brahma kumaris murli 28 august 2017

Brahma kumaris murli 28 August 2017 : Daily Murli (Hindi)

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 28 August 2017

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BK murli today ~ 28/08/2017 (Hindi) Brahma Kumaris प्रातः मुरली
28/08/17
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन
”मीठे बच्चे – तुम उठते-बैठते सब कुछ करते चुप रहो, बाप को याद करो तो वर्सा मिल जायेगा, इसमें गीत कविता आदि की भी दरकार नहीं है”
प्रश्नः- बाप को लिबरेटर कहने से कौन सी एक बात सिद्ध हो जाती है?
उत्तर:- जब बाप दु:खों से अथवा 5 विकारों से लिबरेट करने वाला है तो जरूर उसमें फँसाने वाला कोई दूसरा होगा। लिबरेटर कभी फँसा नहीं सकता। उसको कहा जाता है दु:ख हर्ता सुख कर्ता तो वह कभी किसी को दु:ख कैसे दे सकते। जब बच्चे दु:खी होते हैं तब उस बाप को याद करते हैं। दु:ख देने वाला है रावण। रावण माया श्रापित करती। बाप आते हैं वर्सा देने।
गीत:- जो पिया के साथ है…

ओम् शान्ति। इस ज्ञान मार्ग में गीतों, कविताओं, डायलागों आदि की जरूरत नहीं है। यह सब भक्ति मार्ग में चलता है। यहाँ तो है समझ की बातें। हर बात बुद्धि से समझना है और है भी बहुत सहज। यानी यह ज्ञान बहुत सहज है। एक भी प्वाइंट से मनुष्य पुरूषार्थ करने लग पड़ते हैं। गीत सुनने की वा कविता बनाने की कोई जरूरत नहीं है। गृहस्थ व्यवहार में रहना है, धन्धा धोरी करना है। बाप कहते हैं वह सब करते तुम मेरे से वर्सा कैसे ले सकते हो। वह समझाते हैं उठते बैठते सब कुछ करते चुप रहना है। अन्दर में विचार चलता रहे, बाप ने समझाया है बात बिल्कुल सहज है समझने की। नई दुनिया को पुरानी दुनिया होने में समय लगता है। फिर पुराने से नई बनने में इतना समय नहीं लगता है। बच्चों को समझाया गया है – बाप नई सृष्टि रचते हैं, फिर पुरानी होती है। सुख और दु:ख की दुनिया बनी हुई जरूर है परन्तु सुख कौन देते हैं, दु:ख कौन देते हैं। यह किसको पता नहीं है। बनी बनाई भी जरूर है। इस चक्र से हम निकल नहीं सकते। उसको कहा जाता है ड्रामा। नाटक के बदले ड्रामा कहना अच्छा लगता है। नाटक जो होता है उसमें बदल सदल हो सकती है। कोई को निकाल सकते हैं, कोई को एड कर सकते हैं। आगे नाटक थे, बाइसकोप तो अब निकले हैं। बाइसकोप में जो फिल्म शूट हुई वही रिपीट होगी। यह बाइसकोप निकाला है – इस ज्ञान को भी इस द्वारा पूरा समझने के लिए। नाटक में फ़र्क हो जाता है। बाइसकोप में फर्क नहीं हो सकता। यह एक स्टोरी है नई पावन दुनिया और पुरानी पतित दुनिया की। सिर्फ मनुष्यों को यह पता नहीं है कि ड्रामा की आयु कितनी है। बहुत लम्बी चौड़ी आयु दे दी है। मनुष्य तो कुछ भी समझ नहीं सकते। नई दुनिया में कितने समझदार, धनवान पवित्र थे, सर्वगुण सम्पन्न थे। बाबा आज ऐसे क्यों समझा रहे हैं? कि बच्चे भी जाकर ऐसे भाषण करें। भारत की पहले-पहले महिमा करनी चाहिए। भारत को ऐसा किसने बनाया? वह भी महिमा निकलेगी परमपिता परमात्मा की, जिसको सब याद करते हैं। याद क्यों करते हैं? क्योंकि पुरानी दुनिया में दु:ख बहुत है। दु:ख देने वाले 5 विकार ही हैं। सतयुग त्रेता को सुखधाम कहा जाता है। वह है ही ईश्वरीय स्थापना। यह फिर है आसुरी स्थापना, जिसमें मनुष्य 5 विकारों में फँस पड़ते हैं। समझते भी हैं बाप ही लिबरेट करते हैं। जो लिबरेटर है, वह फँसाने वाला थोड़ेही होगा। उनका नाम ही है दु:ख हर्ता सुख कर्ता। उनके लिए हम दु:ख कर्ता कह नहीं सकते। यह किसको पता नहीं है कि यह दु:ख देने वाले 5 विकार ही हैं, जिससे ही बाप आकर छुड़ाते हैं। बड़ी समझ की बात है। सारी दुनिया में इस समय रावण राज्य है। सिर्फ लंका की बात नहीं है। मनुष्यों के अपने-अपने विचार हैं। जिसको बुद्धि में जो आया वह लिख देंगे। वैसे ही यह शास्त्र हैं। अपना-अपना शास्त्र बना देते हैं। मनुष्यों को कुछ पता नहीं है। भगवानुवाच – यह वेद शास्त्र पढ़ना, यज्ञ तप आदि करना जो कुछ तुम करते आये हो वह सब उतरती कला के हैं। जो कुछ तुमने बनाया है वह अपने को गिराने के लिए। तुमको मत मिलती ही है गिरने की क्योंकि है ही उतरती कला। पावन दुनिया थी, अब पतित दुनिया है। आधाकल्प है नई दुनिया, आधाकल्प है पुरानी दुनिया। जैसे 24 घण्टे होते हैं, 12 घण्टे बाद दिन पूरा हो फिर रात होती है। वैसे यह ब्रह्मा का दिन और ब्रह्मा की रात गाई जाती है। विष्णु का दिन रात नहीं कहेंगे। यह कितनी गुह्य बातें हैं। सिवाए बाप के और कोई समझा न सके। बाप समझाते हैं अभी तमोप्रधान से सतोप्रधान में जाना है। अभी अजुन अपनी बादशाही थोड़ेही स्थापन हुई है। बाप कितना सहज बच्चों को समझाते रहते हैं, सिर्फ शिवबाबा को याद करना है। तमोप्रधान से सतोप्रधान बनना है। यह बातें भी तुम अबलायें ही समझ सकती हो। नई दुनिया और पुरानी दुनिया। नई दुनिया को रचने वाला बाप है। नई दुनिया स्वर्ग थी फिर नर्क किसने बनाया? रावण ने। रावण कौन है? यह राज़ भी तुमको समझाया है। कोई भी विद्वान पण्डित आदि नहीं समझ सकते वह तो कह देते जगत मिथ्या है। सब कुछ कल्पना है। तुम समझा सकते हो अगर जगत बना ही नहीं है तो तुम बैठे कहाँ हो? यह जो वर्ल्ड रिपीट होती है, उसकी पूरी नॉलेज चाहिए ना। नॉलेज न होने के कारण कह देते हैं सब कुछ मिथ्या है, जिसने जो सुनाया सो सत। तुम तो एक बात में ही खुश होते हो। बाप तो बहुत अच्छी रीति समझाते हैं। बाप ने तो आधाकल्प का वर्सा दिया है, फिर रावण से हराया है। यह खेल बना हुआ है।

तुम बच्चे जानते हो हम अभी ईश्वर के बने हैं और उनकी श्रीमत पर चल रहे हैं। यह चित्र तो बड़े अच्छे हैं, सबके पास बड़े चित्र होने चाहिए। बड़े चित्रों पर समझाना अच्छा होता है। चक्र सामने खड़ा है। संगमयुग भी सामने लगा हुआ है। कलियुग है काला, पतित। उनमें लोहे की खाद पड़ने से काले हो गये हैं। भारत कितना गोल्डन एजड था। अब फिर इनको आइरन एज से चेन्ज होना है। उनकी स्थापना इनका विनाश होना चाहिए। गाया भी जाता है परमपिता परमात्मा त्रिमूर्ति है। त्रिमूर्ति का अर्थ भी कोई समझते नहीं हैं। रोड पर भी त्रिमूर्ति नाम रखे हुए हैं। वास्तव में त्रिमूर्ति है ब्रह्मा विष्णु शंकर, यह तीनों देवतायें हैं अलग-अलग। इन सबसे ऊंच ते ऊंच है परमपिता परमात्मा शिव, करन-करावनहार। उनको गुम कर दिया है। देवताओं से भी ऊपर तो वह निराकार भगवान ही है। जैसे बाप निराकार है वैसे हम आत्मायें भी निराकार हैं। हम यहाँ आये हैं पार्ट बजाने। लक्ष्मी-नारायण की डिनायस्टी थी। एक दो के पिछाड़ी राज्य करते आते हैं। तो स्वर्ग की महिमा सुनानी पड़े। भारत कितना धनवान था। प्योरिटी, पीस, प्रासपर्टी थी। कभी अकाले मृत्यु नहीं होती थी, नई दुनिया थी। बाप ने ही नई दुनिया रची थी। बाप 16 कला बनाते हैं। कहते हैं बच्चे मनमनाभव, मामेकम् याद करो। यह है भगवानुवाच। उनको पतित-पावन कहा जाता है। कृष्ण को ज्ञान सागर नहीं कहेंगे। फिर गीता में कृष्ण का नाम क्यों डाला है! कोई द्वारा साक्षात्कार हुआ, कहेंगे बस यह कृष्ण का रूप है। दुनिया में तो अनेक प्रकार के मनुष्य हैं। किसी में भाव बैठ जाता है फिर उनका लाकेट बनाए गले में डाल देते हैं। गुरू का लाकेट पहन गुरू को याद करते हैं। बस ईश्वर सर्वव्यापी है फिर तो गुरू और ईश्वर में फ़र्क नहीं रहा। ऐसे ढेर हैं। बाप ने तुम बच्चों को पुरानी दुनिया और नई दुनिया का राज़ भी समझाया है। बाप बैठ नई दुनिया रचते हैं। अभी सब बाप को बुलाते रहते हैं। आकर पावन दुनिया स्थापन करो या हमको पावन बनाए ले चलो। धाम हैं दो – निर्वाणधाम और सुखधाम। सन्यासी तो मुक्ति के लिए नॉलेज देते हैं, जीवनमुक्ति के लिए दे नहीं सकते। तुम देवी-देवता धर्म वाले हो, जो पुजारी बने हो फिर पूज्य बनना है। श्रीकृष्ण सतयुग का प्रिन्स है, उनकी महिमा होती है। कुमार-कुमारी की ही महिमा होती है क्योंकि पवित्र हैं ना। नहीं तो कृष्ण से राधे की महिमा ज्यादा होनी चाहिए परन्तु यह किसको मालूम नहीं। पहले राधे फिर कृष्ण क्यों! कहते हैं राधे कृष्ण। कृष्ण राधे मुश्किल कोई कहेंगे। समझते हैं बच्चा वर्से का हकदार बनते हैं इसलिए कृष्ण की महिमा जास्ती है। यहाँ तुम सब हो बच्चे।

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बाप कहते हैं – जितना पुरूषार्थ करेंगे उतना अपने लिए ही ऊंच पद पायेंगे – कल्प-कल्पान्तर के लिए। बाप आत्माओं से बात कर रहे हैं। पुरूषार्थ से तुम ऊंच पद पा सकते हो। विलायत में बच्ची पैदा होती है तो खुशी मनाते हैं। यहाँ बच्चा पैदा हो तो खुश होते हैं। हर एक की रसम अपनी-अपनी है। तो बच्चों की बुद्धि में अब बैठा है कि बाप वर्सा देते हैं, फिर श्राप माया देती है। वह गॉड फादर स्वर्ग का रचयिता है। कृष्ण के लिए कभी कह न सकें, परमात्मा ही नर्क को स्वर्ग बनाते हैं। सहज ज्ञान और योग वही सिखलाते हैं। ऐसे ऐसे भाषण तुम कर सकते हो। गीता में कृष्ण का नाम डाल खण्डन कर दिया है। गीता का भगवान निराकार परमात्मा है न कि कृष्ण। श्रीकृष्ण तो रचना है। उनको भी वर्सा बाप से मिला। वह कैसे, आओ तो समझायें। कोई भी बात उठाकर उन पर समझाने लग जाओ। पुरानी दुनिया, नई दुनिया पर समझाने से उसमें सब आ जाता है। अभी अनेक धर्म हैं। उनके बीच आदि सनातन देवी-देवता धर्म की स्थापना हो रही है। कितना समझाया जाता है, इन 5 विकारों को छोड़ो। घर में भी किस पर क्रोध नहीं करो। ख्यालात आने चाहिए कि जैसा कर्म हम करेंगे, हमको देख फिर और करेंगे। मैं विकारी बनूँगा तो मुझे देख और भी विकारी बनेंगे। बाप फरमान करते हैं अब पवित्र बनो। स्त्री को भी पवित्र बनाओ। कोई पर क्रोध मत करो। तुमको देख वह भी करने लग पड़ेंगे। मेल तो रचयिता है तो स्त्री को भी समझाना चाहिए फिर अगर तकदीर में ही नहीं होगा तो क्या कर सकेंगे। समझाना है कि पवित्र बनो तो पवित्र दुनिया के मालिक बनेंगे। बाप समझाते हैं तुमने 84 जन्म कैसे लिये हैं। पहले तुम सतोप्रधान पावन थे। फिर रजो तमो बने हो। अब फिर तुम मुझे याद करो तो पावन बनेंगे। गीता के वरशन्स ही भगवान कह रहे हैं। गीता में कृष्ण का नाम डालने से उनकी सारी जीवन कहानी खत्म हो जाती है। समझाने की भी हिम्मत चाहिए। बाबा समझाते रहते हैं बहुत बच्चे समझते हैं हम तो शिवबाबा को ही मानते हैं, उनसे ही कल्याण होना है। भूल करते हैं तो बाबा ईशारा देते हैं। परन्तु कई बच्चे लून-पानी हो जाते हैं, लून-पानी थोड़ेही बनना है। समझाया जाता है कि ऐसे नहीं करो। कोई तो ऐसे हैं जो एक दो का रिगार्ड भी नहीं रखते हैं। अपने से बड़ों को तो तुम-तुम करके बात करते हैं। सेन्सीबुल बच्चों को सर्विस का बहुत शौक होना चाहिए। फलाना सेन्टर खुला है हम उन पर जाकर सर्विस करें। बिगर कहे जो करे सो देवता। कहने से करे वह मनुष्य, कहने से भी न करे तो…अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का यादप्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) सदा यह बात याद रखना है कि जो कर्म हम करेंगे, हमें देख और भी करने लग पड़ेंगे इसलिए कभी भी श्रीमत के विपरीत विकारों के वश हो कोई भी कर्म नहीं करना है।

2) सर्विस का शौक रखना है। बिगर कहे सेवा में लग जाना है। कभी भी आपस में लून-पानी नहीं होना है।

वरदान:- अपने भरपूर स्टॉक द्वारा खुशियों का खजाना बांटने वाले हीरो हीरोइन पार्टधारी भव 
संगमयुगी ब्राह्मण आत्माओं का कर्तव्य है सदा खुश रहना और खुशी बांटना लेकिन इसके लिए खजाना भरपूर चाहिए। अभी जैसा नाज़ुक समय नजदीक आता जायेगा वैसे अनेक आत्मायें आपसे थोड़े समय की खुशी की मांगनी करने के लिए आयेंगी। तो इतनी सेवा करनी है जो कोई भी खाली हाथ नहीं जाये। इसके लिए चेहरे पर सदा खुशी के चिन्ह हों, कभी मूड आफ वाला, माया से हार खाने वाला, दिलशिकस्त वाला चेहरा न हो। सदा खुश रहो और खुशी बांटते चलो-तब कहेंगे हीरो हीरोइन पार्टधारी।
स्लोगन:- एक दो की राय को रिगार्ड देना ही संगठन को एकता के सूत्र में बांधना है।

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TODAY MURLI 28 August 2017 DAILY MURLI (English)

Today Murli Brahma kumaris : 28 August 2017

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28/08/17
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, while sitting or moving around and doing everything, remain silent. Remember the Father and you will receive your inheritance. There is no need for songs or poetry.
Question: Which particular aspect is proven by the Father being called the Liberator?
Answer: If the Father is the One who liberates us from sorrow, that is, from the five vices, then it must surely be someone else who traps us in them. The Liberator can never trap you. He is called the Remover of Sorrow and the Bestower of Happiness. Therefore, how could He cause sorrow for anyone? Children remember that Father when they are unhappy. Ravan is the one who causes you sorrow. Ravan, Maya, curses you whereas the Father comes to give you your inheritance.
Song: The shower of knowledge is for those who are with the Beloved.

Om shanti. On this path of knowledge, there is no need for songs, poetry or dialogues etc. All of that is for the path of devotion. Here, it is a question of understanding. Everything has to be understood with the intellect; it is very easy, that is, this knowledge is very easy. You can start making effort with any one point. There is no need to listen to a song or to write poetry. You have to stay at home and also carry on with your business. The Father says: While doing all of that, how can you claim your inheritance from Me? He explains: While sitting or moving around and doing everything, just remain silent. Continue to have these internal thoughts. The Father has already explained: It is very easy to understand. It takes time for the new world to become the old world, but it doesn’t take that long for the old world to become new. It has been explained to you children that the Father makes the world new and that it then becomes old. This world is definitely made of happiness and sorrow, but no one knows who gives happiness and who causes sorrow. The world is already made. We cannot come out of this cycle. This is called the drama. It is better to say ‘dr ama’ than to say ‘play’. It is possible to change something in a play; it is possible to remove someone or add someone. Previously, there only used to be plays; it is only recently that bioscopes have emerged. Whatever film is shot in a bioscope, it is repeated. This bioscope has been created so that, knowledge can be understood accurately through it. There can be a change in a play but not in a bioscope. This is the story of the new, pure world and the old, impure world. People do not know the duration of the drama. They have given it a very long time span. Human beings cannot understand anything. In the new world, people were so sensible, wealthy and pure; they were full of all virtues. Why is Baba explaining in this way today? So that you children can go and give lectures. You should first of all praise Bharat. Who made Bharat like this? The praise of the Supreme Father, the Supreme Soul, whom everyone remembers, will also emerge. Why do they remember Him? Because there is a lot of sorrow in the old world. It is the five vices that cause sorrow. The golden and silver ages are called the land of happiness. That is God’s establishment. This is the devilish establishment where human beings get trapped in the five vices. They also understand that only the Father liberates them. How could the One who liberates you also be the one who traps you? His name is ‘The Remover of Sorrow and the Bestower of Happiness’. We wouldn’t say that He is the Bestower of Sorrow. No one knows that it is the five vices that cause sorrow and that the Father comes and liberates you from them. This is a matter of great understanding. It is now Ravan’s kingdom throughout the whole world; it is not a question of Lanka alone. Human beings have their own ideas. They just write whatever enters their intellects. The same applies to the scriptures: they have all made their own scriptures. Human beings do not know anything. God speaks: All that studying of the Vedas and scriptures, the sacrificial fires and the penance etc., that you have been doing, are all of the stage of descent. Whatever you have made has been to bring you down. The instructions you receive are for coming down because it is the stage of descent. It was a pure world, but it is now impure. For half a cycle, there is the new world and for half a cycle, there is the old world. It is just as there are 24 hours: when 12 hours have passed, day comes to an end and night comes. The day of Brahma and the night of Brahma have been remembered in the same way. You wouldn’t say: The day and night of Vishnu. These are such deep points. No one, except the Father, can explain these things to you. The Father explains: You now have to go from the tamopradhan stage into the satopradhan stage. Your kingdom is not established as yet. The Father explains to you children so easily. You simply have to remember Shiv Baba and change from tamopradhan to satopradhan. Only you innocent ones can understand these things. There is the new world and the old world, and the Father is the One who creates the new world. The new world was heaven. Then, who made it into hell? Ravan. It has been explained to you what Ravan is. No scholars or pundits will understand this. They just say that the world is false, that all of this is imagination. You can explain to them: If the world has not been created, then where are you sitting? This world repeats; you must have the full knowledge of it. Because they do not have this knowledge, they say that everything is false. They believe that whatever anyone related is the truth. You become happy with only one thing. The Father explains very clearly. The Father gave you your inheritance for half a cycle and then Ravan defeated you. This play is predestined. You children know that we now belong to God and that we are following His shrimat. These pictures are very good. Everyone should have large pictures. It is good to explain using large pictures. The cycle is in front of you. The confluence age is also in front of you. The iron age is ugly and impure. Due to the alloy of iron, it has become ugly. Bharat was so golden aged ! It now has to change from the iron age. That has to be established and this has to be destroyed. It is sung that the Supreme Father, the Supreme Soul, is Trimurti. No one understands the meaning of the Trimurti. They have even named roads, ‘Trimurti’. In fact, the Trimurti is Brahma, Vishnu and Shankar. Each of the three deities is distinct. Above them is the Supreme Father, the Supreme Soul, Shiva, Karankaravanhar (the One who acts and acts through others) who is the highest of all. They have removed Him. Even higher than the deities is incorporeal God. We souls are incorporeal just as the Father is incorporeal. We have come here to play our parts. It used to be the dynasty of Lakshmi and Narayan. They ruled one after another. Therefore, you have to tell people the praise of heaven: Bharat was so wealthy! There was purity, peace and prosperity. There was no untimely death. It was the new world. The Father created the new world. He makes you 16 celestial degrees full. He says: Children, manmanabhav! Constantly remember Me alone. These are God’s versions. He is called the Purifier. You cannot call Krishna ‘The Ocean of Knowledge’; so why have they put Krishna’s name in the Gita? They have a vision of Krishna through someone, and they say: This is the image of Krishna. There are many types of people in the world. They develop faith in someone and then wear locket s of that one around their necks. They wear locket s of their guru and remember him. They say “God is omnipresent”, and so there is no difference between their guru and God. There are many like them. The Father has explained to you children the significance of the old world and the new world. He sits here and makes the world new. Everyone now continues to call out to Him: Come and establish the pure world! Or: Make us pure and take us with You! There are two lands: the land of nirvana and the land of happiness. Sannyasis give knowledge of liberation; they cannot give knowledge for liberation-in-life. You belonged to the deity religion and then became worshippers. You again have to become worthy of being worshipped. Shri Krishna is the first prince of the golden age. There is his praise. There is the praise of kumars and kumaris because they remain pure. Otherwise, there should be greater praise of Radhe than of Krishna. No one knows why they put Radhe before Krishna. They say: Radhe-Krishna. Scarcely anyone says: Krishna-Radhe. They understand that the son has the right to the inheritance. Therefore, there is greater praise of Krishna. Here, all of you are children. The Father says: To the extent that you make effort, accordingly you will claim a high status for yourself, cycle after cycle. The Father is talking to souls. By making effort, you can claim a high status. In foreign lands, when a daughter is born they celebrate in happiness, whereas here, they become happy when a son is born. All have their own customs and traditions. It is now in the intellects of you children that the Father gives you the inheritance and that Maya then curses you. God, the Father, is the Creator of heaven; you would not say this of Krishna. Only the Supreme Soul changes hell into heaven. Only He teaches easy gyan and yoga. You can give lectures in this way: They have falsified the Gita by putting Krishna’s name in it. The God of the Gita is incorporeal God and not Shri Krishna. Shri Krishna is the creation. He received the inheritance from the Father. Come and we will explain to you. Take up any subject and start explaining it. Everything is included in the explanation of the old world and the new world. At present, there are numerous religions and, in the midst of them all, the original eternal deity religion is being established. It has been explained to you so much that you must renounce the five vices. Do not get angry with anyone at home. You should have this thought: Whatever others see me do, they will do the same. If I become full of vices, anyone who sees me will also become full of vices. The Father issues this ordinance: Become pure and make your wife pure as well. Do not get angry with anyone. By seeing you, they too would get angry. Males are the creators, and so they should explain to their wives. However, if it is not in their fortune, what can be done? You have to explain: If you become pure, you become the masters of the pure world. The Father explains how you have taken 84 births. At first, you were satopradhan, pure, then you became rajo and then tamo. Now, if you remember Me, you will become pure. God is speaking the versions of the Gita. By Krishna’s name being inserted in the Gita, his whole life story becomes meaningless. You must have the courage to explain. Baba continues to explain. Many children think that they will only believe in Shiv Baba, that there is benefit only through Him. If they make mistakes, Baba gives them a signal. However, some children become like salt water. You should not become like salt water. It is explained to you that you must not become like that. Some children are such that they don’t have regard for one another. They are very impolite to their seniors. Sensible children should be very interested in doing service. “Such and such a centre has opened, and so let me go and do some service there.” Those who act without being asked are deities; those who act after being asked are humans and those who do not do anything even after being asked are… Achcha.

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To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. Always remember: When others see you doing something, they will do the same. Therefore, never perform any act under the influence of the vices against shrimat.
  2. You have to be interested in doing service. Engage yourself in service without being asked. Never become like salt water with one another.
Blessing: May you be a hero/heroine actor who shares the treasures of happiness with your overflowing stock.
The duty of confluence-aged Brahmin souls is to remain constantly happy and to share happiness, but for this, your treasures have to be overflowing. Now, as delicate times continue to come closer, many souls will come to you to ask for happiness for even a short time. So, you have to do so much service that no one goes back empty handed. For this, let there always be the sign of happiness on your face. Let your face not be of an off-mood, of being defeated by Maya or of being disheartened. Remain constantly happy and continue to share happiness and you will then be called a hero/heroine actor.
Slogan: To give regard to the advice of one another is to tie the gathering in the thread of unity.

*** Om Shanti ***

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