious again. Anger too causes a great deal of sorrow. As well as it making oneself unhappy, it also makes others unhappy. Some have this in an incognito way, whereas it is more visible in others. No matter how much you explain to them, they don’t understand. They now consider themselves to be very clever. Later, they will have to repent, and that flaw will be in them every cycle. There is a lot of benefit in following shrimat. Otherwise, there will be a great deal of loss. The directions of both shrimat and of Brahma are very famous. They say about someone that even if Brahma were to come down from up above, that one would not listen to him. Krishna’s name is not mentioned in this way. The Supreme Father, the Supreme Soul, Himself, now gives directions and Brahma, too, receives directions from Him. The Father has a lot of love for you children and He makes you children sit on his shoulders and then his head. The Father has the aim that His children should climb high and glorify the name of the clan. However, if children don’t listen to the Father or to Dada, it means that they don’t even listen to the senior Mother. Just think what their condition will be; don’t even ask! However, serviceable children claim BapDada’s heart-throne. Baba Himself praises them, and so they must explain to others that this same Bharat used to be the kingdom of the Vishnu clan, and that it is being established once again. Baba is now once again making this same Bharat into the land of Vishnu, and so you should have a lot of intoxication. Those people beat their heads to glorify their names for nothing. Their expenses are paid by the G overnment. Sannyasis also receive a lot of money. Even now, when they say that they teach the ancient yoga of Bharat, people very quickly give them money. Baba doesn’t need anyone’s money. He Himself is the One who gives aid to the whole world, the One who is the innocent Master of the treasure-store and He takes help from the children. When the children have courage, the Father gives help. People from outside who come here are very used to giving something to an ashram. However, you should ask them: Why do you give here? You have not heard any knowledge. You don’t know anything. We are planting a seed to receive the fruit in heaven. However, they will only know this when they listen to the knowledge. Millions will come in this way. It is good that Baba has come in an incognito way. If He were to come in the form of Krishna, they would all pile up like sand and would very quickly cling to Him. No one would be able to sit at home. You are the children of God. Don’t forget this! It remains in the Father’s heart that you children should take the full inheritance. Many will come to heaven, but only a few out of multimillions, only a handful of the few, have the courage to claim a high status in heaven. Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Night Class – 15/06/19 68

If whatever has happened in the past is revis ed, the weakness in the hearts of those who have weak hearts also becomes revised. This is why you children are made to stabilize yourselves on the rails of the drama. The main benefit is received by having remembrance. It is only by having remembrance that your lifespan will increase. If children were to understand the drama, they would never have any thoughts about anything. It is this part of the drama for learning and teaching knowledge. This part will then finish. Neither the Father’s part nor our parts will remain. Neither His part of giving nor our parts of receiving will remain. So, everything will become one. Our parts will then be in the new world. Baba’s part will be in the land of silence. The reel of the parts is recorded: our parts of our reward and Baba’s part of the land of silence. The part of giving and receiving is complete; the drama has ended. Then the parts will change to those of our coming to rule. Knowledge will stop. We will have become that. When the part has finished, no difference will remain. The parts of the children and the Father will not remain. This one will also have taken the full knowledge. Nothing remains with Him either. Nothing remains with the One who is giving and nothing is missing in those who are receiving, and so both become the same as one another. For this, you need intellects that will churn. The main effort is of the pilgrimage of remembrance. The Father sits here and explains. When it is related, it becomes a gross thing, but it is otherwise something subtle in the intellect. You understand in yourself what Shiv Baba’s form is. When it is explained, it becomes a big form. On the path of devotion, they have created a huge lingam image. A soul is just a tiny point. This is the wonder of nature. Till when will you go into the depths of this? So, finally, they say it is infinite. Baba has explained that a whole part is recorded in the soul. This is the wonder of nature. No one can reach its end. You can reach the end of the world cycle. Only you know the Creator and the beginning, middle and end of the creation. Baba is knowledge-full. Even so, we will also become full. Nothing more will be left to attain. The Father enters this one and teaches us. He is just a dot. There cannot be happiness in having a vision of a soul or the Supreme Soul. You have to make effort to remember the Father and your sins will then be absolved. The Father says: Knowledge will stop in Me and it will also stop in you. You take the knowledge and become elevated. You take everything but, nevertheless, the Father is the Father. You souls will remain souls; you will not become the Father. This is knowledge. The Father is the Father and the children will be the children. These are matters into which you have to go deep and churn. You also know that everyone has to go back. Everyone is going to return. Only souls will remain. The whole world will finish. You have to remain fearless in this. You have to make effort to remain fearless. No awareness of the body should remain. You have to return home in that stage. The Father makes you the same as Himself. You children also continue to make others the same as yourselves. You have to make effort to have only remembrance of the Father. You still have time for this. You have to have intense rehearsals. If you don’t practise this, you will come to a standstill. Your legs will tremble and you will suddenly have heart failure. It does not take long for a tamopradhan body to have heart failure. The more you become bodiless and have remembrance the Father, the closer you will continue to come. Only those who have yoga will remain fearless. You receive power through yoga and wealth through knowledge. Children need power. In order to receive power, continue to remember the Father. Baba is the eternal Surgeon. He can never become a patient. The Father now says: Continue to take your imperishable medicine. We are giving you the life-giving herb so that no one ever falls ill. Simply continue to remember the Purifier Father and you will become pure. Deities are constantly free from disease and pure. You children have the faith that you claim this inheritance every cycle. The Father has come now as He has come countless times. Everything that Baba teaches you and explains to you is Raja Yoga. The Gita etc. all belong to the path of devotion. Only the Father shows you the path of knowledge. The Father comes and lifts you up from the bottom. Those whose intellects have firm faith become beads of the rosary. You children understand that you have been coming down while performing devotion. The Father has now come and inspires you to earn a true income. Physical fathers do not inspire you to earn as much as the Father from beyond does. Achcha. Good night and namaste to the children.

Essence for dharna:

  1. In order to become serviceable, remove any trace of vice. Have a lot of enthusiasm for doing service.
  2. We are the children of God. On the basis of shrimat, we are changing Bharat into the land of Vishnu where everyone will be firm Vaishnavs (pure vegetarians). Maintain this intoxication.
Blessing: May you be a special soul who receives everyone’s co-operation and moves forward with just the speciality of courage.
The children who remain courageous and fearless move forward by receiving the Father’s help automatically. With the speciality of courage, you receive everyone’s co-operation. With this one speciality, all other specialities come automatically. Take one step forward and you claim a right to many steps of co-operation. Continue to donate and bless others with this speciality, that is, use your speciality for service and you will become a special soul.
Slogan: In your intellect remain so light that the Father sits you on His eyelids and takes you back with Him.

*** Om Shanti ***

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BRAHMA KUMARIS MURLI 29 JANUARY 2018 : DAILY MURLI (HINDI)

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 29 January 2018

To Read Murli 28 January 2018 :- Click Here
29-01-2018
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन

 

 मीठे बच्चे – क्रोध बहुत दु:खदाई है यह अपने को भी दु:खी करता तो दूसरे को भी दु:खी करता इसलिए श्रीमत पर इन भूतों पर विजय प्राप्त करो 
प्रश्नः- कल्प-कल्प का दाग किन बच्चों पर लगता है? उनकी गति क्या होती है?
उत्तर:- जो अपने को बहुत होशियार समझते, श्रीमत पर पूरा नहीं चलते। अन्दर कोई न कोई विकार गुप्त व प्रत्यक्ष रूप में है, उसे निकालते नहीं। माया घेराव करती रहती है। ऐसे बच्चों पर कल्प-कल्प का दाग लग जाता है। उन्हें फिर अन्त में बहुत पछताना पड़ेगा। वह अपने को घाटा डालते हैं।
गीत:- आज अन्धेरे में है इंसान…

ओम् शान्ति। बच्चे जानते हैं कि बेहद का बाप जिसको हेविनली गॉड फादर कहा जाता है वह सबका बाप है। वह बच्चों को सम्मुख बैठ समझाते हैं। बाप तो सभी बच्चों को इन नयनों से देखते हैं। उनको बच्चों को देखने के लिए दिव्य दृष्टि की दरकार नहीं। बाप जानते हैं परमधाम से बच्चों के पास आया हुआ हूँ। यह बच्चे भी यहाँ देहधारी बन पार्ट बजा रहे हैं, इन बच्चों को सम्मुख बैठ पढ़ाता हूँ। बच्चे भी जानते हैं बेहद का बाप जो स्वर्ग की स्थापना करने वाला है, वह फिर से हमको भक्ति मार्ग के धक्कों से छुड़ाए हमारी ज्योत जगा रहे हैं। सभी सेन्टर्स के बच्चे समझते हैं कि अब हम ईश्वरीय कुल के वा ब्राह्मण कुल के हैं। सृष्टि का रचता कहा जाता है परमपिता परमात्मा को। सृष्टि कैसे रची जाती है, वह बाप बैठ समझाते हैं। बच्चे जानते हैं मात-पिता बिगर कभी मनुष्य सृष्टि रची नहीं जा सकती। ऐसे नहीं कहेंगे कि पिता द्वारा सृष्टि रची जाती है, नहीं। गाया ही जाता है तुम मात-पिता… यह मात-पिता सृष्टि रचकर फिर उन्हों को लायक बनाते हैं। यह बड़ी खूबी है। ऐसे तो नहीं ऊपर से देवतायें आकर धर्म स्थापन करेंगे। जैसे क्राइस्ट क्रिश्चियन धर्म की स्थापना करते हैं। तो क्राइस्ट को भी क्रिश्चियन लोग फादर कहते हैं। अगर फादर है तो मदर भी जरूर चाहिए। उन्होंने मदर रखा है ”मेरी” को। अब मेरी कौन थी? क्राइस्ट की नई आत्मा ने आकर तन में प्रवेश किया तो जिसमें प्रवेश किया, उसके मुख से प्रजा रची। वह हो गये क्रिश्चियन। यह भी समझाया गया है कि नई आत्मा जो ऊपर से आती है, उनका ऐसा कोई कर्म नहीं है जो दु:ख भोगे। पवित्र आत्मा आती है। जैसे परमपिता परमात्मा कभी दु:ख नहीं भोग सकता। दु:ख अथवा गाली आदि सब इस साकार को देते हैं। तो क्राइस्ट को भी जब क्रास पर चढ़ाया तो जरूर जिस तन में क्राइस्ट की आत्मा ने प्रवेश किया उसने ही यह दु:ख सहन किया। क्राइस्ट की प्युअर सोल तो दु:ख नहीं सहन कर सकती। तो क्राइस्ट हुआ फादर। माँ कहाँ से लावें! फिर मेरी को मदर बना दिया है। दिखाते हैं मेरी कुमारी थी उनसे क्राइस्ट पैदा हुआ। यह सब शास्त्रों से उठाया है। दिखाया है ना कुन्ती कन्या थी उनसे कर्ण पैदा हुआ। अब यह दिव्य दृष्टि की बात है। परन्तु उन्होंने फिर कापी किया है। तो जैसे यह ब्रह्मा मदर है। मुख द्वारा बच्चे पैदा कर फिर सम्भालने के लिए मम्मा को दिया। तो क्राइस्ट का भी ऐसे है। क्राइस्ट ने प्रवेश कर धर्म की स्थापना की। उनको कहेंगे क्राइस्ट की मुख वंशावली भाई और बहन। क्रिश्चियन का प्रजापिता हो गया क्राइस्ट। जिसमें प्रवेश कर बच्चे पैदा किये वह हो गई माता। फिर सम्भालने लिये दिया मेरी को, उन्हों ने मेरी को मदर समझ लिया है। यहाँ तो बाप कहते हैं मैं इनमें प्रवेश कर मुख सन्तान रचता हूँ। तो उसमें यह मम्मा भी मुख सन्तान ठहरी। यह हैं डिटेल में समझने की बातें।

दूसरी बात – बाप समझाते हैं आज एक पार्टी आबू में आने वाली है – वेजीटेरियन का प्रचार करने। तो उनको समझाना है बेहद का बाप अब देवी-देवता धर्म की स्थापना कर रहे हैं जो पक्के वेजीटेरियन थे। और कोई भी धर्म इतना वेजीटेरियन होता नहीं है। अब यह सुनायेंगे कि वैष्णव बनने में कितने फायदे हैं। परन्तु सब तो बन नहीं सकते क्योंकि बहुत हिरे हुए हैं। (आदत पड़ी हुई है) छोड़ना बड़ा मुश्किल है। परन्तु इस पर समझाना है कि बेहद के बाप ने जो हेविन स्थापन किया है, उसमें सभी वैष्णव अर्थात् विष्णु की वंशावली थे। देवतायें बिल्कुल वाइसलेस थे। आजकल के वेजीटेरियन तो विशश हैं। क्राइस्ट से 3 हजार वर्ष पहले भारत हेविन था। तो ऐसे-ऐसे समझाना है। तुम बच्चों के बिगर ऐसा कोई मनुष्य नहीं जिसको मालूम हो कि स्वर्ग क्या चीज़ है? कब स्थापन हुआ? वहाँ कौन राज्य करते हैं? लक्ष्मी-नारायण के मन्दिर में भल जाते हैं। बाबा भी जाते थे परन्तु यह नहीं जानते कि स्वर्ग में इन्हों की राजधानी होती है। सिर्फ महिमा गाते हैं परन्तु उन्हों को किसने राज्य दिया, कुछ भी पता नहीं। अब तक बहुत मन्दिर बनाते हैं क्योंकि समझते हैं लक्ष्मी ने धन दिया है इसलिए दीपमाला पर व्यापारी लोग लक्ष्मी की पूजा करते हैं। इन मन्दिर बनाने वालों को भी समझाना चाहिए। जैसे फॉरेनर्स आते हैं तो उनको भारत की महिमा बतानी चाहिए कि क्राइस्ट से 3 हजार वर्ष पहले भारत ऐसा वेजीटेरियन था, ऐसा कोई हो नहीं सकता। उनमें बहुत ताकत थी। गॉड गॉडेज का राज्य कहा जाता है। अब वही राज्य फिर से स्थापन हो रहा है। यह वही समय है। शंकर द्वारा विनाश भी गाया हुआ है, फिर विष्णु का राज्य होगा। बाप द्वारा स्वर्ग का वर्सा लेना हो तो आकर ले सकते हो। रमेश उषा दोनों को सर्विस का बहुत शौक है। यह वन्डरफुल जोड़ा है, बहुत सर्विसएबुल है। देखो नये-नये आते हैं तो पुरानों से भी तीखे चले जाते हैं। बाबा युक्तियां बहुत बताते हैं, परन्तु कोई न कोई विकार का नशा है तो माया उछलने नहीं देती है। कोई में काम का थोड़ा अंश है, क्रोध तो बहुतों में है। परिपूर्ण कोई बना नहीं है। बन रहे हैं। माया भी अन्दर काटती रहती है। जब से रावण राज्य आरम्भ हुआ है तब से इन चूहों ने कुतरना (काटना) शुरू किया है। अब तो भारत बिल्कुल ही कंगाल हो गया है। माया ने सबको पत्थरबुद्धि बना दिया है। अच्छे-अच्छे बच्चों को भी माया ऐसे घेरती है जो उन्हों को पता नहीं पड़ता कि हमारा कदम पीछे कैसे जा रहा है। फिर संजीवनी बूटी सुंघाकर होश में लाते हैं। क्रोध भी दु:खदाई है। अपने को भी दु:खी करता, दूसरों को भी दु:खी करता है। कोई में गुप्त है, कोई में प्रत्यक्ष। कितना भी समझाओ, समझते नहीं हैं। अभी अपने को बहुत होशियार समझते हैं। पीछे बहुत पछताना पड़ेगा। कल्प-कल्प का दाग लग जायेगा। श्रीमत पर चले तो फायदा भी बहुत है। नहीं तो घाटा भी बहुत है। मत दोनों की मशहूर है। श्रीमत और ब्रह्मा की मत। कहते हैं ब्रह्मा भी उतर आये तो भी यह नहीं मानेगा… कृष्ण का नाम नहीं लेते हैं। अब तो परमपिता परमात्मा खुद मत देते हैं। ब्रह्मा को भी उनसे ही मत मिलती है। बाप का बच्चों पर बहुत प्यार होता है। बच्चों को सिरकुल्हे चढ़ाते हैं। बाप की एम रहती है कि बच्चा ऊंच चढ़े तो कुल का नाम निकलेगा। परन्तु बच्चा न बाप की मानें, न दादा की मानें तो गोया बड़ी माँ की भी नहीं माना। उसका क्या हाल होगा! बात मत पूछो। बाकी सर्विसएबुल बच्चे तो बापदादा की दिल पर चढ़ते हैं। तो उनकी बाबा खुद महिमा करते हैं। तो उन्हों को समझाना है कि इसी भारत में विष्णु के घराने का राज्य था जो फिर स्थापन हो रहा है। अब बाबा फिर उसी भारत को विष्णुपुरी बना रहे हैं।

तुमको बहुत नशा होना चाहिए। वह लोग तो मुफ्त अपना नाम निकालने के लिए माथा मार रहे हैं। खर्चा तो गवर्मेन्ट से मिल जाता है। सन्यासियों को तो बहुत पैसे मिलते हैं। अभी भी कहते हैं भारत का प्राचीन योग सिखलाने जाते हैं तो झट पैसे देंगे। बाबा को तो किसी के पैसे की दरकार नहीं। यह खुद सारी दुनिया को मदद करने वाला भोला भण्डारी है, मदद मिलती है बच्चों की। हिम्मते बच्चे मददे बाप। जब कोई बाहर से आते हैं तो हिरे हुए हैं, समझते हैं आश्रम है कुछ देवें। परन्तु तुमको बोलना है क्यों देते हो? ज्ञान तो कुछ सुना नहीं है। कुछ पता नहीं। हम बीज बोते हैं स्वर्ग में फल मिलना है, यह पता भी तब हो जब ज्ञान सुनें। ऐसे आने वाले करोड़ों आयेंगे। यह अच्छा है जो बाबा गुप्त रूप में आया है। कृष्ण के रूप में आता तो रेती मुआफिक इकट्ठे हो जाते, एकदम चटक पड़ते, कोई घर में बैठ न सके। तुम ईश्वरीय सन्तान हो। यह भूलो मत। बाप की तो दिल में रहता है कि बच्चे पूरा वर्सा लेवें। स्वर्ग में तो ढेर आयेंगे परन्तु हिम्मत कर ऊंच पद पायें, वह कोटों में कोई निकलेगा। अच्छा!

मात-पिता बापदादा का मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति यादप्यार और गुडमार्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

रात्रि क्लास 15-6-68

पास्ट जो हो गया है उनको रिवाईज करने से जिनकी कमज़ोर दिल है तो उन्हों के दिल की कमज़ोरी भी रिवाईज हो जाती है इसलिए बच्चों को ड्रामा के पट्टे पर ठहराया गया है। मुख्य फायदा है ही याद से। याद से ही आयु बड़ी होनी है। ड्रामा को बच्चे समझ जायें तो कब ख्याल न हो। ड्रामा में इस समय ज्ञान सीखने और सिखाने का चल रहा है। फिर पार्ट बन्द हो जायेगा। न बाप का, न हमारा पार्ट रहेगा। न उनका देने का पार्ट, न हमारा लेने का पार्ट होगा। तो एक हो जायेंगे ना। हमारा पार्ट नई दुनिया में हो जायेगा। बाबा का पार्ट शान्तिधाम में होगा। पार्ट का रील भरा हुआ है ना हमारा प्रारब्ध का पार्ट, बाबा का शान्तिधाम का पार्ट। देने और लेने का पार्ट पूरा हुआ, ड्रामा ही पूरा हुआ। फिर हम राज्य करने आयेंगे, वह पार्ट चेंज होगा। ज्ञान स्टाप हो जायेगा। हम वह बन जायेंगे। पार्ट ही पूरा तो बाकी फर्क नहीं रहेगा। बच्चों के साथ बाप का भी पार्ट नहीं रहेगा। बच्चे ज्ञान को पूरा ले लेते हैं। तो उनके पास कुछ रहता ही नहीं है। न देने वाले के पास रहता, न लेने वाले में कमी रहती तो दोनों एक दो के समान हो गये। इसमें विचार सागर मंथन करने की बुद्धि चाहिए। खास पुरुषार्थ है याद की यात्रा का। बाप बैठ समझाते हैं। सुनाने में तो मोटी बात हो जाती है, बुद्धि में तो सूक्ष्म है ना। अन्दर में जानते हैं शिव बाबा का रूप क्या है। समझाने में मोटा रूप हो जाता है। भक्ति मार्ग में बड़ा लिंग बना देते हैं। आत्मा है तो छोटी ना। यह है कुदरत। कहाँ तक अन्त पायेंगे? फिर पिछाड़ी में बेअन्त कह देते। बाबा ने समझाया है सारा पार्ट आत्मा में भरा हुआ है। यह कुदतर है। अन्त नहीं पाया जा सकता। सृष्टि चक्र का अन्त तो पाते हैं। रचयिता और रचना के आदि मध्य अन्त को तुम ही जानते हो। बाबा नॉलेजफुल है। फिर भी हम फुल बन जायेंगे, पाने के लिये कुछ रहेगा नहीं। बाप इसमें प्रवेश कर पढ़ाते हैं। वह है बिन्दी। आत्मा का वा परमात्मा का साक्षात्कार होने से खुशी थोड़ेही होती है। मेहनत कर बाप को याद करना है तो विकर्म विनाश होंगे। बाप कहते हैं मेरे में ज्ञान बन्द हो जायेगा तो तेरे में भी बन्द हो जायेगा। नॉलेज ले ऊंच बन जाते हैं। सभी कुछ ले लेते हैं फिर भी बाप तो बाप है ना। तुम आत्मायें आत्मा ही रहेंगे, बाप होकर तो नहीं रहेंगे। यह तो ज्ञान है। बाप बाप है, बच्चे बच्चे हैं। यह सभी विचार सागर मंथन कर डीप में जाने की बातें हैं। यह भी जानते हैं जाना तो सभी को है। सभी चले जाने वाले हैं। बाकी आत्मा जाकर रहेगी। सारी दुनिया ही खत्म होनी है, इसमें निडर रहना होता है। पुरुषार्थ करना है निडर हो रहने का। शरीर आदि का कोई भी भान न आये, उसी अवस्था में जाना है। बाप आप समान बनाते हैं, तुम बच्चे भी आप समान बनाते रहते हो। एक बाप की ही याद रहे ऐसा पुरुषार्थ करना है। अभी टाइम पड़ा है। यह रिहर्सल तीखी करनी पड़े। प्रैक्टिस नहीं होगी तो खड़े हो जायेंगे। टांगे थिरकने लग पड़ेंगी और हार्टफेल अचानक होता रहेगा। तमोप्रधान शरीर को हार्टफेल होने में देरी थोड़ेही लगती है। जितना अशरीरी होते जायेंगे, बाप को याद करते रहेंगे तो नज़दीक आते जायेंगे। योग वाले ही निडर रहेंगे। योग से शक्ति मिलती है। ज्ञान से धन मिलता है। बच्चों को चाहिए शक्ति। तो शक्ति पाने लिये बाप को याद करते रहो। बाबा है अविनाशी सर्जन। वह कब पेशेन्ट बन न सके। अभी बाप कहते हैं तुम अपनी अविनाशी दवाई करते रहो। हम ऐसी संजीवनी बूटी देते हैं जो कब कोई बीमार न पड़े। सिर्फ पतित-पावन बाप को याद करते रहो तो पावन बन जायेंगे। देवतायें सदैव निरोगी पावन हैं ना। बच्चों को यह तो निश्चय हो गया है हम कल्प कल्प वर्सा लेते हैं। अनगिनत बार बाप आया है, जैसे अभी आया है। बाबा जो सिखलाते, समझाते हैं यही राजयोग है। वह गीता आदि सभी भक्ति मार्ग के हैं। यह ज्ञान मार्ग बाप ही बताते हैं। बाप ही आकर नीचे से ऊपर उठाते हैं। जो पक्के निश्चय बुद्धि हैं वही माला का दाना बनते हैं। बच्चे समझते हैं भक्ति करते करते हम नीचे गिरते आये हैं। अभी बाप आकर सच्ची कमाई कराते हैं। लौकिक बाप इतनी कमाई नहीं कराते जितनी पारलौकिक बाप कराते हैं। अच्छा – बच्चों को गुडनाईट और नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) सर्विसएबुल बनने के लिए विकारों के अंश को भी समाप्त करना है। सर्विस के प्रति उछलते रहना है।

2) हम ईश्वरीय सन्तान हैं, श्रीमत पर भारत को विष्णुपुरी बना रहे हैं, जहाँ सब पक्के वैष्णव होंगे… इस नशे में रहना है।

वरदान:- एक हिम्मत की विशेषता द्वारा सर्व का सहयोग प्राप्त कर आगे बढ़ने वाली विशेष आत्मा भव 
जो बच्चे हिम्मत रखकर, निर्भय होकर आगे बढ़ते हैं उन्हें बाप की मदद स्वत: मिलती है। हिम्मत की विशेषता से सर्व का सहयोग मिल जाता है। इसी एक विशेषता से अनेक विशेषतायें स्वत: आती जाती हैं। एक कदम आगे रखा और अनेक कदम सहयोग के अधिकारी बने। इसी विशेषता का औरों को भी दान और वरदान देते रहो अर्थात् विशेषता को सेवा में लगाओ तो विशेष आत्मा बन जायेंगे।
स्लोगन:- बुद्धि से इतने हल्के रहो जो बाप अपनी पलकों पर बिठाकर साथ ले जाये।

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