bkmurli 10 october 2017

BRAHMA KUMARIS MURLI 10 OCTOBER 2017 : DAILY MURLI (HINDI)

 

10/10/17
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन

 

”मीठे बच्चे – तुम कर्मयोगी हो, कर्म करते हुए बाप की याद में रहो, याद में रहने से कोई भी विकर्म नहीं होगा”
प्रश्नः- बाप से बुद्धियोग न लगने का मुख्य एक कारण है – वह कौन सा?
उत्तर:- लोभ। कोई भी विनाशी चीज़ों में लोभ होगा, खाने का वा पहनने का शौक होगा तो उनकी बुद्धि बाप से नहीं लग सकती इसलिए बाबा विधि बताते हैं बच्चे लोभ रखो – बेहद के बाप से वर्सा लेने का। बाकी किसी भी चीज़ में लोभ नहीं रखो। नहीं तो जिस चीज़ से अधिक प्यार होगा वही चीज़ अन्त में भी याद आयेगी और पद भ्रष्ट हो जायेगा।
गीत:- जाग सजनियां जाग…

ओम् शान्ति। अभी यह तो बच्चे जानते हैं यूँ तो सारी दुनिया में सब कहते हैं कि हम सभी आपस में भाई-भाई हैं। वी आर आल ब्रदर्स। परन्तु क्यों नहीं उन आत्माओं को यह समझ में आता है कि हम बाप के बच्चे हैं। वह रचयिता है, हम रचना हैं। जानवर तो नहीं कहेंगे हम ब्रदर्स हैं। मनुष्य ही समझते हैं और कहते भी हैं कि हम सब ब्रदर्स हैं। रचता बाप एक है। उसको कहा जाता है परमपिता परमात्मा। ऐसे हो नहीं सकता कि बहन को भाई कहें। जब सब अपने को आत्मा समझते हैं तब कहते हैं हम आपस में भाई-भाई हैं। सिवाए आत्मा के और कुछ हो नहीं सकता। एक बाप के जिस्मानी बच्चे तो इतने नहीं हो सकते। अभी तुमको अच्छी तरह याद है कि हम आपस में भाई-भाई हैं। बाप बैठ बच्चों को पढ़ाते हैं। भगवानुवाच – हे बच्चों, तो बहुतों को पढ़ाते हैं ना। सिर्फ ऐसे नहीं कहेंगे हे अर्जुन, एक का नाम नहीं लेंगे। सबको पढ़ाते हैं। स्कूल में मास्टर कहेंगे ना – हे बच्चों, अच्छी तरह पढ़ो। हैं तो स्टूडेन्ट। परन्तु टीचर बड़ा, बुजुर्ग है इसलिए स्टूडेन्ट को बच्चे-बच्चे कहते हैं। वहाँ कोई अपने को आत्मा तो समझते नहीं हैं। वहाँ तो जिस्मानी सम्बन्ध ही रहता है। जैसे गांधी को बापू का मर्तबा दे दिया है। मेयर को भी फादर कहते हैं। ऐसे मर्तबे तो बहुतों को देते हैं। यहाँ तो तुम समझते हो हम आत्मायें भाई-भाई हैं। तो भाईयों का बाप जरूर चाहिए। सब आत्मायें जानती हैं वह हमारा बाप है जिसको गॉड फादर कहते हैं। यह आत्मा ने कहा हमारा गॉड फादर। लौकिक फादर को गॉड नहीं कहेंगे। तुम जानते हो हम आत्मा हैं। बाबा हमको पढ़ाने आये हैं अर्थात् पतितों को पावन बनाने आये हैं। हमको पतित से पावन बनाकर और फिर पावन दुनिया का मालिक बनाते हैं। यह बातें कोई भी जानते नहीं। यहाँ तुम बच्चे जानते हुए भी फिर कर्म करने में भूल जाते हो। याद में रहो तो विकर्म नहीं होगा। कर्मयोगी तो तुम हो ही। सन्यासियों का है कर्म सन्यास। सिर्फ ब्रह्म तत्व से योग लगाते हैं। परन्तु सारा दिन तो योग लगा नहीं सकते। ब्रह्म में जाने के लिए योग रखते हैं। समझते हैं ब्रह्म को याद करने से हम ब्रह्म में लीन हो जायेंगे। परन्तु सारा दिन तो ब्रह्म को याद कर नहीं सकते और उस याद से विकर्म भी विनाश नहीं होते हैं। गाया हुआ है पतित-पावन। वह तो बाप ही है। ऐसे तो नहीं कहते पतित-पावन ब्रह्म अथवा पतित-पावन तत्व। सब बाप को ही पतित-पावन कहते हैं। ब्रह्म को कोई फादर नहीं कहते। न ब्रह्म की कोई तपस्या करते। शिव की तपस्या करते हैं। शिव का मन्दिर भी है। तत्व का मन्दिर बन सकेगा क्या? ब्रह्म में तो अण्डे सदृश्य आत्मायें रहती हैं इसलिए शास्त्रों में ब्रह्माण्ड कहा है। यह नाम कोई है नहीं। वो घर है, जैसे आकाश तत्व में कितने साकारी मनुष्य रहते हैं वैसे वहाँ फिर आत्मायें रहती हैं।

तुम बच्चे जानते हो बाबा से हम ड्रामा के आदि-मध्य-अन्त की नॉलेज ले सारे राज़ को जानकर, सारे झाड़ की नॉलेज समझकर मास्टर बीजरूप बन जाते हैं। परमपिता परमात्मा में सारी नॉलेज है, हम उनके बच्चे हैं। वह बैठ समझाते हैं। इस कल्प वृक्ष की उत्पत्ति, पालना और संहार कैसे होता है, उत्पत्ति कहने से जैसे नई दुनिया उत्पन्न करते हैं। स्थापना अक्षर ठीक है। ब्रह्मा द्वारा पतितों को पावन करते हैं। पतित-पावन अक्षर जरूर चाहिए। सतयुग में सब सद्गति में हैं, कलियुग में सब दुर्गति में हैं। क्यों, कैसे दुर्गति हुई? यह कोई को पता नहीं। गाते भी हैं सर्व का सद्गति दाता एक है। आत्मा समझती है – यह एक खेल है। बाप की महिमा गाते हैं ”सदा शिव।” सुख देने वाला शिव, गाते भी हैं दु:ख हर्ता सुख कर्ता। भारत में लक्ष्मी-नारायण का राज्य था। अब तो नहीं है। लक्ष्मी-नारायण को भगवती भगवान कहते हैं, उन्हों की राजधानी किसने स्थापन की? भगवान निराकार है, उनसे आत्मायें वर्सा पाती हैं। आत्मा ही 84 जन्म लेते-लेते गिरती आती है। गिरते-गिरते दुर्गति को पाती है। यह बात समझानी है, परमात्मा सर्वव्यापी नहीं है। वह बाप सद्गति दाता है, हम सब भाई-भाई हैं, न कि बाप। ऐसे थोड़ेही कहा जाता है – फादर ने ब्रदर्स का रूप धरा है। नहीं, इसलिए पहले यह बताओ कि परमपिता परमात्मा से तुम्हारा क्या सम्बन्ध है? लौकिक सम्बन्ध को तो सब जानते हैं। आत्माओं का है निराकार बाप। उनको हेविनली गॉड फादर कहते हैं। फादर ने जरूर नई रचना का मालिक बनाया होगा। अभी हम मालिक नहीं हैं। हम सुखी थे। दु:खी किसने बनाया? यह नहीं जानते। आधाकल्प से रावण का राज्य चला है तो भारत की यह हालत हुई है। भारत परमपिता परमात्मा की बर्थ प्लेस है। भारत में भगवान आया है। जरूर स्वर्ग स्थापन किया होगा। शिव जयन्ती भी मनाई जाती है। तुम लिख भी सकते हो – हम फलाना बर्थ डे मना रहे हैं। तो मनुष्य वन्डर खायेंगे, यह क्या कहते हैं? बधाई भी दो। बताओ हम पतित-पावन, सद्गति दाता परमपिता परमात्मा शिव की जयन्ती मना रहे हैं। उस दिन बहुत शादमाना करना चाहिए। सर्व के सद्गति दाता की जयन्ती कम बात है क्या? एरोप्लेन द्वारा पर्चे बड़े-बड़े शहरों में गिराने चाहिए। तो अखबारों में भी पड़ेगा। बहुत सुन्दर-सुन्दर कार्ड बनाने चाहिए। मोस्ट बिलवेड बाप की बहुत महिमा लिखनी चाहिए। भारत को फिर से स्वर्ग बनाने आया है। वही बाप राजयोग सिखला रहे हैं। वर्सा भी वही देते हैं। बहुत भभके के शिव जयन्ती के कार्ड छपाने चाहिए। प्लास्टिक पर भी छप सकते हैं। परन्तु अजुन छोटी बुद्धि हैं, राजा रानी तो कोटों में कोई बनेगा। बाकी जरूर अलबेले जो होंगे वह प्रजा बनेंगे। माला 108 की है, बाकी प्रजा तो बहुत होगी। ऐसे भी नहीं हम तो अलबेले हैं, खूब पुरुषार्थ करना चाहिए। बाबा समझाते बहुत हैं परन्तु अमल में मुश्किल लाते हैं। यहाँ अपने को अल्लाह के बच्चे समझते हैं, बाहर निकलने से माया उल्लू बना देती है, इतनी कड़ी माया है। राजाई लेने वाले थोड़े निकलते हैं। चन्द्रवंशी को भी हम नापास कहेंगे। तुम सबकी पढ़ाई और पद को जानते हो। दुनिया में रामचन्द्र के पद को कोई जानता होगा? बाबा अच्छी तरह समझाते हैं। कैसे हम शिव जयन्ती के लिए फर्स्टक्लास निमंत्रण बनावें जो मनुष्य चक्रित हो जाएं। विचार सागर मंथन गाया हुआ है। शिवबाबा को थोड़ेही विचार सागर मंथन करना है। यह बच्चों का काम है। बाबा राय देते हैं – किसकी बुद्धि में आये और काम न करे तो बाबा उनको अनाड़ी कहेंगे। बच्चे जानते हैं परमपिता परमात्मा हमको ब्रह्मा द्वारा विष्णुपुरी का मालिक बना रहे हैं। शंकर द्वारा विनाश होना है। त्रिमूर्ति ऊपर खड़ा है।

तुम सब पण्डे हो जो रूहानी यात्रा सिखलाते हो। तुम भी लिख सकते हो – सत्य मेव जयते… बरोबर सत्य बाबा हमको विजय पाना सिखलाते हैं अथवा विजय प्राप्त कराते हैं। कोई एतराज उठावे तो उनको समझाना है। बाबा का ख्याल चला कि शिव जयन्ती कैसे मनानी चाहिए। गीता का भगवान शिव है, न कि कृष्ण – इसका बहुत प्रचार करना है। वह रचयिता, वह रचना। वर्सा किससे मिलेगा? श्रीकृष्ण है पहली रचना। दिखाया है सागर में पीपल के पत्ते पर कृष्ण आया। यह है गर्भ महल की बात। स्वर्ग में गर्भ महल में मौज रहती है। यहाँ नर्क में गर्भ जेल में फथकते हैं। सतयुग में गर्भ महल, कलियुग में गर्भ जेल होता है। कृष्ण का चित्र कितना अच्छा है। नर्क को लात मार रहे हैं। कृष्ण के 84 जन्म भी लिखे हुए हैं। भगवानुवाच, तुम अपने जन्मों को नहीं जानते हो, मैं तुमको बतलाता हूँ। तो जिसने पूरे 84 जन्म लिए हैं उनको ही समझाता हूँ। कितना सहज है। साथ में मैनर्स भी चाहिए। लोभ रखना चाहिए – बेहद के बाप से वर्सा लेने का और कोई चीज़ का लोभ नहीं इसलिए ऐसी कोई चीज़ अपने पास नहीं रखनी चाहिए जो बुद्धि जाये। नहीं तो पद भ्रष्ट हो जायेगा। देह सहित जो कुछ है सबसे बुद्धि निकालनी है। एक बाप को याद करना है। कोई मनुष्य बहुत फर्नीचर रखने वाला होगा तो मरने समय वह याद आता रहेगा। जिस वस्तु से जास्ती प्यार होगा वह पिछाड़ी में याद जरूर आयेगी। बाप बच्चों को समझाते हैं कोई भी चीज़ लोभ के वश छिपाकर मत रखो। यज्ञ से हर चीज़ मिल सकती है। छिपाके कुछ रखा तो बुद्धि जरूर लटकेगी। बाबा का फरमान है – शिवबाबा का भण्डारा है – बच्चों को सब कुछ मिलना है। ऐसा भी ख्याल नहीं आना चाहिए कि फलाने को साड़ी अच्छी पड़ी है, हम भी पहनें। अरे तुम बाप से राजाई का वर्सा लेने आई हो कि साड़ी का वर्सा लेने आई हो? जो अच्छी सर्विस करते हैं उन पर सब कुर्बान जाते हैं। बोलो, हम सिवाए शिव के भण्डारे से मिले हुए और कुछ पहन नहीं सकती। हम यज्ञ से ही लेंगी तो बाबा की याद रहेगी। शिवबाबा के भण्डारे से यह मिला। नहीं तो चोरी आदि की आदत पड़ जाती है। अरे यहाँ पीफाइज़ (त्याग) करेंगे तो वहाँ बहुत फर्स्टक्लास चीज़ें मिलेंगी। शिवबाबा कहाँ-कहाँ बच्चों की परीक्षा भी लेते हैं। देखें कितना देह-अभिमान है। तुम्हारा वायदा है – जो खिलायेंगे, जो पहनायेंगे… आदि। दिल में समझना चाहिए – यह शिवबाबा देते हैं। इतनी फर्स्टक्लास अवस्था होनी चाहिए। बाबा से पूरा वर्सा लेना है तो श्रीमत पर पूरा-पूरा पुरूषार्थ करो। बाबा की राय पर चलो। बाबा मम्मा कहते हो तो पूरा-पूरा फालो करो। सबको रास्ता बताओ। बाबा से वर्सा मिला था, अब फिर मिल रहा है। याद की यात्रा करते रहो। बाबा समझाते हैं – तुम जितना रूसतम बनेंगे उतना माया ज़ोर से आयेगी। तुम मूँझते क्यों हो? कोई-कोई बच्चे को बाबा लिखते हैं तुम तो बहुत अच्छी सर्विस करने वाले हो। माया के तूफान आयेंगे – क्या सारी आयु ब्रह्मचर्य में रहेंगे? बुढ़ापे में भी आकर चकरी लगेगी। शादी करें, यह करें। माया बूढ़े को भी जवान बना देगी। ऐसा फथकायेगी। तुम डरते क्यों हो? भल कितना भी तूफान आये, बाबा को याद करने से बच जायेंगे। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमार्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) लोभ के वश कोई भी चीज़ छिपाकर अपने पास नहीं रखनी है। बाप के फरमान पर चलते रहना है।

2) बाबा जो खिलाये, जो पहनाये, एक शिवबाबा के भण्डारे से ही लेना है। देह-अभिमान में नहीं आना है। मम्मा बाबा को पूरा फालो करना है।

वरदान:- सत्यता की हिम्मत से विश्वास का पात्र बनने वाले बाप वा परिवार के स्नेही भव
विश्वास की नांव सत्यता है। दिल और दिमाग की ऑनेस्टी है तो उसके ऊपर बाप का, परिवार का स्वत: ही दिल से प्यार और विश्वास होता है। विश्वास के कारण फुल अधिकार उसको दे देते हैं। वे स्वत: ही सबके स्नेही बन जाते हैं इसलिए सत्यता की हिम्मत से विश्वासपात्र बनो। सत्य को सिद्ध नहीं करो लेकिन सिद्धि स्वरूप बन जाओ तो तीव्रगति से आगे बढ़ते रहेंगे।
स्लोगन:- सबसे अधिक धनवान वह है जिसके पास शान्ति व पवित्रता का खजाना है।

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TODAY MURLI 10 OCTOBER 2017 DAILY MURLI (English)

 

10/10/17
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, you are karma yogis. While performing actions, stay in remembrance of the Father. By staying in remembrance, you won’t perform sinful actions.
Question: What is one main reason for not being able to connect your intellect’s yoga to the Father?
Answer: Greed. If there is greed for perishable things or an interest in eating good food or wearing good clothes, then that person’s intellect would not be connected to the Father. This is why Baba shows you a method: Children, just have greed for claiming your inheritance from the unlimited Father. Don’t have greed for anything else. If you do, the thing you love the most will be remembered at the end and your status will be destroyed.
Song: Awaken o brides, awaken! The new age is about to dawn.

Om shanti. You children know that the whole world says, “We are all brothers.” So, why are those souls not able to understand that they are children of the one Father; that He is the Creator and we are the creation? Animals wouldn’t say that they are brothers. It is human beings who understand and say that they are all brothers. The Father, the Creator, is only One. He is called the Supreme Father, the Supreme Soul. It is not possible that a sister would be called a brother. When all of you consider yourselves to be souls, you say that you are brothers. There couldn’t be anything other than souls. There couldn’t be so many physical children of one father. You now remember very well that you are all brothers. The Father sits here and teaches you children. God speaks: O children! Therefore, He is teaching many, is He not? He would not say, “O Arjuna”, to just one person. He would not mention the name of just one person. He is teaching everyone. In a school , the master would say: O children, study very well! They are students, but the teacher is mature and so he calls the students ‘children’. There, no one considers himself to be a soul. They just have physical relationships. Gandhiji was given the status of Bapu (father); a mayor is also called f ather. Such a status is given to many. Here, you souls understand that you are brothers. Therefore, brothers definitely need the Father. All souls know that He is their Father and that He is called God, the Father. Souls say: He is God, our Father. A physical father would not be called God. You know that you are souls. Baba has come to teach you. That is, He has come to purify the impure. He will make us pure from impure and make us into the masters of the pure world. No one knows these things. You know them here, but you forget them when you perform actions. Stay in remembrance and you won’t perform sinful actions. You are karma yogis. Sannyasis have renunciation of karma. They simply have yoga with the brahm element. However, they are unable to have yoga throughout the whole day. They have yoga in order to go to the brahm element. They feel that by remembering the brahm element they will merge into it. However, they’re unable to remember the brahm element throughout the whole day. Their sins cannot be absolved through that remembrance. The Purifier is remembered. Only the Father is that. They don’t call the brahm element or other elements the Purifier. Everyone calls the Father, the Purifier. No one calls brahm, the Father, nor does anyone do tapasya of the brahm element; they do tapasya of Shiva. There are temples to Shiva. Can a temple be built to the elements? Souls reside in the brahm element in their egg form and this is why the name ‘Brahmand’ is mentioned in the scriptures. That is not really a name, for it is the home. For instance, so many corporeal human beings reside beneath the sky element and so souls reside up there in the same way. You children know that you receive the knowledge of the beginning, the middle and the end of the whole drama from Baba. You come to know all the secrets; you understand the knowledge of the whole tree and then become master seeds. The Supreme Father, the Supreme Soul, has all knowledge and we are His children. He sits here and explains to us how this kalpa tree is created, sustained and destroyed. When you speak of creation, it is as though He creates a new world. The word ‘establishment’ is better. He purifies the impure through Brahma. The word ‘Purifier’ is definitely needed. Everyone in the golden age is in salvation whereas everyone in the iron age is in degradation. Why? How did degradation take place? No one knows this. They sing that the Bestower of Salvation for all is One. The soul understands that this is a play. They sing praise of the Father as ‘Sada Shiva’ (Constantly Benevolent). Shiva is the One who gives happiness. He is remembered as the Remover of Sorrow and the Bestower of Happiness. There used to be the kingdom of Lakshmi and Narayan in Bharat. It is no longer that. Lakshmi and Narayan are called a goddess and god. Who established their kingdom? God is incorporeal and souls receive the inheritance from Him. It is souls that take 84 births and continue to descend. While descending, they become degraded. You have to explain that God is not omnipresent. That Father is the Bestower of Salvation and we are all brothers; we are not the Father. It is not said that the Father adopted the form of brothers; no. This is why you first have to ask them: What is your relationship with the Supreme Father, the Supreme Soul? They all know their physical relations. The incorporeal One is the Father of souls. He is called Heavenly God, the Father. The Father must definitely have made you into the masters of the new creation. We are no longer the masters. We were happy. So, who made us unhappy? People don’t know this. Ravan’s kingdom has continued for half the cycle. Therefore this has become the condition of Bharat. Bharat is the birthplace of the Supreme Father, the Supreme Soul. God came in Bharat. He must definitely have established heaven. The birthday of Shiva is also celebrated. You can even write: For example, we are now celebrating such and such a bir thday. People would be amazed at what you say. Also give them greetings and tell them that you are celebrating the birthday of the Purifier, the Bestower of Salvation, the Supreme Father, the Supreme Soul, Shiva. On that day, you should have a lot of celebration and festivity. The birthday of the Bestower of Salvation for all is not a small thing. You should drop leaflets from aeroplanes over big cities; it would then also be printed in the newspapers. You should make very beautiful cards. You should write a lot of praise of the most beloved Father. He has come to make Bharat into heaven once again. That same Father is teaching Raja Yoga. He is the One who also gives the inheritance. You should print attractive cards for Shiva’s birthday. You can even print them on plastic. However, as yet, your intellects are very small (limited). Only a handful out of multimillions will become kings and queens whereas those who are careless will surely become subjects. There is the rosary of 108, but there will be many subjects. Don’t just think that you are careless, but make a lot of effort. Baba explains a great deal, but you scarcely put anything into practice. Here, you consider yourselves to be the children of God (Allah) but when you go outside, Maya makes you into bats (ullu). Maya is so strong. Only a few will emerge to claim the kingdom. Even the moon dynasty is considered to be of those who failed. You know everyone’s study and their status. Would anyone in the world know the status of Ramachandra? Baba explains to you very well how you should print firstclass invitation cards for Shiv Jayanti so that people are amazed by them. The churning of the ocean of knowledge has been remembered. Shiv Baba doesn’t have to churn the ocean. This is the duty of you children. Baba advises you: If something enters the intellect of someone, but he doesn’t put it into practice, Baba would call him a fool. You children know that the Supreme Father, the Supreme Soul, is making you into the masters of the land of Vishnu through Brahma. Destruction has to take place through Shankar. The Trimurti is up above. You are all guides who teach the spiritual pilgrimage. You can even write: Truth brings victory. Truly, the true Baba is teaching us how to gain victory, that is, He is enabling us to gain victory. If someone objects to this, you can explain to him. Baba was thinking about how Shiv Jayanti should be celebrated. The God of the Gita is Shiva, not Krishna. You have to make this widely known. That One is the Creator whereas this one is the creation. From whom would you receive the inheritance? Shri Krishna is the first creation. They have portrayed Krishna arriving on a pipal leaf floating on the ocean. This refers to the palace of a womb. In heaven, there is pleasure in the palace of a womb. Here, in hell, a child would be agitated in the jail of a womb. In the golden age, the womb is a palace whereas in the iron age the womb is a jail. The picture of Krishna is so good: he is kicking hell away. You have written about the 84 births of Krishna. God speaks: You don’t know your own births. I tell you about them. Therefore, I explain to those who have taken the full 84 births. It is so easy! Manners are also required. There should be greed for claiming your inheritance from the unlimited Father and not for anything else. Therefore, you mustn’t keep anything that would pull your intellect. Otherwise, your status will be destroyed. Remove your intellect from everything including your body. Remember the one Father. If someone has accumulated a lot of furniture , he would remember that when he dies. Whatever you have a lot of love for, that will definitely be remembered at the end. The Father explains to you children: Don’t keep anything hidden away due to greed. You can receive everything from the yagya. If you keep something secretly hidden away, your intellect will dangle after that. Baba’s orders are: This is Shiv Baba’s treasure-store. Children should receive everything from here. You shouldn’t even have the thought: So-and-so has a good sari, so I too should wear one like that. Oho, have you come to the Father to claim your inheritance of the kingdom or the inheritance of a sari? Everyone has great regard for those who do good service. Tell them: I cannot wear anything except that which I have received from Shiva’s treasure-store. I will receive everything from just the yagya. Then, there will be remembrance of Baba: I received this from Shiv Baba’s treasure-store. Otherwise, the habit of stealing will be instilled. Only if you sacrifice yourself here will you receive many firstclass things there. Sometimes, Shiv Baba even tests the children and sees how much body consciousness they have. You have promised: Whatever You feed me, whatever You give me to wear… You should understand in your hearts that Shiv Baba gave you that. You should have such a first-class stage. If you want to claim your full inheritance from Baba, then make full effort by following shrimat. Follow Baba’s advice. Since you say, “Mama, Baba”, follow them completely. Show everyone the path. We received our inheritance from Baba and we are receiving it once again. Continue to stay on the pilgrimage of remembrance. Baba explains: The more powerful you become, that much more strongly Maya will come to you. Why do you become confused? Baba writes to some children: You are going to do very good service. However, storms of Maya then come: Am I going to remain celibate all my life? Even in old age, your intellects will spin in this way: I want to get married; I want to do this. Maya makes even old ones become young again. She will harass them a great deal. Why are you afraid? No matter how many storms come, you will be saved by remembering Baba. Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and goodmorning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. Don’t keep anything secretly hidden with you due to greed. Continue to follow the Father’s directions.
  2. Whatever Baba feeds you and whatever He gives you to wear, take everything from Shiv Baba’s treasure-store. Don’t become body conscious. Follow Mama and Baba completely.
Blessing: May you be loving to the Father and the family and with the courage of truth, become trustworthy.
The boat of faith is truth. When there is honesty in your heart and head, there is then automatically love from the heart and trust from the Father and the family. Because of having that trust, such a soul is given full rights. Such souls are automatically loved by all and this is why you have to become trustworthy with the courage of truth. Do not try to prove the truth, but become an embodiment of success and you will continue to move forward at a fast speed.
Slogan: The wealthiest of all is one who has the treasures of peace and purity.

*** Om Shanti ***

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