daily murli 23 January

BRAHMA KUMARIS MURLI TODAY 23 JANUARY 2021 : AAJ KI MURLI

23-01-2021
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन
“मीठे बच्चे – कदम-कदम पर श्रीमत पर चलते रहो, यह ब्रह्मा की मत है या शिवबाबा की, इसमें मूँझो नहीं”
प्रश्नः- अच्छी ब्रेन वाले बच्चे कौन सी गुह्य बात सहज ही समझ सकते हैं?
उत्तर:- ब्रह्मा बाबा समझा रहे हैं या शिवबाबा – यह बात अच्छी ब्रेन वाले सहज ही समझ लेंगे। कई तो इसमें ही मूँझ जाते हैं। बाबा कहते – बच्चे, बापदादा दोनों इकट्ठे हैं। तुम मूँझो नहीं। श्रीमत समझकर चलते रहो। ब्रह्मा की मत का रेसपॉन्सिबुल भी शिवबाबा है।

ओम् शान्ति। रूहानी बाप बच्चों को समझा रहे हैं, तुम समझते हो हम ब्राह्मण ही रूहानी बाप को पहचानते हैं। दुनिया में कोई भी मनुष्यमात्र रूहानी बाप, जिसको गॉड फादर वा परमपिता परमात्मा कहते हैं, उनको जानते नहीं हैं। जब वह रूहानी बाप आये तब ही रूहानी बच्चों को पहचान दे। यह नॉलेज न सृष्टि के आदि में रहती, न सृष्टि के अन्त में रहती। अभी तुमको नॉलेज मिली है, यह है सृष्टि के अन्त और आदि का संगमयुग। इस संगमयुग को भी नहीं जानते तो बाप को कैसे जान सकेंगे। कहते हैं – हे पतित-पावन आओ, आकर पावन बनाओ, परन्तु यह पता नहीं है कि पतित-पावन कौन है और वह कब आयेंगे। बाप कहते हैं – मैं जो हूँ जैसा हूँ, मुझे कोई भी नहीं जानते। जब मैं आकर पहचान दूँ तब मुझे जानें। मैं अपना और सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का परिचय संगमयुग पर एक ही बार आकर देता हूँ। कल्प बाद फिर से आता हूँ। तुमको जो समझाता हूँ वह फिर प्राय: लोप हो जाता है। सतयुग से लेकर कलियुग अन्त तक कोई भी मनुष्य मात्र मुझ परमपिता परमात्मा को नहीं जानते हैं। न ब्रह्मा-विष्णु-शंकर को जानते। मुझे मनुष्य ही पुकारते हैं। ब्रह्मा-विष्णु-शंकर थोड़ेही पुकारते हैं। मनुष्य दु:खी होते हैं तब पुकारते हैं। सूक्ष्मवतन की तो बात ही नहीं। रूहानी बाप आकर अपने रूहानी बच्चों अर्थात् रूहों को बैठ समझाते हैं। अच्छा, रूहानी बाप का नाम क्या है? बाबा जिसको कहा जाता है, जरूर कुछ नाम होना चाहिए। बरोबर नाम एक ही गाते हैं शिव। यह नामीग्रामी है परन्तु मनुष्यों ने अनेक नाम रखे हैं। भक्ति मार्ग में अपनी ही बुद्धि से यह लिंग रूप बना दिया है। नाम फिर भी शिव है। बाप कहते हैं मैं एक बार आता हूँ। आकर मुक्ति-जीवनमुक्ति का वर्सा देता हूँ। मनुष्य भल नाम लेते हैं – मुक्तिधाम, निर्वाणधाम, परन्तु जानते कुछ नहीं हैं। न बाप को जानते हैं, न देवताओं को। यह किसको भी पता नहीं है बाप भारत में आकर कैसे राजधानी स्थापन करते हैं। शास्त्रों में भी ऐसी कोई बात नहीं है परमपिता परमात्मा कैसे आकर आदि सनातन देवी-देवता धर्म की स्थापना करते हैं। ऐसे नहीं सतयुग में देवताओं को ज्ञान था, जो गुम हो गया। नहीं, अगर देवताओं में भी यह ज्ञान होता तो चलता आता। इस्लामी, बौद्धी आदि जो हैं उन्हों का ज्ञान चलता आता है। सब जानते हैं – यह ज्ञान प्राय:लोप हो जाता है। मैं जब आता हूँ तो जो आत्मायें पतित बन राज्य गवाँ बैठी हैं उन्हों को आकर फिर पावन बनाता हूँ। भारत में राज्य था फिर गवाँया कैसे है, वह भी किसको पता नहीं इसलिए बाप कहते हैं बच्चों की कितनी तुच्छ बुद्धि बन गई है। मैं बच्चों को यह ज्ञान दे प्रालब्ध देता हूँ फिर सभी भूल जाते हैं। कैसे बाप आया, कैसे बच्चों को शिक्षा दी, वह सब भूल जाते हैं। यह भी ड्रामा में नूँध है। बच्चों को विचार सागर मंथन करने की बड़ी बुद्धि चाहिए।

बाप कहते हैं यह जो शास्त्र आदि तुम पढ़ते आये हो यह सतयुग-त्रेता में नहीं पढ़ते थे। वहाँ थे ही नहीं। तुम यह नॉलेज भूल जाते हो फिर गीता आदि शास्त्र कहाँ से आया? जिन्होंने गीता सुनकर यह पद पाया है वही नहीं जानते तो और फिर कैसे जान सकते। देवतायें भी जान नहीं सकते। हम मनुष्य से देवता कैसे बनें। वह पुरुषार्थ का पार्ट ही बन्द हो गया। तुम्हारी प्रालब्ध शुरू हो गई। वहाँ यह नॉलेज हो कैसे सकती। बाप समझाते हैं यह नॉलेज तुमको फिर से मिल रही है, कल्प पहले मिसल। तुमको राजयोग सिखलाए प्रालब्ध दी जाती है। फिर वहाँ तो दुर्गति है नहीं। तो ज्ञान की बात भी नहीं उठ सकती। ज्ञान है ही सद्गति पाने के लिए। वह देने वाला एक बाप है। सद्गति और दुर्गति का अक्षर यहाँ से निकलता है। सद्गति को भारतवासी ही पाते हैं। समझते हैं हेविनली गॉड फादर ने हेविन रचा था। कब रचा? यह कुछ भी पता नहीं। शास्त्रों में लाखों वर्ष लिख दिया है। बाप कहते हैं – बच्चों, तुमको फिर से नॉलेज देता हूँ फिर यह नॉलेज खलास हो जाती है तो भक्ति शुरू होती है। आधाकल्प है ज्ञान, आधाकल्प है भक्ति। यह भी कोई नहीं जानते हैं। सतयुग की आयु ही लाखों वर्ष दे दी है। तो मालूम कैसे पड़े। 5 हज़ार वर्ष की बात भी भूल गये हैं। तो लाखों वर्ष की बात कैसे जान सकें। कुछ भी समझते नहीं। बाप कितना सहज समझाते हैं। कल्प की आयु 5 हज़ार वर्ष है। युग ही 4 हैं। चारों का इक्वल टाइम 1250 वर्ष है। ब्राह्मणों का यह मिडगेड युग है। बहुत छोटा है उन 4 युगों से। तो बाप भिन्न-भिन्न रीति से, नई-नई प्वाइंट्स सहज रीति बच्चों को समझाते रहते हैं। धारणा तुमको करनी है। मेहनत तुमको करनी है। ड्रामा अनुसार जो समझाता आया हूँ वह पार्ट चला आता है। जो बताने का था वही आज बता रहा हूँ। इमर्ज होता रहता है। तुम सुनते जाते हो। तुमको ही धारण करना और कराना है। मुझे तो धारण नहीं करना है। तुमको सुनाता हूँ, धारणा कराता हूँ। हमारी आत्मा में पार्ट है पतितों को पावन बनाने का। जो कल्प पहले समझाया था वही निकलता रहता है। मैं पहले से जानता नहीं था कि क्या सुनाऊंगा। भल इनकी सोल विचार सागर मंथन करती हो। यह विचार सागर मंथन कर सुनाते हैं या बाबा सुनाते हैं – यह बड़ी गुह्य बातें हैं, इसमें ब्रेन बड़ी अच्छी चाहिए। जो सर्विस में तत्पर होंगे उनका ही विचार सागर मंथन चलता होगा।

वास्तव में कन्यायें बंधनमुक्त होती हैं। वह इस रूहानी पढ़ाई में लग जाएं, बंधन तो कोई है नहीं। कुमारियां अच्छा उठा सकती हैं, उनको है ही पढ़ना और पढ़ाना। उनको कमाई करने की दरकार नहीं है। कुमारी अगर अच्छी रीति से यह नॉलेज समझ जाए तो सबसे अच्छी है। सेन्सीबुल होगी तो बस इस रूहानी कमाई में लग जायेगी। कई तो शौक से लौकिक पढ़ाई पढ़ती रहती हैं। समझाया जाता है – इससे कोई फायदा नहीं। तुम यह रूहानी पढ़ाई पढ़कर सर्विस में लग जाओ। वह पढ़ाई तो कोई काम की नहीं है। पढ़कर चले जाते हैं गृहस्थ व्यवहार में। गृहस्थी मातायें बन जाती हैं। कन्याओं को तो इस नॉलेज में लग जाना चाहिए। कदम-कदम श्रीमत पर चल धारणा में लग जाना है। मम्मा शुरू से आई और फिर इस पढ़ाई में लग गई, कितनी कुमारियां तो गुम हो गई। कुमारियों को अच्छा चांस है। श्रीमत पर चले तो बहुत फर्स्टक्लास हो जाएं। यह श्रीमत है वा ब्रह्मा की मत है – इसमें ही मूँझ पड़ते हैं। फिर भी यह बाबा का रथ है ना। इनसे कुछ भूल हो जाए, तुम श्रीमत पर चलते रहेंगे तो वह आपेही ठीक कर देंगे। श्रीमत मिलेगी भी इन द्वारा। सदैव समझना चाहिए श्रीमत मिलती है फिर कुछ भी हो – रेसपान्सिबुल खुद है। इनसे कुछ हो जाता है, बाबा कहते हैं मैं रेसपान्सिबुल हूँ। ड्रामा में यह राज़ नूँधा हुआ है। इनको भी सुधार सकते हैं। फिर भी बाप है ना। बापदादा दोनों इकट्ठे हैं तो मूँझ पड़ते हैं। पता नहीं शिवबाबा कहते हैं वा ब्रह्मा कहते हैं। अगर समझें शिवबाबा ही मत देते हैं तो कभी भी हिले नहीं। शिवबाबा जो समझाते हैं सो राइट ही है। तुम कहते हो बाबा आप ही हमारे बाप-टीचर-गुरू हो। तो श्रीमत पर चलना चाहिए ना। जो कहे उस पर चलो। हमेशा समझो शिवबाबा कहते हैं – वह है कल्याणकारी, इनकी रेसपान्सिबिल्टी भी उन पर है। उनका रथ है ना। मूँझते क्यों हो, पता नहीं यह ब्रह्मा की राय है या शिव की? तुम क्यों नहीं समझते हो शिवबाबा ही समझाते हैं। श्रीमत जो कहे सो करते रहो। दूसरे की मत पर तुम आते ही क्यों हो। श्रीमत पर चलने से कभी झुटका नहीं आयेगा। परन्तु चल नहीं सकते, मूँझ पड़ते हैं। बाबा कहते हैं तुम श्रीमत पर निश्चय रखो तो मैं रेसपान्सिबुल हूँ। तुम निश्चय ही नहीं रखते हो तो फिर मैं भी रेसपान्सिबुल नहीं। हमेशा समझो श्रीमत पर चलना ही है। वह जो कहे, चाहे प्यार करो, चाहे मारो….. यह उनके लिए गायन है। इसमें लात आदि मारने की तो बात नहीं है। परन्तु किसको निश्चय बैठना ही बड़ा मुश्किल है। निश्चय पूरा बैठ जाए तो कर्मातीत अवस्था हो जाए। लेकिन वह अवस्था आने में भी टाइम चाहिए। वह होगी अन्त में, इसमें निश्चय बड़ा अडोल चाहिए। शिवबाबा से तो कभी कोई भूल हो न सके, इनसे हो सकती है। यह दोनों हैं इकट्ठे। परन्तु तुमको निश्चय भी रखना है – शिवबाबा समझाते हैं, उस पर हमको चलना पड़े। तो बाबा की श्रीमत समझकर चलते चलो। तो उल्टा भी सुल्टा हो जायेगा। कहाँ मिसअन्डरस्टैंडिंग भी हो जाती है। शिवबाबा और ब्रह्मा बाबा की मुरली को भी बड़ा अच्छी रीति समझना है। बाबा ने कहा व इसने कहा। ऐसे नहीं कि ब्रह्मा बोलते ही नहीं है। परन्तु बाबा ने समझाया है – अच्छा, समझो यह ब्रह्मा कुछ नहीं जानते, शिवबाबा ही सब कुछ सुनाते हैं। शिवबाबा के रथ को स्नान कराता हूँ, शिवबाबा के भण्डारे की सर्विस करता हूँ – यह याद रहे तो भी बहुत अच्छा है। शिवबाबा की याद में रहते कुछ भी करे तो बहुतों से तीखे जा सकते हैं। मुख्य बात है ही शिवबाबा के याद की। अल्फ और बे। बाकी है डिटेल।

बाप जो समझाते हैं उस पर अटेन्शन देना है। बाप ही पतित-पावन, ज्ञान का सागर है ना। वही पतित शूद्रों को आकर ब्राह्मण बनाते हैं। ब्राह्मणों को ही पावन बनाते हैं, शूद्रों को पावन नहीं बनाते, यह सब बातें कोई भागवत आदि में नहीं हैं। थोड़े-थोड़े अक्षर हैं। मनुष्यों को तो यह भी पता नहीं है कि राधे-कृष्ण ही लक्ष्मी-नारायण हैं। मूँझ जाते हैं। देवतायें तो हैं ही सूर्यवंशी-चन्द्रवंशी। लक्ष्मी-नारायण की डिनायस्टी, सीता-राम की डिनायस्टी। बाप कहते हैं भारतवासी स्वीट चिल्ड्रेन याद करो, लाखों वर्ष की तो बात ही नहीं है। कल की बात है। तुमको राज्य दिया था। इतना अकीचार (अथाह) धन दौलत दिया। बाप ने सारे विश्व का तुमको मालिक बनाया, और कोई खण्ड थे नहीं, फिर तुमको क्या हुआ! विद्वान, आचार्य, पण्डित कोई भी इन बातों को नहीं जानते। बाप ही कहते हैं – अरे भारतवासियों, तुमको राज्य-भाग्य दिया था ना। तुम भी कहेंगे शिवबाबा कहते हैं – इतना तुमको धन दिया फिर तुमने कहाँ गँवा दिया! बाप का वर्सा कितना जबरदस्त है। बाप ही पूछते हैं ना वा बाप चला जाता है तो मित्र-सम्बन्धी पूछते हैं। बाप ने तुमको इतने पैसे दिये सब कहाँ गँवायें! यह तो बेहद का बाप है। बाप ने कौड़ी से हीरे जैसा बनाया। इतना राज्य दिया फिर पैसा कहाँ गया? तुम क्या जवाब देंगे? किसको भी समझ में नहीं आता है। तुम समझते हो बाबा पूछते ठीक हैं – इतने कंगाल कैसे बने हो! पहले सब कुछ सतोप्रधान था फिर कला कम होती गई तो सब कुछ कम होता गया। सतयुग में तो सतोप्रधान थे, लक्ष्मी-नारायण का राज्य था। राधे-कृष्ण से लक्ष्मी-नारायण का नाम जास्ती है। उन्हों की कोई ग्लानि नहीं लिखी है और सबके लिए निंदा लिखी है। लक्ष्मी-नारायण के राज्य में कोई दैत्य आदि नहीं बताते हैं। तो यह बातें समझने की हैं। बाबा ज्ञान धन से झोली भर रहे हैं। बाप कहते हैं बच्चे इस माया से खबरदार रहो। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉनिंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) सेन्सीबुल बन सच्ची सेवा में लग जाना है। जवाबदार एक बाप है इसलिए श्रीमत में संशय नहीं उठाना है। निश्चय में अडोल रहना है।

2) विचार सागर मंथन कर बाप की हर समझानी पर अटेन्शन देना है। स्वयं ज्ञान को धारण कर दूसरों को सुनाना है।

वरदान:- अपने प्रत्यक्ष प्रमाण द्वारा बाप को प्रत्यक्ष करने वाले श्रेष्ठ तकदीरवान भव
कोई भी बात को स्पष्ट करने के लिए अनेक प्रकार के प्रमाण दिये जाते हैं। लेकिन सबसे श्रेष्ठ प्रमाण प्रत्यक्ष प्रमाण है। प्रत्यक्ष प्रमाण अर्थात् जो हो, जिसके हो उसकी स्मृति में रहना। जो बच्चे अपने यथार्थ वा अनादि स्वरूप में स्थित रहते हैं वही बाप को प्रत्यक्ष करने के निमित्त हैं। उनके भाग्य को देखकर भाग्य बनाने वाले की याद स्वत: आती है।
स्लोगन:- अपने रहम की दृष्टि से हर आत्मा को परिवर्तन करने वाले ही पुण्य आत्मा हैं।

TODAY MURLI 23 JANUARY 2021 DAILY MURLI (English)

23/01/21
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, continue to follow shrimat at every step. Don’t be confused about whether these are Brahma’s directions or Shiv Baba’s.
Question: What deep things do the children who have good brains easily understand?
Answer: The children who have good brains easily understand whether it is Brahma Baba or Shiv Baba who is explaining. Some get confused about this. Baba says: Children, Bap and Dada are both together. Therefore don’t be confused. Continue to move along while considering it to be shrimat. Shiv Baba is responsible for any directions you receive from Brahma.

Om shanti. The spiritual Father explains to you children. You understand that only you Brahmins recognise the spiritual Father. No human being in the world knows the spiritual Father, the One who is called God, the Father, and the Supreme Father, the Supreme Soul. It is only when the spiritual Father comes that He can give that recognition to the spiritual children. This knowledge neither exists at the beginning of the world nor at the end of the world. You have now been given the knowledge that this is the confluence of the end of the old world and the beginning of the new world. Since you didn’t know this confluence age, how could you know the Father? They say: O Purifier, come! Come and purify us! However, they don’t know who the Purifier is or when He comes. The Father says: No one knows Me as I am or what I am. It is only when I come and give My introduction that anyone knows Me. Only once, at the confluence age, do I give you the introduction of Myself and of the beginning, the middle and the end of the world. I come once every cycle. Whatever I explain to you then disappears. No human being, from the golden age to the end of the iron age, knows Me, the Supreme Father, nor do they know Brahma, Vishnu or Shankar. It is human beings who call out to Me. Brahma, Vishnu and Shankar don’t call out to Me. It is when human beings experience sorrow that they call out. There is no question of this in the subtle region. The spiritual Father comes and sits here and explains to His spiritual children, that is, to the spirits. Achcha, what is the name of the spiritual Father? The One who is called Baba must definitely have a name. Really, just the one name, Shiva, is remembered. That One’s name is very famous, but human beings have given Him many names. On the path of devotion, even though the name is still Shiva, they created lingam forms with their own intellects. The Father says: I only come once. I come and give you your inheritance of liberation and liberation-in-life. Although human beings speak of the land of liberation and the land of nirvana, they don’t understand anything. They neither know the Father nor the deities. No one understands how the Father comes in Bharat and establishes a kingdom. None of these things are mentioned in the scriptures. How does the Supreme Father come and establish the deity religion? It isn’t that the deities in the golden age had knowledge which disappeared; no. If the deities had had this knowledge, it would have continued from then on. The knowledge of the Islamists and the Buddhists has continued. You all understand that this knowledge disappears. When I come, I purify souls who have become impure and who have lost their kingdom. There used to be your kingdom in Bharat, so how did you lose it? No one knows this either. This is why the Father says: The intellects of you children have become so degraded! I come and give you children this knowledge and then give you your reward. Then all of you forget everything. You forget everything about how the Father came and gave you all the teachings. This too is fixed in the drama. You children need to have vast intellects with which to churn the ocean of knowledge. The Father says: You didn’t study the scriptures in the golden and silver ages that you studied later; they didn’t exist there. You forgot this knowledge. So, where did the Gita and the scriptures, etc. come from? Those who had heard the Gita and attained a status didn’t understand anything. Therefore, how could those others understand anything? Even the deities cannot know how they changed from ordinary human beings into deities. Your part of making that effort came to an end and your reward began. How can this knowledge exist there? The Father explains: You are once again receiving this knowledge exactly as you did in the previous cycle. You are taught Raj Yoga and then given the reward. There is no degradation there. Therefore, the question of knowledge cannot arise there. This knowledge is for attaining salvation. It is only the one Father who gives you this. The words “salvation” and “degradation” emerge here. Only the people of Bharat receive salvation. They believe that Heavenly God, the Father, created heaven. They don’t know anything about when it was created. Hundreds of thousands of years are mentioned in the scriptures. The Father says: Children, I am giving you this knowledge once again. Then, when this knowledge disappears, devotion begins. For half the cycle, there is knowledge and for half the cycle, there is devotion. No one understands this either. They have given the golden age a duration of hundreds of thousands of years. So, how can they understand anything? If they have forgotten everything of even 5000 years, how could they know anything of hundreds of thousands of years? They don’t understand anything at all. The Father explains everything so easily. The duration of each cycle is 5000 years and there are just four ages in that. The four ages have an equal duration of 1,250 years each. This is the midget age of Brahmins. Compared with the four ages, this age is very short. The Father explains new points to you in many different ways. So, you have to imbibe them! You also have to make effort! Whatever He explains to you, that part continues according to the drama. Whatever I had to tell you today, that is what I am telling you; it continues to emerge. You continue to hear it. You have to imbibe it and also inspire others to do so. I don’t have to imbibe it. I tell it to you and inspire you to imbibe it. It is My soul who has the part of purifying the impure. Whatever I explained in the previous cycle, that continues to emerge. Even though this soul churns the ocean of knowledge, I don’t know in advance what I am going to tell you. It is a very deep matter as to whether it is this one who churns everything and speaks to you or whether it is Baba who speaks. A very good brain is required for this. Those who keep busy doing service will constantly churn the ocean of knowledge. In fact, kumaris are free from bondage. They can busy themselves in this spiritual study as they don’t have any bondage. Kumaris can take this knowledge very well. They have to study and teach others. They don’t need to earn an income. When kumaris understand this knowledge very well, they can become very good. If they are sensible, they will busy themselves earning this income. Some study worldly studies with great interest. It is explained that there is no benefit in those studies. You can study this spiritual study here and busy yourself in service. Those studies are of no use. They just study and then become housewives and occupy themselves with household activities. Kumaris should occupy themselves with this knowledge. You have to follow shrimat at every step and then occupy yourselves with imbibing all of this. Mama came at the beginning and occupied herself with this study. So many kumaris have now disappeared. Kumaris have a very good chance. If you follow shrimat, you can become very firstclass. Many get confused by wondering whether this is shrimat or the directions of Brahma. However, this is Baba’s chariot. If you follow shrimat and this one makes a mistake, then that One will rectify everything Himself. Only through this one can you receive shrimat. Always remember that you are receiving shrimat. Then, no matter what happens, He, Himself, is responsible. If something happens through this one, then Baba says: I am responsible. This secret is fixed in the drama. He can also reform this one. He is the Father, after all! Bap and Dada are both together. This is why you ge t confused and say, “I don’t know whether Shiv Baba is saying this or Brahma is saying it”. If you were to believe that only Shiv Baba gives you directions, you would never fluctuate.Whatever Shiv Baba explains is right. You say: Baba, You are my Father, Teacher and Guru. Therefore, you should follow shrimat, should you not? You have to follow whatever He tells you. Always consider it to be Shiv Baba who is speaking to you. He is the Benefactor. The responsibility for this one lies with that One. This one is His chariot. Why do you become confused and say, “I don’t know whether this is Brahma’s advice or Shiv Baba’s? Why don’t you understand that it is only Shiv Baba who explains everything? Continue to do what shrimat tells you. Why do you follow the dictates of others? When you follow shrimat, you will never doze off. However, you are unable to follow it because you get confused. Baba says: Have faith in shrimat and then I am responsible. If you don’t have faith, I am not responsible. Always understand that you have to follow shrimat. When it is sung, “Whether You love us or whether You beat us…”, it is sung of that One. There is no question of kicking anyone in this. However, it is very difficult for anyone to have faith. If you were to have full faith, you would reach your karmateet stage, but time is required to reach that stage. That will be your stage at the end. Your faith about this matter needs to be unshakeable. Shiv Baba can never make a mistake. This one can make a mistake. Both of us are together. However, you have to have the faith that it is Shiv Baba who is explaining and that you also have to follow what He says. Therefore, continue to move along considering it to be Baba’s shrimat, and then anything wrong will be put right. In some cases, there is a misunderstanding. Shiv Baba and Brahma Baba’s murlis have to be understood very clearly. It doesn’t matter whether Baba said it or this one said it. It isn’t that Brahma doesn’t speak at all. However, Baba explained it. Just understand that Brahma doesn’t know anything and that it is Shiv Baba who is saying everything. “I am bathing Shiv Baba’s chariot. I am serving in Shiv Baba’s kitchen.” If you just remember this, that too is very good. Do everything while staying in remembrance of Shiv Baba and you can go ahead of many. The main thing is the remembrance of Shiv Baba: Alpha and beta and all the rest is detail. Pay attention to whatever the Father explains. Only the Father is the Purifier and the Ocean of Knowledge. Only He changes impure shudras into Brahmins. He only purifies Brahmins. He doesn’t purify shudras. None of these things are mentioned in the Bhagawad, etc. Some of these words are mentioned in them. People don’t even understand that Radhe and Krishna become Lakshmi and Narayan. People get confused about this. Deities are part of the sun dynasty and the moon dynasty. There is the dynasty of Lakshmi and Narayan and that of Rama and Sita. The Father says: O people of Bharat, sweet children, just remember this! It is not a matter of hundreds of thousands of years. It is just a matter of yesterday when you were given the kingdom. You were given an abundance of wealth and prosperity. The Father made you into the masters of the whole world. There were no other countries at that time. So, what happened to you then? None of the scholars or pundits, etc. know about these things. Only the Father says: O people of Bharat, I gave you your fortune of the kingdom. You also tell others: Shiv Baba says: I gave you so much wealth! So, where did you lose all of that? The Father’s inheritance is so great! The Father Himself is asking you! After your father departs (dies), your friends and relatives ask you: What did you do with all the wealth that your father left you? That one is the unlimited Father. The Father made you into diamonds from shells. He gave you such a kingdom! So where did all that wealth go? How would you answer Him? No one else understands anything. You understand that what Baba is asking is right. How did you become so poverty-stricken? At first everything was satopradhan and then the degrees continued to decrease. Therefore, everything else also continued to decrease. In the golden age you were satopradhan; it was the kingdom of Lakshmi and Narayan. The names “Lakshmi and Narayan” are much more famous than the names “Radhe and Krishna”. There is no defamation of Lakshmi and Narayan. There is defamation written about all the others. No devils are portrayed in the kingdom of Lakshmi and Narayan. Therefore, these matters have to be understood. Baba is filling your aprons with the wealth of knowledge. The Father says: Children, beware of that Maya! Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. Be sensible and occupy yourself with true service. The one Father is responsible. Therefore, have no doubts about shrimat. Have unshakeable faith.
  2. Churn the ocean of knowledge and pay attention to everything that the Father says. Imbibe knowledge yourself and then relate it to others.
Blessing: May you have elevated fortune and reveal the Father with your practical example.
In order to clarify things, many types of proof are given. However, the most elevated proof is your practical example. To be a practical example means to stay in the awareness of who you are and who you belong to. The children who remain stable in their real and eternal forms become instruments to reveal the Father. When others see their fortune, they automatically remember the One who created their fortune.
Slogan: Those who transform every soul with their vision of mercy are charitable souls.

*** Om Shanti ***

BRAHMA KUMARIS MURLI TODAY 23 JANUARY 2020 : AAJ KI MURLI

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 23 January 2020

23-01-2020
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन

 

“मीठे बच्चे – निराकार बाप तुम्हें अपनी मत देकर आस्तिक बनाते हैं, आस्तिक बनने से ही तुम बाप का वर्सा ले सकते हो”
प्रश्नः- बेहद की राजाई प्राप्त करने के लिए किन दो बातों पर पूरा-पूरा अटेन्शन देना चाहिए?
उत्तर:- 1-पढ़ाई और 2-सर्विस। सर्विस के लिए लक्षण भी बहुत अच्छे चाहिए। यह पढ़ाई बहुत वन्डरफुल है इससे तुम राजाई प्राप्त करते हो। द्वापर से धन दान करने से राजाई मिलती है लेकिन अभी तुम पढ़ाई से प्रिन्स-प्रिन्सेज बनते हो।
गीत:- हमारे तीर्थ न्यारे हैं……….

ओम् शान्ति। मीठे-मीठे रूहानी बच्चों ने गीत की एक लाइन सुनी। तुम्हारे तीर्थ हैं – घर में बैठ चुपके से मुक्तिधाम पहुँचना। दुनिया के तीर्थ तो कॉमन हैं, तुम्हारे हैं न्यारे। मनुष्यों का बुद्धियोग तो साधू-सन्तों आदि तरफ बहुत ही भटकता रहता है। तुम बच्चों को तो सिर्फ बाप को ही याद करने का डायरेक्शन मिलता है। वह है निराकार बाप। ऐसे नहीं कि निराकार को मानने वाले निराकारी मत के ठहरे। दुनिया में मत-मतान्तर तो बहुत हैं ना। यह एक निराकारी मत निराकार बाप देते हैं, जिससे मनुष्य ऊंच ते ऊंच पद जीवनमुक्ति वा मुक्ति पाते हैं। इन बातों को जानते कुछ नहीं हैं। सिर्फ ऐसे ही कह देते निराकार को मानने वाले हैं। अनेकानेक मतें हैं। सतयुग में तो होती है एक मत। कलियुग में हैं अनेक मत। अनेक धर्म हैं, लाखों-करोड़ों मतें होंगी। घर-घर में हर एक की अपनी मत। यहाँ तुम बच्चों को एक ही बाप ऊंच ते ऊंच मत देते हैं, ऊंच ते ऊंच बनाने की। तुम्हारे चित्र देखकर बहुत लोग कहते हैं कि यह क्या बनाया है? मुख्य बात क्या है? बोलो, यह रचता और रचना के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान है, जिस ज्ञान से हम आस्तिक बनते हैं। आस्तिक बनने से बाप से वर्सा मिलता है। नास्तिक बनने से वर्सा गंवाया है। अभी तुम बच्चों का धन्धा ही यह है – नास्तिक को आस्तिक बनाना। यह परिचय तुमको मिला है बाप से। त्रिमूर्ति का चित्र तो बड़ा क्लीयर है। ब्रह्मा द्वारा ब्राह्मण तो जरूर चाहिए ना। ब्राह्मणों से ही यज्ञ चलता है। यह बड़ा भारी यज्ञ है। पहले-पहले तो यह समझाना होता है कि ऊंच ते ऊंच बाप है। सभी आत्मायें भाई-भाई ठहरी। सभी एक बाप को याद करते हैं। उनको बाप कहते हैं, वर्सा भी रचता बाप से ही मिलता है। रचना से तो मिल न सके इसलिए ईश्वर को सभी याद करते हैं। अब बाप है ही स्वर्ग का रचयिता और भारत में ही आते हैं, आकर यह कार्य करते हैं। त्रिमूर्ति का चित्र तो बड़ी अच्छी चीज़ है। यह बाबा, यह दादा। ब्रह्मा द्वारा बाबा सूर्यवंशी घराने की स्थापना कर रहे हैं। बाप कहते हैं मुझे याद करो तो विकर्म विनाश हों। एम ऑब्जेक्ट पूरी है इसलिए बाबा मैडल्स भी बनवाते हैं। बोलो, शॉर्ट में शॉर्ट दो अक्षर में आपको समझाते हैं। बाप से सेकण्ड में वर्सा मिलना चाहिए ना। बाप है ही स्वर्ग का रचयिता। यह मैडल्स तो बहुत अच्छी चीज़ है। परन्तु बहुत देह-अभिमानी बच्चे समझते नहीं हैं। इनमें सारा ज्ञान है-एक सेकण्ड का। बाबा भारत को ही आकर स्वर्ग बनाते हैं। नई दुनिया बाप ही स्थापन करते हैं। यह पुरूषोत्तम संगमयुग भी गाया हुआ है। यह सारा ज्ञान बुद्धि में टपकना चाहिए। कोई का योग है तो फिर ज्ञान नहीं, धारणा नहीं होती। सर्विस करने वाले बच्चों को ज्ञान की धारणा अच्छी हो सकती है। बाप आकर मनुष्य को देवता बनाने की सेवा करे और बच्चे कोई सेवा न करें तो वह क्या काम के? वह दिल पर चढ़ कैसे सकते? बाप कहते हैं-ड्रामा में मेरा पार्ट ही है रावण राज्य से सबको छुड़ाना। राम राज्य और रावण राज्य भारत में ही गाया हुआ है। अब राम कौन है? यह भी जानते नहीं। गाते भी हैं-पतित-पावन, भक्तों का भगवान एक। तो पहले-पहले जब कोई अन्दर घुसे तो बाप का परिचय दो। आदमी-आदमी देखकर समझाना चाहिए। बेहद का बाप आते ही हैं बेहद के सुख का वर्सा देने। उनको अपना शरीर तो है नहीं तो वर्सा कैसे देते हैं? खुद कहते हैं कि मैं इस ब्रह्मा तन से पढ़ाकर, राजयोग सिखलाए यह पद प्राप्त कराता हूँ। इस मैडल में सेकण्ड की समझानी है। कितना छोटा मैडल है परन्तु समझाने वाले बड़े देही-अभिमानी चाहिए। वह बहुत कम हैं। यह मेहनत कोई से पहुँचती नहीं है इसलिए बाबा कहते हैं चार्ट रखकर देखो-सारे दिन में हम कितना टाइम याद में रहते हैं? सारा दिन ऑफिस में काम करते याद में रहना है। कर्म तो करना ही है। यहाँ योग में बिठाकर कहते हैं बाप को याद करो। उस समय कर्म तो करते नहीं हो। तुमको तो कर्म करते याद करना है। नहीं तो बैठने की आदत पड़ जाती है। कर्म करते याद में रहेंगे तब कर्मयोगी सिद्ध होंगे। पार्ट तो जरूर बजाना है, इसमें ही माया विघ्न डालती है। सच्चाई से चार्ट भी कोई लिखते नहीं हैं। कोई-कोई लिखते हैं, आधा घण्टा, पौना घण्टा याद में रहे। सो भी सवेरे ही याद में बैठते होंगे। भक्ति मार्ग में भी सवेरे उठकर राम की माला बैठ जपते हैं। ऐसे भी नहीं, उस समय एक ही धुन में रहते हैं। नहीं, और भी बहुत संकल्प आते रहेंगे। तीव्र भक्तों की बुद्धि कुछ ठहरती है। यह तो है अजपाजाप। नई बात है ना। गीता में भी मन्मनाभव अक्षर है। परन्तु कृष्ण का नाम देने से कृष्ण को याद कर लेते हैं, कुछ भी समझते नहीं। मैडल साथ में जरूर हो। बोलो, बाप ब्रह्मा तन से बैठ समझाते हैं, हम उस बाप से प्रीत रखते हैं। मनुष्यों को तो न आत्मा का, न परमात्मा का ज्ञान है। सिवाए बाप के यह ज्ञान कोई दे न सके। यह त्रिमूर्ति शिव सबसे मुख्य है। बाप और वर्सा। इस चक्र को समझना तो बहुत सहज है। प्रदर्शनी से भी प्रजा तो लाखों बनती रहती है ना। राजायें थोड़े होते हैं, उन्हों की प्रजा तो करोड़ों की अन्दाज में होती है। प्रजा ढेर बनती है, बाकी राजा बनाने लिए पुरूषार्थ करना है। जो जास्ती सर्विस करते हैं वे जरूर ऊंच पद पायेंगे। कई बच्चों को सर्विस का बहुत शौक है। कहते हैं नौकरी छोड़ दें, खाने लिए तो है ही। बाबा का बन गये तो शिवबाबा की ही परवरिश लेंगे। परन्तु बाबा कहते हैं-मैंने वानप्रस्थ में प्रवेश किया है ना। मातायें भी जवान हैं तो घर में रहते दोनों सर्विस करनी है। बाबा हर एक की सरकमस्टांश को देख राय देते हैं। शादी आदि के लिए अगर एलाउ न करें तो हंगामा हो जाए इसलिए हर एक का हिसाब-किताब देख राय देते हैं। कुमार हैं तो कहेंगे तुम सर्विस कर सकते हो। सर्विस कर बेहद के बाप से वर्सा लो। उस बाप से तुमको क्या मिलेगा? धूलछांई। वह तो सब मिट्टी में मिल जाना है। दिन-प्रतिदिन टाइम कम होता जाता है। कई समझते हैं हमारी मिलकियत के बच्चे वारिस बनेंगे। परन्तु बाप कहते हैं कुछ भी मिलने का नहीं है। सारी मिलकियत खाक में मिल जायेगी। वह समझते हैं पिछाड़ी वाले खायेंगे। धनवान का धन खत्म होने में कोई देरी नहीं लगती है। मौत तो सामने खड़ा ही है। कोई भी वर्सा ले नहीं सकेंगे। बहुत थोड़े हैं जो पूरी रीति समझा सकते हैं। जास्ती सर्विस करने वाले ही ऊंच पद पायेंगे। तो उन्हों का रिगॉर्ड भी रखना चाहिए, इनसे सीखना है। 21 जन्म के लिए रिगॉर्ड रखना पड़े। ऑटोमेटिक जरूर वह ऊंच पद पायेंगे, तो रिगॉर्ड तो जहाँ-तहाँ रहना ही है। खुद भी समझ सकते हैं, जो मिला सो अच्छा है, इसमें ही खुश होते हैं।

बेहद की राजाई के लिए पढ़ाई और सर्विस पर पूरा अटेन्शन चाहिए। यह है बेहद की पढ़ाई। यह राजधानी स्थापन हो रही है ना। इस पढ़ाई से यहाँ तुम पढ़कर प्रिन्स बनते हो। कोई भी मनुष्य धन दान करते हैं तो वह राजा के पास वा साहूकार के पास जन्म लेते हैं। परन्तु वह है अल्पकाल का सुख। तो इस पढ़ाई पर बहुत अटेन्शन देना चाहिए। सर्विस का ओना (फिकर) रहना चाहिए। हम अपने गांव में जाकर सर्विस करें। बहुतों का कल्याण हो जायेगा। बाबा जानते हैं – सर्विस का शौक अजुन कोई में है नहीं। लक्षण भी तो अच्छे चाहिए ना। ऐसे नहीं कि डिससर्विस कर और ही यज्ञ का भी नाम बदनाम करें और अपना ही नुकसान कर दें। बाबा तो हर बात के लिए अच्छी रीति समझाते हैं। मैडल्स आदि के लिए कितना ओना रहता है। फिर समझा जाता है-ड्रामा अनुसार देरी पड़ती है। यह लक्ष्मी-नारायण का ट्रांसलाइट चित्र भी फर्स्टक्लास है। परन्तु बच्चों पर आज बृहस्पति की दशा तो कल फिर राहू की दशा बैठ जाती है। ड्रामा में साक्षी हो पार्ट देखना होता है। ऊंच पद पाने वाले बहुत कम होते हैं। हो सकता है ग्रहचारी उतर जाए। ग्रहचारी उतरती है तो फिर जम्प कर लेते हैं। पुरूषार्थ कर अपना जीवन बनाना चाहिए, नहीं तो कल्प-कल्पान्तर के लिए सत्यानाश हो जायेगी। समझेंगे कल्प पहले मुआफिक ग्रहचारी आई है। श्रीमत पर नहीं चलेंगे तो पद भी नहीं मिलेगा। ऊंच ते ऊंच है भगवान की श्रीमत। इन लक्ष्मी-नारायण के चित्र को तुम्हारे सिवाए कोई समझ न सके। कहेंगे चित्र तो बहुत अच्छा बनाया है, बस तुमको यह चित्र देखने से मूलवतन, सूक्ष्मवतन, स्थूलवतन सारा सृष्टि का चक्र बुद्धि में आ जायेगा। तुम नॉलेजफुल बनते हो-नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार। बाबा को तो यह चित्र देख बहुत खुशी होती है। स्टूडेन्ट को तो खुशी होनी चाहिए ना-हम पढ़कर यह बनते हैं। पढ़ाई से ही ऊंच पद मिलता है। ऐसे नहीं कि जो भाग्य में होगा। पुरूषार्थ से ही प्रालब्ध मिलती है। पुरूषार्थ कराने वाला बाप मिला है, उनकी श्रीमत पर नहीं चलेंगे तो बुरी गति होगी। पहले-पहले तो कोई को भी इस मैडल्स पर ही समझाओ फिर जो लायक होंगे वह झट कहेंगे – हमको यह मिल सकते हैं? हाँ, क्यों नहीं। इस धर्म का जो होगा उसको तीर लग जायेगा। उसका कल्याण हो सकता है। बाप तो सेकण्ड में हथेली पर बहिश्त देते हैं, इसमें तो बहुत खुशी रहनी चाहिए। तुम शिव के भक्तों को यह ज्ञान दो। बोलो, शिवबाबा कहते हैं मुझे याद करो तो राजाओं का राजा बन जायेंगे। बस सारा दिन यही सर्विस करो। खास बनारस में शिव के मन्दिर तो बहुत हैं, वहाँ अच्छी सर्विस हो सकती है। कोई न कोई निकलेंगे। बहुत इज़ी सर्विस है। कोई करके देखो, खाना तो मिलेगा ही, सर्विस करके देखो। सेन्टर तो वहाँ है ही। सवेरे जाओ मन्दिर में, रात को लौट आओ। सेन्टर बना दो। सबसे जास्ती तुम शिव के मन्दिर में सर्विस कर सकते हो। ऊंच ते ऊंच है ही शिव का मन्दिर। बाम्बे में बबुलनाथ का मन्दिर है। सारा दिन वहाँ जाकर सर्विस कर बहुतों का कल्याण कर सकते हैं। यह मैडल ही बस है। ट्रायल करके देखो। बाबा कहते हैं यह मैडल्स लाख तो क्या 10 लाख बनाओ। बुजुर्ग लोग तो बहुत अच्छी सर्विस कर सकते हैं। ढेर प्रजा बन जायेगी। बाप सिर्फ कहते हैं मुझे याद करो बस, मन्मनाभव अक्षर भूल गये हो। भगवानुवाच है ना। कृष्ण थोड़ेही भगवान है, वह तो पूरे 84 जन्म लेते हैं। शिवबाबा इन कृष्ण को भी यह पद प्राप्त कराते हैं। फिर धक्का खाने की क्या दरकार है। बाप तो कहते हैं सिर्फ मुझे याद करो। तुम सबसे अच्छी सर्विस शिव के मन्दिर में कर सकेंगे। सर्विस की सफलता के लिए देही-अभिमानी अवस्था में स्थित होकर सर्विस करो। दिल साफ तो मुराद हांसिल। बनारस के लिए बाबा तो खास राय देते हैं वहाँ वानप्रस्थियों के आश्रम भी हैं। बोलो हम ब्रह्मा के बच्चे ब्राह्मण हैं। बाप ब्रह्मा द्वारा कहते हैं मुझे याद करो तो विकर्म विनाश हों, और कोई उपाय नहीं है। सुबह से लेकर रात तक शिव के मन्दिर में बैठ सर्विस करो। ट्राई करके देखो। शिवबाबा खुद कहते हैं – हमारे मन्दिर तो बहुत हैं। तुमको कोई भी कुछ कहेंगे नहीं, और ही खुश होंगे-यह तो शिवबाबा की बहुत महिमा करते हैं। बोलो यह ब्रह्मा, यह ब्राह्मण हैं, यह कोई देवता नहीं हैं। यह भी शिवबाबा को याद कर यह पद लेते हैं। इन द्वारा शिवबाबा कहते हैं मामेकम् याद करो। कितना इज़ी है। बुजुर्ग की कोई इनसल्ट नहीं करेगा। बनारस में अभी तक इतनी कोई सर्विस हुई नहीं है। मैडल वा चित्रों पर समझाना बहुत सहज है। कोई गरीब है तो बोलो तुमको फ्री देते हैं, साहूकार है तो बोलो तुम देंगे तो बहुतों के कल्याण के लिए और भी छपा लेंगे तो तुम्हारा भी कल्याण हो जायेगा। यह तुम्हारा धन्धा सबसे तीखा हो जायेगा। कोई ट्रायल करके देखो। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) ज्ञान को जीवन में धारण कर फिर सर्विस करनी है। जो जास्ती सर्विस करते हैं, अच्छे लक्षण हैं उनका रिगॉर्ड भी जरूर रखना है।

2) कर्म करते याद में रहने की आदत डालनी है। सर्विस की सफलता के लिए अपनी अवस्था देही-अभिमानी बनानी है। दिल साफ रखनी है।

वरदान:- साइलेन्स की शक्ति द्वारा सेकण्ड में मुक्ति और जीवनमुक्त का अनुभव कराने वाले विशेष आत्मा भव
विशेष आत्माओं की लास्ट विशेषता है-कि सेकण्ड में किसी भी आत्मा को मुक्ति और जीवन-मुक्ति के अनुभवी बना देंगे। सिर्फ रास्ता नहीं बतायेंगे लेकिन एक सेकण्ड में शान्ति का वा अतीन्द्रिय सुख का अनुभव करायेंगे। जीवनमुक्ति का अनुभव है सुख और मुक्ति का अनुभव है शान्ति। तो जो भी सामने आये वह सेकण्ड में इसका अनुभव करे-जब ऐसी स्पीड होगी तब साइंस के ऊपर साइलेंस की विजय देखते हुए सबके मुख से वाह-वाह का आवाज निकलेगा और प्रत्यक्षता का दृश्य सामने आयेगा।
स्लोगन:- बाप के हर फरमान पर स्वयं को कुर्बान करने वाले सच्चे परवाने बनो।

अव्यक्त स्थिति का अनुभव करने के लिए विशेष होमवर्क

चेक करो – जो भी संकल्प उठता है वह स्वयं वा सर्व के प्रति कल्याण का है? सेकेण्ड में कितने संकल्प उठे – उसमें कितने सफल हुए और कितने असफल हुए? संकल्प और कर्म में अन्तर न हो। संकल्प जीवन का अमूल्य खजाना है। जैसे स्थूल खजाने को व्यर्थ नहीं करते वैसे एक संकल्प भी व्यर्थ न जाये।

TODAY MURLI 23 JANUARY 2020 DAILY MURLI (English)

Today Murli Brahma Kumaris: 23 January 2020

23/01/20
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, the incorporeal Father gives you His own directions and makes you into theists. Only by becoming theists can you claim the inheritance from the Father.
Question: To what two aspects must you pay full attention in order to claim the unlimited kingdom?
Answer: The study and service. In order to do service, your character must be very good. This study, through which you claim a kingdom, is very wonderful. From the copper age onwards, you received a kingdom by making donations and performing charity. However, you now become princes and princesses through this study.
Song: Our pilgrimage is unique.

Om shanti. You sweetest, spiritual children heard a line of the song. Your pilgrimage is to sit quietly at home and go to the land of liberation. Whereas all the pilgrimages of the world are common, your pilgrimage is unique. The intellect’s yoga of a human being continues to wander towards sages and holy men. You children have been given the direction: Only remember the Father. He is the incorporeal Father. It isn’t that those who believe in the incorporeal Father follow the directions of the incorporeal One. There are many different opinions in the world. Incorporeal directions are given by the incorporeal Father and, by following them, people claim the highest status of liberation and liberation-in-life. Others know none of these things. They simply say that they believe in the incorporeal One. There are innumerable directions. In the golden age there is only one direction, whereas in the iron age there are innumerable directions; there are innumerable religions. There must be hundreds of thousands of directions. In every home, each one has his own direction. Here, only the one Father gives you the most elevated directions to make you into the most elevated of humans. When people see your pictures, many ask you: What have you created? What is the main thing? Tell them: This is the knowledge of the Creator and the beginning, the middle and the end of creation. It is through this knowledge that we become theists. By becoming theists we receive the inheritance from the Father. We lose the inheritance by becoming atheists. The task of you children now is to change atheists into theists. You have now received this introduction from the Father. The picture of the Trimurti is very clear. Brahmins created through Brahma are definitely needed. This sacrificial fire only functions through you Brahmins. This sacrificial fire is a very important one. First of all, you have to explain that the Father is the highest Father of all and that all souls are brothers; they all remember the one Father. He is called the Father. You receive the inheritance from the Father, the Creator. You cannot receive it from the creation. This is why everyone remembers God. The Father is the Creator of heaven and He only comes in Bharat. He comes here to carry out His task. The picture of the Trimurti is very good. That One is Baba and this one is Dada. Baba is establishing the sun-dynasty kingdom through Brahma. The Father says: Remember Me and your sins will be absolved. Your aim and objective is completely clear. This is why Baba has had the medals made. Tell them: We explain everything in short, in two words. You can receive the inheritance from the Father in a second. The Father is the Creator of heaven. These medals are very good. However, many body-conscious children do not understand them. These medals contain the whole knowledge of a second. Baba comes and makes Bharat into heaven. Only the Father makes the world new. “The most elevated confluence age” has been remembered. All of this knowledge should trickle in your intellects. Some do have yoga but they don’t listen to knowledge, and so they’re unable to imbibe anything. The children who do service are able to imbibe this knowledge very well. The Father comes and does the service of changing human beings into deities, but some children don’t do any service. So, of what use are such children? How would they climb onto Baba’s heart throne? The Father says: My part in the drama is to liberate everyone from Ravan’s kingdom. Rama’s kingdom and Ravan’s kingdom have been remembered in Bharat. Now, who is Rama? People don’t even know this. They sing, “The Purifier, the God of the devotees, is One”. Therefore, when anyone comes for the first time, give him the Father’s introduction. First judge the person and explain accordingly. The unlimited Father comes to give you the inheritance of unlimited happiness. He doesn’t have a body of His own, and so how does He give the inheritance? He Himself says: I teach you Raj Yoga through the body of Brahma and enable you to claim that status. It takes a second to explain this medal. This medal is so tiny! However, those who explain have to be very soul conscious. There are very few of them. No one makes this effort, and this is why Baba says: Write your chart and see how much time you stay in remembrance throughout the whole day. Whilst working in your office throughout the day, you have to stay in remembrance. You have to act. Here, you are made to sit in yoga and told to remember the Father. At this time, you are not acting. You have to remember Baba even whilst acting. Otherwise, you will form the habit of having to sit specially to have remembrance. Only when you stay in remembrance whilst acting will you be recognised as karma yogis. You definitely do have to play your parts. It is only in this remembrance that Maya causes obstacles. None of you write your chart honestly. Some of you write that you stayed in remembrance for half an hour, or for three quarters of an hour. Even that must have been remembrance in the early morning. On the path of devotion too, people wake up in the morning and chant Rama’s name whilst turning the beads of a rosary. It isn’t that they are lost in the One at that time; no. They also have many other thoughts arising. Firm devotees are able to still their intellects. This is the silent mantra. This is a new aspect. The word “Manmanabhav” is mentioned in the Gita. However, because Krishna’s name is used, they remember Krishna; they don’t understand anything. You should definitely have some medals with you. Tell them: The Father is explaining through the body of Brahma and we have love for that Father. People have no knowledge of souls or the Supreme Soul. No one but the Father can give this knowledge. The picture of Trimurti Shiva is a main one – the Father and the inheritance. It is very easy to understand this cycle. There are hundreds of thousands of subjects created at the exhibitions. There are very few kings, but their subjects are in the region of millions. Many become subjects, but you have to make effort to create kings. Those who do more service will definitely receive a higher status. Some children are very keen to do service. They say: I want to leave my job. There is enough for me to eat anyway. I now belong to Baba and so I’ll be looked after by Shiv Baba. However, Baba says: I entered this one’s body in his stage of retirement. The mothers are young and so, even whilst living at home, they can carry on doing both types of service (looking after a home and doing spiritual service). Baba advises each of you according to your circumstances. A great deal of trouble is caused if they are not allowed to marry. This is why Baba first sees each one’s karmic accounts before He gives advice. To a kumar, He would say: You can do service, and claim the inheritance from the unlimited Father by doing this service. What would you receive from that father? Just dust! Everything is going to turn to dust. Day by day, less time remains. Many children believe that they will inherit their father’s property, but the Father says: They are not going to inherit anything. All of that property is going to turn to ashes. They think that those they leave behind will eat from that inheritance. It takes no time for the wealth of the wealthy to be destroyed. Death is standing ahead of you. No one will be able to claim that inheritance. There are very few who can explain this very clearly. Only those who do a lot of service will claim a high status. Therefore, they have to be given regard. You have to learn from them. You have to give regard for 21 births. They will automatically claim a high status and so they will be given regard wherever they go. They themselves can understand that whatever they have received is good. They become happy with just that. You have to pay full attention to the study and service in order to claim the unlimited kingdom. This study is unlimited. The kingdom is being established. You study this education here and become princes there. When human beings donate wealth, they take birth to a king or a wealthy person. However, that happiness is temporary. You have to pay a great deal of attention to this study. You should be concerned about doing service. You should want to go to your village and do service there. There will be benefit for many. Baba knows that, as yet, no one has any interest in doing such service. A good character is also needed. It shouldn’t be that you do disservice and thereby defame the name of this yagya and also incur a loss for yourself. Baba explains everything clearly. There is so much concern for medals etc. It is understood that, according to the drama, it will take time. This “translight of Lakshmi and Narayan is firstclass. However, today, you children have the omens of Jupiter whereas, tomorrow, there are the omens of an eclipse of Rahu. Each of you has to watch your part in the drama as a detached observer. Only a very few claim a high status. It is possible that your bad omens will be removed. If your bad omens are removed, you are able to take a high jump. Make effort to create a good life for yourself. Otherwise, everything will be destroyed for cycle after cycle. You will think that the bad omens have come again as they did in the previous cycle. When you don’t follow shrimat, you cannot claim a status. God’s shrimat is the highest of all. No one but you can understand this picture of Lakshmi and Narayan. Others just say that the pictures are very good. When you see these pictures, the incorporeal world, the subtle region, the corporeal world and the whole world cycle enter your intellects. You are becoming knowledgefull, numberwise, according to the efforts you make. Baba becomes very happy on seeing these pictures. You students should experience a lot of happiness: This is what we are becoming through this study! You receive a high status through this study. It shouldn’t be that you say: Whatever is in my fortune! You receive a reward by making effort. You have found the Father who inspires you to make effort. You will reach a very bad state if you don’t follow His directions. First of all, explain these medals to anyone who comes. Those who are worthy would instantly ask to be given one. Yes indeed, why not? Those who belong to this religion will be struck by an arrow. They can be benefited. The Father gives you heaven on the palm of your hand in a second. You should have a lot of happiness about this. You should give this knowledge to the devotees of Shiva. Tell them: Shiv Baba says: By remembering Me, you will become the kings of kings. Simply do this service throughout the day. In Banaras especially, there are many temples to Shiva and so good service can be done there; someone or other will emerge. It is very easy to do service. Just try it and see! You will of course be given food. Just try doing service and see. There are centres there anyway. Go to the temples in the morning and come back at night. Just open some centres. You can do the most service in the Shiva temples. Shiva temples are the most elevated. In Bombay, there is a temple to Babulnath (the Lord of Thorns). You can go there for the whole day to do service and benefit many. These medals are good enough. Just try it and see! Baba says: Not just one hundred thousand medals, you can even make a million medals. The elderly can do very good service. There will be many subjects created. The Father just says: Remember Me, that’s all! You have forgotten the word “Manmanabhav”. God says this. Krishna is not God; he takes the full 84 births. Shiv Baba enables Krishna to claim that status. What need is there to stumble? The Father says: Just remember Me! You can do the best service in the Shiva temples. In order to achieve success in service, serve whilst stabilised in a soul-conscious stage. When your heart is clean, all your desires are fulfilled. Baba especially gives advice to Banaras because there are also ashrams for retired people there. Tell them: We Brahmins are the children of Brahma. The Father says through Brahma: Remember Me so that your sins are absolved; there is no other way. From morning until night, sit in the Shiva temples and do service. Just try it and see! Shiv Baba Himself says: There are many temples to Me. No one will say anything to you. Instead, they will become even happier, saying that you praise Shiv Baba a great deal. Tell them: This Brahma is a Brahmin, he is not a deity. This one also remembers Shiv Baba and claims that status. Through this one, Shiv Baba says: Constantly remember Me alone! It is so easy! No one would ever insult elderly people. Not much service has taken place in Banaras as yet. It is very easy to explain using the medals and pictures. If someone is poor, tell him: We are giving it to you free. If someone is wealthy, tell him: If you give something, we can have even more made to benefit many more, and so there will be benefit for you too. This business of yours will be the best. Someone should just try it and see. Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. Imbibe this knowledge in your life and do service. Have regard for those who do a lot of service and who have very good characters.
  2. Form the habit of staying in remembrance whilst doing anything. In order to achieve success in service, become soul conscious and keep your heart clean.
Blessing: May you be a special soul who gives the experience of liberation and liberation-in-life in a second with the power of silence.
The last speciality of special souls is to enable other souls to experience liberation and liberation-in-life in a second. They would not show the path, but, would give the experience of peace and supersensuous joy in a second. The experience of liberation-in-life is happiness and the experience of liberation is peace. So, whoever comes in front of you, enable them to experience these in a second. When you have such a speed, then they all see the victory of silence over science and the sound of “Wah, Wah” will emerge from everyone’s lips and scenes of revelation will come in front of you.
Slogan: Become true moths whosurrender themselves to every order of the Father.

*** Om Shanti ***

Special homework to experience the avyakt stage in this avyakt month.

Check: Is every thought that I have for the benefit of the self and everyone? How many thoughts did I have in one second? How many were worthwhile and how many were not worthwhile? Let there not be any difference between your thoughts and actions. Thoughts are an invaluable treasure of life. Just as you do not waste physical treasures, similarly, let not a single thought go to waste.

 

TODAY MURLI 23 JANUARY 2019 DAILY MURLI (English)

Today Murli Brahma kumaris : 23 January 2019

Today Murli in Hindi :- Click Here

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23/01/19
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, always maintain the intoxication that God is teaching you. This student life of yours is the best. You have the omens of Jupiter over you.
Question: Which children receive a lot of love from everyone?
Answer: Those who become instruments to benefit many. Those who benefit would say: You are my mother. So, check yourself to see how many you bring benefit to. To how many souls do you give the Father’s message? The Father is the Messenger. You children also have to give the Father’s message. Tell everyone that they have two fathers. Remember the unlimited Father and the inheritance.
Song: You are the Ocean of Love. We thirst for one drop!

Om shanti. The spiritual Father sits here and explains to you children every day: Children, sit here in soul consciousness. It should not be that your intellects continue to wander outside. You have to remember the one Father alone. He alone is the Ocean of Knowledge and the Ocean of Love. It is said: Even just one drop of knowledge is enough. The Father says: Sweetest children, remember the spiritual Father and you will receive your inheritance. You will then go to the land of immortality, to Paradise. However, you now have to remove the burden of sin that is on your heads. Everything is explained to you children systematically and logically. The one who was the highest of all is now doing tapasya down below at the end. Only the one Father teaches you the tapasya of Raja Yoga. Hatha yoga is completely different. That is limited and this is unlimited. That is the path of isolation and this is the family path. The Father says: You were the masters of the world. As were the king and queen, so were the subjects. There were the pure deities of the family path and they then went on to the path of sin. There are images of that too. They make such dirty images that you would be ashamed even to look at them. Their intellects are completely finished. The praise “You are the Ocean of Love” belongs to only the one Father. It cannot be a drop of love; it refers to knowledge. You recognize the Father and come here to claim your inheritance. The Father only gives you knowledge for salvation. You listen to just a little and you receive salvation. From here, you children have to go to the new world. You know that you become the masters of Paradise. At this time there is the kingdom of Ravan over the whole world. The Father has come to give you the kingdom of the world. All of you were the masters of the world. There are pictures of that even now. However, it isn’t a matter of hundreds of thousands of years; that is wrong. Only the Father is said to be always righteous. The whole world becomes righteous through the Father. It is now unrighteous. You children are now claiming your inheritance from the Father. However, it is also fixed in the drama that those who listened to knowledge and became amazed by listening to it then related it to others but then also ran away. Oh Maya! You are so powerful that you turn them away from the Father. Why would she not be powerful, since she has ruled the kingdom for half the cycle? You now know what Ravan is. Here, too, some children are sensible and some are senseless. You know that you now have the omens of Jupiter over you. This is why you make effort to go to heaven. Those who are dying do not make effort to go to heaven. People simply say for the sake of saying it that so-and-so has gone to heaven. You know that you are truly making effort to go to heaven, that is, you are making effort to become the masters of heaven. No one else would say that they are going to heaven. They would say: What are you saying? Keep quiet! People tell you limited things whereas the Father tells you unlimited things. You children should make a lot of effort. You should have a lot of intoxication. Whoever made effort in the previous cycle and whoever claimed a status will do so again. You have been made to conquer Maya many times. Then you were also defeated by her. This drama is predestined, therefore, you children should be very happy that you are to go to the land of immortality from the land of death. Student life is the best. At this time your life is the best life. No human beings know this. God Himself comes and teaches you. This is the best student life. It is souls that study, and then it is said: This one’s name is so-and-so. It is a soul that is a teacher. It is souls that listen and imbibe. It is souls that listen but, because there is body consciousness, they don’t understand. In the golden age, you would also understand that you, the soul, have received that body and that you have now reached old age. You would quickly have a vision that you now have to shed that old costume and take a new one. The example of the buzzing moth (brahmari) is also about the present time. You now know that you are Brahmin teachers (Brahmni). According to the drama, you buzz the knowledge to whoever comes to you. Then, among them, too, some are weak and they decay. Sannyasis cannot give this example. They would not make others the same as themselves. You have an aim and objective. This is the story of the true Narayan, the story of immortality. All of those stories are yours. Only the one Father tells you the truth. All the rest are false. In the world, people relate the story of the true Narayan and then distribute prasad (holy food). There is such a vast difference between those limited things and these unlimited things. The Father is giving you directions. You note them down. However, all the books and scriptures etc. will be destroyed. None of the old things will remain. People think that 40,000 years of the iron age still remain and this is why they continue to build huge buildings and spend money. Will the ocean leave anything alone? It will swallow everything up with one tidal wave. Bombay didn’t exist previously and it will not remain. Look at all the things that have emerged in the last 100 years. Earlier, the Viceroy used to travel in a four-horse carriage. Look what has happened in the last few years! Heaven is very small. Your palaces will be by the river banks. There are now the omens of Jupiter over you children. You children should have the happiness that you are becoming so wealthy. When someone goes bankrupt, there are said to be bad omens over him. You are now happy with the omens over you. God, the Father, is teaching you. Would God be teaching anyone? You children know that this student life ofyoursis the best. We are becoming Narayan from ordinary men; we are becoming the masters of the world. We came here and then became trapped in the kingdom of Ravan. We will now go to the land of happiness. You are Brahmins of the confluence age. Establishment takes place through Brahma. There wouldn’t be just one; there would be many. You have become God’s helpers. God is doing the service of establishing heaven and you help Him in that. Those who help Him more will receive a higher status. No one can starve to death. Here, when the Government investigated the beggars, they found that they had thousands of rupees. No one can starve to death. Here, too, you belong to the Father. Although a father may be poor, he too would not eat anything until his children had something to eat because children are the heirs. He has love for them. There, there is no question of anyone being poor; they have plenty of food. There is unlimited wealth there. Look at their way of dressing; it is so beautiful. This is why Baba says: When you have time, go and sit in front of the picture of Lakshmi and Narayan. You can also sit in front of it at night. Go to sleep while looking at the picture of Lakshmi and Narayan. Oho! Baba is making us become like them! Practise this and see how much you enjoy yourself. Then, wake up in the morning and share your experience. Everyone should have the pictures of Lakshmi and Narayan and the ladder. You s tudents know who is teaching you. There is His picture too. Everything depends on the study. You will become the masters of heaven, but your status depends on how you study. Baba says: Make this effort: I am a soul, not a body. I am claiming my inheritance from Baba. There is no difficulty in this. It is very easy for the mothers. Men go to their businesses etc. You can do a lot of serviceusing the picture of this aim and objective. You will benefit many and they will love you a lot. They would say: You are our mother. You mothers have become instruments to benefit the world. Check yourself to see how many you bring benefit to. To how many did you give the Father’s message? The Father is the Messenger. No one else would be called the Messenger. The Father is giving you a message which you then have to give to others: Remember the unlimited Father and the inheritance. Also remember the cycle of 84 births. You are the children of the Father, the Messenger, and you give everyone the message. Tell everyone that they have two fathers. The unlimited Father gave you the inheritance of happiness and peace. We were in the land of happiness and all the rest were in the land of peace. We went into liberation-in-life. We now have to return home and we will then become the masters of the world there. There is a song: Baba, we receive the sovereignty of the world from You. The earth, sea and sky are all in our hands. At this time, we are claiming our unlimited inheritance from the Father. You are incognito warriors, the Shiv Shakti Army. This is the sword of knowledge and arrows of knowledge. Those people have shown goddesses with physical weapons. There are so many temples on the path of devotion. There are so many pictures etc. This is why the Father says: You used up all of that wealth on the path of devotion. All of them are going to be destroyed. All will be drowned. You have been given visions of how you will bring diamonds and jewels from the mines because they will all be buried at this time. Great kings have treasure-stores underground. All of them will be buried. Then, your craftsmen will bring them up again. Where else would they bring all of this gold from? You can see a model scene of heaven in Ajmer. Baba has told you to make a museum similar to that. You should create a first-class model of heaven. You children know that you are now establishing your own kingdom. Previously, you didn’t know anything. You now continue to know everything. It isn’t that I know what is inside each one. Even some vicious ones used to come here. They were asked: Why have you come here? They would reply: Only when I come here can I become free from the vices. I am a very sinful soul. The Father would say: OK, may you benefit! Maya is very powerful. The Father says: Children, you have to conquer those vices because only then will you become conquerors of the world. Maya is no less. You are now making effort and becoming like Lakshmi and Narayan. No one else can have the beauty they have. That is natural beauty. Heaven is established every 5000 years and then you go around the cycle of 84 births. You can write: This is a u niversity -cum-hospital. One is for health and the other is for wealth. Come and attain health, wealth and happiness for 21 births. Businessmen also put up their own boards. They even put up boards outside their homes. Only those who have this intoxication would write these things. Explain to anyone who comes: You claimed your inheritance from the unlimited Father and you then took 84 births and became impure. Now become pure. Consider yourselves to be souls. Remember the Father. Baba also does the same. He is the number one effort-maker. Some children write: Baba, storms come. This happens. I write back: All storms come to me first. Only when I first become experienced can I then explain to you about them. That is Maya’s business. The Father now says: Sweet, beloved children, you now have the omens of Jupiter over you. You don’t need anyone to show you your horoscope; Baba tells you everything. There, you have a long lifespan. Krishna is also called Yogeshwar. Yogeshwar taught him yoga and so he became that. No human being or sannyasi etc. can be called Yogeshwar. Ishwar (God) is teaching you yoga. This is why the names ‘Yogeshwar’ and ‘Yogeshwari’ are given. It is at this time that you are also ‘Gyaneshwar’ and ‘Gyaneshwari’. Then you will go and become Raj-Rajeshwari (princes and princesses). Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. Make effort while keeping your aim and objective in front of you. Look at the picture of Lakshmi and Narayan in front of you and talk to yourself: Oho Baba! You are making me become like them. We now have the omens of Jupiter over us.
  2. In order to make others the same as yourself, continue to buzz knowledge like a buzzing moth. Become a helper of God and help the Father establish heaven.
Blessing: May you have unlimited disinterest by transforming any consciousness of bodies into the stage of soul consciousness.
While moving along, if you have no disinterest, the main reason for that is the consciousness of bodies. Until you have disinterest in any consciousness of bodies, you will not be able to have permanent disinterest for anything. To have disinterest in relationships is not a big deal; many people in the world also have disinterest. However, here, you have to know the many forms of consciousness of bodies and transform those into the stage of soul consciousness. This is the way to become one who has unlimited disinterest.
Slogan: When the feet of your thoughts are strong, situations like darks clouds will be transformed.

*** Om Shanti ***

Special effort to become equal to Father Brahma.

Any account, whether of this birth or your past birth, cannot be burnt without the stage of the fire of love. Now, like Father Brahma, pay special attention to the stage of constant, powerful remembrance which is the form of fire, the seed stage, the stage of being a lighthouse and might house and burn away all your accounts.

BRAHMA KUMARIS MURLI TODAY 23 JANUARY 2019 : AAJ KI MURLI

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 23 January 2019

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23-01-2019
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन

 

“मीठे बच्चे – सदा इसी नशे में रहो कि भगवान हमको पढ़ाते हैं, हमारी यह स्टूडेन्ट लाइफ दी बेस्ट है, हमारे ऊपर ब्रहस्पति की दशा है”
प्रश्नः- किन बच्चों को सभी का प्यार प्राप्त होता है?
उत्तर:- जो बहुतों के कल्याण के निमित्त बनते हैं, जिनका कल्याण हुआ वह कहेंगे तुम तो हमारी माता हो। तो अपने आपको देखो हम कितनों का कल्याण करते हैं? बाप का मैसेज कितनी आत्माओं को देते हैं? बाप भी पैगम्बर है। तुम बच्चों को भी बाप का पैगाम देना है। सबको बोलो दो बाप हैं। बेहद के बाप और वर्से को याद करो।
गीत:- तू प्यार का सागर है…..

ओम् शान्ति। रूहानी बाप बैठ रूहानी बच्चों को रोज़-रोज़ समझाते हैं कि बच्चे आत्म-अभिमानी होकर बैठो। ऐसे नहीं बुद्धि बाहर में भटकती रहे। एक बाप को ही याद करना है। वही ज्ञान का सागर है, प्रेम का सागर है। कहते हैं एक ज्ञान की बूँद भी बस है। बाप कहते हैं मीठे-मीठे बच्चे रूहानी बाप को याद करो तो तुमको यह वर्सा मिल जायेगा। अमरपुरी वैकुण्ठ में चले जायेंगे। बाकी इस समय जो सिर पर पापों का बोझ है वह उतारना है। कायदे प्रमाण, विवेक अनुसार तुम बच्चों को समझाया जाता है। जो ऊंच ते ऊंच थे वही फिर अन्त में नीचे तपस्या कर रहे हैं। राजयोग की तपस्या एक बाप ही सिखलाते हैं। हठयोग बिल्कुल अलग है। वह है हद का, यह है बेहद का। वह है निवृत्ति मार्ग, यह है प्रवृत्ति मार्ग। बाप कहते हैं तुम विश्व के मालिक थे। यथा राजा रानी तथा प्रजा.. प्रवृत्ति मार्ग में पवित्र देवी-देवता थे फिर देवतायें वाम मार्ग में जाते हैं। उसके भी चित्र हैं। बहुत गन्दे चित्र बनाते हैं जो देखने में भी लज्जा आती है क्योंकि बुद्धि ही एकदम खत्म हो जाती है। बाप का ही गायन है तू प्यार का सागर है। अब प्यार की बूँद नहीं होती। यह है ज्ञान की बात। तुम बाप को पहचानकर बाप से वर्सा लेने आते हो। बाप सद्गति का ही ज्ञान देते हैं। थोड़ा ही सुना और सद्गति में आ गये। यहाँ से तुम बच्चों को जाना है नई दुनिया में। तुम जानते हो हम वैकुण्ठ के मालिक बनते हैं। इस समय सारे विश्व पर रावण राज्य है। बाप आया है विश्व का राज्य देने। तुम सब विश्व के मालिक थे। अब तक चित्र खड़े हैं। बाकी लाखों वर्ष की कोई बात नहीं। यह रांग है। बाप को ही सदैव राइटियस कहा जाता है। बाप द्वारा सारी विश्व राइटियस बन जाती है। अभी है अनराइटियस। अभी तुम बच्चे बाप से वर्सा ले रहे हो। परन्तु यह भी ड्रामा में नूँध है। जो ज्ञान सुनते-सुनते आश्चर्यवत सुनन्ती, कथन्ती, भागन्ती हो जाते हैं। अहो मम माया तुम कितनी जबरदस्त हो जो बाप से बेमुख करा देती हो। क्यों नहीं जबरदस्त होगी, आधाकल्प उनका राज्य चलता है। रावण क्या है, यह भी तुम जानते हो। यहाँ भी कोई बच्चे समझदार हैं, कोई बेसमझ हैं।

तुम जानते हो अभी हमारे ऊपर बृहस्पति की दशा है, तब हम स्वर्ग में जाने का पुरूषार्थ कर रहे हैं। मनुष्य जो मरते हैं वह तो कोई स्वर्ग में जाने का पुरूषार्थ नहीं करते हैं। सिर्फ ऐसे ही कह देते हैं स्वर्ग पधारा। तुम जानते हो सच-सच स्वर्ग में जाने का पुरूषार्थ हम कर रहे हैं अथवा स्वर्ग का मालिक बनने का पुरूषार्थ कर रहे हैं। ऐसे कभी कोई नहीं कहेंगे कि यह स्वर्ग जा रहे हैं। कहेंगे यह क्या कहते हो, मुख बन्द करो। मनुष्य तो हद की बातें सुनाते हैं। बाप तुम्हें बेहद की बातें सुनाते हैं। तुम बच्चों को बहुत पुरूषार्थ करना चाहिए। बहुत नशा चढ़ना चाहिए। जिन्होंने कल्प पहले पुरूषार्थ किया, जो पद पाया है वही पायेंगे। अनेक बार तुम बच्चों को माया पर जीत पहनाई है। फिर तुमने हार भी खाई है। यह भी ड्रामा बना हुआ है। तो बच्चों को बड़ी खुशी होनी चाहिए। मृत्युलोक से अमरलोक में जा रहे हो। स्टूडेन्ट लाइफ इज़ दी बेस्ट। इस समय तुम्हारी बेस्ट लाइफ है, इसे कोई भी मनुष्य नहीं जानते। भगवान खुद आकर पढ़ाते हैं, यह है दी बेस्ट स्टूडेन्ट लाइफ। आत्मा ही पढ़ाती है फिर कहेंगे इनका नाम फलाना है। आत्मा ही टीचर है ना। आत्मा ही सुनकर धारण करती है, आत्मा ही सुनती है। परन्तु देह-अभिमान के कारण समझते नहीं। सतयुग में भी समझेंगे कि हम आत्मा को यह शरीर मिला है, अब वृद्ध अवस्था हुई है। झट साक्षात्कार होगा – अभी हम यह पुराना चोला छोड़ नया लेते हैं। भ्रमरी का मिसाल भी अभी का है। अब तुम जानते हो हम ब्राह्मणियाँ हैं। ड्रामा प्लैन अनुसार जो भी तुम्हारे पास आते हैं उन पर भूँ-भूँ करते हो फिर उनमें भी कोई कच्चे कोई सड़ जाते हैं। सन्यासी लोग तो यह मिसाल दे न सके। वो थोड़ेही आप समान बनायेंगे। तुम्हारे पास तो एम आब्जेक्ट है। यह सत्य नारायण की कथा, अमरकथा… यह सब तुम्हारी है। एक ही बाप सत्य सुनाते हैं। बाकी सब है झूठ। वहाँ सत्य नारायण की कथा सुनाकर प्रसाद खिलाते रहते हैं। कहाँ वह हद की बातें, कहाँ यह बेहद की बातें। तुमको बाप डायरेक्शन देते हैं। तुम नोट करते हो बाकी किताब शास्त्र आदि तो सब खत्म हो जायेंगे। पुरानी कोई भी चीज़ नहीं रहेगी। मनुष्य समझते हैं कलियुग में अजुन 40 हज़ार वर्ष पड़े हैं इसलिए बड़े-बड़े मकान आदि बनाते रहते हैं। खर्चा करते रहते हैं। क्या समुद्र छोड़ेगा? एक ही लहर से हप कर लेगा। न यह बाम्बे थी, न रहेगी। अभी 100 वर्ष के अन्दर यह सब क्या-क्या निकला है। आगे वाइसराय भी 4 घोड़े की गाड़ी में आते थे। अब थोड़े समय में क्या-क्या हो गया है। स्वर्ग तो बहुत छोटा है। नदी के किनारे पर तुम्हारे महल होंगे।

अभी तुम बच्चों पर बृहस्पति की दशा है। बच्चों को खुशी होनी चाहिए हम इतने साहूकार बनते हैं। कोई देवाला मारते हैं तो राहू की दशा कहा जाता है। तुम अपनी दशा पर हर्षित रहो। भगवान बाप हमको पढ़ाते हैं। भगवान किसको पढ़ाते हैं क्या? तुम बच्चे जानते हो हमारी यह स्टूडेन्ट लाइफ दी बेस्ट है। हम नर से नारायण विश्व के मालिक बनते हैं। यहाँ हम रावण राज्य में आकर फँसे हैं। फिर जाते हैं सुखधाम में। तुम संगमयुगी ब्राह्मण हो। ब्रह्मा द्वारा स्थापना होती है। एक थोड़ेही होगा। बहुत होंगे ना। तुम खुदाई खिदमतगार बनते हो। खुदा जो खिदमत करते हैं स्वर्ग स्थापन करने की, उसमें तुम मदद करते हो। जो जास्ती मदद करेंगे वह ऊंच पद पायेंगे। कोई भूख नहीं मर सकते। यहाँ फकीर लोगों के पास भी जाँच करते हैं तो हज़ारों रूपये निकल आते हैं। भूख कोई मर न सके। यहाँ भी तुम बाप के बने हो। भल बाप गरीब होते हैं परन्तु बच्चों को जब तक खाना न मिले तो खुद नहीं खाते क्योंकि बच्चे वारिस हैं। उन पर लॅव रहता है। वहाँ तो गरीब की बात नहीं। अथाह अनाज रहता है। बेहद की साहूकारी रहती है। वहाँ की पहरवाइस देखो कितनी सुन्दर है। तब बाबा कहते हैं जब फुर्सत मिले तो लक्ष्मी-नारायण के चित्र के सामने जाकर बैठो। रात को भी बैठ सकते हो। इन लक्ष्मी-नारायण को देखते-देखते सो जाओ। अहो बाबा हमें ऐसा बनाते हैं! तुम ऐसा अभ्यास करके देखो, कितना मजा आता है। फिर सुबह को उठकर अनुभव सुनाओ। लक्ष्मी-नारायण का चित्र और सीढ़ी का चित्र सबके पास होना चाहिए। स्टूडेन्ट जानते हैं, हमको कौन पढ़ाते हैं। उनका चित्र भी है। सारा मदार है पढ़ाई के ऊपर। स्वर्ग का मालिक तो बनेंगे। बाकी पद का मदार है पढ़ाई पर। बाबा कहते हैं यह पुरूषार्थ करो – मैं आत्मा हूँ शरीर नहीं। मैं बाबा से वर्सा लेता हूँ। कोई भी तकलीफ नहीं। माताओं के लिए तो बहुत सहज है। पुरूष लोग तो धन्धे पर चले जाते हैं। इस एम आब्जेक्ट के चित्र पर तुम बहुत सर्विस कर सकते हो। बहुतों का कल्याण करेंगे तो तुमको बहुत प्यार करेंगे। कहेंगे तुम तो हमारी माता हो। जगत के कल्याण के लिए तुम मातायें निमित्त हो। अपने को देखना है हमने कितनों का कल्याण किया है। कितनों को बाप का पैगाम दिया है। बाप भी पैगम्बर है और कोई को भी पैगम्बर नहीं कहेंगे। तुमको बाप मैसेज देते हैं जो तुम सबको सुनाओ। बेहद के बाप और वर्से को याद करो, 84 के चक्र को भी याद करो। तुम पैगम्बर बाप के बच्चे पैगाम देने वाले हो। सबको बोलो दो बाप हैं। बेहद के बाप ने सुख और शान्ति का वर्सा दिया है। हम सुखधाम में थे तो बाकी सब शान्तिधाम में थे। फिर जीवनमुक्ति में आते हैं। अब हमको वापिस जाना है फिर वहाँ हम ही विश्व के मालिक होंगे। एक गीत भी है बाबा तुमसे हमको सारे विश्व की बादशाही मिलती है। सारा धरती, समुद्र, आकाश हमारे हाथ में होगा। इस समय हम बाप से बेहद का वर्सा ले रहे हैं। तुम हो गुप्त वारियर्स, शिव शक्ति सेना। यह है ज्ञान कटारी, ज्ञान बाण। उन्हों ने देवियों को स्थूल हथियार दे दिये हैं। भक्ति मार्ग में कितने मन्दिर बनाये हैं, कितने चित्र आदि हैं, तब बाप कहते हैं भक्ति मार्ग में तुमने सब पैसे आदि खत्म कर दिए हैं। अब यह सब खत्म होने वाले हैं, डूब जायेंगे। तुमको साक्षात्कार भी कराया था कि वहाँ कैसे जाकर खानियों से हीरे जवाहर ले आते हैं क्योंकि यह सब दब जाते हैं। बड़े-बड़े राजाओं के पास तहखाने (अन्डरग्राउन्ड) होते हैं। वह सब दब जायेंगे फिर तुम्हारे कारीगर लोग जाकर ले आयेंगे। नहीं तो इतना सोना आदि कहाँ से आयेगा। स्वर्ग की सीन अजमेर में देखते हैं ना। बाबा ने कहा था म्युज़ियम भी ऐसा ही बनाओ। स्वर्ग का फर्स्टक्लास माडल बनाना चाहिए। तुम बच्चे जानते हो अभी हम अपनी राजधानी स्थापन कर रहे हैं। आगे कुछ भी नहीं जानते थे, अब जानते जा रहे हैं। ऐसे नहीं हम हर एक के अन्दर को जानते हैं। कोई-कोई विकारी भी आते थे। कहा जाता था क्यों आते हो? तो कहते थे आयेंगे तब तो विकारों से छूटेंगे। मैं बहुत पाप आत्मा हूँ। बाप कहेगा अच्छा कल्याण हो जाये। माया बड़ी दुस्तर है। बाप कहते हैं बच्चे तुम्हें इन विकारों पर जीत पानी है तब ही जगतजीत बनेंगे। माया भी कम नहीं है। अभी तुम पुरूषार्थ कर इन लक्ष्मी-नारायण जैसा बनते हो। इन जैसी ब्युटी और किसी की हो न सके। यह है नैचुरल ब्युटी। हर 5 हज़ार वर्ष के बाद स्वर्ग की स्थापना होती है फिर 84 जन्मों के चक्र में आते हैं। तुम लिख सकते हो यह युनिवर्सिटी कम हॉस्पिटल है। वह हेल्थ के लिए वह वेल्थ के लिए। हेल्थ, वेल्थ, हैपीनेस – 21 जन्म के लिए आकर प्राप्त करो। धन्धे वाले भी अपना बोर्ड लगाते हैं। घरों में भी बोर्ड लगाते हैं। ऐसे-ऐसे लिखेंगे भी वही जो नशे में रहते होंगे। जो भी आये उनको समझाओ – तुमने बेहद के बाप से वर्सा लिया था फिर 84 जन्म ले तुम पतित बने हो। अब पावन बनो। अपने को आत्मा समझो। बाप को याद करो। बाबा भी ऐसे करते हैं। यह हैं पहले नम्बर के पुरूषार्थी। कई बच्चे लिखते हैं बाबा तूफान आते हैं, यह होता है। मैं लिखता हूँ मेरे पास तो सब तूफान पहले आते हैं। मैं पहले अनुभवी बनूँ तब तो समझा सकूँ। यह तो माया का धन्धा है।

अब बाप कहते हैं मीठे लाडले बच्चे, अब तुम्हारे ऊपर बृहस्पति की दशा है। तुम्हें किसी को भी अपनी जन्मपत्री आदि दिखाने की ज़रूरत नहीं। बाबा सब कुछ बता देते हैं। वहाँ आयु भी बड़ी होती है। कृष्ण को भी योगेश्वर कहते हैं। इनको योगेश्वर ने योग सिखाया तो यह बना। कोई मनुष्य मात्र सन्यासी आदि को योगेश्वर नहीं कह सकते हैं। तुमको ईश्वर योग सिखाते हैं इसलिए योगेश्वर और योगेश्वरी नाम रखा है। ज्ञानेश्वर ज्ञानेश्वरी भी इस समय तुम ही हो। फिर जाकर राज-राजेश्वर भी तुम ही बनते हो। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का यादप्यार और गुडमार्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) एम आब्जेक्ट को सामने रख पुरूषार्थ करो। लक्ष्मी-नारायण के चित्र को सामने देखते हुए अपने आपसे बातें करो ओहो बाबा आप हमें ऐसा बनाते हैं! हमारे ऊपर अभी ब्रहस्पति की दशा बैठी है।

2) आप समान बनाने के लिए भ्रमरी की तरह ज्ञान की भूँ-भूँ करो। खुदाई खिदमतगार बन स्वर्ग की स्थापना में बाप की मदद करो।

वरदान:- देह-भान को देही-अभिमानी स्थिति में परिवर्तन करने वाले बेहद के वैरागी भव
चलते-चलते यदि वैराग्य खण्डित होता है तो उसका मुख्य कारण है – देह-भान। जब तक देह-भान का वैराग्य नहीं है तब तक कोई भी बात का वैराग्य सदाकाल नहीं रह सकता। सम्बन्ध से वैराग्य – यह कोई बड़ी बात नहीं है, वह तो दुनिया में भी कईयों को वैराग्य आ जाता है लेकिन यहाँ देह-भान के जो भिन्न-भिन्न रूप हैं, उन्हें जानकर, देह-भान को देही-अभिमानी स्थिति में परिवर्तन कर देना – यह विधि है बेहद के वैरागी बनने की।
स्लोगन:- संकल्प रूपी पांव मजबूत हों तो काले बादलों जैसी बातें भी परिवर्तन हो जायेंगी।

ब्रह्मा बाप समान बनने के लिए विशेष पुरुषार्थ

कोई भी हिसाब चाहे इस जन्म का, चाहे पिछले जन्म का, लग्न की अग्नि-स्वरूप स्थिति के बिना भस्म नहीं होता। अब ब्रह्मा बाप समान सदा अग्नि-स्वरूप शक्तिशाली याद की स्थिति, बीजरूप, लाइट हाउस, माइट हाउस स्थिति पर विशेष अटेन्शन देकर सब हिसाब-किताब भस्म करो।

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