mahavakya

BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 6 NOVEMBER 2017 – Aaj Baba ne Kaha

To Read 5 November Shiv Baba’s Mahavakya :- Click Here

*Om Shanti*
*06.11.2017*

★【 *आज का पुरुषार्थ* 】★

बच्चे, तुम हो आदि देव और आदि देवी। यह सारा ज्ञान जो तुम्हें बाप स्मृति दिला रहे हैं … वह तुम्हारे अन्दर समाया हुआ है। बस बाप तो निमित्त बन तुम्हें स्मृति दिला रहा है। 
जितना-जितना तुम अपनी position के स्मृति स्वरूप बनते जाओगे … उतना ही तुम्हें अपने कर्तव्यों और authority की याद आती जायेगी।

फिर यह छोटी-छोटी सी परिस्थितियाँ ऐसे solve होगी जैसे मक्खन से बाल निकालते है।
देखो, जैसे दुनिया का सबसे अमीर आदमी अगर किसी कारण अपनी याददाश्त भूल जाता है और एक मज़दूर के घर रहने लग जाए, तो उसके संस्कार royal अवश्य होंगे। फिर भी मज़दूर के घर रहने के कारण वह उन्हीं परिस्थितियों में फँस जाता है परन्तु जब कोई उसे उसकी position की स्मृति दिलाता है, और जब तक उसे full स्मृति नहीं आती तब तक वह छोटी-छोटी बातों में फँसा रहता है परन्तु स्मृति आते ही वह छोटे-छोटे काम छोड़ अपने बड़े कर्तव्य में तत्पर हो जाता है।

इसी तरह बाप तो केवल इस कल्प की अर्थात् आपको कुछ समय पहले की ही याद दिला रहा है ताकि आप अपनी position में स्थित हो अपना बेहद का कर्तव्य करो। बस बच्चे, बार-बार अपनी स्मृति का switch-on कर अपनी स्व-स्थिति के आसन पर स्थित हो अपने कर्म-व्यवहार में आओ तो जल्दी ही आप बच्चे बाप के साथ विश्व-परिवर्तन का कार्य कर पाओंगे।

अच्छा । ओम् शान्ति ।

【 *Peace Of Mind TV* 】
Tata Sky # 1065 | Airtel # 678 | Videocon # 497 | Reliance # 640 | 
Jio TV |

Brahmakumaris Daily Mahavakya 8 September 2017

To Read 7 September Mahavakya :- Click Here

ओम् शान्ति ।

बाबा बच्चों को रोज़ कहता है, बच्चे बाप पर निश्चय रखो और हल्के रहो, तो क्या आप अपने लौकिक बच्चों को भी कहते हो कि मुझ पर निश्चय रखो…, नहीं ना…!

परन्तु मैं बाप आपको बार-बार एक ही बात कह रहा हूँ, क्योंकि बाप को पता है कि कहीं बच्चे थक ना जायें…!

यह जो अन्तिम समय जा रहा है, हिसाब-किताब क्लीयर करने का है । यह इतना सहज भी नहीं है । इसलिए बच्चे थोड़ा हलचल में आ जाते हैं, परन्तु देखो सबकुछ की आदि आप बच्चों से ही होती है – चाहे सतयुग की, चाहे द्वापर की, चाहे संगमयुग की, फिर हिसाब-किताब क्लीयर करने की आदि भी आप बच्चों से हुई है ।

हिसाब-किताब क्लीयर करना अर्थात् सम्पन्न और सम्पूर्ण बनना अर्थात् परिवर्तन का नगाड़ा बजना, इसलिए धैर्यतापूर्वक मेरा बाबा … मेरा बाबा … करते रहो । बाबा आप बच्चों के हर पल साथ है, फिर तो विजय हुई पड़ी है ना…।
निश्चयबुद्धि विजयन्ती का गायन भी आप बच्चों का ही है ।

देखो, बाबा ने कभी भी किसी भी आत्मा से गृहस्थी या कोई कर्म छुड़वाया नहीं है । बस, बाबा ने यहीं कहा कि 
‘‘पवित्र बनो – योगी बनो’’ 
क्योंकि कल्प के अन्तिम समय में पवित्रता और बाप की याद के बिना इस पुरानी दुनिया में केवल दुःख-ही-दुःख है, इसलिए पवित्र और योगी बनने में यदि किसी भी तरह की कोई बाधा है, कोई भी आत्मा या कोई भी कार्य आपको आपके रास्ते में रूकावट स्वरूप बन जाता है, तो उसे छोड़ने में आपके कल्याण के साथ-साथ उसका भी कल्याण समाया हुआ है । यज्ञ की आदि में पवित्रता की वजह से माताओं और कन्याओं ने घरों का त्याग किया क्योंकि वह त्याग उस समय अति आवश्यक था और वह त्याग उनका भाग्य बन गया ।

बच्चे, किसी भी तरह का कोई बन्धन वा चिन्ता आत्मा को आगे बढ़ने नहीं देती । एक निश्चिंत और निर्बंधन आत्मा ही उड़कर अपनी मंज़िल को प्राप्त कर सकती है इसलिए चेक करो, फिर चेन्ज करो ।

अच्छा । ओम् शान्ति ।

 

Font Resize