28 November 2020

BRAHMA KUMARIS MURLI TODAY 28 NOVEMBER 2020 : AAJ KI MURLI

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 28 November 2020

Murli Pdf for Print : – 

28-11-2020
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन
“मीठे बच्चे – तुम दिल से बाबा-बाबा कहो तो खुशी में रोमांच खड़े हो जायेंगे, खुशी में रहो तो मायाजीत बन जायेंगे”
प्रश्नः- बच्चों को किस एक बात में मेहनत लगती है लेकिन खुशी और याद का वही आधार है?
उत्तर:- आत्म-अभिमानी बनने में ही मेहनत लगती है लेकिन इसी से खुशी का पारा चढ़ता है, मीठा बाबा याद आता है। माया तुम्हें देह-अभिमान में लाती रहेगी, रूसतम से रूसतम होकर लड़ेगी, इसमें मूंझना नहीं। बाबा कहते बच्चे माया के तूफानों से डरो मत, सिर्फ कर्मेन्द्रियों से कोई विकर्म नहीं करो।

ओम् शान्ति। रूहानी बाप रूहानी बच्चों को समझा रहे हैं वा शिक्षा दे रहे हैं, पढ़ा रहे हैं। बच्चे जानते हैं पढ़ाने वाला बाप सदैव देही-अभिमानी है। वह है ही निराकार, देह लेता ही नहीं है। पुनर्जन्म में नहीं आते हैं। बाप समझाते हैं तुम बच्चों को मेरे समान अपने को आत्मा समझना है। मैं हूँ परमपिता। परमपिता को देह होती नहीं। उनको देही-अभिमानी भी नहीं कहेंगे। वह तो है ही निराकार। बाप कहते हैं मुझे अपनी देह नहीं हैं। तुमको तो देह मिलती आई है। अब मेरे समान देह से न्यारा हो अपने को आत्मा समझो। अगर विश्व का मालिक बनना है तो और कोई डिफीकल्ट बात है नहीं। बाप कहते हैं देह-अभिमान को छोड़ मेरे समान बनो। सदैव बुद्धि में याद रहे हम आत्मा हैं, हमको बाबा पढ़ा रहे हैं। बाप तो निराकार है, परन्तु हमको पढ़ाये कैसे? इसलिए बाबा इस तन से आकर पढ़ाते हैं। गऊ मुख दिखाते हैं ना। अब गऊ के मुख से तो गंगा नहीं निकल सकती। माता को भी गऊ माता कहा जाता है। तुम सब गऊ हो। यह (ब्रह्मा) तो गऊ नहीं है। मुख द्वारा ज्ञान मिलता है। बाप की गऊ तो नहीं है ना – बैल पर भी सवारी दिखाते हैं। वह तो शिव-शंकर एक कह देते हैं। तुम बच्चे अभी समझते हो शिव-शंकर एक नहीं है। शिव तो है ऊंच ते ऊंच फिर ब्रह्मा-विष्णु-शंकर। ब्रह्मा है सूक्ष्मवतनवासी। तुम बच्चों को विचार सागर मंथन कर प्वाइंट निकाल समझाना पड़ता है, और निडर भी बनना है। तुम बच्चों को ही खुशी है। तुम कहेंगे हम ईश्वर के स्टूडेण्ट हैं, हमको बाबा पढ़ाते हैं। भगवानुवाच भी है-हे बच्चे, मैं तुमको राजाओं का राजा बनाने के लिए पढ़ाता हूँ। भल कहाँ भी जाते हो, सेन्टर्स पर जाते हो, बुद्धि में है कि बाबा हमको पढ़ाते हैं। जो अभी हम सेन्टर्स पर सुनते हैं, बाबा मुरली चलाते हैं। बाबा, बाबा करते रहो। यह भी तुम्हारी यात्रा हुई। योग अक्षर शोभता नहीं। मनुष्य अमरनाथ, बद्रीनाथ यात्रा करने पैदल जाते हैं। अभी तुम बच्चों को तो जाना है अपने घर। तुम जानते हो अब यह बेहद का नाटक पूरा होता है। बाबा आया हुआ है, हमको लायक बनाकर ले जाने के लिए। तुम खुद कहते हो हम पतित हैं। पतित थोड़ेही मुक्ति को पायेंगे। बाप कहते हैं-हे आत्माओं, तुम पतित बने हो। वह शरीर को पतित समझ गंगा में स्नान करने जाते हैं। आत्मा को तो वह निर्लेप समझ लेते हैं। बाप समझाते हैं – मूल बात है ही आत्मा की। कहते भी हैं पाप आत्मा, पुण्य आत्मा। यह अक्षर अच्छी रीति याद करो। समझना और समझाना है। तुमको ही भाषण आदि करना है। बाप तो गांव-गांव में, गली-गली में नहीं जायेंगे। तुम घर-घर में यह चित्र रख दो। 84 का चक्र कैसे फिरता है। सीढ़ी में बड़ा क्लीयर है। अब बाप कहते हैं – सतोप्रधान बनो। अपने घर जाना है, पवित्र बनने बिगर तो घर जायेंगे नहीं। यही फुरना लगा रहे। बहुत बच्चे लिखते हैं, बाबा हमको बहुत तूफान आते हैं। मन्सा में बहुत खराब ख्यालात आते हैं। आगे नहीं आते थे।

बाप कहते हैं तुम यह ख्याल नहीं करो। आगे कोई तुम युद्ध के मैदान में थोड़ेही थे। अभी तुमको बाप की याद में रह माया पर जीत पानी है। यह घड़ी-घड़ी याद करते रहो। गांठ बांध लो। जैसे मातायें गांठ बांध लेती हैं, पुरूष लोग फिर नोट बुक में लिखते हैं। तुम्हारा तो यह बैज अच्छी निशानी है। हम प्रिन्स बनते हैं, यह है ही बेगर टू प्रिन्स बनने की गॉडली युनिवर्सिटी। तुम प्रिन्स थे ना। श्रीकृष्ण वर्ल्ड का प्रिन्स था। जैसे इंगलैण्ड का भी प्रिन्स ऑफ वेल्स कहा जाता है। वह हैं हद की बातें, राधे-कृष्ण तो बहुत नामीग्रामी है। स्वर्ग के प्रिन्स-प्रिन्सेज थे ना इसलिए उन्हों को सभी प्यार करते हैं। श्रीकृष्ण को तो बहुत प्यार करते हैं। करना तो दोनों को चाहिए। पहले तो राधे को करना चाहिए। परन्तु बच्चे पर जास्ती प्यार रहता है क्योंकि वह वारिस बनता है। स्त्री का भी पति पर प्यार रहता है। पति के लिए ही कहते हैं यह तुम्हारा गुरू ईश्वर है। स्त्री के लिए ऐसे नहीं कहेंगे। सतयुग में तो माताओं की महिमा है। पहले लक्ष्मी फिर नारायण। अम्बा का कितना रिगार्ड रखते हैं। ब्रह्मा की बेटी है। ब्रह्मा का इतना नहीं है, ब्रह्मा का मन्दिर अजमेर में हैं। जहाँ मेले आदि लगते हैं। अम्बा के मन्दिर में भी मेला लगता है। वास्तव में यह सब मेले मैला बनाने के लिए ही हैं। तुम्हारा यह मेला है स्वच्छ बनने का। स्वच्छ बनने के लिए तुमको स्वच्छ बाप को याद करना है। पानी से कोई पाप नाश नहीं होते हैं। गीता में भी भगवानुवाच है मनमनाभव। आदि और अन्त में यह अक्षर हैं। तुम बच्चे जानते हो हमने ही पहले-पहले भक्ति शुरू की है। सतोप्रधान भक्ति फिर सतो-रजो-तमो भक्ति होती है। अभी तो देखो मिट्टी पत्थर आदि सबकी करते हैं। यह सब है अन्धश्रद्धा। इस समय तुम संगम पर बैठे हो। यह उल्टा झाड़ है ना। ऊपर में है बीज। बाप कहते हैं इस मनुष्य सृष्टि का बीज रचता मैं हूँ। अभी नई दुनिया की स्थापना कर रहे हैं। सैपलिंग लगाते हैं ना। झाड़ के पुराने पत्ते झड़ जाते हैं। नये-नये पत्ते निकलते हैं। अभी बाप देवी-देवता धर्म की स्थापना कर रहे हैं। बहुत पत्ते हैं जो मिक्स हो गये हैं। अपने को हिन्दू कहलाते हैं। वास्तव में हिन्दू हैं ही आदि सनातन देवी-देवता धर्म वाले। हिन्दुस्तान का वास्तव में नाम ही है भारत, जहाँ देवतायें रहते थे। और किसी देश का नाम नहीं बदलता, इनका नाम बदल दिया है। हिन्दुस्तान कह देते हैं। बौद्धी लोग ऐसे नहीं कहेंगे कि हमारा धर्म जापानी वा चीनी है। वह तो अपने धर्म को बौद्धी ही कहेंगे। तुम्हारे में कोई भी अपने को आदि सनातन देवी-देवता धर्म का नहीं कहते हैं। अगर कोई कहे भी तो बोलो वह धर्म कब और किसने स्थापन किया? कुछ भी बता नहीं सकेंगे। कल्प की आयु ही लम्बी-चौड़ी कर दी है, इसको कहा जाता है अज्ञान अन्धेरा। एक तो अपने धर्म का पता नहीं, दूसरा लक्ष्मी-नारायण के राज्य को बड़ा दूर ले गये हैं इसलिए घोर अन्धियारा कहा जाता है। ज्ञान और अज्ञान में कितना फर्क है। ज्ञान सागर है ही एक शिवबाबा। उनसे जैसे एक लोटा देते हैं। सिर्फ किसको यह सुनाओ कि शिवबाबा को याद करो तो विकर्म विनाश होंगे। यह जैसे चुल्लु पानी हुआ ना। कोई तो स्नान करते हैं, कोई घड़ा भर ले जाते हैं। कोई छोटी-छोटी लोटी ले जाते हैं। रोज़ एक-एक बूंद मटके में डाल उसको ज्ञान जल समझ पीते हैं। विलायत में भी वैष्णव लोग गंगा जल के घड़े भरकर ले जाते हैं। फिर मंगाते रहते हैं। अब यह तो सारा पानी पहाड़ों से ही आता है। ऊपर से भी पानी गिराते हैं। आजकल देखो मकान भी कितने ऊंचे 100 मंजिल तक के बनाते हैं। सतयुग में तो ऐसे नहीं होगा। वहाँ तो तुमको जमीन इतनी मिलती है बात मत पूछो। यहाँ रहने के लिए जमीन नहीं है, तब इतने मंजिल बनाते हैं। वहाँ अनाज भी अथाह पैदा होता है। जैसे अमेरिका में बहुत अनाज होता है तो जला देते हैं। यह है मृत्युलोक। वह है अमरलोक। आधाकल्प वहाँ तुम सुख में रहते हो। काल अन्दर घुस न सके। इस पर एक कथा भी है। यह है बेहद की बात। बेहद की बातों से फिर हद की कथायें बैठ बनाई हैं। ग्रंथ पहले कितना छोटा था। अब तो कितना बड़ा कर दिया है। शिवबाबा कितना छोटा है, उनकी भी कितनी बड़ी प्रतिमा बना दी है। बुद्ध के चित्र, पाण्डवों के चित्र बड़े-बड़े लम्बे बनाये हैं। ऐसे तो कोई होते नहीं। तुम बच्चों को तो यह एम ऑब्जेक्ट का चित्र घर-घर में रखना चाहिए। हम पढ़कर यह बन रहे हैं। फिर रोना थोड़ेही चाहिए। जो रोते हैं वह खोते हैं। देह-अभिमान में आ जाते हैं। तुम बच्चों को आत्म-अभिमानी बनना है, इसमें ही मेहनत लगती है। आत्म-अभिमानी बनने से ही खुशी का पारा चढ़ता है। मीठा बाबा याद आता है। बाबा से हम स्वर्ग का वर्सा ले रहे हैं। बाबा हमको इस भाग्यशाली रथ में आकर पढ़ाते हैं। रात-दिन बाबा-बाबा याद करते रहो। तुम आधाकल्प के आशिक हो। भक्त भगवान को याद करते हैं। भक्त हैं अनेक। ज्ञान में सब एक बाप को याद करते हैं। वही सबका बाप है। ज्ञान सागर बाप हमको पढ़ाते हैं, तुम बच्चों के तो रोमांच खड़े हो जाने चाहिए। तूफान तो माया के आयेंगे ही। बाबा कहते हैं – सबसे जास्ती तूफान तो मुझे आते हैं क्योंकि सबसे आगे मैं हूँ। हमारे पास आते हैं तब तो मैं समझता हूँ – बच्चों के पास कितने आते होंगे। मूँझते होंगे। अनेक प्रकार के तूफान आते हैं जो अज्ञान काल में भी कभी नहीं आते होंगे, वह भी आते हैं। पहले मुझे आने चाहिए, नहीं तो मैं बच्चों को समझाऊंगा कैसे। यह है फ्रन्ट में। रूसतम है तो माया भी रूसतम से रूसतम होकर लड़ती है। मल्लयुद्ध में सब एक जैसे नहीं होते हैं। फर्स्ट, सेकण्ड, थर्ड ग्रेड होती है। बाबा के पास सबसे जास्ती तूफान आते हैं, इसलिए बाबा कहते हैं इन तूफानों से डरो मत। सिर्फ कर्मेन्द्रियों से कोई विकर्म नहीं करो। कई कहते हैं – ज्ञान में आये हैं तो यह क्यों होता है, इससे तो ज्ञान नहीं लेते तो अच्छा था। संकल्प ही नहीं आते। अरे यह तो युद्ध है ना। स्त्री के सामने होते भी पवित्र दृष्टि रहे, समझना है शिवबाबा के बच्चे हम भाई-भाई हैं फिर प्रजापिता ब्रह्मा की सन्तान होने से भाई-बहन हो गये। फिर विकार कहाँ से आया। ब्राह्मण हैं ऊंच चोटी। जो ही फिर देवता बनते हैं तो हम बहन-भाई हैं। एक बाप के बच्चे कुमार-कुमारी। अगर दोनों कुमार-कुमारी होकर नहीं रहते तो फिर झगड़ा होता है। अबलाओं पर अत्याचार होते हैं। पुरूष भी लिखते हैं हमारी स्त्री तो जैसे पूतना है। बड़ी मेहनत है। जवानों को तो बहुत मेहनत होती है। और जो गन्धर्वी विवाह कर इकट्ठे रहते, कमाल है उन्हों की। उन्हों का बहुत ऊंच पद हो सकता है। परन्तु जब ऐसी अवस्था धारण करें। ज्ञान में तीखे हो जाएं। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) माया के तूफानों से डरना वा मूँझना नहीं हैं। सिर्फ ध्यान रखना है कर्मेन्द्रियों से कोई विकर्म न हो। ज्ञान सागर बाबा हमको पढ़ाते हैं – इसी खुशी में रहना है।

2) सतोप्रधान बनने के लिए आत्म अभिमानी बनने की मेहनत करनी है, ज्ञान का विचार सागर मंथन करना है, याद की यात्रा में रहना है।

वरदान:- श्रेष्ठ पुरूषार्थ द्वारा फाइनल रिजल्ट में फर्स्ट नम्बर लेने वाले उड़ता पंछी भव
फाइनल रिजल्ट में फर्स्ट नम्बर लेने के लिए :-1- दिल के अविनाशी वैराग्य द्वारा बीती हुई बातों को, संस्कार रूपी बीज को जला दो। 2-अमृतवेले से रात तक ईश्वरीय नियमों और मर्यादाओं का सदा पालन करने का व्रत लो और 3-मन्सा द्वारा, वाणी द्वारा या सम्बन्ध सम्पर्क द्वारा निरन्तर महादानी बन, पुण्य आत्मा बन दान पुण्य करते रहो। जब ऐसा श्रेष्ठ हाई जम्प देने वाला पुरूषार्थ हो तब उड़ता पंछी बन फाइनल रिजल्ट में नम्बर वन बन सकेंगे।
स्लोगन:- वृत्ति द्वारा वायुमण्डल को पावरफुल बनाना यही लास्ट का पुरूषार्थ व सर्विस है।

TODAY MURLI 28 NOVEMBER 2020 DAILY MURLI (English)

Today Murli Brahma Kumaris: 28 November 2020

28/11/20
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, say “Baba, Baba” from your hearts and you will have goose pimples of happiness. Stay in happiness and you will become conquerors of Maya.
Question: What one thing, which is the basis of happiness and remembrance, do children find hard work?
Answer: It takes effort to become soul conscious, but it is by becoming this that your mercury of happiness rises and you remember sweet Baba. Maya continues to make you body conscious. Maya becomes powerful with the powerful ones and fights them. However, you mustn’t be confused by this. Baba says: Children, don’t be afraid of the storms of Maya. Just don’t perform any sinful actions with your physical senses.

Om shanti. The spiritual Father explains to you spiritual children, that is, He gives you teachings and educates you. You children know that the Father who is teaching you is always soul conscious. He is incorporeal. He doesn’t take a body. He doesn’t come into rebirth. The Father explains: You children have to consider yourselves to be souls like Me. I am the Supreme Father. The Supreme Soul doesn’t have a body. You cannot say that He is soul conscious; He is incorporeal. The Father says: I do not have a body of My own. You have been continuously receiving bodies. Now, become like Me, detached from the body, and consider yourself to be a soul. If you want to become a master of the world, there is nothing more difficult than that. The Father says: Renounce body consciousness and become like Me. Always keep it in your intellects that you are souls and that Baba is teaching us. The Father is incorporeal, so how would He teach us? This is why Baba comes and teaches us through this body. They show Gaumukh (cow’s mouth). Now, how could the Ganges emerge from the mouth of a cow? Mothers are also called mother cows. You are all cows. This one (Brahma Baba) isn’t a cow. You receive knowledge through the mouth. The Father doesn’t have a cow; they show Him riding a bull. They also say: Shiva and Shankar are one. You children now understand that Shiva and Shankar are not the same. Shiva is the Highest on High; then there are Brahma, Vishnu and Shankar. That Brahma is a resident of the subtle region. You children have to churn the ocean of knowledge and extract points to explain and you also have to become fearless. Only you children have happiness. You say: We are students of God; Baba is teaching us. God speaks: O children, I teach you in order to make you into kings of kings. No matter where you go, to the centres or anywhere else, it is in your intellects that Baba is teaching you. Whatever you listen to at a centre is the murli spoken by Baba. Continue to say “Baba, Baba”. This is also your pilgrimage. The word “yoga” is not really appropriate. Human beings go on foot to pilgrimage places like Amarnath and Badrinath. You children now have to go back to your home. You know that this unlimited play is now coming to an end. Baba has come to make us worthy and to take us back. You yourselves say: We are impure. Impure beings cannot attain liberation. The Father says: O souls, you have become impure. They consider their bodies to be impure and go and bathe in the Ganges. They say that souls are immune to the effect of action. The Father explains: The main thing is the soul. It is said: Charitable soul and sinful soul. Remember these words very well. You have to understand this yourself and then make others understand. It is you who have to give lectures. The Father is not going to go from village to village and street to street. You should have these pictures in every home. How does the cycle of 84 births turn? It is very clear in the picture of the ladder. The Father says: Now become satopradhan. You have to go back home and you cannot go back without becoming pure. You should just have this one concern. Many children write to Baba: So many storms of Maya come to me. Very dirty thoughts come into my mind; they did not come before. The Father says: Don’t worry about it. Previously, you were not on a battlefield. You now have to stay in remembrance of the Father and gain victory over Maya. Remember this again and again. Tie a knot, just as mothers tie a knot and men write it in their notebooks. This badge of yours is a good symbol. We are becoming princes. This is the Godly university for changing from a beggar to a prince. You were prince, were you not? Shri Krishna was the prince of the world, just as in England there is the Prince of Wales. That is a limited matter. Radhe and Krishna are very famous. Because they were the prince and princess of heaven, everyone loves them. Shri Krishna is loved a great deal. Both of them should be loved. It should first be Radhe, but it is the male child who is loved more because he becomes the heir. A wife has love for her husband. It is of the husband that they say: He is your guru and your god. This is not said of the wife. In the golden age, the mothers are praised. First it is Lakshmi and then Narayan. There is so much regard for the goddess Amba; she is the daughter of Brahma. There is not as much regard for Brahma. There is a temple to Brahma in Ajmer where melas etc. take place. There are also melas in the temples to Amba. In fact, all of those melas are to make you dirty (mehla). This mela of yours is to make you clean. In order to become clean, you have to remember the clean (pure) Father. You cannot be absolved of your sins with water. The word of God, “Manmanabhav”, is mentioned in the Gita. It is mentioned at the beginning as well as at the end. You children know that it was we who started worshipping. There is satopradhan devotion, then sato, rajo and then tamo devotion. Look, they now even worship mud and stones! All of that is blind faith. At this time, you are sitting at the confluence. This is the inverted tree: the Seed is at the top. The Father says: I am the Creator and Seed of this human world tree. I am now establishing the new world. The sapling is being planted. Old leaves of a tree fall off and new leaves start to appear. The Father is now establishing the original, eternal, deity religion. There are many leaves who have become mixed (converted). They call themselves Hindus. In reality, Hindus belong to the original, eternal, deity religion. The original name of Hindustan is Bharat where the deities used to live. No other country’s name is changed, but they have changed this country’s name. They call it Hindustan. Buddhists do not say that their religion is Japanese or Chinese. They call their religion Buddhism. Here, too, none of them consider themselves to be part of the original, eternal, deity religion. If someone says that he is part of that religion, ask him: When was that religion established and who established it? He will not be able to tell you anything. The duration of the cycle has been elongated. That is said to be the darkness of ignorance. Firstly, they do not know about their religion. Secondly, the kingdom of Lakshmi and Narayan has been placed far away. That is why it is said to be extreme darkness. There is so much difference between knowledge and ignorance. The Ocean of Knowledge is Shiv Baba alone. It is just like giving an urn of water; simply to tell someone to remember Shiv Baba and his sins will be absolved is just like offering a handful of water. Some bathe in it (Ganges), and some take a pot of water. Some take small urns and some take even smaller urns. They pour a drop of water into a pot and consider it to be the water of knowledge and drink it. Vaishnavs also take this water of the Ganges in a container when they go abroad and they keep asking for more to be sent to them. Now, all of that water comes from the mountains. Water also falls from above. These days, buildings are built with 100 floors. It will not be like that in the golden age. There, you will have so much land, don’t even ask! Here, land is scarce and that is why they have to build so many floors. There, there is an abundance of grain as well. In America, when there is an abundance of grain, they have to burn it. This is the land of death. That is the land of immortality. For half the cycle, you remain happy there. Death cannot force itself in there. There is a story about this. These are unlimited matters. From these unlimited matters they have made up limited stories. Originally, the Granth was so small. It has now been made so big. Shiv Baba is so tiny and yet they have made such a big symbol of Him. Images of Buddha and the Pandavas have been made very large. There is no one like that. You children should keep a picture of the aim and objective in every house. We are becoming this by studying. Why then should you cry? Those who cry lose out. You become body conscious. You children have to become soul conscious; it is this that requires effort. Only by becoming soul conscious does the mercury of your happiness rise and sweet Baba is remembered. We are claiming our inheritance of heaven from Baba. Baba comes in this Lucky Chariot to teach us. Remember Baba day and night. You are lovers for half the cycle. Devotees remember God. There are many devotees. Everyone in knowledge remembers the one Father; He is the Father of all. You should have goose pimples that the Father, the Ocean of Knowledge, is teaching us. Storms of Maya will definitely come. Baba says: I have to face the maximum number of storms as I am in the forefront. Because storms come to me, I can understand how many storms must come to the children, how confused you must be. Many types of storm come, even those you never had in your days of ignorance. These storms first have to come to me. Otherwise, how would I be able to explain them to you children? This one is in the front. He is powerful and hence Maya also fights back in a powerful way. In wrestling, not all are the same. There are the firstsecond and third grades. Baba has the maximum number of storms and this is why he says: Do not be afraid of these storms. Just do not perform any sinful actions through your physical senses. Some say: Why do such things happen after we have come into knowledge? It would have been better if we had not taken knowledge; we wouldn’t have then had such thoughts. However, this is a war. Even when you are in front of a woman you should have pure vision. Understand that, as Shiv Baba’s children, you are brothers and then, as the children of Prajapita Brahma, you become brothers and sisters. So, where do the vices come from? Brahmins are the topknot who become deities and you are therefore brothers and sisters. Since you are both children of one father (Brahma), if you do not stay as a kumar and kumari, there will be fights. Innocent ones are assaulted. Men also write: My wife is like Putna (female devil). There is a lot of effort involved. Young ones have to make a lot of effort. Those who live together in a pure marriage – this is a wonder! They can attain a very high status. However, that can only happen when they adopt such a stage and become clever in knowledge. Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. Do not become afraid or confused because of the storms of Maya. Just pay attention not to perform sinful actions with your physical senses. Maintain the happiness that Baba, the Ocean of Knowledge, is teaching us.
  2. In order to become satopradhan, make effort to become soul conscious. Churn the ocean of knowledge and stay on the pilgrimage of remembrance.
Blessing: May you become a flying bird who claims a first number in the final result by making elevated effort.
In order to claim a first number in the final result: 1) With imperishable disinterest from the heart, burn away the things of the past and the seed of sanskars. 2) Make a vow always to observe the Godly disciplines and codes of conduct from amrit vela till night time. 3) Be a constantly great donor with your thoughts, your words and your relationships and connections, be a charitable soul and continue to give donations and perform charity. When you make such elevated effort to take such a high jump, you will then be able to become a flying bird and claim number one in the final result.
Slogan: To make the atmosphere powerful with your attitude is the last effort for service.

*** Om Shanti ***

Font Resize