8 august ki murli

BRAHMA KUMARIS MURLI TODAY 8 AUGUST 2020 : AAJ KI MURLI

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 8 August 2020

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08-08-2020
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन
“मीठे बच्चे – जैसे बाप गाइड है, ऐसे गाइड बन सबको घर का रास्ता बताना है, अंधों की लाठी बनना है”
प्रश्नः- इस बने-बनाये अनादि ड्रामा का राज़ कौन सा है, जो तुम बच्चे ही जानते हो?
उत्तर:- यह बना बनाया अनादि ड्रामा है इसमें न तो कोई एक्टर एड हो सकता है, न कोई कम हो सकता है। मोक्ष किसी को भी मिलता नहीं। कोई कहे कि हम इस आवागमन के चक्र में आयें ही नहीं। बाबा कहते हाँ कुछ समय के लिए। लेकिन पार्ट से कोई बिल्कुल छूट नहीं सकते। यह ड्रामा का राज़ तुम बच्चे ही जानते हो।

ओम् शान्ति। मीठे-मीठे बच्चे यह जानते हैं कि भोलानाथ किसको कहा जाता है। तुम संगमयुगी बच्चे ही जान सकते हो, कलियुगी मनुष्य रिंचक भी नहीं जानते। ज्ञान का सागर एक बाप है, वही सृष्टि के आदि-मध्य-अन्त का ज्ञान समझाते हैं। अपनी पहचान देते हैं। तुम बच्चे अभी समझते हो, आगे कुछ नहीं जानते थे। बाप कहते हैं मैं ही आकर भारत को स्वर्ग बनाता हूँ, बेहद का वर्सा देता हूँ। जो तुम अभी ले रहे हो। जानते हैं हम बेहद के बाप से बेहद सुख का वर्सा ले रहे हैं। यह बना बनाया ड्रामा है, एक भी एक्टर न एड हो सकता, न कम हो सकता है। सभी को अपना-अपना पार्ट मिला हुआ है। मोक्ष को पा नहीं सकते। जो-जो जिस धर्म का है फिर उस धर्म में जाने वाले हैं। बौद्धी वा क्रिश्चियन आदि इच्छा करें हम स्वर्ग में जायें, परन्तु जा नहीं सकते। जब उनका धर्म स्थापक आता है तब ही उनका पार्ट है। यह तुम बच्चों की बुद्धि में है। सारी दुनिया के मनुष्य मात्र इस समय नास्तिक हैं अर्थात् बेहद के बाप को न जानने वाले हैं। मनुष्य ही जानेंगे ना। यह नाटकशाला मनुष्यों की है। हर एक आत्मा निर्वाणधाम से आती है पार्ट बजाने। फिर पुरूषार्थ करती है निर्वाणधाम में जाने के लिए। कहते हैं बुद्ध निर्वाण गया। अब बुद्ध का शरीर तो नहीं गया, आत्मा गई। परन्तु बाप समझाते हैं, जाता कोई भी नहीं है। नाटक से निकल ही नहीं सकते। मोक्ष पा नहीं सकते। बना-बनाया ड्रामा है ना। कोई मनुष्य समझते हैं मोक्ष मिलता है, इसलिए पुरूषार्थ करते रहते हैं। जैसे जैनी लोग पुरूषार्थ करते रहते हैं, उनकी अपनी रस्म-रिवाज है, उनका अपना गुरू है, जिसको मानते हैं। बाकी मोक्ष किसको भी मिलता नहीं है। तुम तो जानते हो हम पार्टधारी हैं, इस ड्रामा में। हम कब आये, फिर कैसे जायेंगे, यह किसको भी पता नहीं है। जानवर तो नहीं जानेंगे ना। मनुष्य ही कहते हैं हम एक्टर्स पार्टधारी हैं। यह कर्मक्षेत्र है, जहाँ आत्मायें रहती हैं। उनको कर्मक्षेत्र नहीं कहा जाता। वह तो निराकारी दुनिया है। उसमें कोई खेलपाल नहीं है, एक्ट नहीं। निराकारी दुनिया से साकारी दुनिया में आते हैं पार्ट बजाने, जो फिर रिपीट होता रहता है। प्रलय कभी होती ही नहीं। शास्त्रों में दिखाते हैं – महाभारत लड़ाई में यादव और कौरव मर गये, बाकी 5 पाण्डव बचे, वह भी पहाड़ों पर गल मरे। बाकी कुछ रहा नहीं। इससे समझते हैं प्रलय हो गई। यह सब बातें बैठ बनाई हैं, फिर दिखाते हैं समुद्र में पीपल के पत्ते पर एक बच्चा अंगूठा चूसता आया। अब इनसे फिर दुनिया कैसे पैदा होगी। मनुष्य जो कुछ सुनते हैं वह सत-सत करते रहते हैं। अभी तुम बच्चे जानते हो कि शास्त्रों में भी क्या-क्या लिख दिया है। यह सब हैं भक्ति मार्ग के शास्त्र। भक्तों को फल देने वाला एक भगवान बाप ही है। कोई मुक्ति में, कोई जीवनमुक्ति में चले जायेंगे। हर एक पार्टधारी आत्मा का जब पार्ट आयेगा तब फिर आयेगी। यह ड्रामा का राज़ सिवाए तुम बच्चों के और कोई नहीं जानते। कहते हैं हम रचता और रचना को नहीं जानते। ड्रामा के एक्टर्स होकर और ड्रामा के आदि-मध्य-अन्त, ड्युरेशन आदि को न जानें तो बेसमझ कहेंगे ना। समझाने से भी समझते नहीं। 84 लाख समझने कारण ड्युरेशन भी लाखों वर्ष दे देते हैं।

अभी तुम समझते हो बाबा हम आपसे कल्प-कल्प आकर स्वर्ग की बादशाही लेते हैं। 5 हज़ार वर्ष पहले भी आपसे मिले थे, बेहद का वर्सा लेने। यथा राजा-रानी तथा प्रजा सब विश्व के मालिक बनते हैं। प्रजा भी कहेगी हम विश्व के मालिक हैं। तुम जब विश्व के मालिक बनते हो, उस समय चन्द्रवंशी राज्य नहीं होता है। तुम बच्चे ड्रामा के सारे आदि-मध्य-अन्त को जानते हो। मनुष्य भक्ति मार्ग में जिसकी पूजा करते हैं उनको भी जानते नहीं। जिसकी भक्ति करनी होती है तो उनकी बायोग्राफी को भी जानना चाहिए। तुम बच्चे अभी सबकी बायोग्राफी जानते हो बाप के द्वारा। तुम बाप के बने हो। बाप की बायोग्राफी का पता है। वह बाप है पतित-पावन, लिबरेटर, गाइड। तुमको कहते हैं पाण्डव। तुम सबके गाइड बनते हो, अन्धों की लाठी बनते हो सबको रास्ता बताने के लिए। यथा बाप गाइड तथा तुम बच्चों को भी बनना है। सबको रास्ता बताना है। तुम आत्मा, वह परमात्मा है, उनसे बेहद का वर्सा मिलता है। भारत में बेहद का राज्य था, अब नहीं है। तुम बच्चे जानते हो हम बेहद के बाप से बेहद सुख का वर्सा लेते हैं अर्थात् मनुष्य से देवता बनते हैं। हम ही देवतायें थे फिर 84 जन्म लेकर शूद्र बने हैं। बाप आकर शूद्र से ब्राह्मण बनाते हैं। यज्ञ में ब्राह्मण जरूर चाहिए। यह है ज्ञान यज्ञ, भारत में यज्ञ बहुत रचते हैं। इसमें खास आर्य समाजी बहुत यज्ञ करते हैं। अब यह तो है रूद्र ज्ञान यज्ञ, जिसमें सारी पुरानी दुनिया स्वाहा होनी है। अब बुद्धि से काम लेना पड़ता है। कलियुग में तो बहुत मनुष्य हैं, इतनी सारी पुरानी दुनिया खलास हो जायेगी। कोई भी चीज काम में नहीं आनी है। सतयुग में तो फिर सब कुछ नया होगा। यहाँ तो कितना गन्द है। मनुष्य कैसे गन्दे रहते हैं। धनवान बड़े अच्छे महलों में रहते हैं। गरीब तो बिचारे गन्द में, झोपड़ियों में पड़े हैं। अब इन झोपड़ियों को डिस्ट्राय करते रहते हैं। उनको दूसरी जगह दे वह जमीन फिर बेचते रहते हैं। नहीं उठते तो जबरदस्ती उठाते हैं। गरीब दु:खी बहुत हैं, जो सुखी हैं वह भी स्थाई सुखी नहीं। अगर सुख होता तो क्यों कहते कि यह काग विष्टा समान सुख है।

शिव भगवानुवाच, हम इन माताओं के द्वारा स्वर्ग के द्वार खोल रहे हैं। माताओं पर क्लष रखा है। वह फिर सबको ज्ञान अमृत पिलाती हैं। परन्तु तुम्हारा है प्रवृत्ति मार्ग। तुम हो सच्चे-सच्चे ब्राह्मण, तो सबको ज्ञान चिता पर बिठाते हो। अभी तुम बनते हो दैवी सम्प्रदाय। आसुरी सम्प्रदाय अर्थात् रावण राज्य। गांधी भी कहते थे राम राज्य हो। बुलाते हैं हे पतित-पावन आओ परन्तु अपने को पतित समझते थोड़ेही हैं। बाप बच्चों को सुजाग करते हैं, तुम घोर अन्धियारे से सोझरे में आये हो। मनुष्य तो समझते हैं गंगा स्नान करने से पावन बन जायेंगे। ऐसे ही गंगा में हरिद्वार का सारा किचड़ा पड़ता है। कहाँ फिर वह किचड़ा सारा खेती में ले जाते हैं। सतयुग में ऐसे काम होते नहीं। वहाँ तो अनाज ढेर के ढेर होता है। पैसा थोड़ेही खर्च करना पड़ता है। बाबा अनुभवी है ना। पहले कितना अनाज सस्ता था। सतयुग में बहुत थोड़े मनुष्य हैं हर चीज़ सस्ती रहती है। तो बाप कहते हैं – मीठे बच्चे, अभी तुमको पतित से पावन बनना है। युक्ति बहुत सहज बताते हैं, अपने को आत्मा समझ बाप को याद करो। आत्मा में ही खाद पड़ने से मुलम्मे की बन गई है। जो पारसबुद्धि थे वही अब पत्थरबुद्धि बने हैं। तुम बच्चे अभी बाप के पास पत्थरनाथ से पारसनाथ बनने आये हो। बेहद का बाप तुमको विश्व का मालिक बनाते हैं, सो भी गोल्डन एजेड विश्व का। यह है आइरन एजेड विश्व। बाप बैठ बच्चों को पारसपुरी का मालिक बनाते हैं। तुम जानते हो यहाँ के इतने महल माड़ियाँ आदि कोई काम में नहीं आयेंगे। सब खत्म हो जायेंगे। यहाँ क्या रखा है! अमेरिका के पास कितना सोना है! यहाँ तो थोड़ा बहुत सोना जो माताओं के पास है, वह भी लेते रहते हैं क्योंकि उनको तो कर्ज में सोना देना है। तुम्हारे पास वहाँ सोना ही सोना होता है। यहाँ कौड़ियाँ, वहाँ हीरे होंगे। इनको कहा जाता है आइरन एज। भारत ही अविनाशी खण्ड है, कभी विनाश नहीं होता। भारत है सबसे ऊंच ते ऊंच। तुम मातायें सारे विश्व का उद्धार करती हो। तुम्हारे लिए जरूर नई दुनिया चाहिए। पुरानी दुनिया का विनाश चाहिए। कितनी समझने की बातें हैं। शरीर निर्वाह अर्थ धन्धा आदि भी करना है। छोड़ना कुछ भी नहीं है। बाबा कहते हैं सब कुछ करते हुए मुझे याद करते रहो। भक्ति मार्ग में भी तुम मुझ माशूक को याद करते आये हो कि हमको आकर सांवरे से गोरा बनाओ। उनको मुसाफिर कहा जाता है। तुम सब मुसाफिर हो ना। तुम्हारा घर वह है, जहाँ सब आत्मायें रहती हैं।

तुम सबको ज्ञान चिता पर बिठाते हो। सब हिसाब-किताब चुक्तू कर जाने वाले हैं। फिर नयेसिर तुम आयेंगे, जितना याद में रहेंगे उतना पवित्र बनेंगे और ऊंच पद पायेंगे। माताओं को तो फुर्सत रहती है। मेल्स की बुद्धि धन्धे आदि तरफ चक्र लगाती रहती है, इसलिए बाप ने कलष भी माताओं पर रखा है। यहाँ तो स्त्री को कहते हैं कि पति ही तुम्हारा ईश्वर गुरू सब कुछ है। तुम उनकी दासी हो। अभी फिर बाप तुम माताओं को कितना ऊंच बनाते हैं। तुम नारियाँ ही भारत का उद्धार करती हो। कोई-कोई बाबा से पूछते हैं – आवागमन से छूट सकते हैं? बाबा कहते हैं – हाँ, कुछ समय के लिए। तुम बच्चे तो आलराउन्ड आदि से अन्त तक पार्ट बजाते हो। दूसरे जो हैं वह मुक्तिधाम में रहते हैं। उनका पार्ट ही थोड़ा है। वह स्वर्ग में तो जाने वाले हैं नहीं। आवागमन से मोक्ष उसको कहेंगे जो पिछाड़ी को आये और यह गये। ज्ञान आदि तो सुन न सकें। सुनते वही हैं जो शुरू से अन्त तक पार्ट बजाते हैं। कोई कहते हैं – हमको तो यही पसन्द है। हम वहाँ ही बैठे रहें। ऐसे थोड़ेही हो सकता है। ड्रामा में नूँधा हुआ है, जाकर पिछाड़ी में आयेंगे जरूर। बाकी सारा समय शान्तिधाम में रहते हैं। यह बेहद का ड्रामा है। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) सच्चा-सच्चा ब्राह्मण बन सबको ज्ञान अमृत पिलाना है। ज्ञान चिता पर बिठाना है।

2) शरीर निर्वाह अर्थ धन्धा आदि सब कुछ करते पतित से पावन बनने के लिए बाप की याद में रहना है और सबको बाप की याद दिलाना है।

वरदान:- निरन्तर याद और सेवा के बैलेन्स से बचपन के नाज़ नखरे समाप्त करने वाले वानप्रस्थी भव
छोटी-छोटी बातों में संगम के अमूल्य समय को गंवाना बचपन के नाज़ नखरे हैं। अब यह नाज़ नखरे शोभते नहीं, वानप्रस्थ में सिर्फ एक ही कार्य रह जाता है – बाप की याद और सेवा। इसके सिवाए और कोई भी याद न आये, उठो तो भी याद और सेवा, सोओ तो भी याद और सेवा – निरन्तर यह बैलेन्स बना रहे। त्रिकालदर्शी बनकर बचपन की बातें वा बचपन के संस्कारों का समाप्ति समारोह मनाओ, तब कहेंगे वानप्रस्थी।
स्लोगन:- सर्व प्राप्तियों से सम्पन्न आत्मा की निशानी है सन्तुष्टता, सन्तुष्ट रहो और सन्तुष्ट करो।

TODAY MURLI 8 AUGUST 2020 DAILY MURLI (English)

Today Murli Brahma Kumaris: 8 August 2020

08/08/20
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, just as the Father is the Guide, so you must become guides in the same way and show everyone the way home. Become sticks for the blind.
Question: What secret of this eternal, predestined drama do only you children know?
Answer: No actor in the eternal, predestined drama can be added or removed. No one receives eternal liberation. Some say: We don’t want to enter this cycle of coming and going. Baba says: Yes, this is possible for some of the time but no one can be completely freed from playing his part. Only you children know the secret of this drama.

Om shanti. You sweetest children know who is called Bholanath (Innocent Lord). Only you confluence-aged children know Him. Iron-age people don’t know Him even slightly. Only the one Father is the Ocean of Knowledge. He is the One who gives the knowledge of the beginning, the middle and the end of the world. He gives His own introduction. You children now understand this. Previously, you didn’t know anything. The Father says: I come and make Bharat into heaven; I give you your unlimited inheritance, which you are now claiming. You know that you are now claiming your unlimited inheritance of happiness from the unlimited Father. This drama is predestined; not a single actor can be added or removed. Each one has received his own part. No one can attain eternal liberation. Whatever religion someone belongs to, he will go into that religion again. Although Buddhists and Christians, etc. might desire to go to heaven, they cannot go there. Their parts only begin when the founder of their religion comes. This is in the intellects of you children. At this time, all human beings of the world are atheists; that is, they do not know the unlimited Father. It is only human beings who have to know this, is it not? This is a theatre of human beings. Each soul comes from the land of Nirvana (beyond sound) to play his part. Then, each one makes effort to go back to the land of Nirvana. They say that Buddha went to Nirvana. However, it isn’t the body of Buddha that goes there; it is the soul that goes. The Father explains: No one can go there yet; no one can leave the drama; they cannot attain eternal liberation. This drama is predestined. Some people believe that they can receive eternal liberation, so they continue to make effort; just like the Jains, they continue to make effort. They have their own customs and systems and they have their own guru in whom they believe. However, no one receives eternal liberation. You know that you are all actors in this drama. No one knows when they came or how they will return. Animals would not know this. Human beings say: We are actors who are playing our parts. This is the field of action where souls live. That (soul world) cannot be called the field of action. That is the incorporeal world. There are no fun and games there; there are no acts performed there. You come down from the incorporeal world into the corporeal world to play your parts, which continue to repeat. Annihilation never takes place. The Mahabharat War is portrayed in the scriptures. It is written that the Yadavas and the Kauravas died and that only the five Pandavas remained. Then, even they melted away and died on the mountain and nothing remained. This is the reason they believe that annihilation took place. They sat and made up all of those things. Then they show how a baby came sucking his big toe on a pipal leaf in the sea. Now, how could the world be created through him? Whatever human beings hear, they continue to say: True, true. You children now know that all kinds of things have been written in the scriptures! All of those scriptures belong to the path of devotion. There is only one God, the Father, who gives the fruit of devotion to the devotees. Some have liberation whereas others go into liberation in life. When it is time for the part of each soul (actor) to begin, they will then come down again. No one, except you children, understands the secrets of the drama. It is said: We neither know the Creator nor creation. If those who are the actors in this drama do not know the beginning, middle or end of the drama or its duration etc., they are said to be senseless. Even when you explain to them they don’t understand. Because they believe in 8.4 million births they say that the duration of the cycle is millions of years. You now understand that we come to Baba, cycle after cycle, in order to claim the kingdom of the world. You say: We also met You 5000 years ago to claim our unlimited inheritance. Everyone, kings and queens, as well as the subjects, all become the masters of the world. The subjects also say: We are the masters of the world. The moon-dynasty kingdom doesn’t exist when you become masters of the world. You children know the whole cycle from the beginning, through the middle to the end of the drama. Human beings don’t even know the ones they worship on the path of devotion. They ought to know the biography of those whom they worship. You children have now come to know everyone’s biography from the Father. You now belong to the Father. You know the Father’s biography. The Father is the Purifier, Liberator and Guide. You are called Pandavas. You become guides for everyone. You become sticks for the blind to show everyone the path. Just as the Father is the Guide, so you too have to become the same; you have to show everyone the path. You are souls and He is the Supreme Soul. You receive an unlimited inheritance from Him. There was the unlimited kingdom in Bharat, but it no longer exists. You children know that you claim your inheritance of unlimited happiness from the unlimited Father, that is, you become deities from ordinary human beings. We were deities and then, having taken 84 births, we became shudras. The Father has come to change us from shudras to Brahmins. Brahmins (priests) are definitely needed for a sacrificial fire. This is the sacrificial fire of knowledge. In Bharat they create many sacrificial fires. In this, it is especially the Arya Samajis’ community who create many sacrificial fires. This is the sacrificial fire of Rudra in which the whole of the old world is to be sacrificed. You now have to use your intellects for this. There are many human beings in the iron age. It is such a big, old world and it will all be destroyed. Nothing will be of any use. In the golden age everything will be new. Here, there is so much dirt. Human beings remain very dirty. The wealthy live in very nice palaces. The poor live in filthy conditions, in huts. Those huts are now being destroyed. They are being given other places in which to live, and they (the Government) continue to sell that land. When they don’t leave, they are forced out. The poor suffer a great deal, and those who are happy don’t have permanent happiness. If they did have that happiness, why is it said that happiness is like the droppings of a crow? God Shiva speaks: I am opening the gates to heaven through these mothers. The urn of knowledge is placed on the heads of the mothers. They then distribute the nectar of knowledge to everyone. However, yours is the family path. You are true Brahmins, so you enable everyone to sit on the pyre of knowledge. You are now becoming part of the deity community. The impure community means the kingdom of Ravan. Gandhi used to say that there should be the kingdom of Rama. Although they call out, “O Purifier, come!”, they do not consider themselves to be impure. The Father has awakened you children. From extreme darkness, you have come into total light. Human beings think that they will become pure by bathing in the Ganges. All the waste of Haridwar is dropped into the Ganges. In some places all of that waste is taken to farmland. That does not happen in the golden age. There, there is plenty of grain; there is no need to spend money. Baba is experienced. Previously, grain used to be so cheap. In the golden age, there are very few people and everything is cheap. Therefore, the Father says: Sweet children, you now have to change from impure to pure. He shows you a very easy way: Consider yourselves to be souls and remember the Father. Because alloy was mixed into souls they how become tarnished. Those who had divine intellects have now become ones with stone intellects. You children have now come to the Father to change from lords of stone into lords of divinity. The unlimited Father is making you into the masters of the world and that too of the golden-aged world. This is the iron-aged world. The Father sits here and makes you children into the masters of the divine world. You know that all of the palaces etc. here will be of no use; all of them will be destroyed. What is there here anyway? America has so much gold. Even the little gold here that the mothers have will be taken away because gold has to be used to clear debts. There, you have only gold and more gold. Here, there are shells whereas there, there will be diamonds. This is called the iron age. Bharat is the imperishable land; it is never destroyed. Bharat is the most elevated land of all. You mothers uplift the whole world. A new world is definitely needed for you. The old world has to be destroyed. These matters have to be understood. You also have to work for the livelihood of your bodies. You don’t have to renounce anything. Baba says: While doing everything, continue to remember Me. Even on the path of devotion you used to remember Me, the Beloved. You said: Come and make us beautiful from ugly. He is called the Traveller. You are all travellers, are you not? Your home is there, where all souls reside. You enable everyone to sit on the pyre of knowledge. Having finished all your accounts all of you will return home. You will then come again and start anew. The more you stay in remembrance, the more pure you will become and claim an elevated status. The mothers have time. The intellects of males keep spinning around their business etc. This is why the Father has placed the urn on the heads of the mothers. Here, a wife is told that her husband is her god, her guru, her everything and that she is his servant. The Father now makes you mothers so elevated. It is you women who uplift Bharat. Some ask Baba if it is possible to be freed from this coming and going. Baba says: Yes, for some of the time. However, you children play all-round parts from the beginning to the end. Everyone else stay in the land of liberation. They only have small parts to play; they will not go to heaven. Liberation from the coming and going is only said of those who just come at the end and return straightaway; they cannot listen to knowledge etc. It is those who play their parts from the beginning to the end who listen to this knowledge. Some souls say that they only like it there, that they just want to stay up there. How can that be possible? It is fixed in the drama that, after going there, they definitely come at the end. For the rest of the time, they stay in the land of peace. This drama is unlimited. Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost, now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. Be a true Brahmin and distribute the nectar of knowledge to everyone. Enable everyone to be seated on the pyre of knowledge.
  2. While doing everything and carrying on with your business etc. for your livelihood, stay in remembrance of the Father in order to change from impure to pure and remind everyone of the Father.
Blessing: May you finish all mischievous games of childhood by constantly keeping a balance of remembrance and service and be in the stage of retirement.
To waste the invaluable time of the confluence age over trivial matters is like playing mischievous games of childhood. Those mischievous games no longer suits you. In the stage of retirement, the only things that remain are remembrance of the Father and service. Apart from these, let nothing else be remembered. When you wake up, there is only remembrance and service and when you go to sleep, there is only remembrance and service. Always keep this balance. Become trikaldarshi and celebrate the completion ceremony of childish matters and sanskars of childhood and you will then be called one in the stage of retirement.
Slogan: The sign of a soul who is full of all attainments is contentment. Remain content and make others content.

*** Om Shanti ***

BRAHMA KUMARIS MURLI TODAY 8 AUGUST 2019 : AAJ KI MURLI

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 8 August 2019

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08-08-2019
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन

 

“मीठे बच्चे – कामकाज करते हुए भी एक बाप की याद रहे, चलते-फिरते बाप और घर को याद करो, यही तुम्हारी बहादुरी है”
प्रश्नः- बाप का रिगॉर्ड और डिस रिगॉर्ड कब और कैसे होता है?
उत्तर:- जब तुम बच्चे बाप को अच्छी तरह याद करते हो तब रिगार्ड देते हो। अगर कहते याद करने की फुर्सत नहीं है तो यह भी जैसे डिसरिगार्ड है। वास्तव में यह बाप का डिसरिगार्ड नहीं करते, यह तो अपना ही डिसरिगार्ड करते हो इसलिए नामीग्रामी केवल भाषण में नहीं लेकिन याद की यात्रा में बनो, याद का चार्ट रखो। याद से ही आत्मा सतोप्रधान बनेगी।

ओम् शान्ति। रूहानी बच्चों प्रति रूहानी बाप समझाते हैं, यह जो 84 के चक्र का ज्ञान समझाया जाता है यह तो एक नॉलेज है। जो तो हम बच्चों ने जन्म-जन्मान्तर पढ़ी है और धारणा करते आये हैं। यह तो बिल्कुल सहज है, यह कोई नई बात नहीं।

बाप बैठ समझाते हैं – सतयुग से लेकर कलियुग अन्त तक तुमने कितने पुनर्जन्म लिए हैं। यह ज्ञान तो सहज रीति बुद्धि में है ही। यह भी एक पढ़ाई है, रचना के आदि, मध्य, अन्त को समझना है। सो बाप के सिवाए और कोई समझा नहीं सकता। बाप कहते हैं इस ज्ञान से भी ऊंच बात है याद की यात्रा, जिसको योग कहा जाता है। योग अक्षर मशहूर है। परन्तु यह है याद की यात्रा। जैसे मनुष्य यात्रा पर जाते हैं, कहेंगे हम फलाने तीर्थ यात्रा पर जाते हैं। श्रीनाथ या अमरनाथ जाते हैं तो वह याद रहता है। अभी तुम जानते हो रूहानी बाप तो बड़ी लम्बी यात्रा सिखलाते हैं कि मुझे याद करो। उन यात्राओं से तो फिर लौट आते हैं। यह वह यात्रा है जो मुक्तिधाम में जाकर निवास करना है। भल पार्ट में आना है परन्तु इस पुरानी दुनिया में नहीं। इस पुरानी दुनिया से तुमको वैराग्य है। यह तो छी-छी रावण राज्य है। तो मूल बात है याद की यात्रा। कई बच्चे यह भी समझते नहीं हैं कि कैसे याद करना है। कोई याद करते हैं वा नहीं करते हैं – यह देखने में तो कोई चीज़ नहीं आती है। बाप कहते हैं अपने को आत्मा समझ मुझ बाप को याद करना है। देखने की तो चीज नहीं। न मालूम पड़ सकता है। यह उस अवस्था में कहाँ तक याद की यात्रा में कायम रहते हैं, यह तो खुद ही जानें। युक्ति तो बहुतों को बताते हैं। कल्याणकारी बाप ने समझाया है – अपने को आत्मा समझ शिवबाबा को याद करो। भल अपनी सर्विस भी करते रहो। जैसे मिसाल – पहरे पर बच्चे हैं, चक्कर लगाते रहते हैं, इनको याद में रहना तो बड़ा सहज है। सिवाए बाप की याद के और कुछ याद नहीं आना चाहिए। बाबा मिसाल दे बताते हैं, उस याद की यात्रा में ही आये, जाये। जैसे पादरी लोग जाते हैं, कितना साइलेन्स में जाते हैं। तो तुम बच्चों को भी बड़ा प्रेम से बाप और घर को याद करना है। यह मंजिल बड़ी भारी है। भक्त लोग भी यही पुरूषार्थ करते रहते हैं। परन्तु उनको यह पता नहीं है कि हमको वापिस जाना है। वह तो समझते हैं जब कलियुग पूरा होगा, तब जायेंगे। उनको भी ऐसे सिखलाने वाला तो कोई है नहीं। तुम बच्चों को तो सिखलाया जाता है। जैसे पहरा देते हो तो एकान्त में जितना बाप को याद करेंगे उतना अच्छा है। याद से पाप कटते हैं। जन्म जन्मान्तर के पाप सिर पर हैं। जो पहले सतोप्रधान बनते हैं, रामराज्य में भी पहले वह जाते हैं। तो उनको ही सबसे जास्ती याद की यात्रा में रहना है। कल्प-कल्प की बात है। तो इनको याद की यात्रा में रहने का अच्छा चांस हैं। यहाँ तो कोई लड़ाई-झगड़े की बात ही नहीं है। आते-जाते अथवा बैठते एक पंथ, दो कार्य – पहरा भी दो, बाप को भी याद करो। कर्म करते बाप को याद करते रहो। पहरे वाले को तो सबसे जास्ती फायदा है। चाहे दिन को, चाहे रात को जो पहरा देते हैं, उन्हों के लिए बहुत फायदा है। अगर यह याद रहने की आदत पड़ जाए तो। बाप ने यह सर्विस बहुत अच्छी दी है, पहरा और याद की यात्रा। यह भी चांस मिलता है बाप की याद में रहने का। यह भिन्न-भिन्न युक्तियाँ बताई जाती हैं – याद की यात्रा में रहने की। यहाँ तुम जितना याद में रह सकेंगे उतना बाहर धन्धे आदि में नहीं इसलिए मधुबन में आते हैं रिफ्रेश होने। एकान्त में जाकर एक पहाड़ी पर बैठ याद की यात्रा में रहें फिर एक जाए व 2-3 जायें। यहाँ चांस बहुत अच्छा है। यही मुख्य है बाप की याद। भारत का प्राचीन योग मशहूर भी बहुत है। अभी तुम समझते हो इस याद की यात्रा से पाप कटते हैं। हम सतोप्रधान बन जायेंगे। तो इसमें पुरूषार्थ बहुत अच्छा करना है, बहादुरी तो इसमें हैं जो काम करते बाप को याद कर दिखलाओ। कर्म तो करना ही है क्योंकि तुम हो प्रवृत्ति मार्ग वाले। गृहस्थ व्यवहार में रहते धन्धा आदि करते बुद्धि में बाप की याद रहे, इसमें तुम्हारी बहुत-बहुत कमाई है। भल अभी कई बच्चों की बुद्धि में नहीं आता है। बाप कहते रहते हैं चार्ट रखो। थोड़ा बहुत कोई लिखते हैं। बाप युक्तियाँ तो बहुत बताते हैं। बच्चे चाहते हैं बाबा के पास जायें। यहाँ बहुत कमाई कर सकते हैं। एकान्त बहुत अच्छी है। बाप सम्मुख बैठ समझाते हैं मुझे याद करो तो पाप कट जायें क्योंकि जन्म-जन्मान्तर के पाप सिर पर हैं। विकार के लिए कितने झगड़े चलते हैं, विघ्न पड़ते हैं। कहते हैं बाबा हमको पवित्र रहने नहीं देते। बाप कहते हैं – बच्चे, तुम याद की यात्रा में रह जन्म-जन्मान्तर के पाप जो सिर पर हैं, वह बोझा उतारो। घर बैठे शिवबाबा को याद करते रहो। याद तो कहाँ भी बैठ कर सकते हो। कहाँ भी रहते यह प्रैक्टिस करनी है। जो भी आये उनको भी पैगाम दो। बाप कहते हैं अपने को आत्मा समझ बाप को याद करो, इनको ही योगबल कहा जाता है। बल माना ताकत, शक्ति। बाप को सर्वशक्तिमान् कहते हैं ना। तो वह शक्ति बाप से कैसे मिलेगी? बाप खुद कहते हैं मुझे याद करो। तुम नीचे उतरते-उतरते तमोप्रधान बन गये हो तो वह शक्ति बिल्कुल खत्म हो गई है। पाई की भी नहीं रही है। तुम्हारे में भी कोई हैं जो अच्छी रीति समझाते हैं, बाप को याद करते हैं।

तो अपने से पूछना है हमारा चार्ट कैसा रहता है? बाप तो सब बच्चों को कहते हैं, याद की यात्रा मुख्य है। याद से ही तुम्हारे पाप कटेंगे। भल कोई सावधान करने वाला भी नहीं हो तो भी बाप को याद कर सकते हो ना। भल विलायत में अकेले रहो, तो भी याद में रह सकते हो। समझो कोई शादी किया हुआ है, स्त्री और कोई जगह है, तो उनको भी लिख सकते हो – तुम एक बात सिर्फ याद करो – बाप को याद करो तो जन्म-जन्मान्तर के पाप भस्म हो जायेंगे। विनाश सामने खड़ा है। बाप युक्तियाँ तो बहुत अच्छी समझाते रहते हैं फिर कोई करे, न करे, उनकी मर्जी। बच्चे भी समझते होंगे कि बाप राय तो बहुत अच्छी देते हैं। हमारा काम है मित्र-सम्बन्धी आदि जो भी मिलें, सबको पैगाम देना। दोस्त हो या कोई भी हो, सर्विस का शौक चाहिए। तुम्हारे पास चित्र तो हैं, बैज भी है। यह बड़ी अच्छी चीज़ है। बैज किसको भी लक्ष्मी-नारायण बना सकता है। त्रिमूर्ति के चित्र पर अच्छी तरह समझाना है, इनके ऊपर शिव है। वो लोग त्रिमूर्ति बनाते हैं, ऊपर में शिव दिखाते नहीं। शिव को न जानने कारण भारत का बेड़ा डूबा हुआ है। अब शिवबाबा द्वारा ही भारत का बेड़ा पार होता है। पुकारते हैं पतित-पावन आकर हम पतितों को पावन बनाओ फिर भी सर्वव्यापी कह देते हैं। कितनी पाई पैसे की भूल है। बाप बैठ समझाते हैं तुमको ऐसे-ऐसे भाषण करना है। बाप भी डायरेक्शन देते रहते हैं – ऐसे म्युज़ियम खोलो, सर्विस करो तो बहुत आयेंगे। सर्कस भी बड़े-बड़े शहरों में खोलते हैं ना। कितना उन्हों के पास सामान रहता है। गाँव-गाँव से देखने के लिए लोग आते हैं इसलिए बाबा कहते हैं तुम भी ऐसा खूबसूरत म्यूज़ियम बनाओ, जो देखकर खुश हो जायें फिर औरों को जाकर सुनायें। यह भी समझाते हैं जो कुछ सर्विस होती है, कल्प पहले मिसल होती है, परन्तु सतोप्रधान बनने का ओना बहुत रखना है। इसमें ही बच्चे ग़फलत करते हैं। माया विघ्न भी इस याद की यात्रा में ही डालती है। अपने दिल से पूछना है – इतना हमको शौक है, मेहनत करते हैं? ज्ञान तो कॉमन बात है। बाप बिगर 84 का चक्र कोई समझा न सके। बाकी याद की यात्रा है मुख्य। पिछाड़ी में कोई भी याद न आये सिवाए एक बाप के। डायरेक्शन तो बाप पूरे देते रहते हैं। मुख्य बात है याद करने की। तुम कोई को भी समझा सकते हो। भल कोई भी हो तुम सिर्फ बैज पर समझाओ। और कोई के पास ऐसे अर्थ सहित मैडल नहीं होते। मिलेट्री वाले अच्छा काम करते हैं तो उनको मैडल मिलते हैं। राय साहेब का मैडल, सब देखेंगे इनको वाइसराय से टाइटिल मिला है। आगे वाइसराय होते थे। अभी तो उनके पास कोई पॉवर नहीं है। अभी तो कितने झगड़े लगे पड़े हैं। मनुष्य बहुत हो गये हैं, तो उनके लिए जमीन चाहिए शहर में। अभी बाबा स्वर्ग की स्थापना कर रहे हैं, इतने सब खलास हो बाकी कितने थोड़े जाकर रहेंगे। जमीन ढेर होगी। वहाँ तो सब कुछ नया होगा। उस नई दुनिया में चलने के लिए फिर अच्छी रीति पुरूषार्थ करना है। हर एक मनुष्य पुरूषार्थ करते हैं बहुत ऊंच पद पाने का। कोई पूरा पुरूषार्थ नहीं करते तो समझते हैं नापास हो जायेंगे। खुद भी समझते हैं हम फेल हो जायेंगे फिर पढ़ाई आदि को छोड़कर नौकरी में लग जाते हैं। आजकल तो नौकरियों में भी बहुत कड़े कायदे निकालते रहते हैं। मनुष्य बहुत दु:खी हैं। अब बाबा तुमको ऐसा रास्ता बताते हैं जो 21 जन्म कभी दु:ख का नाम नहीं रहेगा। बाप कहते हैं सिर्फ याद की यात्रा में रहो। जितना हो सके रात को बहुत अच्छा है। भल लेटे हुए याद करो। कोई को फिर नींद आ जाती है। बुढ़ा होगा, जास्ती बैठ नहीं सकेगा तो जरूर सो जायेगा। लेटे हुए बाप को याद करते रहेंगे। बड़ी खुशी अन्दर में होती रहेगी क्योंकि बहुत-बहुत कमाई है। यह तो समझते हैं – टाइम पड़ा है परन्तु मौत का कोई ठिकाना नहीं। तो बाप समझाते हैं मूल है याद की यात्रा। बाहर शहर में तो मुश्किल है। यहाँ आते हैं तो बड़ा अच्छा चांस मिलता है। कोई फिकरात की बात नहीं इसलिए यहाँ चार्ट बढ़ाते रहो। तुम्हारे कैरेक्टर्स भी इससे सुधरते जायेंगे। परन्तु माया बड़ी दुश्तर है। घर में रहने वालों को इतना कदर नहीं रहता है, जितना बाहर वालों को है। फिर भी इस समय गोपों की रिजल्ट अच्छी है।

कई बच्चियाँ लिखती हैं शादी के लिए बहुत तंग करते हैं, क्या करें? जो मजबूत सेन्सीबुल बच्चियाँ होंगी वह कभी ऐसे लिखेंगी नहीं। लिखती हैं तो बाबा समझ जाते हैं – रिढ़ बकरी हैं। यह तो अपने हाथ में है जीवन को बचाना। इस दुनिया में अनेक प्रकार के दु:ख हैं। अब बाबा तो सहज बताते हैं।

तुम बच्चे तो महान् भाग्यशाली हो, जो आकर साहेबजादे बने हो। बाप कितना ऊंच बनाते हैं। फिर भी तुम बाप को गाली देते हो, सो भी कच्ची गाली। इतने तमोप्रधान बने हो जो बात मत पूछो। इससे जास्ती और क्या सहन करेंगे। कहते हैं ना – जास्ती तंग करेंगे तो खत्म कर देंगे। तो यह बाप बैठ समझाते हैं। शास्त्रों में तो कहानियाँ लिख दी हैं। बाबा युक्ति तो बहुत सहज बताते हैं। कर्म करते हुए याद करो, इसमें बहुत-बहुत फायदा है। सवेरे आकर याद में बैठो। बहुत मज़ा आयेगा। परन्तु इतना शौक नहीं है। टीचर स्टूडेन्ट की चलन से समझ जाते हैं – यह फेल हो जायेंगे। बाप भी समझते हैं – यह फेल हो जायेंगे, सो भी कल्प-कल्पान्तर के लिए। भल भाषण में तो बहुत होशियार हैं, प्रदर्शनी भी समझा लेते हैं परन्तु याद है नहीं, इसमें फेल हो पड़ते हैं। यह भी जैसे डिसरिगार्ड करते हैं। अपना ही करते हैं, शिवबाबा का तो डिसरिगार्ड होता नहीं। ऐसे कोई कह न सके कि हमको फुर्सत ही नहीं याद करने की। बाबा मानेंगे नहीं। स्नान पर भी याद कर सकते हो। भोजन करते समय बाप को याद करो, इसमें बहुत-बहुत कमाई है। कई बच्चे सिर्फ भाषण में नामीग्रामी हैं, योग है नहीं। वह अहंकार भी गिरा देता है। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) सर्वशक्तिमान् बाप से शक्ति लेने के लिए याद का चार्ट बढ़ाना है। याद की भिन्न-भिन्न युक्तियाँ रचनी है। एकान्त में बैठ विशेष कमाई जमा करनी है।

2) सतोप्रधान बनने का ओना रखना है। ग़फलत नहीं करनी है। अहंकार में नहीं आना है। सर्विस का शौक भी रखना है, साथ-साथ याद की यात्रा पर भी रहना है।

वरदान:- बुद्धि को मेरेपन के फेरे से निकाल उलझनों से मुक्त रहने वाले न्यारे, ट्रस्टी भव
जब बुद्धि कहाँ भी उलझन में आती है तो समझ लो जरूर कोई न कोई मेरापन है। जहाँ मेरा आया वहाँ बुद्धि का फेरा हुआ। गृहस्थी बनकर सोचने से गड़बड़ होती है इसलिए बिल्कुल न्यारे और ट्रस्टी बन जाओ। ये मेरापन – मेरा नाम खराब होगा, मेरी ग्लानि होगी.. यह सोचना ही उलझना है। फिर जितना सुलझाने की कोशिश करेंगे उतना उलझते जायेंगे इसलिए ट्रस्टी बन इन उलझनों से मुक्त हो जाओ। भगवान के बच्चे कभी उलझनों में नहीं आ सकते।
स्लोगन:- बड़े बाप के बच्चे हो इसलिए न तो छोटी दिल करो और न छोटी बातों में घबराओ।

TODAY MURLI 8 AUGUST 2019 DAILY MURLI (English)

Today Murli Brahma Kumaris: 8 August 2019

Today Murli in Hindi:- Click Here

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08/08/19
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: : Sweet children, stay in remembrance of the one Father while working. Remember the Father and the home while walking and moving around. This is your act of courage.
Question: When and how is there regard and disregard for the Father?
Answer: When you children remember the Father very well, you are giving Him regard. If you say that you don’t have time to remember the Father, you are disregarding Him. Actually, you are disregarding yourself and not the Father. Do not only become well known for giving lectures but become well known for having the pilgrimage of remembrance. Keep a chart of your remembrance. It is by having remembrance that you souls will become satopradhan.

Om shanti. The spiritual Father explains to you spiritual children. The cycle of 84 births is explained to you. This is the knowledge which you children have studied for many births and have continued to imbibe. This is absolutely easy; it is not something new. The Father sits here and explains how many births and rebirths you have taken from the golden age till the end of the iron age. This knowledge is already in your intellects in an easy way. This is a study. You also have to understand the beginning, middle and end of creation. No one, except the Father, can explain this. The Father says: The pilgrimage of remembrance, which is also called yoga, is even more elevated than this knowledge. The word “yoga” is very famous, but this yoga is the pilgrimage of remembrance. People who go on pilgrimages say that they are going on a pilgrimage to such-and-such a pilgrimage place. They go to Shrinath or Amarnath and they remember those places. Similarly, you now understand that the spiritual Father teaches you a very long pilgrimage of remembrance. He says: Remember Me! People return from those pilgrimages. This is a pilgrimage where you have to go and reside in the land of liberation. Although you have to play parts, they will not be in this old world. You have disinterest in this old world. This is the dirty kingdom of Ravan. Therefore, the main aspect is the pilgrimage of remembrance. Some children don’t even understand how to have remembrance. Whether someone has remembrance or not is not visible. The Father says: Consider yourselves to be souls and remember Me, your Father. This is not something that is visible. It cannot be known to what extent someone stays in the stage of the pilgrimage of remembrance. Only that individual would know that. This method has been shown to many. The Benefactor Father has explained: Consider yourselves to be souls and remember Shiv Baba. By all means, continue to do your service. For example, there are children on security duty: they walk around, and it’s very easy for them to stay in remembrance. You should not remember anything other than the Father. The Father explains to you using examples. You have to keep coming and going on this pilgrimage of remembrance. Just as Christian priests walk in silence, so you children also have to remember the Father and the home with a lot of love. This destination is very high. Devotees also continue to make this effort. However, they don’t know that they have to return home. They think that they will return when the iron age finishes. There is no one to teach them, whereas you children are being taught. When you are on security duty, the more you remain in solitude and remember the Father, the better it will be. It is by having remembrance that your sins are cut away. There is a burden of sins of many births on your heads. Those who become satopradhan first are also the ones who go into the kingdom of Rama first. Therefore, they are the ones who have to remain on the pilgrimage of remembrance the most. This is a question of each and every cycle and so they have a good chance to stay on the pilgrimage of remembrance. There is no question here of fighting or quarrelling. As you come and go and as you sit, you can carry out the two tasks at the same time: keep watch and also remember the Father. Continue to remember the Father while performing actions. Those on security duty experience the most benefit. Whether it is day or night, those on security duty can benefit a great deal if they imbibe the habit of staying in remembrance. The Father has given you very good service to do: security duty and the pilgrimage of remembrance. You receive a chance to stay in remembrance of the Father. You are shown many different methods to stay on the pilgrimage of remembrance. You are not able to stay in remembrance outside, in your business etc., as much as you are able to here. Therefore, you come to Madhuban to be refreshed. So, go into solitude in the mountains, sit on a rock and stay on the pilgrimage of remembrance. It does not matter if one goes or if two or three others go. There is a very good chance here to do this. The main thing is to have remembrance of the Father. The ancient yoga of Bharat is very famous. You now understand that your sins are cut away with this pilgrimage of remembrance; you will become satopradhan. Therefore, you have to make very good effort for this. To demonstrate staying in remembrance of the Father while working is an act of courage. You definitely have to perform actions because you belong to the household path. Let there be remembrance of the Father while living at home with your family and doing business etc. There is a great deal of income in this for you. Although it does not enter the intellects of some children, the Father continues to tell you to keep a chart. Some write their charts for a little while. The Father shows you many methods. Children want to come to Baba. You can earn a great deal of income here. The solitude here is very good. The Father sits here and personally explains to you: Remember Me and your sins will be cut away, because there are the sins of many births on your heads. Many fights and quarrels take place due to vice; there are many obstacles. Some say: Baba they won’t let us remain pure. The Father says: Child, stay on the pilgrimage of remembrance and remove the burden of your sins of many births from your head. Continue to remember Shiv Baba while sitting at home. You can have remembrance wherever you are sitting. You can practise this wherever you live. Whoever comes, give them this message: The Father says: Consider yourself to be a soul and remember the Father. This is called the power of yoga. Power means strength, shakti. The Father is called the Almighty Authority. So, how can you receive that power from the Father? The Father Himself says: Remember Me! While coming down, you have become tamopradhan, and so that power has now completely finished. There is not even a pennyworth left. There are some among you who explain this very well and who remember the Father. Therefore, you have to ask yourself what your chart is like. The Father tells all the children that the pilgrimage of remembrance is the main thing. It is by having remembrance that your sins will be cut away. Even if there is no one to caution you, you can still remember the Father. Even if you live alone abroad, you can still stay in remembrance. For instance, if you are a married couple and your wife is elsewhere, you can write and tell her: Simply remember one thing: remember the Father and your sins of many births will be burnt. Destruction is standing ahead. The Father continues to explain many good methods, but whether you do it or not is up to you. You children understand that the advice the Father gives is very good. Our duty is to give the message to everyone, our friends, relatives etc. and whomsoever we meet. Whether they are your friends or whoever they are, you should be interested in doing service. You have pictures as well as a badge. They are very good things. This badge can make anyone into Lakshmi or Narayan. You have to explain the picture of the Trimurti very well. The One above them is Shiva. Those people make an image of the Trimurti; they do not show an image of Shiva above it. Because of them not knowing Shiva, the boat of Bharat has sunk. Now, only by remembering Shiv Baba can the boat of Bharat go across. They call out: “O Purifier, come and purify us impure ones”. Yet they say that He is omnipresent! This mistake is worth pennies. The Father sits here and explains to you the way to give lectures. The Father continues to give you directions about how to do service and open museumsThen, many will come. A circus goes to many big cities. They have so much equipment. People from many villages go to see them. This is why the Father says: Build such a beautiful museum that people become happy when they see it and tell others about it. It is also explained that whatever service takes place, it happened as it did in the previous cycle. However, you have to have a great deal of concern about becoming satopradhan. It is in this that children become careless and make mistakes. Maya also creates obstacles in this pilgrimage of remembrance. Ask your heart: Do I have that much interest? Do I make effort? Knowledge is a common matter. No one, except the Father, can explain the cycle of 84 births. However, the pilgrimage of remembrance is the main thing. At the end, no one except the one Father should be remembered. The Father continues to give you full directions. The main aspect is to remember Baba. You can explain to anyone. Whoever they are, you can explain the badge to them. No one else has such a meaningful medal. Those in the militaryreceive a medalwhen they do something good. Anyone who sees the medal of Rai Sahab would see that he received the title from the Viceroy. Previously, there used to be viceroys, but they don’t have any power now. There are so many quarrels now. Human beings have increased so much and so land is needed for them in the cities. The Father is now establishing heaven. So many will be destroyed and very few will remain. There will be so much land there and everything will be new there. You have to make very good effort in order to go to that new world. Every human being makes effort to claim a very high status. It is understood that if someone does not make effort fully, he will fail. He himself understands that he will fail and so he stops studying and finds employment. Nowadays, they have many strong employment laws. Human beings are very unhappy. Baba now shows you such a path that there will be no trace of sorrow for 21 births. The Father says: Simply stay on the pilgrimage of remembrance to whatever extent you can. Night time is very good. By all means, remember Baba while lying down. However, some fall asleep. An old person would not be able to sit for long. Therefore, he would surely go to sleep. He would continue to remember the Father while lying down. He would experience great internal happiness because there is a great deal of income in this. You think that there is still time left, but it is not known when death will come. Therefore, the Father explains: The main thing is the pilgrimage of remembrance. It is difficult to have this outside in the cities. When you come here, you have a very good chanceThere is nothing to worry about here. This is why you must continue to increase your chart here. Your character will also continue to be reformed through this. However, Maya is very powerful. Those who live in this home do not give it as much value as those who live outside do. However, at the moment, the result of the gopes (brothers who are lost in love of God), is still good. Some daughters write: They harass us a great deal to get married. What can we do? Strong and sensible daughters would never write in this way. If someone writes in this way, Baba understands that she is like a goat or a sheep. It is in your own hands to protect your life. There are many types of sorrow in this world. Baba now explains to you in a very easy way. You children are greatly fortunate because you have become the children of the Lord and Master. The Father makes you so elevated, yet you defame the Father! That too is false defamation. You have become so tamopradhan, don’t even ask! How much more can one tolerate? People threaten one another and say: If you cause any more distress, I will put an end to you. The Father sits here and explains this. Only stories have been written in the scriptures. Baba shows you very easy methods. Have remembrance while performing actions. There is a great deal of benefit in this. Come here early in the morning and sit in remembrance; you will experience great pleasure. However, you don’t have much interest in doing this. A teacher is able to understand from the behaviour of his students which ones will fail. The Father also understands which ones will fail and that too is for cycle after cycle. Although they may be very clever at giving lectures and be able to explain at exhibitions, they don’t have remembrance; they fail in this. This shows a great deal of disregard. They are in fact disregarding themselves. Shiv Baba cannot be disregarded. None of you can say that you don’t have time for remembrance; Baba would not believe you. You can have remembrance while bathing. Remember the Father at the time of eating. You can earn a great deal of income in this. Some children are only very well known for giving lectures; they have no yoga. That arrogance also makes them fall. Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. In order to take power from the Almighty Authority Father, increase your chart of remembrance. Create different ways to have remembrance. Sit in solitude and accumulate an extra income for yourself.
  2. Be concerned about becoming satopradhan. Do not become careless and make mistakes. Do not become arrogant. Be interested in doing service. Together with that, stay on the pilgrimage of remembrance.
Blessing: May you become a detached trustee and remain free from being confused by keeping your intellect free from the spinning of any consciousness of “mine”.
When there is any confusion in your intellect you can understand that there is definitely one or another type of consciousness of “mine” involved. When there is the consciousness of “mine”, the intellect gets into a spin. When you think as a householder, there is some upheaval, and so become a completely detached trustee. That consciousness of “mine” – “My name will be spoilt”, “I will be defamed” – to think in that way is to become confused. Then, no matter how much you try to put it right, you will become more confused. Therefore, become a trustee and free from confusion. God’s children can never get confused.
Slogan: You are children of the great Father and so do not allow your hearts to become small (disheartened) or afraid of small things.

*** Om Shanti ***

TODAY MURLI 8 August 2017 DAILY MURLI (English)

Today Murli Brahma kumaris : 7 August 2017

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08/08/17
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, in order to imbibe this spiritual study, your intellects need to become pure, golden vessels. Have a rakhi of purity tied and you will receive the tilak of the kingdom.
Question: What certificate, which all of you children claim from the Father at this time do you have to make effort for?
Answer: In order to go to the pure world, you require a certificate of purity, that is, of being worthy. When you make a promise of purity at this time, your intellect becomes golden aged. The Father’s advice for claiming a certificate of purity is: Children, remove your intellect’s yoga from everyone else and sit on the pyre of knowledge. Follow the one mother and Father. Promise that you will definitely remain pure. Interact with the Father with honesty.
Song: Brother of mine, fulfil the responsibility of the bond of rakhi.

Om shanti. You children have heard this song many times. On the path of devotion, people have been celebrating the festival of Raksha Bandhan and have also been singing this song. This is now the path of knowledge. The Father says to you children: Children, by conquering Maya, Ravan, you will become conquerors of the world, that is, you will become the masters of the world. You children know that the effort lies in conquering the five vices. The vice of lust is also the greatest enemy of those. There is upheaval and violence because of purity. Only the highest-on-high Father can enable you to conquer Maya and make you into the masters of the world. You children know that you definitely do have to become pure in order to claim your inheritance from the unlimited Father. A worldly study is also studied in purity (celibacy). This is a spiritual study. Here, a golden vessel, that is, a pure vessel is required in which the wealth of knowledge can be retained. It takes time to become pure because everyone’s vessel has now become stone. The Father explains: You now have to become pure and return home. The more you continue to imbibe knowledge and yoga, the purer your intellects will continue to become, because your intellects are now aware that you have to return home. You have to go from the iron age to the copper age, then the silver age and then the golden age. This study is such that, while you are moving along, Maya attacks you. Not everyone can remain pure. Maya creates many storms. While you are going from the iron age to the copper age, storms of Maya surround you and your intellect thereby becomes iron-aged again and you fall. You definitely fall and then climb up again. You climb and go to the copper age , then the silver age and then the golden age. While studying and listening to knowledge, our intellects become golden aged by the end. Then we leave our bodies. At this time, there is a lot of falling down and climbing up. It takes time. When your intellects become golden aged you become those who have a right to the kingdom. It is remembered that by having a rakhi of purity tied you receive a tilak of the kingdom. You children know that in order to attain a kingdom you definitely do have to make a promise of purity. It takes such a long time to imbibe knowledge and yoga. It takes 5000 years to go from the golden age to the end of iron age. You now have to study and that only takes place in this one birth. The higher your study, the more your happiness increases. We are establishing a kingdom with the power of the intellect’s yoga and with the power of knowledge. There is the power of everything. By studying a little, you receive a little power and by studying a lot more, you receive a lot more power; you attain a great status. It is the same here: by studying little, you receive a low status. The Father has explained: This Brahmin religion is very small. It is Brahmins who become the deities of the sun and moon dynasties. You are now making effort. You should understand that, as yet, you have just reached the copper age. You have to reach the silver and golden ages. At the end, there will be many children. Everything depends on purity. The more you stay in remembrance, the more power you will receive. You have promised the Father that you will definitely remain pure and make Bharat pure. When you children go and tie rakhis, you have to explain: We also came to tie this rakhi for you to become pure from impure 5000 years ago. The bond of rakhi is not just a one-day thing; it will continue till the end. You continue to keep the promise and also continue to pay attention to your study. You know that, through knowledge and yoga, you have to go from the iron age to the golden age. You have to become satopradhan from tamopradhan. A new person would not be able to understand these things. This is why your bhatthi (furnace) of seven days is very well known. You first have to feel their pulse. Until they receive the Father’s introduction and have faith in Him, they won’t understand anything. They will continue to receive the introduction through you. The tree will continue to grow. It takes time for self-sovereignty to be established. The world cannot be destroyed until you reach the golden age (stage). The time will come when there will be many children. Now, you are to go to important people at the time of Raksha Bandhan. You have to explain to them too. The Purifier Father only comes at the confluence age to make this impure world pure. Bharat truly was pure and it is now impure. The great Mahabharat War is just ahead. God, the Father, says: Children, Maya, Ravan is your great enemy. Those others are small physical enemies. The greatest enemy of Bharat is Ravan. This is why the rakhi of purity has to be tied. You have to promise: O Baba, we will remain pure in order to make Bharat elevated. We will also continue to make others that. Everyone has now been defeated by Ravan. They continue to burn an effigy of Ravan in Bharat alone. The kingdom of Ravan has continued for half the cycle. You have to explain this. It is no use tying a rakhi without explaining anything. Only you know this story. No one else would say: Five thousand years ago, too, the Father said: If you become pure you will claim the status of Narayan in the golden age from that of an ordinary man. Only you can relate the story of the true Narayan and the story of the Lord of Immortality. You have to explain that Bharat was pure; it was the Golden Sparrow. It is now impure; it would now be called the Iron Sparrow! Give them the Father’s introduction and ask them if they believe it. The Father truly gives you an inheritance through Brahma. The Father says: Now remember Me. Your 84 births are now coming to an end. You have been defeated by Maya. You now have to conquer Maya once again. Only the Father comes and tells you: Children, now become pure! Children say: Yes, Baba. We will definitely become Your helpers. We will definitely become pure and make Bharat pure. Tell them: We have not come to take money from you. We have come to give the Father’s introduction. All of you are the Father’s equals, are you not? The Father comes and gives a message. He advises: O children, remove everyone else from your intellects. You came bodiless. You first played your part s in heaven. You were beautiful, that is, you were pure. Then, by sitting on the pyre of lust, you became ugly. Bharat was golden aged. Bharat is now said to be iron aged. You now have to come off the pyre of lust and sit on the pyre of knowledge. The Father says: Constantly remember Me alone. Make a promise of purity. We are brothers and sisters, children of the one Father. You too are His children, but you don’t consider yourselves to be that. Only when you become a BK can you claim your inheritance from Shiv Baba. This is the world of impure and corrupt ones; there isn’t a single elevated being. In the golden age, there isn’t a single corrupt being. This is a matter of the unlimited. To establish the whole elevated world is the task of the Father alone. We Brahma Kumars and Kumaris claim our inheritance from the Father. We make a promise of purity. We make an album of photographs of those who give a guarantee to remain pure. You cannot receive a certificate to go to the pure world unless you become pure. Only the Father comes and makes you worthy and gives you a certificate. The Purifier of All, the Bestower of Salvation, is only the one Father. Impure ones are not worthy. Bharat has become insolvent and unhappy because it is impure. In the golden age, Bharat was pure and it was happy. The Father says: Now become pure! Issue this ordinance: Those who wish to become pure should not be stripped. Men cause a lot of trouble because of vice. This is why women are unable to help make Bharat elevated. A probe should be created about this. However, as yet, children haven’t developed that strength. When they reach the golden st age, they will have the sparkle of being able to explain to someone. Day by day, children continue to receive many points. You children understand that this is a steep climb. You have to follow the mother and Father. You do say: Mother and Father. That One is the Father and so this one is the mother. However, because he is a male, the urn is given to the mothers. You too are mothers. Men are brothers. Brothers inspire sisters and sisters inspire brothers to make a promise of purity. Mothers are made to go ahead. Those people also uplift women. In earlier days, they never had female Presidents or Prime Ministers. Previously, it used to be a kingdom of kings. In earlier days, when a new invention was created, they would go and tell the king about it. He would then give directions for its manufacture to be increased. Here, it is rule of the people by the people. Some believe and others do not. You have to make effort. You know how they have made a big mistake by putting Shri Krishna’s name in the Gita. One person might accept what we tell people and another one would not. As you make progress, you will receive strength. The soul says: I want to go the golden age. The lock on the intellect has now opened. You can now understand knowledge very well. Eventually, everyone will definitely understand. Innocent ones are being assaulted. It says in the scripture that Draupadi was stripped. Therefore, at that time, what else can be done except to stay in remembrance? If you remember Shiv Baba internally, that sin won’t be accumulated. You are under the influence of others. Yes, you do have to try to save yourself. The karmic bondage of each one is different. Some even beat their wives; so it is understood that she will claim a good status there. What can she do? The Father tells you very good ways to remain pure. Brahma Kumars and Kumaris are brothers and sisters, so there cannot be any vision of vice. The Father says: If you break this promise, you will be hurt a great deal. The intellect also says: If you don’t listen to the unlimited Father, you will fall and be hurt. If you repeatedly continue to fall, you will be defeated. This is boxing. All of these things are incognito. Here, the main things are purity and the study. There isn’t any other study.

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There is a lot of business of the path of devotion. Devotees do devotion and also say that God is in every particle. You have now received knowledge. Previously, you too used to say that God was omnipresent: Wherever I look, I only see You. All of this is part of God’s game. God is playing this game having adopted different forms. OK, what games would He play by being in every particle? They defame the unlimited Father! That too is a game, which is why the Father has to come. You children should be happy. You receive the Father’s direction. If you want to go to the pure world, you do have to become pure. Don’t think that you will go to heaven anyway. What status would you then claim? That is not effort. In order to become kings and queens, you do have to make some effort! No one understands the secrets of the drama. You now know that you claim your inheritance from the Father every cycle. Baba comes. Look how beautiful the pictures that have been made are! Bring people in front of the big pictures. All of you are surgeons and Shiv Baba is the eternal, golden Surgeon. You too are surgeons , numberwise. As yet, no one has become completely golden aged. You have to do service. At the time you explain feel each one’s pulse. Those who are maharathis would be able to feel the pulse very well. You have to become completely golden aged. You have not become that yet. It takes time to become that. The storms of Maya harass you a great deal. All of these things have to be understood. You have to claim your full inheritance from the Father by interacting with Him with great honesty. There shouldn’t be anything bad inside you. Maya harasses you because there isn’t yoga. Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. Having made a promise to the Father, you mustn’t break that promise. Make the soul golden aged with purity and by studying.
  2. Remove everyone else from your intellect and practise becoming bodiless. Gain victory over the storms of Maya with the power of yoga.
Blessing: May you be a destroyer of obstacles who finishes the obstacles of the world by being filled with all powers.
Only those who are filled with all powers can become destroyers of obstacles. No obstacle can come to those who are destroyers of obstacles. However, if you lack any power, you cannot then become a destroyer of obstacles and this is why you must check yourself and see that your stockof all powers is full. Maintain this awareness and intoxication: All the powers are my inheritance and I am a master almighty authority. Then, no obstacle will be able to stay with you.
Slogan: Those who constantly create pure thoughts are the ones who remain double light.

*** Om Shanti ***

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Brahma kumaris murli 8 August 2017 : Daily Murli (Hindi)

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 8 August 2017

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BK murli today ~ 08/08/2017 (Hindi) Brahma Kumaris प्रातः मुरली

08/08/17
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन

 

”मीठे बच्चे – इस रूहानी पढ़ाई को धारण करने के लिए बुद्धि पवित्र सोने का बर्तन चाहिए, पवित्रता की राखी बांधो तब राजाई का तिलक मिलेगा”
प्रश्नः- इस समय सभी बच्चों को बाप द्वारा कौन सा सर्टीफिकेट लेने का पुरूषार्थ करना है?
उत्तर:- पावन दुनिया में जाने के लिए पावन अर्थात् लायक बनने का सर्टीफिकेट लेना है। जब इस समय पवित्रता का प्रण करो तब बुद्धि गोल्डन एजेड बने। पवित्रता का सर्टीफिकेट लेने के लिए बाप की राय है – बच्चे, और सबसे अपना बुद्धियोग निकाल ज्ञान चिता पर बैठो। एक मात-पिता को फालो करो। पावन रहना ही है, यह प्रतिज्ञा करो। बाप के साथ सच्चाई से चलो।
गीत:- भैया मेरे राखी के बंधन को निभाना…

ओम् शान्ति। यह गीत तो बच्चों ने बहुत बार सुना है। यह तो रक्षाबंधन का उत्सव वा गीत भक्तिमार्ग में मनाते गाते आते हैं। अब यह है ज्ञान मार्ग। बाप बच्चों को कहते हैं बच्चे इस माया रावण पर जीत पाने से तुम जगत जीत अर्थात् जगत के मालिक बनेंगे। तुम बच्चे जानते हो कि मेहनत ही 5 विकारों पर जीत पाने की है। इसमें भी काम विकार है बड़ा शत्रु। पवित्रता के कारण ही मारामारी हंगामा आदि होता है। ऊंच ते ऊंच बाप ही माया पर जीत पहनाए जगत का मालिक बना सकते हैं। यह तो बच्चे जानते हैं। बेहद बाप का वर्सा पाने हमको पवित्र जरूर बनना है। जिस्मानी पढ़ाई भी पवित्रता में ही पढ़ी जाती है। यह है रूहानी पढ़ाई। इसमें बर्तन सोने का अर्थात् पवित्र चाहिए, जिसमें ज्ञान धन ठहर सके। पवित्र बनने में टाइम लगता है क्योंकि अभी सबका बर्तन ठिक्कर का बन गया है। बाप समझाते हैं अब तुम्हें पवित्र बन वापिस जाना है। जितना-जितना ज्ञान योग की धारणा होती जायेगी, उतना बुद्धि पवित्र होती जायेगी क्योंकि अब बुद्धि में है कि हमको वापिस लौटना है। आइरन एज से कॉपर एज में आना है, फिर सिल्वर एज में, फिर गोल्डन एज में आना है। यह पढ़ाई ऐसी है जो चलते-चलते फिर माया का वार हो जाता है। सब तो पवित्र रह नहीं सकते। माया बड़े तूफान में लाती है। आइरन एज से कॉपर एज में आने से फिर माया के तूफान घेर लेते हैं तो बुद्धि फिर आइरन एजेड बन जाती है और गिर पड़ते हैं। गिरना और चढ़ना यह तो है जरूर। चढ़कर फिर कॉपर एज, सिल्वर एज, गोल्डन एजेड में आना है। पढ़ते-पढ़ते ज्ञान सुनते-सुनते पिछाड़ी में हमारी वह गोल्डन एज बुद्धि बनेगी तब हम शरीर छोड़ देंगे। इस समय गिरना चढ़ना बहुत होता है। टाइम लगता है। जब बुद्धि गोल्डन एजेड बन जाती है फिर राज्य अधिकारी बनते हैं। गाया भी हुआ है – पवित्रता की राखी बांधने से राजतिलक मिलेगा। सो तुम बच्चे जानते हो – हमको राजाई प्राप्त करने के लिए पवित्रता की प्रतिज्ञा करनी है। ज्ञान और योग की धारणा करने में कितना समय लगता है। गोल्डन एज से आइरन एज तक आने में तो 5 हजार वर्ष लगते हैं। अब तो पढ़ना है – सो तो इस एक जन्म में ही होना है। जितना ऊंच पढ़ते जायेंगे, खुशी बढ़ती जायेगी। हम राजधानी स्थापन कर रहे हैं। बुद्धि योगबल और ज्ञानबल से। हर बात में बल होता है। थोड़ा पढ़ने में थोड़ा बल, जास्ती पढ़ने में जास्ती बल मिलता है। बड़ा पद मिलता है। यह भी ऐसे है। कम पढ़ने से पद भी कम मिलता है। बाप ने समझाया है – यह ब्राह्मण धर्म बहुत छोटा है। ब्राह्मण ही देवता सूर्यवंशी चन्द्रवंशी बनते हैं। अभी पुरूषार्थ कर रहे हैं। तुम ऐसे समझो – अजुन हम कॉपर एज तक पहुँचे हैं। फिर सिल्वर, गोल्डन एज तक आना है। पिछाड़ी में बच्चे भी ढेर हो जाते हैं ना। सारा मदार है – पवित्रता पर। जितना याद में रहेंगे उतना बल मिलेगा। बाप से प्रतिज्ञा की है – हम पवित्र बन भारत को पवित्र बनायेंगे। बच्चे राखी बांधने जाते हो तो भी समझाना होता है। आज से 5 हजार वर्ष पहले भी पतित से पावन बनने के लिए हम यह राखी बांधने आये थे। तो राखी बंधन तो एक दिन की बात नहीं। पिछाड़ी तक चलता रहेगा। प्रतिज्ञा करते रहेंगे। पढ़ाई पर ध्यान देते रहेंगे। तुम जानते हो ज्ञान और योग से आइरन एज से हमें गोल्डन एज में जाना है। तमोप्रधान से सतोप्रधान होना है। यह बातें और कोई नया समझ न सके इसलिए तुम्हारी 7 रोज़ की भट्ठी मशहूर है। पहले नब्ज देखनी पड़ती है। जब तक बाप का परिचय नहीं हुआ है, निश्चय नहीं बैठा है तब तक समझेंगे नहीं। तुम्हारे द्वारा परिचय पाते जायेंगे। झाड़ वृद्धि को पाता रहेगा। स्वराज्य स्थापन होने में समय लगता है। जब तक तुम गोल्डन एज में न आओ तब तक सृष्टि का विनाश हो नहीं सकता। वह समय आयेगा बहुत ढेर बच्चे हो जायेंगे। अभी रक्षाबंधन पर बड़े-बड़े आदमियों पास जायेंगे। उनको भी समझाना पड़े। पतित-पावन बाप इस पतित दुनिया को पावन बनाने इस संगम पर ही आते हैं। बरोबर भारत पावन था, अभी तो पतित है। महाभारत लड़ाई सामने खड़ी है। भगवान बाप कहते हैं बच्चे माया रावण तुम्हारा बड़ा दुश्मन है। वह तो जिस्मानी छोटे-छोटे दुश्मन है। भारत का सबसे बड़ा दुश्मन रावण है, इसलिए पवित्रता की राखी बांधनी है। प्रतिज्ञा करनी है हे बाबा भारत को श्रेष्ठाचारी बनाने के लिए हम पवित्र रहेंगे। औरों को भी बनाते रहेंगे। अभी सब रावण से हार खाये हुए हैं। भारत में ही रावण को जलाते रहते हैं। आधाकल्प रावण का राज्य चला है। यह तुमको समझाना पड़े। समझाने बिगर राखी बांधना कोई काम का नहीं। यह कहानी तुम ही जानते हो। और कोई ऐसे नहीं कहेंगे कि 5 हजार वर्ष पहले भी बाप ने कहा था कि पवित्र बनेंगे तो सतयुग में नर से नारायण का पद पायेंगे। यह सत्य-नारायण की वा अमरनाथ की कथा तुम ही सुना सकते हो। समझाना पड़ता है – भारत पवित्र था। सोने की चिड़िया थी। अभी तो पतित है। लोहे की चिड़िया कहेंगे। बाप का परिचय देकर बोलो कि मानते हो? बरोबर बाप ब्रह्मा द्वारा वर्सा देते हैं। बाप कहते हैं अब मुझे याद करो। 84 जन्म पूरे होते हैं। माया से हार खाई है। अब फिर माया पर जीत पानी है। बाप ही आकर कहते हैं बच्चे अब पवित्र बनो। बच्चे कहते हैं – हाँ बाबा। हम आपके मददगार जरूर बनेंगे। पवित्र बनकर भारत को पवित्र जरूर बनायेंगे। बोलो, हम कोई आपसे पैसे लेने नहीं आये हैं। हम तो बाप का परिचय देने आये हैं। तुम सब बाप के हमजिन्स हो ना। बाप आकर मैसेज देते हैं। राय देते हैं हे बच्चों और सबका बुद्धि से त्याग करो, तुम नंगे (अशरीरी) आये थे। पहले-पहले तुमने स्वर्ग में पार्ट बजाया। तुम गोरे अर्थात् पवित्र थे। फिर काम चिता पर बैठने से अभी काले बन गये हो। भारत गोल्डन एजड था। अभी भारत को आइरन एजेड कहा जाता है। अभी फिर काम चिता से उतर ज्ञान चिता पर बैठना है। बाप कहते हैं मामेकम् याद करो। पवित्रता का प्रण करो। एक बाप के बच्चे हम भाई-बहन हैं। तुम भी बच्चे हो, परन्तु समझते नहीं हो। बी.के. बनेंगे तब ही शिवबाबा से वर्सा ले सकते हो। यह है ही पतित भ्रष्टाचारियों की दुनिया। एक भी श्रेष्ठाचारी नहीं है। सतयुग में एक भी भ्रष्टाचारी नहीं होता। यह बेहद की बात है। सारी श्रेष्ठाचारी दुनिया की स्थापना करना, एक बाप का ही काम है। हम ब्रह्माकुमार कुमारियां बाप से वर्सा लेते हैं। पवित्रता की प्रतिज्ञा करते हैं। जो पवित्रता की गैरन्टी करते हैं उनका फोटो निकाल हम एलबम बनाते हैं। पावन बने बिगर पावन दुनिया में जाने का सर्टीफिकेट मिल न सके। बाप ही आकर लायक बनाए सर्टीफिकेट देते हैं। सर्व का पतित-पावन, सद्गति दाता एक ही बाप है। पतित लायक नहीं हैं ना। भारत ही इनसालवेन्ट दु:खी हो पड़ा है क्योंकि पतित है। सतयुग में पावन थे, तो भारत सुखी था। अब बाप कहते हैं पावन बनो। आर्डीनेंस निकालो। जो पावन बनने चाहते हैं उनको नंगन नहीं किया जाए। पुरूष लोग विकार के लिए बहुत तंग करते हैं, इसलिए मातायें भारत को श्रेष्ठ बनाने में मदद नहीं कर सकती हैं। इस पर प्रोब बनाना चाहिए। परन्तु वह ताकत अजुन बच्चों में आई नहीं है। जब गोल्डन स्टेज में आयेंगे तब वह फलक होगी, किसको समझाने की। बच्चों को दिन-प्रतिदिन प्वाइंट्स बहुत मिलती रहती है। बच्चे समझते हैं बड़ी ऊंची चढ़ाई है। माँ-बाप को फालो करना पड़े। मात-पिता तो कहते हैं। वह बाप है, तो यह माता हो गई। परन्तु मेल है इसलिए माता को कलष दिया जाता है। तुम भी मातायें हो, पुरूष भाई हैं। भाई बहन को, बहन भाई को पवित्रता की प्रतिज्ञा कराते हैं। माताओं को आगे बढ़ाया जाता है। वो लोग माताओं को उठा रहे हैं। आगे थोड़ेही प्रेजीडेंट, प्राइममिनिस्टर आदि फीमेल बनती थी। आगे तो राजाओं का राज्य था। आगे कोई नई इन्वेन्शन निकालते थे तो राजा को जाकर बोलते थे। वह फिर उनको बढ़ाने के लिए डायरेक्शन देते थे। यहाँ तो है ही प्रजा का राज्य। कोई मानेंगे कोई नहीं मानेंगे। मेहनत करनी पड़ती है। तुम जानते हो श्री कृष्ण का गीता में नाम डाल बड़ी भूल कर दी है। हमारी बात को एक मानेंगे दूसरे नहीं मानेंगे। आगे चलकर तुम्हारे में ताकत आयेगी। आत्मा कहती है हमको गोल्डन एज में जाना है। बुद्धि का ताला अब खुला है। ज्ञान को अच्छी रीति अब समझ सकते हैं। आखरीन पिछाड़ी में सब समझेंगे जरूर। अबलाओं पर अत्याचार होते हैं। यह शास्त्रों में है कि द्रोपदी के चीर उतारे थे। तो उस समय याद करने सिवाए और कर ही क्या सकेंगे। अन्दर में शिवबाबा को याद करेंगे तो वह पाप नहीं लगता है। परवश है। हाँ, बचने की कोशिश करनी है। हर एक का कर्म बन्धन अलग-अलग है। कोई तो एकदम स्त्री को मार भी देते हैं, तो समझा जाता है कि वह वहाँ अच्छा पद पा लेंगी। कर ही क्या सकते। पवित्र रहने की युक्ति बाप अच्छी रीति समझाते हैं। ब्रह्माकुमार कुमारी भाई बहन हो गये, विकार की दृष्टि जा नहीं सकती। बाप कहते हैं अगर इस प्रतिज्ञा को तोड़ेंगे तो बड़ी चोट लगेगी। बुद्धि भी कहती है – बेहद के बाप का मानेंगे नहीं तो चोट खायेंगे, गिर पड़ेंगे। घड़ी-घड़ी फिर गिरते रहेंगे तो हार खा लेंगे। यह बॉक्सिंग है ना। यह सब गुप्त बातें हैं। यहाँ मुख्य है – पवित्रता और पढ़ाई। और कोई पढ़ाई नहीं।

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भक्ति मार्ग के अथाह धन्धे हैं। भक्त लोग भक्ति करते भी कह देते हैं – भगवान तो कण कण में है। अभी तुम्हें नॉलेज मिली है। आगे तो तुम भी कहते थे भगवान सर्वव्यापी है, जहाँ देखो तू ही तू है। सब भगवान की लीला है। भगवान भिन्न-भिन्न रूप धारण कर लीला कर रहा है। अच्छा कण कण में क्या लीला करेंगे? बेहद के बाप की ग्लानी कर देते हैं। यह भी खेल है तब बाप को आना पड़ता है। बच्चों को खुशी होनी चाहिए। बाप का डायरेक्शन मिलता है – तुमको पवित्र बनना है, अगर पवित्र दुनिया में चलना चाहते हो तो। ऐसे नहीं स्वर्ग में तो जायेंगे ना, फिर क्या पद पायेंगे। वह कोई पुरूषार्थ नहीं। पुरूषार्थ करना है राजा-रानी बनने के लिए। ड्रामा के राज़ को कोई समझते नहीं है। अभी तुम जानते हो कल्प-कल्प हम बाप से वर्सा लेते हैं। बाबा आते हैं। चित्र भी देखो कितने अच्छे बने हुए हैं। बड़े चित्रों के आगे ले आना है। तुम सब सर्जन हो – शिवबाबा अविनाशी गोल्डन सर्जन है। तुम भी नम्बरवार सर्जन हो। अभी कोई सम्पूर्ण गोल्डन एजेड बना नहीं है। तुमको सर्विस करनी है। समझाने समय हर एक की नब्ज देखनी है। महारथी जो हैं वह अच्छी नब्ज देखेंगे। तुमको पूरा गोल्डन एजेड बनना है। अभी बने नहीं हैं। बनने में टाइम लगता है। माया के तूफान बहुत तंग करते हैं। यह सब बातें समझ की होती हैं। बाप से पूरा वर्सा लेना है और बहुत सच्चाई से चलना है। अन्दर कोई खराबी नहीं होनी चाहिए। माया हैरान करती है क्योंकि योग नहीं है। अच्छा।

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का यादप्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) बाप से प्रतिज्ञा कर फिर तोड़नी नहीं है, पवित्रता और पढ़ाई से आत्मा को गोल्डन एजेड बनाना है।

2) और सबका बुद्धि से त्याग कर अशरीरी बनने का अभ्यास करना है। योगबल से माया के तूफानों पर विजय पानी है।

वरदान:- सर्व शक्तियों की सम्पन्नता द्वारा विश्व के विघ्नों को समाप्त करने वाले विघ्न-विनाशक भव 
जो सर्व शक्तियों से सम्पन्न है वही विघ्न-विनाशक बन सकता है। विघ्न-विनाशक के आगे कोई भी विघ्न आ नहीं सकता। लेकिन यदि कोई भी शक्ति की कमी होगी तो विघ्न-विनाशक बन नहीं सकते इसलिए चेक करो कि सर्व शक्तियों का स्टॉक भरपूर है? इसी स्मृति वा नशे में रहो कि सर्व शक्तियां मेरा वर्सा हैं, मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ तो कोई विघ्न ठहर नहीं सकता।
स्लोगन:- जो सदा शुभ संकल्पों की रचना करते हैं वही डबल लाइट रहते हैं।

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