daily gyan murli 6 November 2019

TODAY MURLI 6 NOVEMBER 2019 DAILY MURLI (English)

Today Murli Brahma Kumaris: 6 November 2019

07-11-2019
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन

 

“मीठे बच्चे – बाप आये हैं तुम्हें रूहानी हुनर सिखलाने, जिस हुनर से तुम सूर्य-चांद से भी पार शान्तिधाम में जाते हो”
प्रश्नः- साइन्स घमण्ड और साइलेन्स घमण्ड में कौन-सा अन्तर है?
उत्तर:- साइन्स घमण्डी चांद सितारों पर जाने के लिए कितना खर्चा करते हैं। शरीर का जोखिम उठाकर जाते हैं। उन्हें यह डर रहता है कि रॉकेट कहाँ फेल न हो जाए। तुम बच्चे साइलेन्स घमण्ड वाले बिगर कौड़ी खर्चा सूर्य-चांद से भी पार मूलवतन में चले जाते हो। तुम्हें कोई डर नहीं क्योंकि तुम शरीर को यहाँ ही छोड़कर जाते हो।

ओम् शान्ति। रूहानी बाप बैठ रूहानी बच्चों को समझाते हैं। बच्चे सुनते तो रहते हैं कि साइन्सदान चांद पर जाने का प्रयत्न करते रहते हैं। लेकिन वे लोग तो सिर्फ चांद तक जाने की कोशिश करते हैं, कितना खर्चा करते हैं। बहुत डर रहता है ऊपर जाने में। अब तुम अपने ऊपर विचार करो, तुम कहाँ के रहने वाले हो? वह तो चन्द्रमा की तरफ जाते हैं। तुम तो सूर्य-चांद से भी पार जाते हो, एकदम मूलवतन में। वो लोग तो ऊपर जाते हैं तो उनको बहुत पैसे मिलते हैं। ऊपर में चक्र लगाकर आते तो उन्हों को लाखों सौगातें मिलती हैं। शरीर का जोखिम (रिस्क) उठाकर जाते हैं। वह हैं साइन्स घमण्डी। तुम्हारे पास है साइलेन्स का घमण्ड। तुम जानते हो हम आत्मा अपने शान्तिधाम ब्रह्माण्ड में जाते हैं। आत्मा ही सब कुछ करती है। उन्हों की भी आत्मा शरीर के साथ ऊपर में जाती है। बड़ा खौफनाक है। डरते भी हैं, ऊपर से गिरे तो जान खत्म हो जायेगी। वह सब हैं जिस्मानी हुनर। तुमको बाप रूहानी हुनर (कला) सिखलाते हैं। इस हुनर सीखने से तुमको कितनी बड़ी प्राइज़ मिलती है। 21 जन्मों की प्राइज मिलती है, नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार। आजकल गवर्मेन्ट लॉटरी भी निकालती है ना। यह बाप तुमको प्राइज़ देते हैं। और क्या सिखाते हैं? तुमको बिल्कुल ऊपर ले जाते हैं, जहाँ तुम्हारा घर है। अभी तुमको याद आता है ना कि हमारा घर कहाँ है और राजधानी जो गँवाई है, वह कहाँ है। रावण ने छीन लिया। अब फिर से हम अपने असली घर भी जाते हैं और राजाई भी पाते हैं। मुक्तिधाम हमारा घर है – यह कोई को पता नहीं है। अब तुम बच्चों को सिखलाने के लिए देखो बाप कहाँ से आते हैं, कितना दूर से आते हैं। आत्मा भी रॉकेट है। वह कोशिश करते हैं ऊपर जाकर देखें चन्द्रमा में क्या है, स्टॉर में क्या है? तुम बच्चे जानते हो यह तो इस माण्डवे की बत्तियां हैं। जैसे माण्डवे में बिजलियां लगाते हैं। म्यूज़ियम में भी तुम बत्तियों की लड़ियाँ लगाते हो ना। यह फिर है बेहद की दुनिया। इसमें यह सूर्य, चांद, सितारे रोशनी देने वाले हैं। मनुष्य फिर समझते हैं सूर्य-चन्द्रमा यह देवतायें हैं। परन्तु यह देवता तो हैं नहीं। अभी तुम समझते हो बाप कैसे आकर हमको मनुष्य से देवता बनाते हैं। यह ज्ञान सूर्य, ज्ञान चन्द्रमा और ज्ञान लकी सितारे हैं। ज्ञान से ही तुम बच्चों की सद्गति हो रही है। तुम कितना दूर जाते हो। बाप ने ही घर जाने का रास्ता बताया है। सिवाए बाप के कोई भी वापिस अपने घर जा नहीं सकते। बाप जब आकर शिक्षा देते हैं, तब तुम जानते हो। यह भी समझते हैं हम आत्मा पवित्र बनेंगे तब ही अपने घर जा सकेंगे। फिर या तो योगबल से या सजाओं के बल से पावन बनना है। बाप तो समझाते रहते हैं जितना बाप को याद करेंगे उतना तुम पावन बनेंगे। याद नहीं करेंगे तो पतित ही रह जायेंगे फिर बहुत सजा खानी पड़ेगी और पद भी भ्रष्ट हो जायेगा। बाप खुद बैठ तुमको समझाते हैं। तुम ऐसे-ऐसे घर जा सकते हो। ब्रह्माण्ड क्या है, सूक्ष्मवतन क्या है, कुछ भी पता नहीं। स्टूडेन्ट पहले थोड़ेही कुछ जानते हैं, जब पढ़ना शुरू करते हैं तो फिर नॉलेज मिलती है। नॉलेज भी कोई छोटी, कोई बड़ी होती है। आई.सी.एस. का इम्तहान दिया तो फिर कहेंगे नॉलेजफुल। इससे ऊंच नॉलेज कुछ होती नहीं। अब तुम भी कितनी ऊंच नॉलेज सीखते हो। बाप तुमको पवित्र बनने की युक्ति बताते हैं कि बच्चों मामेकम् याद करो तो तुम पतित से पावन बनेंगे। असुल में तुम आत्मायें पावन थी। ऊपर अपने घर में रहने वाली थी, जब तुम सतयुग में जीवनमुक्ति में हो तो बाकी सब मुक्तिधाम में रहते हैं। मुक्ति और जीवनमुक्ति दोनों को हम शिवालय कह सकते हैं। मुक्ति में शिवबाबा भी रहते हैं, हम बच्चे (आत्मायें) भी रहते हैं। यह है रूहानी हाइएस्ट नॉलेज। वह कहते हैं हम चांद के ऊपर जाकर रहेंगे। कितना माथा मारते हैं। बहादुरी दिखाते हैं। इतने मल्टी-मिलियन माइल ऊपर जाते हैं, लेकिन उन्हों की आश पूर्ण नहीं होती है और तुम्हारी आश पूरी हो जाती है। उनका है झूठा जिस्मानी घमण्ड। तुम्हारा है रूहानी घमण्ड। वह माया की बहादुरी कितनी दिखाते हैं। मनुष्य कितनी तालियां बजाते हैं, बधाईयां देते हैं। मिलता भी बहुत है। करके 5-10 करोड़ मिलेंगे। तुम बच्चों को यह ज्ञान है कि उन्हों को यह जो पैसे मिलते हैं, सब खत्म हो जायेंगे। बाकी थोड़े दिन ही समझो। आज क्या है, कल क्या होगा! आज तुम नर्कवासी हो, कल स्वर्गवासी बन जायेंगे। टाइम कोई जास्ती नहीं लगता है, तो उन्हों की है जिस्मानी ताकत और तुम्हारी है रूहानी ताकत। जो सिर्फ तुम ही जानते हो। वह जिस्मानी ताकत से कहाँ तक जायेंगे। चांद, सितारों तक पहुँचेंगे और लड़ाई शुरू हो जायेगी। फिर वह सब खत्म हो जायेंगे। उन्हों का हुनर यहाँ तक ही खत्म हो जायेगा। वह है जिस्मानी हाइएस्ट हुनर, तुम्हारा है रूहानी हाइएस्ट हुनर। तुम शान्तिधाम में जाते हो। उसका नाम ही है स्वीट होम। वो लोग कितने ऊपर जाते हैं और तुम अपना हिसाब करो-तुम कितने माइल्स ऊपर में जाते हो? तुम कौन? आत्मायें। बाप कहते हैं मैं कितने माइल ऊपर में रहता हूँ। गिनती कर सकेंगे! उन्हों के पास तो गिनती है, बतलाते हैं इतने माइल ऊपर में गये फिर लौट आते हैं। बड़ी खबरदारी रखते हैं, ऐसे उतरेंगे यह करेंगे, बहुत आवाज होता है। तुम्हारा क्या आवाज होगा। तुम कहाँ जाते हो फिर कैसे आते हो, कोई पता नहीं। तुमको क्या प्राइज मिलती है, यह भी तुम ही जानो। वन्डरफुल है। बाबा की कमाल है, किसको पता नहीं। तुम तो कहेंगे यह नई बात थोड़ेही है। हर 5 हज़ार वर्ष बाद वह अपनी यह प्रैक्टिस करते रहेंगे। तुम इस सृष्टि रूपी ड्रामा के आदि, मध्य, अन्त ड्युरेशन आदि को अच्छी रीति जानते हो। तो तुमको अन्दर फ़खुर होना चाहिए – बाबा हमको क्या सिखलाते हैं। बहुत ऊंचा पुरूषार्थ करते हैं फिर भी करेंगे। यह सब बातें और कोई नहीं जानते। बाप है गुप्त। तुमको कितना रोज़ समझाते हैं। तुमको कितनी नॉलेज देते हैं। उन लोगों का जाना है हद तक। तुम बेहद में जाते हो। वह चन्द्रमा तक जाते हैं, अब वह तो बड़ी-बड़ी बत्तियां हैं, और तो कुछ है नहीं। उनको धरनी बहुत छोटी देखने में आती है। तो उन्हों की जिस्मानी नॉलेज और तुम्हारी नॉलेज में कितना फ़र्क है। तुम्हारी आत्मा कितनी छोटी है। परन्तु रॉकेट बड़ा तीखा है। आत्मायें ऊपर में रहती हैं फिर आती हैं पार्ट बजाने। वह भी सुप्रीम आत्मा है। परन्तु उनकी पूजा कैसे हो। भक्ति भी जरूर होनी ही है।

बाबा ने समझाया है आधाकल्प है ज्ञान दिन, आधाकल्प है भक्ति रात। अभी संगमयुग पर तुम ज्ञान लेते हो। सतयुग में तो ज्ञान होता नहीं इसलिए इसको पुरूषोत्तम संगमयुग कहा जाता है। सबको पुरूषोत्तम बनाते हैं। तुम्हारी आत्मा कितना दूर-दूर जाती है, तुमको खुशी है ना। वह हुनर दिखाते हैं तो बहुत पैसे मिलते हैं। भल कितना भी मिलें परन्तु तुम समझते हो वह कुछ भी साथ चलना नहीं है। अभी मरे कि मरे। सब खत्म हो जाने वाला है। अभी तुमको कितने वैल्युबुल रत्न मिलते हैं, इनकी वैल्यु कोई गिनी नहीं जाती। लाख-लाख रूपया एक-एक वर्शन्स का है। कितने समय से तुम सुनते ही आते हो। गीता में कितनी वैल्युबुल नॉलेज है। यह एक ही गीता है जिसको मोस्ट वैल्युबुल कहते हैं। सर्वशास्त्रमई शिरोमणी श्रीमत भगवत गीता है। वो लोग भल पढ़ते रहते हैं परन्तु अर्थ थोड़ेही समझते हैं। गीता पढ़ने से क्या होगा। अब बाप कहते हैं मुझे याद करो तो तुम पावन बनेंगे। भल वह गीता पढ़ते हैं परन्तु एक का भी बाप से योग नहीं। बाप को ही सर्वव्यापी कह देते हैं। पावन भी बन नहीं सकते। अब यह लक्ष्मी-नारायण के चित्र तुम्हारे सामने हैं। इनको देवता कहा जाता है क्योंकि दैवीगुण हैं। तुम आत्माओं को पवित्र बन सबको अपने घर जाना है। नई दुनिया में तो इतने मनुष्य होते नहीं। बाकी सब आत्माओं को जाना पड़ेगा अपने घर। तुमको बाप भी वन्डरफुल नॉलेज देते हैं, जिससे तुम मनुष्य से देवता बहुत ऊंच बनते हो। तो ऐसी पढ़ाई पर अटेन्शन भी इतना चाहिए। यह भी समझते हैं जैसा जिसने कल्प पहले अटेन्शन दिया है, ऐसा देते रहेंगे। मालूम पड़ता रहता है। बाप सर्विस का समाचार सुनकर खुश भी होते हैं। बाप को कभी चिट्ठी ही नहीं लिखते हैं तो समझते हैं उनका बुद्धियोग कहाँ ठिक्कर भित्तर तरफ लग गया है। देह-अभिमान आया हुआ है, बाप को भूल गये हैं। नहीं तो विचार करो लव मैरेज होती है तो उनका कितना आपस में प्यार रहता है। हाँ, कोई-कोई के ख्याल बदल जाते हैं तो फिर स्त्री को भी मार डालते हैं। यह तुम्हारी है उनके साथ लव मैरेज। बाप आकर तुमको अपना परिचय देते हैं। तुम आपेही परिचय नहीं पाते हो। बाप को आना पड़ता है। बाप आयेगा तब जबकि दुनिया पुरानी होगी। पुरानी को नई बनाने जरूर संगम पर ही आयेंगे। बाप की ड्युटी है नई दुनिया स्थापन करने की। तुमको स्वर्ग का मालिक बना देते हैं तो ऐसे बाप के साथ कितना लव होना चाहिए फिर क्यों कहते कि बाबा हम भूल जाते हैं। कितना ऊंच ते ऊंच बाप है। इनसे ऊंचा कोई होता ही नहीं। मनुष्य मुक्ति के लिए कितना माथा मारते, उपाय करते हैं। कितनी झूठ ठगी चल रही है। महर्षि आदि का कितना नाम है। गवर्मेन्ट 10-20 एकड़ जमीन दे देती है। ऐसे नहीं कि गवर्मेन्ट कोई इरिलीजस है, उनमें कोई मिनिस्टर रिलीज़स है, कोई अनरिलीजस है। कोई धर्म को मानते ही नहीं। कहा जाता है रिलीजन इज़ माइट। क्रिश्चियन में माइट थी ना। सारे भारत को हप करके गये। अभी भारत में कोई माइट नहीं है। कितना झगड़ा मारामारी लगी पड़ी है। वही भारत क्या था। बाप कैसे, कहाँ आते हैं, किसको कुछ भी पता नहीं। तुम जानते हो मगध देश में आते हैं, जहाँ मगरमच्छ होते हैं। मनुष्य ऐसे हैं जो सब-कुछ खा जाएं। सबसे जास्ती वैष्णव भारत था। यह वैष्णव राज्य है ना। कहाँ यह महान् पवित्र देवतायें, कहाँ आजकल देखो क्या-क्या हप करते जाते हैं। आदमखोर भी बन जाते हैं। भारत की क्या हालत हो गई है। अभी तुमको सारा राज़ समझा रहे हैं। ऊपर से लेकर नीचे तक पूरा ज्ञान देते हैं। पहले-पहले तुम ही इस पृथ्वी पर होते हो फिर मनुष्य वृद्धि को पाते हैं। अभी थोड़े समय में हाहाकार हो जायेगा फिर हाय-हाय करते रहेंगे। स्वर्ग में देखो कितना सुख है। यह एम आब्जेक्ट की निशानी देखो। यह सब तुम बच्चों को धारणा भी करनी है। कितनी बड़ी पढ़ाई है। बाप कितना क्लीयर कर समझाते हैं। माला का राज़ भी समझाया है। ऊपर में फूल है शिवबाबा, फिर मेरू….. प्रवृत्ति मार्ग है ना। निवृति मार्ग वालों को तो माला फेरने का हुक्म नहीं। यह है ही देवताओं की माला, उन्होंने कैसे राज्य लिया है, तुम्हारे में भी नम्बरवार हैं। कोई-कोई हैं जो बेधड़क हो किसको भी समझाते हैं-आओ तो हम आपको ऐसी बात बतायें जो और कोई बता ही नहीं सकते। सिवाए शिवबाबा के और कोई जानते ही नहीं। उन्हों को यह राजयोग किसने सिखाया। बहुत रसीला बैठ समझाना चाहिए। यह 84 जन्म कैसे लेते, देवता, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र….। बाप कितनी सहज नॉलेज बताते हैं और पवित्र भी बनना है तब ही ऊंच पद पायेंगे। सारे विश्व पर शान्ति स्थापन करने वाले तुम हो। बाप तुमको राज्य-भाग्य देते हैं। दाता है ना। वह कुछ लेता नहीं है। तुम्हारी पढ़ाई की यह है प्राइज़। ऐसी प्राइज़ तो और कोई दे न सके। तो ऐसे बाप को प्यार से क्यों नहीं याद करते हैं। लौकिक बाप को तो सारा जन्म याद करते हो। पारलौकिक को क्यों नहीं याद करते हो। बाप ने बताया है युद्ध का मैदान है, टाइम लगता है पावन बनने में। इतना ही समय लगता है जब तक लड़ाई पूरी हो। ऐसे नहीं जो शुरू में आये हैं वह पूरे पावन होंगे। बाबा कहते हैं माया की लड़ाई बड़ी जोर से चलती है। अच्छे-अच्छे को भी माया जीत लेती है। इतनी तो बलवान है। जो गिरते हैं वह फिर मुरली भी कहाँ से सुनें। सेन्टर में तो आते ही नहीं तो उनको कैसे पता पड़े। माया एकदम वर्थ नाट ए पेनी बना देती है। मुरली जब पढ़ें तब सुजाग हों। गन्दे काम में लग जाते हैं। कोई सेन्सीबुल बच्चा हो जो उनको समझावे-तुमने माया से कैसे हार खाई है। बाबा तुमको क्या सुनाते हैं, तुम फिर कहाँ जा रहे हो। देखते हैं इनको माया खा रही है तो बचाने की कोशिश करनी चाहिए। कहाँ माया सारा हप न कर लेवे। फिर से सुजाग हो जाएं। नहीं तो ऊंच पद नहीं पायेंगे। सतगुरू की निंदा कराते हैं। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) बाप से साइलेन्स का हुनर सीखकर इस हद की दुनिया से पार बेहद में जाना है। फ़खुर (नशा) रहे बाप हमें कितना वन्डरफुल ज्ञान देकर, कितनी बड़ी प्राइज़ देते हैं।

2) बेधड़क होकर बहुत रसीले ढंग से सेवा करनी है। माया की लड़ाई में बलवान बन जीत पानी है। मुरली सुनकर सुजाग रहना है और सबको सुजाग करना है।

वरदान:- स्वराज्य के संस्कारों द्वारा भविष्य राज्य अधिकार प्राप्त करने वाली तकदीरवान आत्मा भव
बहुतकाल के राज्य अधिकारी बनने के संस्कार बहुतकाल भविष्य राज्य अधिकारी बनायेंगे। अगर बार-बार वशीभूत होते हो, अधिकारी बनने के संस्कार नहीं हैं तो राज्य अधिकारियों के राज्य में रहेंगे, राज्य भाग्य प्राप्त नहीं होगा। तो नॉलेज के दर्पण में अपने तकदीर की सूरत को देखो। बहुत समय के अभ्यास द्वारा अपने विशेष सहयोगी कर्मचारी वा राज्य कारोबारी साथियों को अपने अधिकार से चलाओ। राजा बनो तब कहेंगे तकदीरवान आत्मा।
स्लोगन:- सकाश देने की सेवा करने के लिए बेहद की वैराग्य वृत्ति को इमर्ज करो।

BRAHMA KUMARIS MURLI TODAY 6 NOVEMBER 2019 : AAJ KI MURLI

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 6 November 2019

06-11-2019
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन

 

“मीठे बच्चे – अपनी जांच करो कि कितना समय बाप की स्मृति रहती है, क्योंकि स्मृति में है ही फायदा, विस्मृति में है घाटा”
प्रश्नः- इस पाप आत्माओं की दुनिया में कौन-सी बात बिल्कुल असम्भव है और क्यों?
उत्तर:- यहाँ कोई कहे हम पुण्य आत्मा हैं, यह बिल्कुल असम्भव है क्योंकि दुनिया ही कलियुगी तमोप्रधान है। मनुष्य जिसको पुण्य का काम समझते हैं वह भी पाप हो जाता है क्योंकि हर कर्म विकारों के वश हो करते हैं।

ओम् शान्ति। यह तो बच्चे समझते होंगे हम अभी ब्रह्मा के बच्चे ब्रह्माकुमार-कुमारियाँ हैं। फिर बाद में होते हैं-देवी-देवता। यह तो तुम ही समझते हो, दूसरा कोई नहीं समझते। तुम जानते हो हम ब्रह्माकुमार-कुमारियां बेहद की पढ़ाई पढ़ रहे हैं। 84 जन्मों की पढ़ाई भी पढ़ते, सृष्टि चक्र की पढ़ाई भी पढ़ते। फिर तुमको यह शिक्षा मिलती है कि पवित्र बनना है। यहाँ बैठे तुम बच्चे बाप को याद तो जरूर करते हो पावन बनने के लिए। अपने दिल से पूछो सच-सच हम बाप की याद में बैठे थे या माया रावण बुद्धि को और तरफ ले गयी। बाप ने कहा है मामेकम् याद करो तो पाप कटें। अब अपने से पूछना है हम बाबा की याद में रहे या बुद्धि कहाँ चली गई? स्मृति रहनी चाहिए-कितना समय हम बाबा की याद में रहे? कितना समय हमारी बुद्धि कहाँ-कहाँ गई? अपनी अवस्था को देखो। जितना टाइम बाप को याद करेंगे, उससे ही पावन बनेंगे। जमा और ना का भी पोतामेल रखना है। आदत होगी तो याद भी रहेगा। लिखते रहेंगे। डायरी तो सबके पॉकेट में रहती ही है। जो भी व्यापार वाले होते हैं, उन्हों की है हद की डायरी। तुम्हारी है बेहद की डायरी। तो तुमको अपना चार्ट नोट करना है। बाप का फरमान है-धन्धा आदि सब कुछ करो परन्तु कुछ समय निकाल मेरे को याद करो। अपने पोतामेल को देख फायदा बढ़ाते जाओ। घाटा न डालो। तुम्हारी युद्ध तो है ना। सेकण्ड में फायदा, सेकण्ड में घाटा। झट मालूम पड़ता है, हमने फायदा किया या घाटा? तुम व्यापारी हो ना। कोई विरला यह व्यापार करे। स्मृति से है फायदा, विस्मृति से है घाटा। यह अपनी जांच करनी है, जिनको ऊंच पद पाना है उनको तो ओना रहता है-देखें, हम कितना समय विस्मृति में रहे? यह तो तुम बच्चे जानते हो हम सब आत्माओं का बाप पतित-पावन है। हम असुल आत्मायें हैं। अपने घर से यहाँ आये हैं, यह शरीर लेकर पार्ट बजाते हैं। शरीर विनाशी है, आत्मा अविनाशी है। संस्कार भी आत्मा में रहते हैं। बाबा पूछते हैं-हे आत्मा याद करो, इस जन्म के छोटेपन में कोई उल्टा काम तो नहीं किया है? याद करो। 3-4 वर्ष से लेकर याद तो रहती है, हमने छोटेपन में कैसे बिताया है, क्या-क्या किया है? कोई भी बात दिल अन्दर खाती तो नहीं है? याद करो। सतयुग में पाप कर्म होते ही नहीं तो पूछने की बात नहीं रहती। यहाँ तो पाप होते ही हैं। मनुष्य जिसको पुण्य का काम समझते हैं वह भी पाप ही है। यह है ही पाप आत्माओं की दुनिया। तुम्हारी लेन-देन भी है पाप आत्माओं से। पुण्य आत्मा यहाँ है ही नहीं। पुण्य आत्माओं की दुनिया में फिर एक भी पाप आत्मा नहीं। पाप आत्माओं की दुनिया में एक भी पुण्य आत्मा नहीं हो सकती। जिन गुरुओं के चरणों में गिरते हैं वह भी कोई पुण्य आत्मा नहीं हैं। यह तो है ही कलियुग सो भी तमोप्रधान। तो इसमें कोई पुण्य आत्मा होना ही असम्भव है। पुण्य आत्मा बनने लिए ही बाप को बुलाते हैं कि आकर हमको पावन आत्मा बनाओ। ऐसे नहीं, कोई बहुत दान-पुण्य आदि करते हैं, धर्मशाला आदि बनाते हैं तो वह कोई पुण्य आत्मा हैं। नहीं, शादियों आदि के लिए हाल आदि बनाते हैं यह कोई पुण्य थोड़ेही है। यह समझने की बातें हैं। यह है रावण राज्य, पाप आत्माओं की आसुरी दुनिया। इन बातों को सिवाए तुम्हारे और कोई नहीं जानते। रावण भल है परन्तु उनको पहचानते थोड़ेही हैं। शिव का चित्र भी है परन्तु पहचानते नहीं हैं। बड़े-बड़े शिवलिंग आदि बनाते हैं, फिर भी कह देते नाम-रूप से न्यारा है, सर्वव्यापी है इसलिए बाप ने कहा है यदा यदाहि……. भारत में ही शिवबाबा की ग्लानि होती है। जो बाप तुमको विश्व का मालिक बनाते हैं, तुम मनुष्य मत पर चल उनकी कितनी ग्लानि करते हो। मनुष्य मत और ईश्वरीय मत का किताब भी है ना। यह तो तुम ही जानते हो और समझाते हो हम श्रीमत पर देवता बनते हैं। रावण मत पर फिर आसुरी मनुष्य बन जाते हैं। मनुष्य मत को आसुरी मत कहा जायेगा। आसुरी कर्तव्य ही करते रहते हैं। मूल बात ईश्वर को सर्वव्यापी कह देते। कच्छ अवतार, मच्छ अवतार…… तो कितने आसुरी छी-छी बन गये हैं। तुम्हारी आत्मा कच्छ-मच्छ अवतार नहीं लेती, मनुष्य तन में ही आती है। अभी तुम समझते हो हम कोई कच्छ-मच्छ थोड़ेही बनते हैं, 84 लाख योनी थोड़ेही लेते हैं। अभी तुमको बाप की श्रीमत मिलती है – बच्चे, तुम 84 जन्म लेते हो। 84 और 84 लाख का क्या परसेन्टेज कहेंगे! झूठ तो पूरा झूठ, सच की रत्ती नहीं। इनका भी अर्थ समझना चाहिए। भारत का हाल देखो क्या है। भारत सचखण्ड था, जिसको हेविन ही कहा जाता था। आधाकल्प है राम राज्य, आधाकल्प है रावण राज्य। रावण राज्य को आसुरी सम्प्रदाय कहेंगे। कितना कड़ा अक्षर है। आधा कल्प देवताओं का राज्य चलता है। बाप ने समझाया है लक्ष्मी-नारायण दी फर्स्ट, दी सेकण्ड, दी थर्ड कहा जाता है। जैसे एडवर्ड फर्स्ट सेकण्ड होता है ना। पहली पीढ़ी, फिर दूसरी पीढ़ी ऐसे चलती है। तुम्हारा भी पहले होता है सूर्यवंशी राज्य फिर चन्द्रवंशी। बाप ने आकर ड्रामा का राज़ भी अच्छी रीति समझाया है। तुम्हारे शास्त्रों में यह बातें नहीं थी। कोई-कोई शास्त्रों में थोड़ी लकीरें लगाई हुई हैं परन्तु उस समय जिन्होंने पुस्तक बनाये हैं उन्होंने कुछ समझा नहीं है।

बाबा भी जब बनारस गये थे उस समय यह दुनिया अच्छी नहीं लगती थी, वहाँ सारी दीवारों पर लकीर बैठ लगाते थे। बाप यह सब कराते थे परन्तु हम तो उस समय बच्चे थे ना। पूरा समझ में नहीं आता था। बस कोई है जो हमसे यह कराता है। विनाश देखा तो अन्दर में खुशी भी थी। रात को सोते थे तो भी जैसे उड़ते रहते थे परन्तु कुछ समझ में नहीं आता था। ऐसे-ऐसे लकीरें खींचते रहते थे। कोई ताकत है जिसने प्रवेश किया है। हम वन्डर खाते थे। पहले तो धन्धा आदि करते थे फिर क्या हुआ, कोई को देखते थे और झट ध्यान में चले जाते थे। कहता था यह क्या होता है जिसको देखता हूँ उनकी ऑखें बन्द हो जाती हैं। पूछते थे क्या देखा तो कहते थे वैकुण्ठ देखा, कृष्ण देखा। यह भी सब समझने की बातें हुई ना इसलिए सब कुछ छोड़कर बनारस चले गये समझने लिए। सारा दिन बैठा रहता था। पेंसिल और दीवार और कोई धन्धा ही नहीं। बेबी थे ना। तो ऐसे-ऐसे जब देखा तो समझा अब यह कुछ करना नहीं है। धन्धा आदि छोड़ना पड़ेगा। खुशी थी यह गदाई छोड़नी है। रावण राज्य है ना। रावण पर गधे का शीश दिखाते हैं ना, तो ख्याल हुआ यह राजाई नहीं, गदाई है। गधा घड़ी-घड़ी मिट्टी में लथेड़ कर धोबी के कपड़े सब खराब कर देता है। बाप भी कहते हैं तुम क्या थे, अब तुम्हारी क्या अवस्था हो गई है। यह बाप ही बैठ समझाते हैं और यह दादा भी समझाते हैं। दोनों का चलता रहता है। ज्ञान में जो अच्छी रीति समझाते हैं वह तीखे कहेंगे। नम्बरवार तो हैं ना। तुम बच्चे भी समझाते हो, यह राजधानी स्थापन हो रही है। जरूर नम्बरवार पद पायेंगे। आत्मा ही अपना पार्ट कल्प-कल्प बजाती है। सब एक समान ज्ञान नहीं उठायेंगे। यह स्थापना ही वन्डरफुल है। दूसरे कोई स्थापना का ज्ञान थोड़ेही देते हैं। समझो सिक्ख धर्म की स्थापना हुई। शुद्ध आत्मा ने प्रवेश किया, कुछ समय के बाद सिक्ख धर्म की स्थापना हुई। उन्हों का हेड कौन? गुरुनानक। उसने आकर जप साहेब बनाया। पहले तो नई आत्मायें ही होंगी क्योंकि पवित्र आत्मा होती है। पवित्र को महान् आत्मा कहते हैं। सुप्रीम तो एक बाप को कहा जाता है। वह भी धर्म स्थापना करते हैं तो महान् कहेंगे। परन्तु नम्बरवार पीछे-पीछे आते हैं। 500 वर्ष पहले एक आत्मा आई, आकर सिक्ख धर्म स्थापन किया, उस समय ग्रंथ कहाँ से आयेगा। जरूर सुखमनी जप साहेब आदि बाद में बनाये होंगे ना! क्या शिक्षा देते हैं। उमंग आता है तो बाप की बैठ महिमा करते हैं। बाकी यह पुस्तक आदि तो बाद में बनते हैं। जब बहुत हों। पढ़ने वाले भी चाहिए ना। सबके शास्त्र पीछे बने होंगे। जब भक्ति मार्ग शुरू हो तब शास्त्र पढ़े। ज्ञान चाहिए ना। पहले सतोप्रधान होंगे फिर सतो, रजो, तमो में आते हैं। जब बहुत वृद्धि हो तब महिमा हो और शास्त्र आदि बनें। नहीं तो वृद्धि कौन करे। फालोअर्स बनें ना। सिक्ख धर्म की आत्मायें आवें जो आकर फालो करें। उसमें बहुत टाइम चाहिए।

नई आत्मा जो आती है उनको दु:ख तो हो नहीं सकता। लॉ नहीं कहता। आत्मा सतोप्रधान से सतो, रजो, तमो में आवे तब दु:ख हो। लॉ भी है ना! यहाँ है मिक्सअप, रावण सम्प्रदाय भी है तो राम सम्प्रदाय भी है। अभी तो सम्पूर्ण बने नहीं हैं। सम्पूर्ण बनेंगे तो फिर शरीर छोड़ देंगे। कर्मातीत अवस्था वाले को कोई दु:ख हो न सके। वह इस छी-छी दुनिया में रह नहीं सकते। वह चले जायेंगे बाकी जो रहेंगे वह कर्मातीत नहीं बने होंगे। सब तो एक साथ कर्मातीत हो नहीं सकते। भल विनाश होता है तो भी कुछ बचेंगे। प्रलय नहीं होती। गाते भी हैं राम गयो रावण गयो… रावण का बहुत परिवार था। हमारा परिवार तो थोड़ा है। वह कितने ढेर धर्म हैं। वास्तव में सबसे बड़ा हमारा परिवार होना चाहिए क्योंकि देवी-देवता धर्म सबसे पहला है। अभी तो सब मिक्सअप हुए हैं तो क्रिश्चियन बहुत बन गये हैं। जहाँ मनुष्य सुख देखते हैं, पोजीशन देखते हैं तो उस धर्म के बन जाते हैं। जब-जब पोप आता है तो बहुत क्रिश्चियन बनते हैं। फिर वृद्धि भी बहुत होती है। सतयुग में तो है ही एक बच्चा, एक बच्ची। और कोई धर्म की ऐसे वृद्धि नहीं होती। अभी देखो सबसे क्रिश्चियन तीखे हैं। जो बहुत बच्चे पैदा करते हैं उनको इनाम मिलता है क्योंकि उन्हों को तो मनुष्य चाहिए ना। जो मिलेट्री लश्कर काम में आयेगा। हैं तो सब क्रिश्चियन। रशिया, अमेरिका सब क्रिश्चियन हैं, एक कहानी है दो बन्दर लड़े माखन बिल्ला खा गया। यह भी ड्रामा बना हुआ है। आगे तो हिन्दू, मुसलमान इकट्ठे रहते थे। जब अलग हुए तब पाकिस्तान की नई राजाई खड़ी हो गई। यह भी ड्रामा बना हुआ है। दो लड़ेंगे तो बारूद लेंगे, धन्धा होगा। ऊंच ते ऊंच उन्हों का यह धन्धा है। परन्तु ड्रामा में विजय की भावी तुम्हारी है। 100 परसेन्ट सरटेन है, तुम्हें कोई भी जीत नहीं सकते। बाकी सब खत्म हो जायेंगे। तुम जानते हो नई दुनिया में हमारा राज्य होगा, जिसके लिए ही तुम पढ़ते हो। लायक बनते हो। तुम लायक थे अब न लायक बन पड़े हो फिर लायक बनना है। गाते भी हैं पतित-पावन आओ। परन्तु अर्थ थोड़ेही समझते हैं। यह है ही सारा जंगल। अब बाप आये हैं, आकर कांटों के जंगल को गॉर्डन ऑफ फ्लावर बनाते हैं। वह है डीटी वर्ल्ड। यह है डेविल वर्ल्ड। सारी मनुष्य सृष्टि का राज़ समझाया है। तुम अभी समझते हो हम अपने धर्म को भूल धर्म भ्रष्ट हो गये हैं। तो सब कर्म विकर्म ही होते हैं। कर्म, विकर्म, अकर्म की गति बाबा तुमको समझाकर गये थे। तुम समझते हो बरोबर कल हम ऐसे थे फिर आज हम यह बनते हैं। नज़दीक है ना। बाबा कहते हैं कल तुमको देवता बनाया था। राज्य-भाग्य दिया था फिर सब कहाँ किया? तुमको स्मृति आई है-भक्तिमार्ग में हमने कितना धन गँवाया है। कल की बात है ना। बाप तो आकर हथेली पर बहिश्त देते हैं। यह ज्ञान बुद्धि में रहना चाहिए।

बाबा ने यह भी समझाया है यह आंखें कितना धोखा देती हैं, क्रिमिनल आई को ज्ञान से सिविल बनाना है। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) अपनी बेहद की डायरी में चार्ट नोट करना है कि हमने याद में रहकर कितना फायदा बढ़ाया? घाटा तो नहीं पड़ा? याद के समय बुद्धि कहाँ-कहाँ गई?

2) इस जन्म में छोटेपन से हमसे कौन-कौन से उल्टे कर्म अथवा पाप हुए हैं, वह नोट करना है। जिस बात में दिल खाती है उसे बाप को सुनाकर हल्का हो जाना है। अब कोई भी पाप का काम नहीं करना है।

वरदान:- अच्छाई पर प्रभावित होने के बजाए उसे स्वयं में धारण करने वाले परमात्म स्नेही भव
अगर परमात्म स्नेही बनना है तो बॉडीकानसेस की रूकावटों को चेक करो। कई बच्चे कहते हैं यह बहुत अच्छा या अच्छी है इसलिए थोड़ा रहम आता है…कोई का किसी के शरीर से लगाव होता तो कोई का किसी के गुणों वा विशेषताओं से। लेकिन वह विशेषता वा गुण देने वाला कौन? कोई अच्छा है तो अच्छाई को धारण भले करो लेकिन अच्छाई में प्रभावित नहीं हो जाओ। न्यारे और बाप के प्यारे बनो। ऐसे प्यारे अर्थात् परमात्म स्नेही बच्चे सदा सेफ रहते हैं।
स्लोगन:- साइलेन्स की शक्ति इमर्ज करो तो सेवा की गति फास्ट हो जायेगी।
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