18 august 2017

Brahma kumaris murli 18 August 2017 : Daily Murli (Hindi)

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 18 August 2017

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BK murli today ~ 18/08/2017 (Hindi) Brahma Kumaris प्रातः मुरली

18/08/17
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन
”मीठे बच्चे – बाप जो ज्ञान की मीठी-मीठी बातें सुनाते हैं वह धारण करनी है – बहुत मीठा क्षीरखण्ड बनकर रहना है, कभी लून-पानी नहीं होना है”
प्रश्नः- किस महामंत्र से तुम बच्चों को नई राजधानी का तिलक मिल जाता है?
उत्तर:- बाप इस समय तुम बच्चों को महामंत्र देते हैं मीठे लाडले बच्चे – बाप और वर्से को याद करो। घर गृहस्थ में रहते कमल फूल समान रहो तो राजधानी का तिलक तुम्हें मिल जायेगा।
प्रश्नः- कहा जाता जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि…यह कहावत क्यों है?
उत्तर:- इस समय के मनुष्य जैसे पतित हैं, काले हैं ऐसे अपने पूज्य देवताओं को, लक्ष्मी-नारायण, राम सीता को, शिवबाबा को भी काला बनाए उनकी पूजा करते हैं। समझते नहीं इसका अर्थ क्या है, इसीलिए यह कहावत है।
गीत:- मुखडा देख ले…

ओम् शान्ति। मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों ने गीत की लाइन सुनी कि दिल रूपी दर्पण में देखो कि कितना पाप और कितना पुण्य किया है। पाप और पुण्य दिल रूपी दर्पण में विचार किया जाता है ना। यह तो है ही पाप आत्माओं की दुनिया। पुण्य आत्माओं की दुनिया सतयुग को कहा जाता है। यहाँ पुण्य आत्मा कहाँ से आये। सब पाप ही करते रहते हैं क्योंकि रावणराज्य है। खुद कहते भी हैं हे पतित-पावन आओ। हम जानते हैं कि भारत ही पुण्य आत्माओं का खण्ड था। कोई पाप नहीं करते थे। शेर बकरी इकट्ठा पानी पीते थे, क्षीरखण्ड थे। बाप भी कहते हैं बच्चे क्षीरखण्ड बनो। पुण्य आत्माओं की दुनिया में तमोप्रधान आत्मा कहाँ से आये। अभी बाप ने रोशनी दी है। तुम जानते हो कि हम सो सतोप्रधान देवी-देवता थे। उन्हों की महिमा ही है-सर्वगुण सम्पन्न, 16 कला सम्पूर्ण ….. हम खुद भी उनकी महिमा करते हैं। मनुष्य कहते हैं मुझ निर्गुण हारे में कोई गुण नाही। प्रभू आप आकर जब हम पर तरस करो तब हम भी ऐसे बन सकते हैं। यह आत्मा ने कहा। आत्मा समझती है इस समय हम पाप आत्मा हैं। पुण्य आत्मा तो देवी देवतायें हैं जो पूजे जाते हैं। सभी जाकर देवताओं के चरणों पर झुकते हैं। साधू सन्त आदि भी तीर्थों पर जाते हैं। अमरनाथ, श्रीनाथ द्वारे जाते हैं। तो यह है ही पाप आत्माओं की दुनिया। भारत ही पुण्य आत्माओं की दुनिया थी, जब लक्ष्मी-नारायण का राज्य था। उनको ही कहा जाता है स्वर्ग। मनुष्य मरते हैं तो कहते हैं स्वर्ग गया। परन्तु स्वर्ग है कहाँ? स्वर्ग जब था तब सतयुग था। मनुष्यों को तो जो आता है सो कह देते हैं। समझते कुछ भी नहीं। स्वर्ग में गया तो जरूर नर्क में था। सन्यासी मरते हैं तो कहते हैं ज्योति ज्योत समाया। तो फर्क हो गया ना। ज्योति में समाया माना फिर यहाँ आना नहीं है। तुम जानते हो जहाँ हम आत्मायें रहती हैं उसे निर्वाणधाम कहा जाता है। वैकुण्ठ को निर्वाणधाम नहीं कहेंगे। बच्चों को बहुत मीठी-मीठी ज्ञान की बातें सुनाते हैं, जो बहुत अच्छी रीति धारण करनी चाहिए।

तुम जानते हो बाबा आये हैं हमको वैकुण्ठ का रास्ता बताने। बाप आये हैं राजयोग सिखलाने। पावन दुनिया का मार्ग बताए गाइड बन ले जाते हैं। बरोबर विनाश भी सामने खड़ा है। विनाश होता है – पुरानी दुनिया का। पुरानी दुनिया में ही उपद्रव आदि होते हैं। तो बाबा कितना मीठा है। अन्धों की लाठी बनते हैं। मनुष्य तो घोर अन्धियारे में धक्का खाते रहते हैं। गाया जाता है ब्रह्मा का दिन और ब्रह्मा की रात। ब्रह्मा तो यहाँ है ना। बाप आते ही हैं रात को दिन बनाने के लिए। आधाकल्प है रात, आधाकल्प है दिन। अभी तुमको मालूम हो गया है, वह तो समझते हैं कलियुग अजुन बच्चा है। कभी-कभी कहते हैं इस दुनिया का विनाश होना है, परन्तु समझते कुछ भी नहीं हैं। आजकल तो मुश्किल घरबार छोड़ते हैं। कोई कारण हो गया तो घर से जाकर सन्यासी बन जाते हैं। बीच में गवर्मेंट ने आर्डीनेंस निकाला था कि सन्यासियों को भी लायसेन्स होना चाहिए। ऐसे थोड़ेही कि जो घर से रूठे वह जाकर सन्यासी बने। मुफ्त में बहुत माल मिल जाते हैं। वह है हद का सन्यास, तुम्हारा है बेहद का सन्यास। इस समय सारी दुनिया पतित है, उनको फिर पावन बनाना एक पतित-पावन बाप का ही काम है। सतयुग में पवित्र गृहस्थ धर्म था। लक्ष्मी-नारायण के चित्र भी हैं। देवी-देवताओं की महिमा गाते हैं ना – सर्वगुण सम्पन्न… उनका है हठयोग कर्म सन्यास। लेकिन कर्म का सन्यास तो हो न सके। कर्म के बिना तो मनुष्य एक सेकेण्ड भी रह नहीं सकता। कर्म सन्यास अक्षर ही रांग है। यह है कर्मयोग, राजयोग। तुम सूर्यवंशी देवी-देवता थे। तुम जान गये हैं कि हमको 84 जन्म लेने पड़ते हैं। वर्ण भी गाये जाते हैं। ब्राह्मण वर्ण का किसको पता नहीं है।

बाप तुम बच्चों को महामंत्र देते हैं कि बाप और वर्से को याद करते रहो, तो तुमको राजधानी का तिलक मिल जायेगा। मीठे-मीठे लाडले बच्चे घर गृहस्थ में रहते कमल फूल समान रहो। जितना प्यार से काम निकल सकता है, उतना क्रोध से नहीं। बहुत मीठे बनो। बाप की याद में सदैव मुस्कराते रहो। देवताओं के चित्र देखो कितने हर्षित रहते हैं। अभी तुम जानते हो वह तो हम ही थे। हम सो देवता थे फिर सो क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र बनें। अभी हम संगम पर ब्रह्मा मुख वंशावली बने हैं। ब्रह्मा मुख वंशावली सो ईश्वर वंशी। बाप का वर्सा मिलता है मुक्ति और जीवनमुक्ति। यह भी तुम जानते हो जब देवी देवताओं का राज्य था तो और कोई धर्म नहीं था, चन्द्रवंशी भी नहीं थे। यह तो समझने की बात है ना। हम सो का अर्थ भी उन्होंने आत्मा सो परमात्मा निकाल लिया है। अभी तो तुम जानते हो हम सो देवता फिर क्षत्रिय…बनें। यह आत्मा कहती है। हम आत्मा पवित्र थी तो शरीर भी पवित्र था। वह है ही वाइसलेस वर्ल्ड। यह है विशश। दु:खधाम, सुखधाम और शान्तिधाम, जहाँ हम सब आत्मायें रहती हैं। कहते हैं हम सब चीनी-हिन्दू भाई-भाई हैं, परन्तु अर्थ भी तो समझें ना। आज भाई-भाई कहते कल बन्दूक लगाते रहते हैं। आत्मायें तो सब ब्रदर्स हैं। परमात्मा को सर्वव्यापी कहने से सब फादर हो जाते हैं। फादर को वर्सा देना है। ब्रदर्स को वर्सा लेना है। रात दिन का फर्क हो जाता है। वह तो पतित-पावन है ना, उनसे ही पावन बनना है। हम मनुष्य से देवता बनने चाहते हैं। ग्रंथ में भी है मनुष्य से देवता… गाया भी जाता है सेकेण्ड में जीवनमुक्ति। हम देवतायें जीवनमुक्त थे, अभी जीवनबन्ध बने हैं। रावण राज्य द्वापर से शुरू होता है फिर देवतायें वाम मार्ग में जाते हैं। यह निशानियां भी रखी हैं। जगन्नाथ पुरी में देवताओं के भी बहुत गन्दे चित्र हैं। आगे तो यह समझ में नहीं आता था। अब कितना समझ में आया है। वन्डर खाते थे कि देवताओं के ऐसे गन्दे चित्र यहाँ कैसे लगे हैं, और अन्दर काला जगत नाथ बैठा है। श्रीनाथ द्वारे में भी काले चित्र दिखाते हैं। यह किसको पता नहीं है कि जगन्नाथ की शक्ल काली क्यों दिखाई है। कृष्ण के लिए तो कहते हैं कि उनको सर्प ने डसा। राम को क्या हुआ? नारायण की शक्ल भी सांवरी दिखा देते हैं। शिवलिंग भी काला दिखाते हैं, सब काला ही काला दिखाते हैं। जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि। इस समय हैं ही सब पतित काले, तो भगवान को भी काला बना दिया है। पहले-पहले शिव की पूजा करते थे, हीरों का लिंग बनाते थे। अब वह सब चीज़ें गायब हो गयी हैं। यह तो मोस्ट वैल्युबुल चीजें हैं। पुरानी चीज़ का मान कितना होता है। पूजा शुरू हुए 2500 वर्ष हुए, तो इतने पुराने होंगे और क्या! पुराने-पुराने चित्र देवी-देवताओं के हैं। यह फिर कह देते हैं लाखों वर्ष के हैं।

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अभी तुम जानते हो 5 हजार वर्ष पहले भारत स्वर्ग था। अभी कलियुग है, विनाश सामने खड़ा है। सबको जाना है। बाप ही सबको ले जाते हैं। ब्रह्मा द्वारा तुम ब्राह्मण बने, फिर तुम देवतायें पालना करेंगे। यह बातें कोई भागवत गीता में नहीं हैं। बाप कहते हैं यह नॉलेज गुम हो जाती है। लक्ष्मी-नारायण तो त्रिकालदर्शी नहीं हैं फिर यह ज्ञान परमपरा कैसे चल सकता है। तुम ही इस समय त्रिकालदर्शी हो। सबसे अच्छी सेवा इस समय तुम करते हो। तो तुम हो सच्चे-सच्चे रूहानी सोशल वर्कर। तुम अभी आत्म-अभिमानी बनते हो। आत्मा में जो खाद पड़ी है, वह निकले कैसे? बाप जौहरी भी है ना। सोना में आइरन की खाद पड़ते-पड़ते आत्मा पतित हो गई है। अब पावन कैसे बनें? बाप कहते हैं हे आत्मा मामेकम् याद करो। पतित-पावन बाप श्रीमत देते हैं। भगवानुवाच हे आत्मायें तुम्हारे में खाद पड़ती है, अभी तुम पतित हो। पतित फिर महात्मा थोड़ेही हो सकते हैं। एक ही उपाय है – मामेकम् याद करो। इस योग अग्नि से तुम्हारे विकर्म दग्ध होंगे। कितने आश्रम हैं। अनेक प्रकार के हठयोग के चित्र लगे हुए हैं। यह है योग अथवा याद की भट्ठी। भल गृहस्थ व्यवहार में रहो, भोजन आदि बनाओ। बच्चों की सम्भाल करो। अच्छा सवेरे तो टाइम है ना। कहा भी जाता है राम सिमर प्रभात मोरे मन। आत्मा में बुद्धि है। भक्ति भी सवेरे करते हैं। तुम भी सवेरे उठ बाप को याद करो, विकर्म विनाश करो। सारा किचड़ा निकल आत्मा कंचन बन जायेगी, फिर काया भी कंचन मिलेगी। अभी तुम्हारी आत्मा दो कैरेट भी नहीं है। भारत के देवी देवताओं के 84 जन्मों का हिसाब लेना पड़े। वर्ल्ड की हिस्ट्री-जॉग्राफी रिपीट होती है। परन्तु आयु कितनी है, यह जानते नहीं। कल्प की आयु को ही नहीं जानते हैं। बाप कहते हैं मैं आया हूँ श्रीमत देने, श्रेष्ठ बनाने। याद की अग्नि से ही खाद निकलेगी और कोई उपाय नहीं है। बच्चों को बहादुर बनना है, डरो मत। जिनका रक्षक खुद भगवान बाप बैठा है उनको किससे डरना है? तुम्हें कोई श्राप आदि क्या देंगे? कुछ भी नहीं। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का यादप्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) कोई भी काम प्यार से निकालना है, क्रोध से नहीं। बाप की याद में सदा हर्षित रहना है। सदा देवताओं जैसे मुस्कराते रहना है।

2) आत्मा में जो खाद पड़ी है वह याद की अग्नि से निकालनी है। विकर्म विनाश करने हैं। बहादुर बन सेवा करनी है। डरना नहीं है।

वरदान:- व्यर्थ संकल्पों के तेज बहाव को सेकण्ड में स्टॉप कर निर्विकल्प स्थिति बनाने वाले श्रेष्ठ भाग्यवान भव 
यदि कोई भी गलती हो जाती है तो गलती होने के बाद क्यों, क्या, कैसे, ऐसे नहीं वैसे…यह सोचने में समय नहीं गंवाओ। जितना समय सोचने स्वरूप बनते हो उतना दाग के ऊपर दाग लगाते हो, पेपर का टाइम कम होता है लेकिन व्यर्थ सोचने का संस्कार पेपर के टाइम को बढ़ा देता है इसलिए व्यर्थ संकल्पों के तेज बहाव को परिवर्तन शक्ति द्वारा सेकण्ड में स्टॉप कर दो तो निर्विकल्प स्थिति बन जायेगी। जब यह संस्कार इमर्ज हो तब कहेंगे भाग्यवान आत्मा।
स्लोगन:- खुशी के खजाने से सम्पन्न बनो तो दूसरे सब खजाने स्वत: आ जायेंगे।

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Today Murli Brahma kumaris : 18 August 2017

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BK murli today ~ 18/08/2017 (Hindi) Brahma Kumaris प्रातः मुरली

 

18/08/17
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, imbibe the sweet points of knowledge that the Father tells you. Become very sweet like milk and sugar. Never become like salt water.
Question: With which great mantra do you children receive the tilak of the new kingdom?
Answer: At this time, the Father gives you children the great mantra: Sweet, beloved children, remember the Father and your inheritance. While living at home with your family, live like a lotus and you will receive the tilak of the kingdom.
Question: It is said: As is your vision, so the world. Why is there this saying?
Answer: Human beings at this time are impure and ugly and so they accordingly create such images of their worthy-of-worship deities Lakshmi and Narayan and Rama and Sita. They even create images of Shiv Baba in black stone and worship Him. They don’t understand what that means. This is why there is this saying.
Song: O man, look in the mirror of your heart!

Om shanti. You sweetest, beloved, long-lost and now-found, children heard a line from the song: Look in the mirror of your heart to see how much you have sinned and how much charity you have performed. By looking in the mirror of your heart consider how much sin and how much charity you have accumulated. This is the world of sinful souls. The golden age is called the world of charitable souls. How could there be charitable souls here? All continue to commit sin because this is Ravan’s kingdom. They themselves say: O Purifier, come! We know that Bharat was the land of charitable souls. No one committed sin there. Lion and lamb used to drink water from the same stream; they were like milk and sugar. The Father also says: Children, be like milk and sugar. How could tamopradhan souls exist in the world of charitable souls? The Father has now enlightened you. You know that you were satopradhan deities. There is their praise: Full of all virtues, sixteen celestial degrees full. We ourselves also used to praise them. People say: I am without virtue, I have no virtues. Prabhu, we can become like those when You come and have mercy on us. The soul said this. You souls understand that at this time you are sinful souls. Deities who are worshipped are charitable souls. Everyone goes and bows down at the feet of the deity idols. Sages and holy men also go on pilgrimages to Amarnath and Shrinath Dware. Therefore, this is the world of sinful souls. Bharat was the world of charitable souls when it used to be the kingdom of Lakshmi and Narayan. That was called heaven. When a person dies, people say that he has gone to heaven, but where is heaven? When it was heaven, it was the golden age. People simply say whatever enters their minds; they don’t understand anything. If he went to heaven, he must surely have been in hell. When a sannyasi dies, they say that he merged into the light, and so that is something different. To merge into the light means that he is not going to come back here. You know that the place where we souls reside is called the land of nirvana (beyond sound). Vaikunth (Paradise) cannot be called the land of nirvana. Baba tells you children very good, sweet things of knowledge, which you should imbibe very well. You know that Baba has come to show you the path to Paradise. The Father has come to teach us Raja Yoga. He shows us the path to the pure world; He becomes our Guide and takes us back home. Truly, destruction is just ahead. It is the old world that is to be destroyed. Calamities etc. take place in the old world. Baba is so sweet! He becomes the Stick for the Blind. People continue to stumble around in extreme darkness. It is said: The day of Brahma and the night of Brahma. Brahma exists here. The Father comes to change night into day. For half the cycle it is the night and for half the cycle it is the day. You now understand it. People believe that the iron age is still in its infancy. Sometimes it is said: This world is to be destroyed, but they don’t understand anything. Nowadays, scarcely anyone leaves his home. For some reason or other, they leave their homes and become sannyasis. The Government issued an ordinance some time ago saying that even sannyasis should have a licence. It shouldn’t be that anyone who sulks with his family can go and become a sannyasi. In that case, he would receive a lot of things for nothing. That is limited renunciation whereas yours is unlimited renunciation. At this time, the whole world is impure. It is the task of the one Purifier Father alone to make it pure. In the golden age there used to be the pure household religion. There are still images of Lakshmi and Narayan. People sing praise of the deities: You are full of all virtues. Theirs ( sannyasis) is hatha yoga, renunciation of karma. However, there cannot be renunciation of karma. Human beings cannot stay without performing action for even a second. The expression ‘renunciation of karma’ is wrong. This is karma yoga and Raja Yoga. You were sun-dynasty deities. You know that you have to take 84 births. They also speak of the castes. No one knows about the Brahmin caste. The Father gives you children the great mantra: Continue to remember the Father and your inheritance and you will receive the tilak of the kingdom. Sweetest, beloved children, while living at home with your families, live like a lotus flower. You are not able to achieve as much with anger as you are with love. Become very sweet. Constantly continue to smile in remembrance of the Father. Look at the pictures of the deities. They are so cheerful. You now know that we were those. We were deities and then we became warriors, merchants and shudras. Now, at the confluence age, we have become the mouth-born creation of Brahma. The mouth-born creation of Brahma is God’s clan. You receive the Father’s inheritance of liberation and liberation-in-life. You know that when it was the kingdom of deities, there were no other religions at that time. Even the moon dynasty didn’t exist then. This is something to be understood. They have understood the meaning of ‘hum so’ to be: The soul is the Supreme Soul. You now know that we are once again becoming deities and then warriors. It is the soul that says: When I, the soul, was pure, I had a pure body. That is the viceless world whereas this is the vicious world. There are the land of sorrow, the land of happiness and the land of peace where all we souls reside. They say: All of us Chinese and Hindus are brothers, but they should also understand the meaning of that. Today they say that they are brothers, and tomorrow they would shoot one another. All souls are brothers. By calling God omnipresent, all become the Father. The Father has to give the inheritance whereas the brothers are to receive the inheritance. There is the difference of day and night. He is the Purifier, is He not? You have to become pure through Him. We want to change from human beings into deities. It is mentioned in the Granth: It didn’t take God long to change human beings into deities. It is also remembered: Liberation-in-life in a second. We souls were liberated in life and we are now in a life of bondage. Ravan’s kingdom begins with the copper age when the deities go onto the path of sin. They also have signs of that. They have very dirty images of the deities at Jagadnathpuri. Previously, you didn’t understand any of that, but you now understand so much. You used to wonder how there could be such dirty images of the deities there. Inside, they have dark images of Jagadnath. At Shrinath Dware, too, they have dark images. No one knows why they have shown dark images of Jagadnath. They say of Krishna that he was bitten by a snake. What happened to Rama? They show an ugly image of Narayan too. They also have a Shivalingam of black stone. They show everyone ugly. As is their vision, so is their world. At this time, all are impure and ugly and so they have shown God ugly too. At first, they used to worship Shiva by creating a lingam of diamonds. Now all of those things have disappeared. These are most valuable things. Antique things are given so much value. It is now 2,500 years since worship began. Therefore, they must be that old, no more than that. The most ancient images are those of the deities. They say that they are hundreds of thousands of years old. You now know that 5000 years ago Bharat became heaven and that it is now the iron age. Destruction is just ahead; everyone has to go back. Only the Father takes everyone back. You became Brahmins through Brahma and then you will carry out sustenance there as deities. These things are not mentioned in the Bhagawad Gita. The Father says: This knowledge disappears. Lakshmi and Narayan are not trikaldarshi and so how could this knowledge have continued from time immemorial? At this time you are trikaldarshi. You do the best service at this time. So, you are true, spiritual social workers. You are now becoming soul conscious. How can the alloy that is in the soul be removed? The Father is also the Jeweller. When the alloy of iron was mixed into the gold, the soul became impure. So, how can the soul now become pure? The Father says: O soul, constantly remember Me alone. The Purifier Father gives you shrimat. God speaks: O souls, you have alloy mixed in you. You are now impure. A great soul (mahatma) cannot be impure. There is just one method: Constantly remember Me alone. Your sins will be absolved with this fire of yoga.

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There are so many ashrams. They have put up so many pictures of different types of hatha yoga. This is the bhatthi (furnace) of yoga or remembrance. You may live at home with your family and prepare food etc. and look after your children, but you do have time in the morning. It is said: O mind of mine, remember Rama early in the morning! The intellect is in the soul. They perform devotion early in the morning. You too wake up early in the morning and remember the Father and have your sins absolved. All the rubbish will be removed and you souls will become pure. You will then also receive pure bodies. You souls now don’t even have two carats left! There has to be the account of the 84 births of the deities of Bharat. The world history and geography are now being repeated. However, no one knows what its duration is. They don’t even know the duration of the cycle. The Father says: I have come to give you shrimat and to make you elevated. Only through the fire of remembrance will the alloy be removed. There is no other method. You children have to be courageous. Don’t be afraid. Why should children whose Father is God, the Protector, Himself, be afraid of anything? What curse can anyone give you? None at all! Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. Do everything you have to do with love, not with anger. Remain constantly cheerful by remembering the Father. Constantly continue to smile like the deities.
  2. Through the fire of remembrance remove the alloy mixed in the soul. Have your sins absolved. Become courageous and do service. Don’t be afraid.
Blessing: May you make your stage free from any sinful thoughts by stopping the intense flow of waste thoughts in a second and thereby become greatly fortunate.
When you make a mistake, then after making that mistake, do not waste your time in “Why? What? How? Not like that, but like this” etc. For the amount of time you spend in thinking about it, you put that many stains on top of stains. The time of a test paper is short, but the sanskar of waste thoughts increases the time of that paper. So, stop the intense flow of waste thoughts in a second with the power of transformation and your stage will become free from any sinful thoughts. When this sanskar emerges, you will then be said to be a fortunate soul.
Slogan: Become full of the treasure of happiness and all other treasures will automatically come.

*** Om Shanti ***

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