28 november 2017

BRAHMA KUMARIS MURLI 28 NOVEMBER 2017 : DAILY MURLI (HINDI)

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 28 November 2017

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28/11/17
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन

 

”मीठे बच्चे – तुम्हें इस रुद्र ज्ञान यज्ञ का बड़ा कदर होना चाहिए क्योंकि इस यज्ञ से ही भारत स्वर्ग बनता है, तुम इस यज्ञ के रक्षक हो”
प्रश्नः- बच्चे, बाप वा टीचर को तलाक अथवा फारकती कैसे और कब देते हैं?
उत्तर:- जब बाप अथवा टीचर को भूल जाते हैं, मुरली मिस करते हैं, पढ़ते वा सुनते नहीं हैं तो गोया बाप को फारकती वा तलाक दे देते हैं। बाबा कहते बच्चे तुम मुझे तलाक कभी नहीं देना।
प्रश्नः- तुम्हारा सत्य ज्ञान मनुष्यों को मुश्किल समझ में आता है, क्यों?
उत्तर:- क्योंकि यह ज्ञान परम्परा नहीं चलता है। अभी ही प्राय:लोप हो जाता है। इस ज्ञान का किसको पता ही नहीं है। यह नया ज्ञान है इसलिए उन्हें समझने में मुश्किल लगता है।
गीत:- पितु मात सहायक …..

ओम् शान्ति। जिसके साथ बच्चों का अभी योग है उनकी बाहर मनुष्य महिमा गाते रहते हैं। तुम उनकी याद में बैठे हो। अपने को आत्मा समझ देह का अभिमान छोड़ एक की ही याद में रहना है। अभी तुम आत्म-अभिमानी बने हो। पहले थे देह-अभिमानी। सतयुग में तुम बाप को नहीं जानते क्योंकि सुख में होते हो तो बाप याद नहीं रहता। यहाँ दु:खों में हो तब पुकारते हो। गायन भी है दु:ख हर्ता – सुखकर्ता। वास्तव में सच्चा-सच्चा हरिद्वार यह है। मनुष्य हरी कहते हैं कृष्ण को, बैकुण्ठ को कृष्ण का हरी द्वार कहते हैं। तुम जानते हो वास्तव में हरी कृष्ण को नहीं कहेंगे। दु:ख हरने वाले को हरी कहेंगे। तुम जानते हो शिवबाबा कृष्ण का द्वार अथवा बैकुण्ठ, सतयुग का द्वार खोलने आया है। कोई मकान बनाते हैं तो कोई ओपनिंग सेरीमनी करते हैं ना। तो बाबा आया है हरी द्वार की सेरीमनी करने। कृष्ण की राजधानी में कंस तो होता नहीं है। बाप द्वारा हम स्वर्ग का वर्सा ले रहे हैं। बाप ही आकर स्वर्ग के स्थापना की सेरीमनी कर रहे हैं। स्थापना को सेरीमनी कहा जाता है। मकान का पहला फाउन्डेशन लगाया जाता है फिर मकान बनकर पूरा होता है फिर सेरीमनी की जाती है। तो बाप फाउन्डेशन लगाने आया है। 1937 में फाउन्डेशन लगाया, अब फिर तुम स्थापना कर रहे हो। तुमको खुशी है कि बाबा आया है नई दुनिया स्थापन करने और हम नई दुनिया में जा रहे हैं। इस पृथ्वी पर स्वर्ग था, अब फिर स्थापन कर रहे हैं। हर एक को पैगाम दे रहे हैं। धर्म स्थापक को पैगम्बर कहा जाता है ना। सच्चा-सच्चा पैगाम मैं ही देता हूँ। मैं ही राजयोग सिखला कर स्वर्ग की स्थापना करा रहा हूँ। बाप समझाते हैं कि मैं वेद-शास्त्रों से नहीं मिलता हूँ। यह सब भक्ति मार्ग के शास्त्र हैं। भक्तिमार्ग की बहुत सामग्री है। जन्म-जन्मान्तर से तुम भक्ति करते आये हो। अब ज्ञान सुनो फिर सतयुग में ज्ञान नहीं सुनेंगे। कहा जाता है ज्ञान अंजन सतगुरू दिया। सतयुग में अंधकार है नहीं जो भक्ति करें। बाप से ज्ञान लो फिर भक्ति नहीं रहेगी।

तुम जानते हो रावण राज्य किसको कहा जाता है, रामराज्य किसको कहा जाता है। तुमको सारी रोशनी मिली है क्योंकि बाप जगाते हैं। अब देखो दीपावली मनाते हैं, उसमें दीपक कोई छोटे, कोई बड़े बनाते हैं। अब यह छोटे बड़े दीपक जग रहे हैं ना, ज्ञान का घृत मिल रहा है। मनुष्य मरते हैं तो दीपक में घृत डालते रहते हैं कि प्राणी अन्धियारे में ठोकरे न खाये। वह हैं हद की बातें, तुम्हारी हैं बेहद की बातें। जब रावणराज्य शुरू होता है तो ठोकरें खाना शुरू होती हैं। अभी दिन प्रतिदिन अधिक ही ठोकरें खाते रहते हैं। पहले एक की भक्ति करते अब तो मनुष्यों की, टिवाटे की भक्ति करते हैं। भक्ति की बहुत सामग्री है, जितनी वृक्ष की सामग्री है। बीज से कितना बड़ा वृक्ष निकलता है, भक्ति भी इतनी है। ज्ञान है बीज, यह सृष्टि तो अनादि अविनाशी है। इनका कब विनाश नहीं होता। यह सृष्टि चक्र लगाती रहती है। बीज भी एक है तो झाड़ भी एक है। ऐसे नहीं आकाश में, पाताल में, सूर्य में, चांद में दुनिया है। यह तो साइंस वाले चन्द्रमा में जाकर रहने की कोशिश करते हैं। परन्तु यह नहीं जानते कि साइंस से सारी दुनिया का विनाश होना है और राज्य तुम ले लेंगे। तुम कहेंगे यह भी ड्रामा में नूंध है। दूसरे इन बातों को समझेंगे नहीं। राजाई तुमको मिलनी है क्योंकि कनेक्शन है कृष्णपुरी और क्रिश्चियनपुरी का। इन्होंने भारतवासियों को आपस में लड़ाकर कृष्णपुरी को क्रिश्चियनपुरी बनाया। अब बाप कहते हैं हिसाब लेना है, इनको आपस में लड़ाकर माखन तुमको देते हैं अथवा तुमको विश्व का मालिक बनाते हैं। यह आपस में लड़ेंगे जरूर। वह समझते हैं हम पहलवान, वह कहते हैं हम पहलवान, हम जीतेंगे लेकिन सबसे पहलवान तो तुम निकल पड़े हो। जीत तुम्हारी होनी है। महावीर और महावीरनी कहा जाता है। बाप कहते हैं माया के तूफान तो आयेंगे परन्तु कर्म में नहीं आना। योगबल से स्थापना हो रही है और बाहुबल से विनाश हो रहा है। उठते-बैठते, चलते-फिरते बाप को याद करना है, इसको कहा जाता है योगबल। फिर ज्ञान बल कहा जाता है। ज्ञान बल क्यों कहा जाता है? क्योंकि शास्त्रों में बल नहीं हैं। उनसे कोई को मुक्ति-जीवनमुक्ति नहीं मिल सकती, इसलिए उनको ज्ञान नहीं कहा जाता। भक्ति के शास्त्र कहेंगे। ज्ञान का कोई शास्त्र होता नहीं। अब जो राम के पुस्तक बने हैं वा जो भी शास्त्र आदि हैं, सब लड़ाई में खत्म हो जायेंगे। झूठी गीता, सच्ची गीता सब खत्म हो जायेगी क्योंकि सद्गति मिल जाती है। सब कामनायें पूरी हो जाती हैं। कोई कामना रहेगी नहीं। अब तुम 84 के चक्र को जानते हो। तुम अभी बेअन्त नहीं कहेंगे। बेअन्त कहते हैं नास्तिक। कहते हैं गॉड फादर परन्तु नाम रूप देश काल कर्तव्य को नहीं जानते। तुम उनके नई दुनिया की स्थापना, पतितों को पावन करने के कर्तव्य को जान गये हो। मनुष्य तो रावण को जलाते हैं। तुमको तो अब हंसी आती है। जन्म-जन्मान्तर तुम भी रावण को जलाते थे। अभी तो रावणराज्य का विनाश होना है फिर आती है दीपावली। वहाँ घोर सोझरा है, उसको रामराज्य कहते हैं। कहते तो सब हैं कि रामराज्य चाहिए। परन्तु रामराज्य को जानते नहीं। अभी तुमको ज्ञान मिल रहा है और रावणराज्य ट्रांसफर होना है रामराज्य में। उससे पहले तुम जायेंगे रूद्रमाला में। और यह जो इस्लामी, बौद्धियों की आत्मायें हैं, वह आधाकल्प मुक्ति में रहेंगी। जब हमारी सतयुग की प्रालब्ध पूरी होगी तब भक्ति शुरू होगी। फिर द्वापर को रावणराज्य कहा जाता है क्योंकि अपने देवता धर्म को भूल गये हैं। यह होना है जरूर। मिसाल बड़ के झाड़ का देते हैं। बच्चे जानते हैं कि आदि सनातन देवी-देवता धर्म का फाउन्डेशन प्राय:लोप हो चुका है। सब धर्म भ्रष्ट, कर्म भ्रष्ट हो गये हैं। जब देवी देवता धर्म स्थापन हो तब यह सब धर्म विनाश हो जाएं। कहते भी हैं अनेक अधर्म विनाश, एक सत धर्म की स्थापना हो। यहाँ वर्सा पाने का तुम पुरूषार्थ कर रहे हो। जो धारणा करेंगे करायेंगे, वह ऊंच पद पायेंगे। बाप कहते हैं मुख्य बात जरूर धारण करो कि हमको निराकार बाप पढ़ाते हैं। कृष्ण नहीं पढ़ाते हैं। चित्र भी बनाया है – एक तरफ कृष्ण का चित्र, दूसरे तरफ शिव का। पूछना है अब बताओ गीता का भगवान कौन? जज करो तुमको समझाने में बहुत सहज होगा कि गीता का भगवान कृष्ण नहीं शिव है। तुमको मालूम है गीता का ज्ञान फिर से बाप दे रहे हैं। गीत में भी है गीता का ज्ञान फिर से सुनाना पड़े। गीत तो तुमने नहीं बनाये हैं। बनाने वाले तो मनुष्य ही हैं, परन्तु अर्थ को नहीं जानते। कहते हैं गीता के भगवान ने ज्ञान घोड़े गाड़ी में बैठकर दिया। कृष्ण के लिए कोई घोड़े गाड़ी थोड़ेही आयेगी। अगर कृष्ण होता तो उनके लिए अच्छे से अच्छी गाड़ी ले आयें। बड़े-बड़े धनवान आ जायें। यहाँ तो देखो अपनी मोटर (शरीर) भी नहीं है। आता ही हूँ पतित शरीर में। तो गुप्त है ना। कृष्ण की तो बात नहीं। फिर तुम भक्ति मार्ग में मेरा कितना मान रखते हो। सोमनाथ का मन्दिर बनाते हो। कोई एक मन्दिर थोड़ेही होगा, अनेक होंगे फिर उन्हें लूटा भी होगा। तो सारी बेहद की हिस्ट्री-जॉग्राफी को तुम जान गये हो। बाप को कहते हैं नॉलेजफुल। तो यहाँ ज्ञान भी दिया जाता है, पढ़ाई भी पढ़ाई जाती है। ज्ञान है मनमनाभव, इससे सद्गति होती है। फिर मध्याजीभव की पढ़ाई पढ़ाते हैं। टीचर और गुरू का पार्ट इकट्ठा चलता है। सारे वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी तुमको पढ़ाते हैं।

सच्ची-सच्ची नन्स तुम हो क्योंकि तुम एक को याद करती हो। नन्स को गले में क्रास पड़ा रहता है। क्राइस्ट को याद करती हैं, समझती हैं क्राइस्ट गॉड का बच्चा था। तुम जानते हो कि क्राइस्ट कोई गॉड का बच्चा नहीं था, क्राइस्ट की आत्मा गॉड का बच्चा थी। ऐसे तो हम सभी हैं। बाप आकर 3 धर्म स्थापन करते हैं। तुम ऊंचे ते ऊंची चोटी ब्राह्मण हो क्योंकि तुम ऊंच ते ऊंच विश्व की सेवा करते हो। मनुष्य को आत्मा का ज्ञान देते हो। तुम आत्मा को बाप से वर्सा मिलता है। बरोबर बाप कल्प-कल्प के संगमयुगे वर्सा देने आते हैं। शास्त्रों में तो युगे-युगे लिख दिया है। कल्प अक्षर बीच से निकाल दिया है। उनका नाम ही है पतित-पावन। तो युगे-युगे आकर क्या करेंगे। कल्प में एक बार आकर पावन बनाकर चले जाते हैं। तो बाप कहते हैं मुझे तलाक मत देना। आजकल स्त्रियाँ पति को तलाक दे देती हैं वैसे हिन्दू नारी पति को कभी तलाक नहीं देती थी। तुमको मुरली सुननी है जरूर। मुरली नहीं सुनते हो तो गोया बाप टीचर को भूल जाते हो, यह भी जैसे तलाक हो गया। तुमको भी कितना अटेन्शन देना है। अब नापास होंगे तो कल्प-कल्पान्तर नापास होंगे। अन्त में सबको मालूम पड़ जायेगा कि किस-किस ने कितनी पढ़ाई पढ़ी थी। सब कहते हैं कि शान्ति चाहिए। गोया मुक्ति चाहते हैं। कहते हैं कि दु:ख में सिमरण सब करें… तो आधाकल्प सुख और आधाकल्प दु:ख है। सुख दु:ख का खेल भारत पर ही है। तुम तो कहेंगे हम ही देवता, हम ही क्षत्रिय….. तो हम सो का अर्थ भी तो कोई नहीं जानते हैं। तो बाप कहते हैं मनमनाभव, मध्याजीभव। खुद धारण कर औरों को धारण करायें तो अहो सौभाग्य। याद से ही विकर्म विनाश होंगे। कहाँ गंगा में स्नान करना, कहाँ योग में रह पावन बनना।

बच्चों को यज्ञ के पैसे की बहुत कदर होनी चाहिए क्योंकि इससे भारत स्वर्ग बनता है। बाप है गरीब निवाज। गरीबों की पाई-पाई पड़ेगी तब वह साहूकार बनेंगे। स्वर्ग में हेल्थ, वेल्थ, हैपीनेस है। अगर हेल्थ वेल्थ है तो हैपीनेस भी है। अगर हेल्थ हो वेल्थ न हो तो हैपीनेस हो नहीं सकती। सतयुग में हेल्थ वेल्थ है तो सदैव हैपी रहते हैं। वहाँ कभी रोते नहीं हैं। तो तुमको भी यहाँ रोना नहीं है। परन्तु माया के तूफान मुरझा देते हैं। हेल्थ मिलती है हॉस्पिटल से और वेल्थ मिलती है पढ़ाई से। तो देखो मेरे बच्चे कितने गरीब हैं। तीन पैर पृथ्वी में हॉस्पिटल खोल देते हैं। जहाँ से ही सबको हेल्थ वेल्थ मिलती है। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमार्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) माया के तूफानों में कभी मुरझाना नहीं है। सदैव खुशी में रहना है।

2) हमको निराकार बाप पढ़ाते हैं, इस नशे में रहना है। इस झूठी दुनिया में कोई भी कामना नहीं रखनी है।

वरदान:- डबल लाइट स्थिति द्वारा उड़ती कला का अनुभव करने वाले सर्व आकर्षण मुक्त भव 
अभी चढ़ती कला का समय समाप्त हुआ, अभी उड़ती कला का समय है। उड़ती कला की निशानी है डबल लाइट। थोड़ा भी बोझ होगा तो नीचे ले आयेगा। चाहे अपने संस्कारों का बोझ हो, वायुमण्डल का हो, किसी आत्मा के सम्बन्ध-सम्पर्क का हो, कोई भी बोझ हलचल में लायेगा इसलिए कहीं भी लगाव न हो, जरा भी कोई आकर्षण आकर्षित न करे। जब ऐसे आकर्षण मुक्त, डबल लाइट बनो तब सम्पूर्ण बन सकेंगे।
स्लोगन:- स्नेह का चुम्बक बनो तो ग्लानि करने वाले भी समीप आकर स्नेह के पुष्पों की वर्षा करेंगे।

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TODAY MURLI 28 NOVEMBER 2017 DAILY MURLI (English)

Today Murli Brahma kumaris : 28 NOVEMBER 2017

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28/11/17
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, you should value this sacrificial fire of Rudra a great deal because it is through this sacrificial fire that Bharat becomes heaven. You are the protectors of this sacrificial fire.
Question: How and when do you children divorce the Father and the Teacher ?
Answer: When you forget the Father and the Teacher, when you miss the murli, when you don’t study or listen to it, it means you divorce the Father. Baba says: Children, never divorce Me!
Question: Why is it that people find it difficult to understand your true knowledge?
Answer: It is because this knowledge doesn’t continue from time immemorial; it is now to disappear. No one knows about this knowledge. This knowledge is new and this is why they find it difficult to understand.
Song: You are the Mother, Father, Helper, Swami, Friend and Protector of All.

Om shanti. People outside are now singing praise of the One with whom you children have yoga. You are sitting in remembrance of Him. You have to consider yourselves to be souls, renounce the arrogance of the body and stay in remembrance of the One alone. You have now become soul conscious. Previously, you were body conscious. In the golden age you didn’t know the Father because when you are in happiness you don’t remember the Father. When you are in sorrow here, it is then that you call out to Him. It is remembered that He is the Remover of Sorrow and the Bestower of Happiness. In fact, the true Haridwar (Hari dwar-Gateway to God) is this. People refer to Krishna as Hari. They say that Vaikunth (Paradise) is the Haridwar of Krishna. You know that Krishna cannot in fact be called Hari. The One who removes your sorrow is called Hari. You know that Shiv Baba has come to open the door to Krishna, that is, the door to Vaikunth and the golden age. When a building is built, people have an opening ceremony. Therefore, Baba has come to carry out the ceremony of Haridwar. Kans, the Devil, doesn’t exist in Krishna’s kingdom. We are claiming our inheritance of heaven from the Father. The Father Himself has come and is now carrying out the ceremony of the establishment of heaven. Establishment is said to be a ceremony. First, the foundation of a building is laid and then, when the building is completed, a ceremony is held. So, the Father came to lay the foundation. He laid the foundation in 1937. You are now carrying out establishment once again. You have the happiness that Baba has come to establish the new world and that you are now going to the new world. There was heaven on this earth. We are now establishing that once again. We are giving everyone the message. The founder of a religion is called a messenger. It is I who give you the true message. Only I teach you Raja Yoga and I am now inspiring the establishment of heaven. The Father explains that He cannot be found in the Vedas and scriptures. All of those scriptures belong to the path of devotion. There is a lot of paraphernalia on the path of devotion. You have been performing devotion for birth after birth. Listen to knowledge now because you won’t hear it in the golden age. It is said that the darkness of ignorance was dispelled when the Satguru gave you the ointment of knowledge. There is no darkness in the golden age for which you would have to perform devotion. Take knowledge from the Father and then devotion won’t remain. You know what Ravan’s kingdom is and what Rama’s kingdom is. You have now received total light because the Father has awakened you. Now, look! Diwali is celebrated and so people make small and large earthenware lamps. You small and large lamps are now being ignited and are receiving the oil of knowledge. When a person dies, people continue to pour oil into a lamp so that that departed soul doesn’t stumble in the darkness. That is something limited whereas yours is unlimited. When Ravan’s kingdom begins, people begin to stumble. Now, day by day, they stumble a lot more. Previously, there was only the worship of One, whereas people now even worship human beings and perform devotion at T-junctions etc. There is a lot of paraphernalia of devotion, just like a tree that has many branches. Such a big tree emerges from its seed. There is just as much devotion. Knowledge is the seed. This world is eternal and imperishable; it is never destroyed, it continues to go around the cycle. There is just one Seed and one tree. It isn’t that there is a world up above in the sky, one down below, one on the sun and one in the moon etc. Scientists go to the moon and try to live there. However, they don’t know that the whole world is to be destroyed through science and that you will then claim the kingdom. You would say that this too is fixed in the drama. Others will not understand these things. You are to receive the kingdom because there is a connection between the land of Krishna and the land of Christians. They made the people of Bharat fight among themselves and made the land of Krishna into the land of Christians. The Father now says: The account has to be settled. They will fight among themselves and you will be given the butter, that is, He makes you into the masters of the world. They will definitely fight among themselves. One side believes that they are very strong and the other side believes that they are strong and that they will win. However, you turn out to be the strongest of all. You are to be victorious. It is said: Mahavir and mahavirni (female). The Father says: Storms of Maya will come, but you mustn’t put them into action. Establishment is taking place with the power of yoga whereas destruction takes place with physical power. While walking, moving around and sitting, you have to remember the Father. This is known as the power of yoga. Then there is also the power of knowledge. Why is it called the power of knowledge? Because there is no power in the scriptures. No one can receive liberation or liberation-in-life from those and this is why that is not called knowledge. They are called the scriptures of devotion. There are no scriptures of knowledge. All the books of Rama that have been written and all the scriptures etc. will be destroyed in the War. The true Gita and the false Gita will also be destroyed because you will have received salvation. All your desires will have been fulfilled. No desires will then remain. You now know the cycle of 84 births. You no longer speak of God being infinite. Atheists say that God is infinite. They speak of God, the Father, but they don’t know His name, form, land, time period or His tasks. You now know about His tasks of establishing the new world and of making impure ones pure. People burn an effigy of Ravan. You are now amused by all of that. You too used to burn Ravan for birth after birth. Ravan’s kingdom is now to be destroyed and then there will be Deepawali. There is extreme light there. That is called the kingdom of Rama (God). Everyone says that they want there to be the kingdom of Rama, but they don’t know the kingdom of Rama. You are now receiving knowledge. The kingdom of Ravan is now to be transferred into the kingdom of Rama. Before that, you will become part of the rosary of Rudra. The souls who belong to the religions of Islam and Buddhism will remain in liberation for half the cycle. Devotion will begin when your reward of the golden age comes to an end. Then the copper age is called Ravan’s kingdom because they forgot their deity religion. This definitely has to happen. They give the example of a banyan tree. You children know that the foundation of the original eternal deity religion has disappeared. Everyone has become corrupt in their religion and their action. Only when the deity religion is established will all the other religions be destroyed. It is said: Destruction of the many false religions and establishment of the one true religion. You are making effort here to claim your inheritance. Those who imbibe this and inspire others to do so will receive a high status. The Father says: You definitely have to imbibe the main thing that the incorporeal Father is teaching you. It isn’t Krishna who is teaching you. Pictures have been made in which there is an image of Krishna on one side and an image of Shiva on the other side. Ask them: Now, tell us: Who is the God of the Gita? Judge for yourself! It will be very easy for you to explain that the God of the Gita is not Krishna, but Shiva. You know that the Father is once again giving you the knowledge of the Gita. You also sing in the song: You have to tell us the knowledge of the Gita once again. You didn’t compose those songs. It was human beings who composed those songs, but they don’t know the meaning of them. They say that the God of the Gita sat in a horse chariot and gave knowledge. A horse chariot would not come for Krishna. If it were Krishna, then the best car would be brought for him. Many wealthy people would come. Here, look at that One: He doesn’t even have His own motor (body). I enter an impure body. Therefore, this is incognito. It is not a question of Krishna. However, you then pay Me so much respect on the path of devotion. You build the Somnath Temple to Me. There wouldn’t be just one temple; there would be many of them and they would then be looted. You now know the unlimited history and geography. The Father is called knowledgefull. Here, you are given knowledge. An education is also given here. Knowledge is “Manmanabhav” and you receive salvation through that. Then you are taught “Madhyajibhav”. The parts of the Teacher and the Guru continue side by side. You are taught the history and geography of the whole world. You are true nuns because you remember the One. Nuns wear a cross around their necks. They remember Christ and believe that Christ was the son of God. The Father comes and establishes three religions. You Brahmins are the highest topknot because you do the highest service of the world. You give human beings knowledge of souls. You souls receive the inheritance from the Father. The Father truly comes at the confluence age of the cycle to give you the inheritance. In the scriptures they have written that He comes in every age. They have removed the word ‘cycle’ from that. He is called the Purifier. So, what would He do coming in every age? He comes once in the cycle, purifies you and then goes back. The Father says: Don’t divorce Me! Nowadays, women divorce their husbands. Previously, a Hindu wife would never divorce her husband. You definitely have to listen to the murli. When you don’t listen to the murli, it means that you have forgotten the Father and the Teacher. This is like divorcing Him. You have to pay so much attention. If you fail now, you fail every cycle. At the end, everyone will know how much each one of you has studied. Everyone says that they want peace, that is, they want liberation. It is said that everyone remembers God at a time of sorrow. Therefore, there is happiness for half the cycle and sorrow for half the cycle. The play of happiness and sorrow is based on Bharat. You say that you were the deities, you were the warriors… No one knows the meaning of ‘hum so’. The Father says: “Manmanabhav”, “Madhyajibhav”! If you yourselves imbibe it and then inspire others to do so, that is then your great fortune. Only by having remembrance will your sins be absolved. There is a vast difference between bathing in the Ganges and staying in yoga and becoming pure. You children should have a lot of value for the money of the yagya because it is through this that Bharat becomes heaven. The Father is the Lord of the Poor. Only when every penny of the poor is used will they become wealthy. In heaven you have healthwealth and happiness. When you have health and wealth, you also have happiness. If you have health, but no wealth, there cannot be happiness. In the golden age they have health and wealth and so they remain constantly happy. They never cry there. Therefore, you too mustn’t cry here. However, storms of Maya make you wilt. You receive health at the hospital and wealth through the study. So, just look how poor My children are! They open a hospital on three feet of land where everyone can receive health and wealth. Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. Never wilt because of storms of Maya. Remain constantly happy.
  2. Maintain the intoxication that the incorporeal Father is teaching you. Don’t have any desires in this false world.
Blessing: May you be free from all attractions and with your double-light stage, experience the flying stage.
The time for the ascending stage has now finished and it is now the time for the flying stage. The sign of the flying stage is being double light. The slightest burden would bring you down. Even if it is the burden of your own sanskars, the atmosphere, a connection and relationship with any soul, any type of burden will bring upheaval. Therefore, let there not be any attachment to anyone. Don’t let the slightest attraction attract you. When you become free from attraction and double light, you will be able to become perfect.
Slogan: Become a magnet of love and then even those who defame you will come close to you and shower you with flowers.

*** Om Shanti ***

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