today murli 21 september

BRAHMA KUMARIS MURLI 21 SEPTEMBER 2018 : DAILY MURLI (HINDI)

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 21 September 2018

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21-09-2018
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन

 

”मीठे बच्चे – बाप से लॅव और रिगार्ड रखो तो बाप की आशीर्वाद मिलती रहेगी, माया की जंक उतरती जायेगी”
प्रश्नः- इस चैतन्य बगीचे में कई फूल खिलते ही नहीं, कली के कली रह जाते हैं – क्यों?
उत्तर:- क्योंकि पुरुषार्थ में सुस्ती है, याद करने का जो समय है उसमें सोये रहते हैं। सोने वाले अपना समय ऐसे ही गंवा देते हैं। जिन सोया तिन खोया। बन्द कली ही रह जाती। सदा गुलाब के फूल वह हैं जो देवी-देवता धर्म के आलराउन्ड पार्टधारी हैं।
गीत:- यह वक्त जा रहा है… 

ओम् शान्ति। यह किसने समझाया? बेहद के बाप ने समझाया बच्चों को। बेहद की जो घड़ी है उसमें अभी बाकी थोड़ा टाइम अथवा कुछ मिनट रहे हैं। घण्टे गये, बाकी कुछ मिनट रहे हैं। जो अच्छे सेन्सीबुल बच्चे हैं वह जानते हैं, नम्बरवार तो हैं ना। गुलाब के फूल होते हैं उनमें भी नम्बरवार होते हैं। यहाँ भी गुलाब के फूल हैं लेकिन उसमें कोई बन्द कली हैं, कोई थोड़ा खिले हुए हैं। तुम्हारा देवी-देवता धर्म भी जैसे सदा गुलाब है, सदा आलराउन्ड पार्ट बजाने वाले। तुम सभी धर्मों में ऊंच ते ऊंच धर्म वाले सदा गुलाब हो। दूसरे धर्म वाले फिर नम्बरवार हैं, कोई चम्पा हैं, कोई चमेली हैं, कोई टांगर हैं, कोई अक है। बगीचा तो है ना। सभी धर्मों का बगीचा है। बच्चियां जानती हैं ऊंच ते ऊंच धर्म है ही देवी-देवताओं का। जब सीजन नहीं होती है तब मुखड़ी भी नहीं रहती, कली फूल भी नहीं रहते हैं। (बाबा ने आज बगीचे से एक बड़ा गुलाब का फूल, एक छोटा फूल, एक आधा खिला हुआ फूल, एक कली, एक बन्द कली, एक मुखड़ी… ऐसे वैरायटी लाकर संदली पर रखा है) अब देखो, मुखड़ी भी कोई कच्ची है, कोई आधा खिली हुई है। कोई फूल है, कोई बंद कलियां हैं। कोई मुरझा जाते हैं, बिल्कुल खिलते ही नहीं। बरोबर ऐसा है ना। तो बाप कहते हैं पुरुषार्थ में सुस्ती न करो। ऐसे कली के कली न रह जाओ। कोई आधा में रह जाते, नम्बरवार हैं। समझा जाता है इस हालत में यह क्या पद पायेंगे? समय बहुत थोड़ा है। घड़ी बनाई है, कांटे को अब बदल तो नहीं सकते हैं। युक्ति से ऐसे बनाना चाहिए, जो निशानी रहे। यहाँ से शुरू हो कांटा अब यहाँ तक आकर पहुँचा है। जीरो से शुरू हो फिर कांटा 12 तक आकर पूरा होता है। तो इस चक्र में भी पहले देवी-देवता धर्म निकला, अभी है अन्त। जब से बाप आया है तब से गिना जाता है।

तो बाप कहते हैं – बच्चे, टाइम वेस्ट मत करो। बाप को याद करते रहो। जितना याद करेंगे उतना विकर्म विनाश होंगे। विकर्म तो सबसे होते रहते हैं। ऐसे कोई मत समझे कि हमसे नहीं होता है। इतना अहंकार कोई मत रखे। विकर्म तो बहुत ही गुप्त भी बनते हैं। उनसे बड़ी सम्भाल रखनी है। इस घड़ी से तुमको टाइम का तो पता लग ही जाता है। मनुष्य तो समझते कलियुग अभी बच्चा है। बिल्कुल घोर अन्धियारे में पड़े हुए हैं। अभी तुमको मुर्दों को जगाना है। सवेरे उठकर बाप को याद करना चाहिए। जिन सोया तिन खोया। यानी याद करने का जो समय है वह खोना नहीं है, नहीं तो मुर्दे के मुर्दे रह जायेंगे। कोई तो कली ही रह जाते हैं। बस, तूफान में अच्छी-अच्छी कलियां भी गिर जाती हैं। फूल भी गिरते हैं तो कलियां भी गिरती हैं। फिर जैसे कि कांटे के कांटे रह जाते हैं। दैवी घराने में तो आयेंगे परन्तु प्रजा में आयेंगे। तुम हो ही गुलाब के झाड़ के, परन्तु इसमें खुश नहीं होना चाहिए। भल मनुष्य गाते हैं फलाना स्वर्ग पधारा, परन्तु क्या बना? यह भी कारण होगा ना। यह तो बच्चे समझ सकते हैं जितना बाबा का मोस्ट सर्विसएबुल बच्चा होगा उतना वह बिलवेड भी मोस्ट होगा। यह तो कॉमन बात है। सपूत, आज्ञाकारी, इमानदार बच्चे माँ-बाप को प्यारे लगते हैं। माया बिल्कुल ही बेइमानदार बना देती है। पता भी नहीं पड़ता है कि हमसे बड़ी भारी ग़फलत होती है। बाप कहते हैं जो करेंगे उनको पाना ही है। ऐसा विकर्म नहीं करना जो सजा खानी पड़े। कोई विकर्मों की यहाँ भी सजा पा लेते हैं। कर्मभोग है। गर्भजेल में भी कर्मभोग है। उनसे बड़ा ख़बरदारी से छूटना है, माया बड़ी शैतान है इसलिए बिलवेड मोस्ट बाप को तो हर वक्त याद करते रहना चाहिए। जैसे लौकिक बाप अपने बच्चों को जानते हैं वैसे पारलौकिक बाप भी हर एक बच्चे को जानते हैं। बाप खुद बैठ बतलाते हैं – मैं एक ही इस तन में आता हूँ। कितने ढेर बच्चे हैं। अजुन तो ढेर आयेंगे। झाड़ बढ़ता है। भगवान् के आगे भक्तों की भीड़ होगी। शिव के मन्दिर में इतनी भीड़ नहीं होती। यहाँ तो तुम समझते हो कितनी भीड़ होगी। सूर्यवंशी, चन्द्रवंशी राजधानी स्थापन होनी है। इन बातों में बुद्धि बड़ी विशाल चाहिए। बरोबर भक्त जो इतनी भक्ति करते हैं, उनके सम्मुख भगवान् आयेंगे तो कितनी भीड़ होगी।

तुम जानते हो बाबा हमको राजयोग सिखला रहे हैं परन्तु घर में रहते हुए फिर भी भूल जाते हैं। यह ऐसी विचित्र बात है जो साथ रहते भी फिर भूल जाते हैं। इतना लॅव रिगार्ड नहीं रहता। सुई को कट लगी हुई होगी तो वह चुम्बक को खींच नहीं सकती। योग और ज्ञान भी हो तब कट निकल सके और परमात्मा की आशीर्वाद भी चाहिए ना। माया की जंक लगी हुई है, कोई चीज़ को जंक लगी हुई है तो घासलेट में डालते हैं। तुम्हारी भी योग से जंक निकलती है। आत्मा प्योर हो जाती है। तो बाप समझाते हैं – बच्चे, फूल बनकर दिखाओ। वह समय भी जल्दी आयेगा जो तुम किसके सामने बैठेंगे और झट उसको साक्षात्कार होने लगेंगे। ब्रह्मा और विष्णु का साक्षात्कार तो बहुतों को होता है। डायरेक्शन देते हैं – जाओ बी.के. के पास। ब्रह्मा भी बैठे हैं, ब्रह्माकुमार-कुमारियां भी बैठे हैं। आगे चलकर बहुतों को साक्षात्कार होगा। बाबा साक्षात्कार कराते हैं तुम वहाँ जाओ, मैं वहाँ राजयोग सिखला रहा हूँ, इससे तुम यह पद पा सकते हो। है भी सेकेण्ड की बात। मनमनाभव। मुझे याद करो तो तुम सूर्यवंशी बन जायेंगे। वहाँ हैं दैवी वंशी और यहाँ हैं असुर वंशी। कितना अच्छी रीति समझाया जाता है। कोई चीज़ को महीन करने के लिए कूटा जाता है ना। मकान का फाउन्डेशन पक्का करने के लिए कितनी मेहनत करते हैं। बाप भी कहते हैं जितना हो सके मुझे याद करो। शिवपुरी और विष्णुपुरी को याद करो। यह अन्दर अपने साथ बातें करनी चाहिए। पहले अपने से चिन्तन कर फिर बात करनी होती है – समझाने के लिए। तुमको भी समझाना है।

अब बच्चे एग्जीवीशन में कितनी मेहनत करते हैं। है सारी समझाने की बात। सिर्फ स्लोगन से तो कोई समझ न सके। बाप बैठ समझाते हैं देवी-देवताओं को राज्य कैसे मिला? किसने राजयोग सिखाया? भगवानुवाच – मैं राजयोग सिखलाता हूँ, कहता हूँ मुझे याद करो। शिवपुरी और विष्णुपुरी को याद करो। अब प्रदर्शनी में भी बच्चों को अच्छी रीति समझाना है। मेडीटेशन पर भी समझाना है। हम भी मेडीटेशन करते हैं। चलते-फिरते बाप को याद करते बाप से बातें करते रहते हैं। जैसे कोई प्रोग्राम से कहाँ जाना होता है तो बुद्धि में रहता है आज फलाने के पास हमको जाना है। प्रोग्राम मिला और बुद्धि दौड़ती रहेगी। समय नज़दीक आयेगा, समझेंगे अभी हमको जाना है। तुमको भी अन्दर में यह रहना चाहिए – बस, अभी हमको जाना है बाबा के पास। यह पुरानी खाल छोड़नी है। शिवपुरी में जाना है। इस रावणपुरी को छोड़ना है। यह बड़ी छी-छी गन्दी दुनिया है। अभी हम संगम पर बैठे हैं। यह आइरन एजड शरीर है। बाबा कहते हैं मुझे याद करते रहो तो तुम आत्माओं को शिवपुरी ले जाऊंगा। कृष्ण तो नहीं ले जायेगा। तो यह समझाने की बात है।

अब बाप कहते हैं मुझ शिवबाबा को याद करो। अभी तुम राजयोग सीख रहे हो। तुमको शिवपुरी में आना है, फिर विष्णुपुरी में चले आयेंगे। यह समझाना तो सहज है ना। शिव पुरी मुक्ति से होकर विष्णुपुरी (जीवनमुक्ति) में जाना है। सभी का बाप एक है। मुख्य यह समझाना है। बाकी कितना भी स्लोगन आदि बनायेंगे, मुफ्त खर्चा होता है। चित्र तो सब तुम्हारे पास हैं। कराची में तुम्हारे पास कितने आते थे। बड़े मैदान में टेबुल-कुर्सी रखी रहती थी। जो आते थे उनको बैठ समझाते थे। आगे तो इतना ज्ञान नहीं था। अभी तो बिल्कुल सहज ज्ञान मिला है। बाप को भी जानते हो। बाप है स्वर्ग का रचयिता। उनका फ़रमान है – मुझे और वर्से को याद करो। चित्र दिखाकर इस पर समझाओ। आगे तो समझाने से सुनते-सुनते ध्यान में चले जाते थे। उसी समय तो तुम छोटी-छोटी कलियां थी। बाबा का सारा चमत्कार था। रस्सी खींच लेते थे। अभी तो समझाने की बहुत जरूरत है। आजकल तो आदमी भी बड़े ख़राब हैं। फार्म भराने बिगर आक्यूपेशन का पता पड़ न सके। जैसे वह बैरिस्टरी आदि पढ़ाने वाले टीचर्स होते हैं ना। यह बेहद का बाप कितना बड़ा टीचर है। वह टीचर तो करके बैरिस्टर बनायेगा। बीच में शरीर छूट गया तो बैरिस्टरी भी ख़त्म। ऐसे थोड़ेही दूसरे जन्म में वह चलेगी। यहाँ तुम जो कुछ करते हो, वह साथ ले जाते हो। आत्मा में संस्कार रहते हैं। हाँ, छोटे बच्चे को आरगन्स छोटे हैं इसलिए बोल नहीं सकते हैं। कर्मेन्द्रियों से कुछ कर नहीं सकते परन्तु संस्कार तो ले जाते हैं ना। यह है अविनाशी ज्ञान, बड़ा होकर फिर आए ज्ञान लेंगे। वह आत्मा फिर से आयेगी जरूर। कहाँ न कहाँ किसका कल्याण करेगी। अपने मात-पिता को भी इस तरफ खीचेंगी। भल छोटा बच्चा होगा तो भी मम्मा-बाबा को देखने से ही उनका लॅव कशिश होगा। आरगन्स छोटे होने कारण बात तो नहीं कर सकेंगे। परन्तु लॅव जायेगा हमजिन्स तरफ।

तो यह नॉलेज बड़ी विचित्र, रमणीक और सिम्पुल है। कोई तो बिल्कुल ही ऐसे हैं जो कांटे का कांटा रह जाते हैं। सतयुग है गुलाब का झाड़। अभी तो कांटे हैं। फिर उनसे कोई मुखड़ियां निकल रही हैं। सदा गुलाब तो हैं फिर उनमें नम्बरवार हैं। प्रजा में भी आयेंगे ना। कली बन फिर मुरझाकर ख़त्म हो जायें, यह कोई पढ़ाई थोड़ेही हुई। मुखड़ी बंद की बंद रहेगी तो प्रजा में चले जायेंगे। जो फूल बनते हैं वह राजाई में आयेंगे। बाबा बगीचे में जाते हैं तो बच्चों को समझाने के लिए फूल भी ले आते हैं। अगर अभी पुरुषार्थ कर फूल न बनें तो बाद में बहुत पछताना पड़ेगा। एक तो विकर्मों का बोझा सिर पर है ही फिर और ही सजा खाकर प्रजा में पद पाना, वह किस काम का हुआ। यह तो समझते हो हमारी दैवी राजधानी स्थापन हो रही है। हर एक को समझ सकते हैं कौन-कौन क्या बनेंगे? दिल में रहेगा यह कहाँ तक पढ़ रहे हैं, क्या बनेंगे? अच्छा पढ़ने वाला होगा तो अन्दर प्यार करते रहेंगे। समझेंगे, यह राजाई में आयेंगे। आगे चलकर तुमको बहुत साक्षात्कार होंगे। न पढ़ने वाले फिर बहुत पछतायेंगे। समय बहुत थोड़ा है। फिर इतना गैलप भी कैसे करेंगे। बाप कहते हैं बच्चे बनकर और फिर अगर विकर्म करेंगे तो सौगुणा दण्ड भोगना पड़ेगा। जेल में जाने वाले कई चोरों का धन्धा ही यह हो जाता है – सज़ा खाना, जेल जाना।

अभी तुम पुरुषार्थ कर रहे हो ऊंच ते ऊंच महाराजा-महारानी सूर्यवंशी बनने का। नम्बरवार तो हैं ना। जो भागन्ती हो जायेंगे उनका क्या हाल हो जायेगा! बाप कितना अच्छी रीति समझाते हैं परन्तु तकदीर में नहीं है तो समझते नहीं फिर तो तदबीर कराने वाला क्या कर सकता है? बाप तो कहते हैं फूल बनो, बाप को भूलो मत। ऐसे बाप का हाथ कभी नहीं छोड़ना। माया अजगर कच्चा खा जायेगा। ऐसी ग़फलत नहीं करनी है जो अपना राज्य-भाग्य गँवा बैठो। फिर कल्प-कल्पान्तर ऐसी चलन देखने में आयेगी जैसे अभी देखते हैं। कोई की सतोप्रधान चलन है, कोई की रजो, कोई की तमो……..। ग्रहचारी भी अच्छे-अच्छे बच्चों पर बड़ी कड़ी बैठती है। अन्दर के काले, बाहर के अच्छे। ग़फलत होगी तो आत्मा काली हो पड़ेगी। परछाया काला पड़ता है इसलिए बाबा कहते हैं – एक कान से सुन, दूसरे कान से फिर निकाल दो, ईविल बातों के लिए कान बन्द कर दो। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) सदा विकर्म विनाश करने की लगन में रहना है। कोई भी विकर्म अभी न हो, इसकी सम्भाल करनी है।

2) माया की ग्रहचारी से बचने के लिए ईविल बातों से कान बन्द कर लेने हैं। अपनी चलन सतो-प्रधान बनानी है। अन्दर बाहर साफ रहना है।

वरदान:- अमृतवेले के फाउण्डेशन द्वारा सारे दिन की दिनचर्या को ठीक रखने वाले सहज पुरुषार्थी भव
जैसे ट्रेन को पटरी पर खड़ा कर देते हैं तो आटोमेटिकली रास्ते पर चलती रहती है, ऐसे ही रोज़ अमृतवेले याद की लकीर पर खड़े हो जाओ। अमृतवेला ठीक है तो सारा दिन ठीक हो जायेगा। अमृतवेले का फाउण्डेशन पक्का है तो सारा दिन स्वत: सहयोग मिलता रहेगा और पुरुषार्थ भी सहज हो जायेगा। जो सदा बाप की याद और श्रीमत की लकीर के अन्दर रहने वाली ऐसी सच्ची सीतायें हैं उनके नस-नस में एक राम की स्मृति का आवाज रहता है।
स्लोगन:- बाबा की मदद को कैच करना है तो बुद्धि को एकाग्र कर लो।

TODAY MURLI 21 SEPTEMBER 2018 DAILY MURLI (English)

Today Murli Brahma kumaris : 21 September 2018

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21/09/18
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, by having love and regard for the Father, you will continue to receive the Father’s blessings and the rust of Maya will continue to be removed.
Question: Why is it that some buds in this living garden do not bloom at all, but remain buds all the time?
Answer: Because there is laziness in their efforts. They remain sleeping at the time of remembrance. Those who remain sleeping waste their time like that. Those who remain sleeping lose everything. They remain closed buds. Constantly blooming roses are those who have all-round part s in the deity religion.
Song: This time is passing by. 

Om shanti. Who explained this? The unlimited Father explained to you children. Only a short time, that is, only a few more minutes of the unlimited time remains. The hours have gone by; now only a few minutes remain. The good sensible children know this; it is numberwise. Roses are also numberwise. There are roses here, too, but some are closed buds and some have opened a little. Your deity religion is like roses in bloom; they are the ones who always play all-round part s. You are the roses in bloom of the highest of all religions. Those of other religions are numberwise. Some are like magnolias, some like jasmine flowers, some like tangars (other fragrant flowers) and others are like ucks (those with a bitter smell). There is the garden. This is the garden of all religions. You daughters know that the highest-on-high religion is that of the deities. When it is not the season, there aren’t even tightly closed buds or any buds or flowers. (Baba had brought various flowers from the garden – a big rose, a small rose, another small flower, one half opened bud, one bud, a closed bud and a newly-born bud – and placed these on the gaddi.) Look, among the closed buds, some are still weak, some have only half opened. Some are flowers and others are closed buds. Some wilt and they don’t bloom at all. It is truly like that, is it not? So, the Father says: Don’t be lazy in your efforts. Make sure you don’t just remain a bud. Some only reach half-way; it is numberwise. It is understood what status someone would claim in that situation. There is very little time. A clock has been made, but the hands of the clock cannot be changed. You should create it cleverly so that that sign remains. The hands began here and have now reached here. The hands start at zero and will finish at 12. So, in this cycle too, the deity religion emerged first and it is now the end. You would begin to count from the time the Father came. Therefore, the Father says: Children, don’t waste your time. Continue to remember the Father. To the extent that you remember Him, accordingly your sins will be absolved. Everyone continues to commit sin. None of you should think that you don’t commit sin; no one should have that much arrogance. There are also many incognito sins committed. You have to be very cautious about them. From this clock, you become aware of the time. People think that the iron age is still a child. They are in extreme darkness. You now have to awaken the corpses. You should wake up early in the morning and remember the Father. Those who remain sleeping lose out, that is, you mustn’t waste the time that is for remembrance. Otherwise, you will remain like corpses. Some remain buds. In storms, even good buds fall. Flowers as well as buds fall. They then remain as they were, like thorns. They will become part of the deity dynasty, but as subjects. You belong to the rose tree, but you mustn’t become happy with just that. Although people say that so-and-so went to heaven, what did he become? There must be a reason for that. You children can understand that you would become most beloved to the extent you are a most serviceable child of Baba’s. This is something common. Worthy, obedient and honest children are loved by their parents. Maya makes you completely dishonest. You are not even able to realise when you are making a great mistake. The Father says: Those who do something definitely have to receive the reward of that. You mustn’t commit any sin for which you would have to experience punishment. Some experience the punishment of their sins here. There is the suffering of karma. There is the suffering of karma in the jail of a womb. You have to be liberated from that with great caution. Maya is very devilish and this is why you should continue to remember the most beloved Father at every moment. Just as a physical father knows his children, in the same way, the spiritual Father also knows each and every child. The Father Himself sits here and tells you: I only come into this one body. There are so many children, and many more will come. The tree continues to grow. There will be a crowd of devotees in front of God. There wouldn’t be as great a crowd in the Shiva Temple. Here, you understand how many crowds there will be. The sun and moon dynasty kingdoms are to be established. You need a very broad and unlimited intellect for these things. When God truly comes in front of the devotees who perform so much devotion, there will be such a great crowd. You know that Baba is teaching us Raja Yoga, but you still forget Him while living at home. This is something so unique that, even though you live together, you forget. There isn’t that much love and regard. If a needle is rusty, a magnet wouldn’t be able to pull it. Only when there is knowledge and yoga can the rust be removed. You also need God’s blessings. Souls are covered with the rust of Maya. Anything that is rusty is immersed in kerosene. Your rust is removed by yoga and the soul also becomes pure. Therefore, the Father explains: Children, make yourself into flowers. The time will also come soon when whoever you sit in front of will immediately begin to have visions. So many have visions of Brahma or Vishnu. They give them a direction to go to the BKs. Brahma is sitting there and there are also the Brahma Kumars and Brahma Kumaris. As you progress further, many will have visions. Baba gives a vision: Go there. I am teaching Raja Yoga there and, through that, you can claim such-and-such a status. This is a matter of a second. Manmanbhav, remember Me and you will become part of the sun dynasty. There, it is the deity clan whereas here, it is the devilish clan. This is explained to you so clearly. In order to make something fine, it is ground. They make so much effort to make the foundation of a building strong. The Father also says: Remember Me as much as possible. Remember the land of Shiva and the land of Vishnu. Continue to talk to yourself internally in this way. First think about these things , then talk to yourself about them in order to understand and explain to others. Some children make so much effort for the exhibitions. It is all a matter of explaining. No one would be able to understand with just slogans. The Father sits here and explains how the deities received their kingdom. Who taught them Raja Yoga? God speaks: I teach Raja Yoga. I tell you to remember Me. Remember the land of Shiva and the land of Vishnu. You children now have to explain very clearly at the exhibitions. You also have to explain about meditation. We also practise meditation. While walking and moving around, we remember the Father and continue to talk to Him. When you have to go to a programme, your intellect is aware: Today, I have to go to so-and-so. As soon as you receive a programme, your intellect runs in that direction. When the time comes close, you will understand that you now have to go there. You should also feel inside: That’s it! We now have to go to Baba. We have to shed these old skins. We have to leave this land of Ravan and go to the land of Shiva. This world is very dirty. We are now sitting at the confluence age. These are ironaged bodies. Baba says: Remember Me and I will take you souls to the land of Shiva. Krishna will not take you there. These matters have to be explained. Now the Father says: Remember Me, Shiv Baba. You are now studying Raja Yoga. You have to go to the land of Shiva and you will then automatically go to the land of Vishnu. It is easy to explain this. You will go from the land of Shiva, the land of liberation, to the land of Vishnu, the land of liberation-in-life. The Father of all is the One. You have to explain this main thing. No matter how many slogans etc. you make, that is unnecessary expense. You have all the pictures etc. In Karachi, so many used to come to you. You used to keep a table and chair outside on the big area of ground. You would sit and explain to whoever came there. Previously, there wasn’t that much knowledge. You have now received easy knowledge. You also know the Father. The Father is the Creator of heaven. His order is: Remember Me and the inheritance. Show the picture and explain that. Previously, when you used to explain the pictures, while they were listening to you they would go into trance. At that time, you were small buds. All of that was Baba’s magic. He used to pull the string. There is now a great need to explain everything. Nowadays, people are very bad. You cannot tell what someone’s occupation is unless you ask him to fill in a form. Just as there are those teachers etc. who teach you how to become a barrister, so too, this unlimited Father is such a great Teacher. Those teachers would perhaps make you into a barrister. However, if you shed your body while studying, everything you had studied to become a barrister would be finished. It isn’t that that study will continue in the next birth. Whatever you do here, you take that with you. A soul has the sanskars within him. Yes, little children have small organsand are therefore unable to speak. They are unable to do anything with their physical organs, but they do carry those sanskars with them. This knowledge is imperishable, so they will come and take knowledge when they grow older. That soul will definitely come here again. He will bring benefit to someone, somewhere or other. He will pull his parents in this direction. Although he will be a small child, as soon as he sees Mama and Baba, there will be a pull of that love. Because the physical organs are small, he wouldn’t be able to speak, but there would be that love for his equals. So, this knowledge is very unique, entertaining and simple. Some are such that they remain as they are, like thorns. The golden age is a rose tree. You are now thorns. Then, some closed buds emerge from that. There are those who are constant roses, but they are still numberwise. They will become part of the subjects. To become a bud and then wilt and die is as though you have not studied. If a bud remains closed, that one will end up among the subjects. Those who become flowers will become part of the kingdom. When Baba goes into the garden, He brings flowers from there in order to explain to you children. If you don’t make effort and become a flower now, there will be a lot of repentance later on. Firstly, there is already the burden on your heads of the sins committed. So then, of what use is it to experience punishment and then claim a status among the subjects? You understand that your deity kingdom is being established. Baba can understand what each one of you will become. It will remain in His heart to what extent you study and what you will become. If someone studies well, He will continue to have that love inside. He would understand that you will become part of the kingdom. As you progress further, you will have many visions. Those who don’t study will repent a lot at that time. There is very little time left. So, how will you be able to gallop sufficiently? The Father says: If you perform sinful actions after becoming a child, there will have to be one hundred-fold punishment. It becomes the business of many thieves who go to jail: to experience punishment and go to jail. You are now making effort to become the highest-on-high sun-dynasty emperors and empresses. It is numberwise. What will be the condition of those who run away? The Father explains to you so well, but if it is not in your fortune and you don’t understand, what can the One who inspires you to make effort do? The Father says: Become a flower. Don’t forget the Father. Never let go of the hand of such a Father. Maya, the snake, will swallow you raw. Don’t make any mistakes so that you lose your fortune of the kingdom. Your activity of every cycle would then be seen to be the same as your activity of this time. Some have satopradhan behaviour, some have rajo and others have tamo behaviour. Some very good children have very severe omens over them. Internally, they are ugly whereas externally they look good. If you make any mistakes, the soul will become ugly. There is then a dark shadow. This is why Baba says: Hear it through one ear and let it out through the other: close your ears to anything evil. Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. Always have the deep desire to have your sins absolved. Take care that you don’t commit any sins now.
  2. In order to remain safe from the eclipse of the omens of Maya, close your ears to evil things. Let your behaviour be satopradhan. Remain clean inside and out.
Blessing: May you be an easy effort-maker and keep your daily timetable accurate with the foundation of amrit vela.
Just as a train automatically moves along fine when it is on the rails, similarly, remainconcentrated each day, on the line of remembrance at amrit vela. If amrit vela is fine, then the rest of the day will be fine. If the foundation of amrit vela is firm, you will then continue to receive co-operation for the whole day and your efforts will become easy. Those who are true Sitas and constantly stay within the line of remembrance and shrimat of the Father remains aware of the one Rama in their every vein.
Slogan: In order to catch Baba’s help, keep your intellect concentrated.

*** Om Shanti ***

TODAY MURLI 21 SEPTEMBER 2017 DAILY MURLI (English)

Today Murli Brahma kumaris : 21 SEPTEMBER 2017

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[Web-Dorado_Zoom]
21/09/17
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, you Brahmins now have to interact with even greater royalty than the deities because you now belong to the incorporeal and corporeal elevated clans.
Question: Which children’s faces remain in bloom like flowers?
Answer: Those who have the incognito happiness that they are claiming their unlimited inheritance from the Father and are becoming the masters of the world, those who are becoming satopradhan with knowledge and yoga; such souls continue to become pure. The faces of such children remain happily in bloom like flowers. Those souls will continue to receive strength. Jewels of knowledge will continue to emerge from their lips and they will become rup and basant. They will continue to have visions of the new kingdom.
Song: To live in Your lane and to die in Your lane.

Om shanti. Sweetest children, you have understood very clearly that you have to become a garland around Baba’s neck. Who said this? The soul said: Now, I want to become a garland only around Your neck. Body consciousness has to be renounced. We will now be threaded in the rosary of Rudra. You have to return home. Therefore, renounce body consciousness while alive. A soul is a child of the Supreme Soul. We are now claiming our inheritance from Him. You children should have this intoxication. Then your intellects will go to Shiv Baba. We souls are His children. You have now become His grandchildren through Brahma. Baba is incorporeal and Dada is corporeal. The Father is the Highest on High. Important, wealthy people live with great royalty. They have the intoxication of their position. You children should have a lot of happiness inside you. To stay in remembrance of the Father is the stage of soul consciousness through which you benefit a great deal. You children know that you are God’s children, that you are the children of Brahma. Baba says: You are My children anyway. I now adopt you through Brahma. You should have the intoxication that you belong to the incorporeal and corporeal elevated Brahmin clans. You have to consider yourselves to be Brahmins. You children of God are the children of Brahma. You Brahmins know that you are becoming deities. You mustn’t forget this. You Brahmins have to interact with even greater royalty than the deities. Your life becomes invaluable at this time. It was previously like a shell and it is now becoming like a diamond and this is why you are praised. Temples have also been created as your memorials. There is also the memorial to Somnath (Lord of Nectar), the One who made the deities what they were. There is your memorial too. Somnath gave the imperishable jewels of knowledge and so they created such a beautiful temple to Him. When you hear this song, you understand that you have become a garland around Shiv Baba’s neck. Baba is teaching us. You should also have the happiness of who it is who is teaching you. When you first learn the alphabet, you learn it while sitting on the floor. Then you sit on benches and then on chairs. Princes and princesses sit on couches in their college. It isn’t a prince or princess who teaches them. It is just another teacher. The status of princes and princesses is higher. You are even higher than the golden-aged princes and princesses. They are only the children of the deities; you are the children of God. You have to remember the One from whom you are to claim your inheritance. While sitting, walking and interacting with everyone, you mustn’t forget Him. It is only by having remembrance that you become healthy and wealthy. A father wills everything to his children and goes into the stage of retirement. Therefore, nothing then remains his; he gives everything away. You also will everything to Baba: Baba, all of this is Yours. Baba then says: OK, look after it as a trustee. You make Me into the Trustee and I then make you into trustees. Therefore, you have to follow shrimat. You mustn’t do any wrong business. Continue to ask Me. Some don’t even know how children should eat their food. There is great praise of Brahma bhojan. Even deities have a desire for Brahma bhojan and this is why you take Brahma bhojan. This Brahma bhojan has a lot of strength. As you make further progress, yogis will prepare all the food. At the moment you are all effort-makers. You continue to make effort to stay in remembrance of Shiv Baba as much as possible. You are His children. The children who eat this will continue to become very strong; therefore, strong, firm ones who prepare food will also emerge. They speak of Brahma bhojan, not Shiva bhojan. They speak of the bhandara of Shiva. Whatever is sent becomes pure in Shiv Baba’s bhandara. This is Shiv Baba’s bhandara. Baba has told you that at Shrinathdware they have wells of ghee. They cook very rich food there, whereas at Jagannathdware, they cook very simple food. There is a difference. That one is ugly and this one is beautiful. Shrinath has a lot of wealth, whereas people there (near Orissa) are not that wealthy. There are the wealthy and the poor. You are now very poor and you will then become wealthy. At this time you are very poor. There, you will receive 36 varieties of food. Therefore, such preparations have to be made. Although even the subjects are able to eat 36 varieties of food, the status of the kings is still higher. The food there is very firstclass. Everything there is A1 quality. Here, everything is Z quality. There is the difference of day and night. The total harvest of grains etc. that they have here goes rotten. You children should have a lot of intoxication. When someone passes an important examination, he becomes very intoxicated. You should have very elevated intoxication that God, who is the Bestower of Salvation for All, is teaching you. The Father says: I am Your Obedient Servant. A father is his children’s obedient servant. He surrenders everything he has to his children and then goes into the stage of retirement. The Father says: I too surrender Myself. However, you surrender yourselves first. When a person dies, all of his belongings are given to the karnighor (special brahmin priest). If a wealthy person dies, they even give away his furniture etc. What do you children give? Rubbish! What do you receive in return for that? Only the poor ones claim the inheritance; they surrender themselves. What does Baba take from you and what does He give you? Therefore, you children should have a lot of intoxication. You have found the unlimited Baba who washes the dirty impure clothes. Sikhs say: Guru Nanak spoke the versions from which they made the Granth (Sikh Scripture). The people of Bharat don’t even know who spoke their Gita, who the God of the Gita is, or which religion was established through it. They simply speak of the Hindu religion. They speak of the Aryan religion but they don’t understand the meaning of that at all. They believe that there was the Aryan religion, but now the whole of Bharat is un-Aryan (not reformed). That is just a name given by Dayananda. The branches that emerge later grow quickly. You have to make a lot of effort. They don’t take time to convert others. Here, there is no question of converting others. Here, you have to change from shudras into Brahmins. To become a Brahmin is not like going to your aunty’s home! Some fail while moving along. Baba says: Even if someone cuts your throat, you mustn’t become impure. Some ask Baba: What can I do under these circumstances? Then Baba understands that that one is unable to endure it. In that case, Baba would say: Go and become impure! It depends on you. They would beat you in this one birth, but you would be slaughtering yourself for 21 births. Maya slaps you very hard while you move along. This is boxing. She knocks you down with one punch. Some who have been coming from the beginning or for 15 to 20 years are such that they completely leave everything and die; they are so sensitive! When a mistake is made, there has to be repentance for that because you do that disservice. That is not right. Teachings are given. No one is beaten here. Some say that when their children at home are very troublesome, they have to be slapped. Baba says: OK, in order to benefit them, you may pull their ears a little, but explain with a lot of love as much as possible. It is said of Krishna that he was tied up with string. However, children there don’t cause such mischief. It is only the children of this time who are so troublesome. The Father explains: Children, the destination is very high. Ask about every situation and Baba will continue to give you methods. Each one’s illness is different. You have to be cautious at every step. Otherwise, you will be deceived. Become very, very sweet. Shiv Baba is so sweet and lovely! You children should also become like Him. The Father would want His children to become higher than Him and glorify their name. Become so firs class that your status becomes higher than Mine. He truly gives you a high status. No one would even be able to understand how you become the masters of the world. Therefore, your behaviour should be very royal. Your walking, moving, speaking and eating should all be very royal. Internally, there should be great happiness that you are the children of God. The picture of Lakshmi and Narayan is visible whereas you are incognito. Only Brahmins know you Brahmins; no one else knows you. You know that you are claiming your inheritance from Baba in an incognito form and becoming the masters of the world. The status you receive is very high. That gives you a lot of internal happiness. Make such effort that your faces bloom like flowers. No one has become like that yet. You have to make effort. As you make further progress, there will be a lot of regard for you. You have to give knowledge to the sannyasis and also to the kings at the end when you have received full strength. You have to become satopradhan with knowledge and the power of yoga. Let only jewels always emerge from your lips and you will become rup and basant. The soul will continue to become pure. The closer you come, the more happiness you will feel inside. You will also continue to have visions of your kingdom. You have to make effort in a very incognito way. You have to show others the path. All of you are Draupadis. Baba says: These assaults will have to be tolerated for Baba’s sake. There is so much purity in the golden age. It is called the 100% viceless world. It is now the 100% vicious world. It is in your intellects that you are now racing the spiritual race of yoga in order to become the garland around Shiv Baba’s neck. You will then become the garland around Vishnu’s neck. Your first clan is that of Brahmins. You then become deities and warriors. It takes you the whole cycle for the stage of descent and a second for the stage of ascent. It is now your stage of ascent. You simply have to remember Baba. This is your final birth. It takes you 84 births to fall down. You continue to climb in this birth. Baba gives you liberation-in-life in a second. You should have that happiness. You can see the contrast between what you would become with that knowledge and what you will become with this knowledge. You have to study this as well as that. Baba says: While living at home with your family, make effort for the future. Fulfil your responsibility to both your worldly family and your divine family. Baba sees the account of each of you and then shows you a method accordingly: This is how you should do this. If someone becomes angry, you have to remain very sweet. Even if someone insults you, just continue to smile. “Achcha. You are insulting me, but I am offering you flowers.” That person will then become completely quiet. He or she will cool down in just a minute. Baba is the great Entertainer. He shows you many tactics. He purifies the impure. Therefore, He has to have those tactics. You have to take shrimat. You have come here to become elevated through shrimat. Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. Become so first class, sweet and royal that you glorify the Father’s name. Even if someone becomes angry or insults you, simply continue to smile.
  2. Become a complete trustee by following shrimat. Don’t do any wrong business. Surrender yourselves completely.
Blessing: May you become an alokik angel who is light with pure thoughts and elevated company and performs the dance of happiness.
For you Brahmin children, the daily murli is your pure thoughts. You receive so many pure thoughts from the Father first thing in the morning. Keep your intellects busy with these pure thoughts and constantly stay in the Father’s company and you will become light and dance in happiness. The easy way to remain happy is to remain constantly light. Pure thoughts are light whereas waste thoughts are heavy and this is why you have to remain constantly busy with pure thoughts and become light and continue to perform the dance of happiness, for only then will you be called an alokik angel.
Slogan: The form of God’s sustenance of love is an easy yogi life.

*** Om Shanti ***

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BRAHMA KUMARIS MURLI 21 SEPTEMBER 2017 : DAILY MURLI (HINDI)

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 21 September 2017

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BK murli today ~ 21/09/2017 (Hindi) Brahma Kumaris प्रातः मुरली

 

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21/09/17
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन

 

”मीठे बच्चे – अभी तुम ब्राह्मणों को देवताओं से भी जास्ती रॉयल्टी से चलना है क्योंकि तुम अभी निराकारी और साकारी ऊंच कुल के हो”
प्रश्नः- किन बच्चों का मुखड़ा (चेहरा) फूल की तरह खिला हुआ रहेगा?
उत्तर:- जिन्हें गुप्त खुशी होगी कि बाप से हम बेहद का वर्सा लेकर विश्व का मालिक बनते हैं। 2- जो ज्ञान और योग से सतोप्रधान बनते जा रहे हैं। आत्मा पवित्र होती जाती है। ऐसे बच्चों का मुखड़ा फूल की तरह खुशी में खिला हुआ रहेगा। आत्मा में ताकत आती जायेगी। मुख से ज्ञान रत्न निकलते-निकलते रूप-बसन्त बन जायेंगे। नई राजधानी का साक्षात्कार होता रहेगा।
गीत:- मरना तेरी गली में…

ओम् शान्ति। मीठे-मीठे बच्चों ने अच्छी तरह समझ लिया है कि हमको बाबा के गले का हार बनना है। यह किसने कहा? आत्मा ने कहा कि अभी आपके ही गले का हार बनना है। देह-अभिमान छोड़ना है। अभी हम रूद्र माला में पिरोयेंगे। वापिस जाना है इसलिए जीते जी देह-अभिमान छोड़ना है। आत्मा परमात्मा की सन्तान है, उनसे ही अब हम वर्सा ले रहे हैं। बच्चों को यह नशा रहना चाहिए। तो बुद्धि शिवबाबा पास चली जायेगी। हम आत्मा उनकी सन्तान हैं। अभी ब्रह्मा द्वारा उनके पोत्रे बने हैं। निराकार बाबा, साकार दादा है। बाप है ऊंच ते ऊंच। मनुष्य जो ऊंचे धनवान होते हैं वह बड़ी रॉयल्टी से रहते हैं। अपनी पोजीशन का नशा रहता है। तुम बच्चों को अन्दर में बहुत खुशी होनी चाहिए। बाप की याद में रहना यही देही-अभिमानी अवस्था है, जिससे तुम्हारा बहुत फायदा है। तुम बच्चे जानते हो कि हम ईश्वरीय सन्तान, ब्रह्मा की सन्तान हैं। बाबा कहते हैं तुम मेरे बच्चे हो ही, अभी तुमको ब्रह्मा द्वारा एडाप्ट करता हूँ। तुम्हें यह नशा रहना चाहिए – हम निराकारी और साकारी ऊंच ब्राह्मण कुल के हैं। अपने को ब्राह्मण समझना है। हम ईश्वरीय सन्तान ब्रह्मा की औलाद हैं। तुम जानते हो हम ब्राह्मण से देवता बन रहे हैं। यह भूलना नहीं चाहिए। तुम ब्राह्मणों को देवताओं से भी अधिक रॉयल्टी से चलना चाहिए। तुम्हारा अमूल्य जीवन अभी बनता है। पहले कौड़ी जैसा था, अब हीरे जैसा बनता है, इसलिए तुम्हारी महिमा है। मन्दिर भी तुम्हारे यादगार बने हुए हैं। सोमनाथ, जिसने देवताओं को ऐसा बनाया, उनका भी यादगार है। तुम्हारा भी यादगार है। सोमनाथ ने अविनाशी ज्ञान रत्न दिये हैं तो उनका मन्दिर कितना अच्छा बना हुआ है। तुम जब गीत सुनते हो तो जानते हो अभी हम शिवबाबा के गले का हार बने हैं। बाबा हमको पढ़ाते हैं। हमको पढ़ाने वाला कौन है, वह भी खुशी होनी चाहिए। पहले अल्फ बे पढ़ते हैं तो पट (जमीन) में बैठ पढ़ते हैं फिर बेंच पर बैठ पढ़ते हैं, फिर कुर्सी पर। प्रिन्स-प्रिन्सेज तो कॉलेज में कोच पर बैठते हैं। उन्हों को पढ़ाने वाला कोई प्रिन्स-प्रिन्सेज नहीं होता है। वह फिर भी कोई टीचर होता है। परन्तु मर्तबा तो प्रिन्स प्रिन्सेज का ऊंच होता है ना। तुम तो सतयुगी प्रिन्स प्रिन्सेज से भी ऊंच हो ना। वह फिर भी देवताओं की सन्तान हैं। तुम हो ईश्वरीय सन्तान, जिससे वर्सा लेना है उनको याद भी करना है। उठते बैठते व्यवहार में रहते, उनको भूलना नहीं चाहिए। याद से ही हेल्दी-वेल्दी बनते हैं।

बाप बच्चों को विल कर वानप्रस्थ में जाते हैं तो फिर कुछ भी नहीं रहा। सब कुछ दे दिया। जैसे तुम विल करते हो कि बाबा यह सब आपका है। बाबा फिर कहते हैं अच्छा ट्रस्टी हो सम्भालो। तुम हमको ट्रस्टी बनाते हो, फिर हम तुमको ट्रस्टी बनाते हैं तो श्रीमत पर चलना, कोई उल्टा-सुल्टा धन्धा नहीं करना। मेरे से पूछते रहना, कोई तो यह भी नहीं जानते कि बच्चों को भोजन कैसे खाना चाहिए। ब्रह्मा भोजन की बड़ी महिमा है। देवतायें भी ब्रह्मा भोजन की आश रखते हैं तब तो तुम ब्रह्माभोजन ले जाते हो। इस ब्रह्मा भोजन में बहुत ताकत है। आगे चल भोजन योगी लोग बनायेंगे। अभी तो पुरूषार्थी हैं। जितना हो सकता है शिवबाबा की याद में रहने की कोशिश करते हैं। बच्चे तो हैं ना। खाने वाले बच्चे पक्के होते जायेंगे तो बनाने वाले भी पक्के निकलते रहेंगे। ब्रह्मा भोजन कह देते हैं। शिव भोजन नहीं कहते हैं। शिव का भण्डारा कहते हैं। जो भी भेज देते हैं वह शिवबाबा के भण्डारे में पवित्र हो जाता है। शिवबाबा का भण्डारा है। बाबा ने बतलाया है – श्रीनाथ द्वारे पर घी के कुएं हैं। वहाँ पक्की रसोई बनती है और जगन्नाथ द्वारे पर कच्ची रसोई बनती है। फर्क है ना। वह है श्याम, वह है सुन्दर। श्रीनाथ पास बहुत धन है – वहाँ (उड़ीसा के तरफ) इतना धनवान नहीं होते। गरीब और साहूकार तो होते हैं ना। अभी तो बहुत गरीब हैं फिर साहूकार होंगे। इस समय तुम बहुत गरीब हो। वहाँ तो तुमको 36 प्रकार के भोजन मिलेंगे। तो ऐसी तैयारियाँ करनी चाहिए। भल प्रजा भी 36 प्रकार के भोजन खा सकती है परन्तु राजाई का मर्तबा तो ऊंच है ना। वहाँ का भोजन तो बहुत फर्स्टक्लास होगा। सब चीजें ए वन क्वालिटी की होती है। यहाँ सब चीजें जेड क्वालिटी की हैं। दिन-रात का फर्क है ना। अनाज आदि जो कुछ निकलता, सब सड़ा हुआ रहता है। तुम बच्चों को बहुत नशा रहना चाहिए, कोई बड़ा इम्तहान पास करते हैं तो नशा रहता है ना। तुमको तो बड़ा ऊंच नशा रहना चाहिए – हमको भगवान पढ़ा रहे हैं। जो सर्व का सद्गति दाता है। बाप कहते हैं मैं तुम्हारा ओबीडियन्ट सर्वेन्ट हूँ। बाप बच्चों का ओबीडियन्ट सर्वेन्ट होता है ना। बच्चों पर बलि चढ़ फिर खुद वानप्रस्थ में चले जाते हैं। बाप कहते हैं मैं भी बलि चढ़ता हूँ। परन्तु तुम पहले बलि चढ़ते हो। आदमी मरता है तो उसकी चीजें करनीघोर को देते हैं ना। साहूकार होते हैं तो फर्नीचर आदि भी दे देते हैं। तुम बच्चे क्या देते हो? किचड़पट्टी। उसकी एवज़ में तुमको क्या मिलता है? गरीब ही वर्सा लेते हैं। बलिहार जाते हैं। बाबा लेते क्या हैं, देते क्या हैं? तो तुम बच्चों को नशा रहना चाहिए। बेहद का बाबा मिला है, मूत पलीती कपड़ धोते हैं। सिक्ख लोग कहते हैं – गुरुनानक ने यह वाणी चलाई – जिसका ग्रन्थ बना हुआ है। भारतवासियों को यह भी पता नहीं कि हमारी गीता किसने गाई? गीता का भगवान कौन था? कौन सा धर्म स्थापन किया? वह तो हिन्दू धर्म कह देते हैं। आर्य धर्म कहते हैं, अर्थ कुछ भी नहीं समझते। वह समझते हैं कि आर्य धर्म था, अब तो सारा भारत अनआर्य है। यह तो करके दयानंद ने नाम रखा है। पिछाड़ी को जो टालियाँ निकलती हैं उनकी जल्दी-जल्दी वृद्धि हो जाती है। तुमको तो मेहनत करनी पड़ती है। उन्हों को कनवर्ट करने में देरी थोड़ेही लगती है। यहाँ तो कनवर्ट होने की बात ही नहीं है। यहाँ तो शूद्र से ब्राह्मण बनना है। ब्राह्मण बनना कोई मासी का घर थोड़ेही है। चलते-चलते फाँ हो जाते हैं। बाबा कहते हैं कोई गला भी काट दे तो भी अपवित्र नहीं बनना है। बाबा से पूछते हैं कि इस हालत में क्या करूँ? तो बाबा समझ जाते हैं कि सहन नहीं कर सकते हैं। तो बाबा कहते हैं जाकर पतित बनो। यह तो तुम्हारे ऊपर है। वह तो करके इस एक जन्म लिए मार देंगे, तुम तो 21 जन्मों के लिए अपना कतल करती हो। चलते-चलते माया जोर से थप्पड़ मार देती है। बॉक्सिंग है ना। एक ही घूसे से एकदम गिरा देती है। 15-20 वर्ष के, शुरू से आये हुए भी ऐसे हैं जो एकदम छोड़कर चले जाते हैं, मर पड़ते हैं। ऐसे भी नाज़ुक हैं। भूल पर तो पछताना होता है ना। बाप समझाते हैं बच्चे तुम यह डिससर्विस करते हो, यह ठीक नहीं है। शिक्षा तो दी जाती है ना। कोई घूंसा नहीं लगाया जाता है। जैसे कहते हैं ना घर में बच्चे बहुत तंग करते हैं तो चमाट लगानी पड़ती है। बाबा कहते हैं अच्छा उनके कल्याण के लिए करके थोड़ा कान पकड़ लो। जितना हो सके बड़े प्यार से समझाओ। कृष्ण के लिए भी कहते हैं कि उनको रस्सी में बांध देते थे। परन्तु ऐसी चंचलता वहाँ होती नहीं है। इस समय के ही बच्चे नाक में दम कर देते हैं।

तो बाप समझाते हैं कि बच्चे मंजिल बहुत ऊंची है। हर बात में पूछो – बाबा युक्तियाँ बतलाते रहेंगे। हर एक की बीमारी अलग-अलग होती है। कदम-कदम पर सावधानी लेनी है। नहीं तो धोखा खा लेंगे। बहुत-बहुत मीठा बनना है। शिवबाबा कितना मीठा कितना प्यारा है। बच्चों को भी ऐसा बनना चाहिए। बाप तो चाहेंगे ना – बच्चे हमसे भी ऊंच बनें। नाम निकालें। ऐसा फर्स्टक्लास बनो जो हमसे भी तुम्हारा ऊंच पद हो। बरोबर ऊंच पद देते हैं ना! किसको ख्याल में भी नहीं होगा कि यह विश्व के मालिक कैसे बनें। तो तुम्हारी चलन बड़ी रॉयल होनी चाहिए। चलना, फिरना, बोलना, खाना बड़ा रॉयल्टी से होना चाहिए। अन्दर में बड़ी खुशी होनी चाहिए – हम ईश्वरीय सन्तान हैं। लक्ष्मी-नारायण के चित्र तो प्रत्यक्ष हैं। तुम तो गुप्त हो ना। तुम ब्राह्मणों को ब्राह्मण ही जानें और न जाने कोई। तुम जानते हो हम गुप्त वेष में बाबा से वर्सा लेकर विश्व के मालिक बनते हैं। बहुत ऊंच पद है, इसमें अन्दर में बड़ी खुशी रहती है। मुखड़ा फूल की तरह खिला रहना चाहिए, ऐसा पुरूषार्थ करना है। अभी कोई ऐसा बना नहीं है। पुरूषार्थ करना है। आगे चल तुम्हारा बहुत मान होने वाला है। सन्यासियों और राजाओं को भी पिछाड़ी में ज्ञान देना है। जब तुम्हारे में पूरी ताकत आ जाती है।

ज्ञान और योग बल से तुम्हें सतोप्रधान बनना है। मुख से सदैव रत्न ही निकलते रहें तो तुम रूप-बसन्त बन जायेंगे। आत्मा पवित्र बनती जायेगी। तुम जितना नजदीक आते जायेंगे तो अन्दर में बहुत खुशी होगी। अपनी राजधानी का साक्षात्कार भी होता रहेगा। तुमको अपना पुरूषार्थ बहुत गुप्त रीति से करना चाहिए। रास्ता बताना चाहिए। तुम सब द्रोपदियां हो। बाबा कहते हैं यह अत्याचार सहन करने पड़ेंगे – बाबा के निमित्त। सतयुग में कितनी पवित्रता है। 100 परसेन्ट वाइसलेस वर्ल्ड कहा जाता है। अभी है 100 परसेन्ट विशश वर्ल्ड। तुम्हारी बुद्धि में है अभी हम शिवबाबा के गले का हार बनने के लिए रूहानी योग की दौड़ी पहन रहे हैं। फिर हम विष्णु के गले का हार बनेंगे। तुम्हारा पहले-पहले नसल है – ब्राह्मणों का। फिर तुम देवता क्षत्रिय बनते हो। उतरती कला में तुमको सारा कल्प लगता है और चढ़ती कला में सेकेण्ड लगता है। अभी तुम्हारी चढ़ती कला है। सिर्फ बाबा को याद करना है, यह अन्तिम जन्म है। गिरने में तुमको 84 जन्म लगते हैं। इस जन्म में तुम चढ़ते जाते हो। बाबा सेकेण्ड में जीवनमुक्ति देते हैं। वह खुशी रहनी चाहिए। कान्ट्रास्ट किया जाता है – उस नॉलेज से हम क्या बनेंगे! इससे हम क्या बनेंगे! यह भी पढ़ना है, वह भी पढ़ना है। बाबा कहते हैं गृहस्थ व्यवहार में रहते भविष्य के लिए पुरूषार्थ करना है। आसुरी और दैवी कुल दोनों से तोड़ निभाना है। एक-एक का बाबा हिसाब लेते हैं। फिर उस पर वैसी युक्ति बतलाते हैं कि इस पर ऐसे चलो। भल कोई गुस्सा करे परन्तु तुमको बहुत मीठा बनना है। कोई गाली दे तो भी मुस्कराते रहना है।

अच्छा – तुम गाली देते हो हम तुम्हारे ऊपर फूल चढ़ाते हैं। तो एकदम शान्त हो जायेंगे। एक मिनट में ठण्डे हो जायेंगे। बाबा रांझू-रमजबाज है। बहुत रमजें (युक्तियां) बतायेंगे। पतितों को पावन बनाते हैं तो जरूर रमज़ होगी ना। श्रीमत लेनी है। श्रीमत से श्रेष्ठ बनने के लिए ही आये हो। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमार्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) ऐसा फर्स्टक्लास मीठा और रॉयल बनना है जो बाप का नाम बाला हो। कोई गुस्सा करे, गाली दे तो भी मुस्कराते रहना है।

2) श्रीमत पर पूरा-पूरा ट्रस्टी बनना है। कोई भी उल्टा धन्धा नहीं करना है। पूरा-पूरा बलिहार जाना है।

वरदान:- शुद्ध संकल्प और श्रेष्ठ संग द्वारा हल्के बन खुशी की डांस करने वाले अलौकिक फरिश्ते भव 
आप ब्राह्मण बच्चों के लिए रोज़ की मुरली ही शुद्ध संकल्प हैं। कितने शुद्ध संकल्प बाप द्वारा रोज़ सवेरे-सवेरे मिलते हैं, इन्हीं शुद्ध संकल्पों में बुद्धि को बिजी रखो और सदा बाप के संग में रहो तो हल्के बन खुशी में डांस करते रहेंगे। खुश रहने का सहज साधन है – सदा हल्के रहो। शुद्ध संकल्प हल्के हैं और व्यर्थ संकल्प भारी हैं इसलिए सदा शुद्ध संकल्पों में बिजी रह हल्के बनों और खुशी की डांस करते रहो तब कहेंगे अलौकिक फरिश्ते।
स्लोगन:- परमात्म प्यार की पालना का स्वरूप है – सहजयोगी जीवन।

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