15 august ki murli

BRAHMA KUMARIS MURLI TODAY 15 AUGUST 2020 : AAJ KI MURLI

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 15 August 2020

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15-08-2020
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन
“मीठे बच्चे – कदम-कदम पर जो होता है वह कल्याणकारी है, इस ड्रामा में सबसे अधिक कल्याण उनका होता है जो बाप की याद में रहते हैं”
प्रश्नः- ड्रामा की किस नूँध को जानने वाले बच्चे अपार खुशी में रह सकते हैं?
उत्तर:- जो जानते हैं कि ड्रामानुसार अब इस पुरानी दुनिया का विनाश होगा, नैचुरल कैलेमिटीज भी होंगी। लेकिन हमारी राजधानी तो स्थापन होनी ही है, इसमें कोई कुछ कर नहीं सकता। भल अवस्थायें नीचे-ऊपर होती रहेंगी, कभी बहुत उमंग, कभी ठण्डे ठार हो जायेंगे, इसमें मूँझना नहीं है। सभी आत्माओं का बाप भगवान हमको पढ़ा रहे हैं, इस खुशी में रहना है।
गीत:- महफिल में जल उठी शमा …….. Audio Player

ओम् शान्ति। मीठे-मीठे नम्बरवार पुरूषार्थ अनुसार चैतन्य परवानों को बाबा याद-प्यार दे रहे हैं। तुम सब हो चैतन्य परवाने। बाप को शमा भी कहते हैं, परन्तु उनको जानते बिल्कुल नहीं हैं। शमा कोई बड़ी नहीं, एक बिन्दी है। किसकी भी बुद्धि में नहीं होगा कि हम आत्मा बिन्दी हैं। हमारी आत्मा में सारा पार्ट है। आत्मा और परमात्मा का नॉलेज और किसकी बुद्धि में नहीं है। तुम बच्चों को ही बाप ने आकर समझाया है, आत्मा का रियलाइजेशन दिया है। आगे यह पता नहीं था कि आत्मा क्या है, परमात्मा क्या है! इसलिए देह-अभिमान के कारण बच्चों में मोह भी है, विकार भी बहुत हैं। भारत कितना ऊंच था। विकार का नाम भी नहीं था। वह था वाइसलेस भारत, अभी है विशश भारत। कोई भी मनुष्य ऐसे नहीं कहेंगे जैसे बाप समझाते हैं। आज से 5 हज़ार वर्ष पहले हमने इनको शिवालय बनाया था। मैंने ही शिवालय स्थापन किया था। कैसे? सो भी तुम अभी समझ रहे हो। तुम जानते हो कदम-कदम पर जो होता है वह कल्याणकारी ही है। एक-एक दिन जास्ती कल्याणकारी उनका है जो बाप को अच्छी रीति याद कर अपना भी कल्याण करते रहते हैं। यह है ही कल्याणकारी पुरूषोत्तम बनने का युग। बाप की कितनी महिमा है। तुम जानते हो अभी सच्चा-सच्चा भागवत चल रहा है। द्वापर में जब भक्ति मार्ग शुरू होता है तो पहले-पहले तुम भी हीरों का लिंग बनाकर पूजा करते हो। अभी तुमको स्मृति आई है, हम जब पुजारी बने थे तब मन्दिर बनाये थे। हीरे माणिक का बनाते थे। वह चित्र तो अभी मिल न सकें। यहाँ तो यह लोग चांदी आदि का बनाकर पूजा करते हैं। ऐसे पुजारियों का भी मान देखो कितना है। शिव की पूजा तो सब करते हैं। लेकिन अव्यभिचारी पूजा तो है नहीं।

यह भी बच्चे जानते हैं – विनाश भी आने का है जरूर, तैयारियाँ हो रही हैं। नैचुरल कैलेमिटीज की भी ड्रामा में नूँध है। कोई कितना भी माथा मारे, तुम्हारी राजधानी तो स्थापन होनी ही है। कोई की भी ताकत नहीं जो इसमें कुछ कर सके। बाकी अवस्थायें तो नीचे-ऊपर होंगी ही। यह है बहुत बड़ी कमाई। कभी तुम बहुत खुशी में अच्छे ख्यालात में रहेंगे, कभी ठण्डे पड़ जायेंगे। यात्रा में भी नीचे-ऊपर होते हैं, इसमें भी ऐसे होता है। कभी तो सुबह को उठ बाप को याद करने से बहुत खुशी होती है ओहो! बाबा हमको पढ़ा रहे हैं। वण्डर है। सभी आत्माओं का बाप भगवान हमको पढ़ा रहे हैं। उन्होंने फिर कृष्ण को भगवान समझ लिया है। सारी दुनिया में गीता का मान बहुत है क्योंकि भगवानुवाच है ना। परन्तु यह किसको पता नहीं है कि भगवान किसको कहा जाता है। भल कितनी भी पोजीशन वाले बड़े-बड़े विद्वान, पण्डित आदि हैं, कहते भी हैं गॉड फादर को याद करते हैं परन्तु वह कब आया, क्या आकर किया यह सब भूल गये हैं। बाप सब बातें समझाते रहते हैं। ड्रामा में यह सब नूँध है। यह रावणराज्य फिर भी होगा और हमको आना पड़ेगा। रावण ही तुमको अज्ञान के घोर अन्धियारे में सुला देते हैं। ज्ञान तो सिर्फ एक ज्ञान सागर ही बतलाते हैं जिससे सद्गति होती है। सिवाए बाप के और कोई सद्गति कर न सके। सर्व का सद्गति दाता एक है। गीता का ज्ञान जो बाप ने सुनाया था वह फिर प्राय: लोप हो गया। ऐसे नहीं, यह ज्ञान कोई परम्परा चला आता है। औरों के कुरान, बाइबिल आदि चले आते हैं, विनाश नहीं हो जाते। तुमको तो जो ज्ञान अभी मैं देता हूँ, इनका कोई शास्त्र बनता नहीं है। जो परम्परा अनादि हो जाए। यह तो तुम लिखते हो फिर खत्म कर देते हो। यह तो सब नैचुरल जलकर खत्म हो जायेंगे। बाप ने कल्प पहले भी कहा था, अभी भी तुमको कह रहे हैं – यह ज्ञान तुमको मिलता है फिर प्रालब्ध जाकर पाते हो फिर इस ज्ञान की दरकार नहीं रहती। भक्ति मार्ग में सब शास्त्र हैं। बाबा तुमको कोई गीता पढ़कर नहीं सुनाते हैं। वह तो राजयोग की शिक्षा देते हैं, जिसका फिर भक्ति मार्ग में शास्त्र बनाते हैं तो अगड़म बगड़म कर देते हैं। तो तुम्हारी मूल बात है कि गीता का ज्ञान किसने दिया! उनका नाम बदली कर दिया है, और कोई के भी नाम बदली नहीं हुए हैं। सबके मुख्य धर्म शास्त्र हैं ना। इसमें मुख्य है डिटीज्म, इस्लामिज़म, बुद्धिज़म। भल करके कोई कहते हैं कि पहले बुद्धिज़म है पीछे इस्लामिज़म। बोलो, इन बातों से गीता का कोई तैलुक नहीं है। हमारा तो काम है बाप से वर्सा लेने का। बाप कितना अच्छी रीति समझाते हैं – यह है बड़ा झाड़। अच्छा है, जैसा फ्लावरवाज़ है। 3 ट्युब्स निकलती हैं। कितना अच्छी समझ से बनाया हुआ झाड़ है। कोई भी झट समझ जायेंगे कि हम किस धर्म के हैं। हमारा धर्म किसने स्थापन किया? यह दयानंद, अरविन्द घोस आदि तो अभी होकर गये हैं। वो लोग भी योग आदि सिखलाते हैं। है सब भक्ति। ज्ञान का तो नाम-निशान नहीं। कितने बड़े-बड़े टाइटिल मिलते हैं। यह भी सब ड्रामा में नूँध है, फिर भी होगा – 5 हज़ार वर्ष बाद। शुरू से लेकर यह चक्र कैसे चला है, फिर कैसे रिपीट होता रहता है? तुम जानते हो। अभी का प्रेजन्ट फिर पास्ट हो फ्युचर हो जायेगा। पास्ट, प्रेजन्ट, फ्युचर। जो पास्ट हो जाता है वह फिर फ्युचर होता है। इस समय तुमको नॉलेज मिलती है फिर तुम राजाई लेते हो, इन देवताओं का राज्य था ना। उस समय और कोई का राज्य नहीं था। यह भी एक कहानी मिसल बताओ। बड़ी सुन्दर कहानी बन जायेगी। लांग-लांग 5 हज़ार वर्ष पहले यह भारत सतयुग था, कोई धर्म नहीं था, सिर्फ देवी-देवताओं का ही राज्य था। उनको सूर्यवंशी राज्य कहा जाता था। लक्ष्मी-नारायण का राज्य चला 1250 वर्ष, फिर उन्होंने राज्य दिया दूसरे भाइयों क्षत्रियों को फिर उनका राज्य चला। तुम समझा सकते हो कि बाप ने आकर पढ़ाया था। जो अच्छी रीति पढ़े वह सूर्यवंशी बनें। जो फेल हुए उनका नाम क्षत्रिय पड़ा। बाकी लड़ाई आदि की बात नहीं है। बाबा कहते हैं बच्चे तुम मुझे याद करो तो तम्हारे विकर्म विनाश हो जायेंगे। तुम्हें विकारों पर जीत पानी है। बाप ने ऑर्डीनेन्स निकाला है, जो काम पर जीत पायेंगे वही जगतजीत बनेंगे। पीछे आधाकल्प बाद फिर वाम मार्ग में गिरते हैं। उन्हों के भी चित्र हैं। शक्ल देवताओं की बनी हुई है। राम राज्य और रावण राज्य आधा-आधा है। उनकी कहानी बैठ बनानी चाहिए। फिर क्या हुआ, फिर क्या हुआ। यही सत्य नारायण की कहानी है। सत्य तो एक ही बाप है, जो इस समय आकर सारे आदि-मध्य-अन्त का तुमको नॉलेज दे रहे हैं, जो और कोई दे न सके। मनुष्य तो बाप को ही नहीं जानते। जिस ड्रामा में एक्टर हैं, उनके क्रियेटर-डायरेक्टर आदि को नहीं जानते। तो बाकी कौन जानेंगे! अभी तुमको बाप बताते हैं – ड्रामा अनुसार यह फिर भी ऐसे होगा। बाप आकर तुम बच्चों को फिर पढ़ायेंगे। यहाँ दूसरा कोई आ न सके। बाप कहते हैं मैं बच्चों को ही पढ़ाता हूँ। कोई नये को यहाँ बिठा नहीं सकते। इन्द्रप्रस्थ की कहानी भी है ना। नीलम परी, पुखराज परी नाम है ना। तुम्हारे में भी कोई हीरे जैसा रत्न है। देखो रमेश ने ऐसी बात निकाली प्रदर्शनी की जो सबका विचार सागर मंथन हुआ। तो हीरे जैसा काम किया ना। कोई पुखराज है, कोई क्या है! कोई तो बिल्कुल कुछ नहीं जानते। यह भी जानते हो कि राजधानी स्थापन होती है। उनमें राजायें-रानियाँ आदि सब चाहिए। तुम समझते हो हम ब्राह्मण श्रीमत पर पढ़कर विश्व के मालिक बनते हैं। कितनी खुशी होनी चाहिए। यह मृत्युलोक खत्म होना है। यह बाबा तो अभी ही समझते रहते हैं कि हम जाकर बच्चा बनेंगे। बचपन की वह बातें अभी ही सामने आ रही हैं, चलन ही बदल जाती है। ऐसे ही वहाँ भी जब बूढ़े होंगे तो समझेंगे अब यह वानप्रस्थ शरीर छोड़ हम किशोर अवस्था में चले जायेंगे। बचपन है सतोप्रधान अवस्था। लक्ष्मी-नारायण तो युवा हैं, शादी किये हुए को किशोर अवस्था थोड़ेही कहेंगे। युवा अवस्था को रजो, वृद्ध को तमो कहते हैं इसलिए कृष्ण पर लव जास्ती रहता है। हैं तो लक्ष्मी-नारायण भी वही। परन्तु मनुष्य यह बातें नहीं जानते हैं। कृष्ण को द्वापर में, लक्ष्मी-नारायण को सतयुग में ले गये हैं। अभी तुम देवता बनने का पुरूषार्थ कर रहे हो।

बाप कहते हैं कुमारियों को तो बहुत खड़ा होना चाहिए। कुंवारी कन्या, अधर कुमारी, देलवाड़ा आदि जो भी मन्दिर हैं, यह तुम्हारे ही एक्यूरेट यादगार हैं। वह जड़, यह चैतन्य। तुम यहाँ चैतन्य में बैठे हो, भारत को स्वर्ग बना रहे हो। स्वर्ग तो यहाँ ही होगा। मूलवतन, सूक्ष्मवतन कहाँ है, तुम बच्चों को सब मालूम है। सारे ड्रामा को तुम जानते हो। जो पास्ट हो गया है सो फिर फ्युचर होगा फिर पास्ट होगा। तुमको कौन पढ़ाते हैं, यह समझना है। हमको भगवान पढ़ाते हैं। बस खुशी में ठण्डे ठार हो जाना चाहिए। बाप की याद से सब घोटाले निकल जाते हैं। बाबा हमारा बाप भी है, हमको पढ़ाते भी हैं फिर हमको साथ भी ले जायेंगे। अपने को आत्मा समझ परमात्मा बाप से ऐसी बातें करनी हैं। बाबा हमको अभी मालूम पड़ा है, ब्रह्मा और विष्णु का भी मालूम पड़ा है। विष्णु की नाभी से ब्रह्मा निकला। अब विष्णु दिखाते हैं क्षीरसागर में। ब्रह्मा को सूक्ष्मवतन में दिखाते हैं। वास्तव में है यहाँ। विष्णु तो हुआ राज्य करने वाला। अगर विष्णु से ब्रह्मा निकला तो जरूर राज्य भी करेगा। विष्णु की नाभी से निकला तो जैसे कि बच्चा हो गया। यह सब बातें बाप बैठ समझाते हैं। ब्रह्मा ही 84 जन्म पूरे कर अब फिर विष्णुपुरी के मालिक बनते हैं। यह बातें भी कोई पूरी रीति समझते नहीं हैं, तब तो वह खुशी का पारा नहीं चढ़ता। गोप-गोपियाँ तो तुम हो। सतयुग में थोड़ेही होंगे। वहाँ तो होंगे प्रिन्स-प्रिन्सेज। गोप-गोपियों का गोपी वल्लभ है ना। प्रजापिता ब्रह्मा है सबका बाप और फिर सब आत्माओं का बाप है निराकार शिव। यह सब हैं मुख वंशावली। तुम सब बी.के. भाई-बहन हो गये। क्रिमिनल आई हो न सके, इसमें ही माया हार खिलाती है। बाप कहते हैं अभी तक जो कुछ पढ़ा है उसे बुद्धि से भूल जाओ। मैं जो सुनाता हूँ वह पढ़ो। सीढ़ी तो बड़ी फर्स्टक्लास है। सारा मदार है एक बात पर। गीता का भगवान कौन? कृष्ण को भगवान कह नहीं सकते। वह तो सर्वगुण सम्पन्न देवता है। उनका नाम गीता में दे दिया है। सांवरा भी उनको बनाया है और फिर लक्ष्मी-नारायण को भी सांवरा कर देते। कोई हिसाब-किताब ही नहीं। रामचन्द्र को भी काला कर देते। बाप कहते हैं काम चिता पर बैठने से सांवरा हुआ है। नाम करके एक का लिया जाता है। तुम सब ब्राह्मण हो। अभी तुम ज्ञान चिता पर बैठते हो। शूद्र काम चिता पर बैठे हैं। बाप कहते हैं – विचार सागर मंथन कर युक्तियां निकालो कि कैसे जगायें? जागेंगे भी ड्रामा अनुसार। ड्रामा बड़ा धीरे-धीरे चलता है। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) सदा इसी स्मृति में रहना है कि हम गोपी वल्लभ के गोप-गोपियां हैं। इसी स्मृति से सदा खुशी का पारा चढ़ा रहे।

2) अभी तक जो कुछ पढ़ा है, उसे बुद्धि से भूल बाप जो सुनाते हैं वही पढ़ना है। हम भाई बहिन हैं इस स्मृति से क्रिमिनल आई को खत्म करना है। माया से हार नहीं खानी है।

वरदान:- रीयल्टी द्वारा रॉयल्टी का प्रत्यक्ष रूप दिखाने वाले साक्षात्कार मूर्त भव
अभी ऐसा समय आयेगा जब हर आत्मा प्रत्यक्ष रूप में अपने रीयल्टी द्वारा रॉयल्टी का साक्षात्कार करायेगी। प्रत्यक्षता के समय माला के मणके का नम्बर और भविष्य राज्य का स्वरूप दोनों ही प्रत्यक्ष होंगे। अभी जो रेस करते-करते थोड़ा सा रीस की धूल का पर्दा चमकते हुए हीरों को छिपा देता है, अन्त में यह पर्दा हट जायेगा फिर छिपे हुए हीरे अपने प्रत्यक्ष सम्पन्न स्वरूप में आयेंगे, रॉयल फैमली अभी से अपनी रायॅल्टी दिखायेगी अर्थात् अपने भविष्य पद को स्पष्ट करेगी इसलिए रीयॅल्टी द्वारा रायॅल्टी का साक्षात्कार कराओ।
स्लोगन:- किसी भी विधि से व्यर्थ को समाप्त कर समर्थ को इमर्ज करो।

TODAY MURLI 15 AUGUST 2020 DAILY MURLI (English)

Today Murli Brahma Kumaris: 15 August 2020

15/08/20
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, whatever happens at every step is beneficial. In this drama those who stay in remembrance of the Father experience the most benefit.
Question: By knowing which secret that is fixed in the drama can children maintain infinite happiness?
Answer: Those who know that, according to the drama, this old world is now going to be destroyed can maintain infinite happiness. There will also be natural calamities.but your kingdom is definitely going to be established and no one can do anything to prevent it. The stage of you children fluctuates; sometimes you have a great deal of enthusiasm and sometimes you become cool. However, you mustn’t become confused about that. Maintain the happiness that God, the Father of all souls, is teaching you.
Song: The Flame has ignited in the happy gathering of moths. Audio Player

Om shanti. Baba is giving love and remembrance to you sweetest living moths who are numberwise, according to your efforts. All of you are living moths. The Father is called the Flame but no one knows Him at all. The Flame is not large; He is just a point. It doesn’t enter the intellect of anyone that a soul is a point and that a whole part is recorded in each soul. The knowledge of souls and the Supreme Soul is not in the intellect of anyone else. The Father has come and explained to you children. He has given you realisation of the soul. Previously, you neither knew what a soul is nor what the Supreme Soul is. Therefore, because of their body consciousness, children have a lot of attachment and also many vices. Bharat was so elevated. There was no mention of vices at all. That was the viceless Bharat. It is now vicious Bharat. No human being can explain this to you in the way that the Father explains. I made this land into Shivalaya 5000 years ago. I, Myself, established Shivalaya. How? You now understand this. You know that whatever happens at every step is beneficial. Every day becomes more and more beneficial for those who remember the Father very well and benefit themselves. This is the benevolent age in which you become the most elevated beings. There is so much praise of the Father. You know that the true Bhagawad is now being enacted. When the path of devotion begins in the copper age you are the first ones to create an oval image of diamonds and worship that. You now remember that you built temples when you were worshippers. You used to build them of diamonds and emeralds. You cannot obtain those images now. People here make the same images of them in silver in order to worship them. Look how much regard there is for such worshippers. Although everyone worships Shiva, that is still not unadulterated worship. You children also know that destruction is definitely going to take place. Preparations for that are now taking place. Natural calamities are also fixed in the drama. No matter how much someone beats his head over it, your kingdom is definitely going to be established. No one has the power to do anything about this. However, the stage of you souls does fluctuate. This is a huge income. Sometimes, you have very good thoughts because you are happy whereas at other times you become very cool. Even on a pilgrimage there is fluctuation; it is the same here. Sometimes, when you wake up in the morning, there is great happiness in remembering the Father: Oho, Baba is teaching us! It is such a wonder! God, the Father of all souls, is teaching us! They believe that Krishna is God. Throughout the whole world, there is a lot of regard for the Gita because it says in it, “God speaks”. However, no one knows who God is. No matter how great the positions that scholars and pundits have and, even though they say that they remember God, the Father, they have forgotten when He comes and what He does when He comes. The Father continues to explain all of these things to you. All of this is fixed in the drama. This kingdom of Ravan will exist once again and we will have to enter it once again. It is Ravan who puts you to sleep in the extreme darkness of ignorance. Only the one Ocean of Knowledge gives you knowledge through which there is salvation. No one except the Father can grant you salvation. The Bestower of Salvation for All is just the One. The knowledge of the Gita that the Father gave to you has disappeared. It isn’t that this knowledge continues from time immemorial. The Koran and the Bible etc. continue (from the time of that religion); they are not destroyed. A scripture is not created from the knowledge that I give you now, that it would become eternal and continue all the time. You write this down and then have it destroyed. All of this will be burnt and finished naturally. The Father told you this a cycle ago and is also telling you now. You receive this knowledge now, and you will then receive the reward. Therefore, there is no need for this knowledge there. On the path of devotion there are all the scriptures. Baba doesn’t relate this knowledge to you by reading the Gita. He is giving you the teachings of Raj Yoga. They create scriptures from this on the path of devotion and mix everything up. Therefore, the main aspect you have to explain is: Who gave the knowledge of the Gita? They have replaced the name of that One. No one else’s name has been replaced. All other religions have their main religious scripture. The main religions are Deityism, Islam and Buddhism. Some say that there was first Buddhism and then Islamism. Tell them that such things are not connected with the Gita. We are only concerned about claiming our inheritance from the Father. The Father explains so clearly that this is a big tree. It is very good; it is like a flower vase; three tubes emerge from it. The tree has been created to give such clear understanding. Anyone can very quickly understand which religion he belongs to and who established that religion. Dayananda and Aurobindo Ghose etc. have recently been and gone. They too taught yoga etc., but all of that is devotion. There is no name or trace of knowledge. They have been given such huge titles! All of that is fixed in the drama. It will happen again after 5000 years. You know how the cycle continues to turn from the beginning and how it will repeat again. The present time will become the past and it will then become the future. It is said: Past, present and future. Whatever is the past then becomes the future. You receive knowledge at this time and you then claim your kingdom. It used to be the kingdom of deities. At that time there was no other kingdom. Tell them all of this in the form of a story. It will become a very beautiful story. Longlong ago, 5000 years ago, Bharat was the golden age. There was no religion except the kingdom of deities at that time. That was called the sun-dynasty kingdom. For 1250 years it was the kingdom of Lakshmi and Narayan. Then they gave their kingdom to their brothers, the warriors, and their kingdom then continued. You can explain that the Father came and taught you. Those who had studied well became part of the sun dynasty. Those who failed were named warriors. However, there was no question of a war etc. Baba says: Children, remember Me and you will be absolved of your sins. You have to conquer the vices. The Father has issued this ordinance: Those who conquer lust become conquerors of the world. Later, after half the cycle, they fall on to the path of sin. There are their images; the features are those of deities. The kingdom of Rama (God) and the kingdom of Ravan are half and half. Create a story about this and explain what happened next and what happened after that. This is the story of the true Narayan. Only the one Father is the Truth. He is now giving you the knowledge of the beginning, the middle and the end. No one else can give you this knowledge. Human beings don’t even know the Father. If they don’t know the Creator and Director of the drama in which they are the actors, who else would? The Father is now explaining to you that all of this will happen in the same way according to the drama. The Father will come to teach you again. No one else can come here. The Father says: I only teach you children. No new people can sit here. There is the story of Indraprasth. There are the names of the different angels, like sapphire and topaz. There are some amongst you who are like diamonds. Look how Ramesh created the exhibition through which everyone started to think about that! Therefore, he did something worth diamonds. Some are topaz and others are of another type of jewel. Some know nothing at all! You know that a kingdom is being established. Kings and queens etc. are all needed in that. You know that you Brahmins are studying by following shrimat and that you will then become the masters of the world. You should have so much happiness! This land of death is now going to be destroyed. Even at this time, this Baba understands that he is to go and become a baby. The things of that childhood are coming in front of him now, and so his whole behaviour changes. In the same way, when they become old there, they understand that they will shed their old bodies and go into the childhood stage. Childhood is the satopradhan stage. Lakshmi and Narayan have the stage of adults. When they are married, they aren’t said to be in their adolescence. The adult stage is said to be the rajo stage and the elderly stage is said to be the tamo stage. This is why there is greater love for Krishna. Lakshmi and Narayan are the same ones, but people don’t know these things. Krishna has been shown in the copper age and Lakshmi and Narayan in the golden age. You are now making effort to become deities. The Father says: Kumaris should become very active. There are the temples to the kumaris and the half kumaris. All the temples, like the Dilwara Temple, etc., are your accurate memorials. Those are non-living whereas this is the living one. We are sitting here in the living form. We are making Bharat into heaven. Heaven will be here. You children know everything about where the incorporeal world is and where the subtle region is. You know the whole drama. Whatever has become the past will then become the future and then the past. You have to understand who it is that is teaching you. God is teaching us! You should become very cool and calm and be happy. By staying in remembrance of the Father, all your confusion is removed. Baba is our Father. He teaches us and He will then take us back home with Him. Consider yourselves to be souls and talk to the Father, the Supreme Soul, in this way: Baba, I now understand. I also understand about Brahma and Vishnu. Brahma emerged from the navel of Vishnu. Vishnu is shown in a lake of milk and Brahma is shown in the subtle region. In fact, he exists here. Vishnu is the one who rules. If Brahma emerged from Vishnu, then he too would definitely rule. If he emerged from the navel of Vishnu that would be like becoming a child. The Father sits here and explains all of these things. Brahma completes his 84 births and then becomes the master of the land of Vishnu. Some don’t understand these things very well and so their mercury of happiness doesn’t rise. You are these gopes and gopis; they don’t exist in the golden age. There, you will be princes and princesses. Gopi Vallabh is the Father of the gopes and gopis. Prajapita Brahma is the father of everyone whereas the Father of all souls is incorporeal Shiva. All of you are the mouth-born creation. All of you Brahma Kumars and Kumaris are brothers and sisters. There must not be any criminal vision; it is in this that Maya defeats you. The Father says: Remove from your intellect everything you have studied up to now. Study the things that I am telling you. The picture of the ladder is firstclass. Everything depends on one thing: Who is the God of the Gita? Krishna cannot be called God. He is a deity full of all virtues. His name is mentioned in the Gita. He is portrayed as dark blue and Lakshmi and Narayan are also portrayed as dark blue. They can’t account for this. They have even portrayed Ramachandra as dark blue. The Father says: He became like that by sitting on the pyre of lust. Although the name of one is mentioned, it applies to all. All of you are Brahmins. You are now sitting on the pyre of knowledge. Shudras sit on the pyre of lust. The Father says: Churn the ocean of knowledge and create methods to awaken others. They will of course awaken according to the drama. The drama moves very, very slowly. Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. Always remain aware that you are the gopes and gopis who belong to Gopi Vallabh. By having this awareness, the mercury of your happiness will always remain high.
  2. Remove from your intellect everything you have studied up to now and study the things that the Father now tells you. Finish your criminal eye with the awareness of being brothers and sisters. Don’t be defeated by Maya.
Blessing: May you show the practical form of royalty with your reality and become an image that grants visions.
Such a time is now to come when you souls will grant a vision of your royalty through your reality in a practical way. At the time of revelation, the numbers of the beads of the rosary and also the form of the future kingdom will be revealed. Now, while you race, the curtain of a little dust of competition is hiding the sparkling diamonds. At the end, however this curtain will be removed and the hidden diamonds will reveal their complete and perfect forms. The royal family will show their royalty from now, that is, they will reveal their future status. So, grant a vision of royalty through your reality.
Slogan: Finish all wastefulness with any method and let the powerful emerge.

*** Om Shanti ***

TODAY MURLI 15 AUGUST 2019 DAILY MURLI (English)

Today Murli Brahma Kumaris: 15 August 2019

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15/08/19
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, the Father has come to give you true freedom and to liberate you from the punishment of the demons of death and from your dependency on Ravan
Question: What is the main difference between the explanation the Father gives and the explanation you children give?
Answer: When the Father explains, He does so whilst saying, “Sweet children.” Through this, the arrow of what the Father says strikes the target. When you children explain to your brothers, you cannot say, “Sweet children”. The Father is the Senior and this is why what He says has an effect. He makes you children have realisation. Children, are you not ashamed that you have become impure? Now, become pure!

Om shanti. The unlimited, spiritual Father sits here and explains to the unlimited, spiritual children. Only the unlimited Father and the unlimited children know this. No one else knows the unlimited Father and they do not consider themselves to be children of the unlimited Father. Only those who are the mouth-born creation of Brahma know this and accept it. No one else would accept this. Brahma is definitely needed and he is also called Adi Dev. The Father enters him. What does the Father come and do? He says: You have to become pure. The Father’s shrimat is: Have the faith that you are souls. He has given you children the introduction of soul. Each soul resides in the centre of a forehead. Baba has explained that a soul is imperishable and that his throne is a perishable body. You know these things and that all of you souls are brothers, children of the one Father. To say that God is omnipresent is a mistake. You explain very well that there is the existence of the five vices in everyone and some think that what you say is right. We are brothers, and so we will surely receive the inheritance from the Father. However, as soon as you leave from here, you get into the storms of Maya; hardly anyone survives. This is the condition everywhere. Some understand a little of this well and make effort to understand a little more. You can now explain to everyone. If someone doesn’t pay a lot of attention, it would be said: He is not an old devotee. Only those who are to understand these things will understand them. If someone doesn’t understand, he is unable to explain to others. It is numberwise amongst you too. A good person is sent to explain to a good person, so that he can perhaps understand something because you know that important people don’t understand these things that quickly. Yes, they do give their opinion and say that the way you explained was good, that you gave the Father’s full introduction, but that they don’t have time themselves. You tell them: Remember the unlimited Father so that your sins can be absolved. You now understand that the Father is speaking directly to you souls. When you listen to Him directly, the arrow strikes the target very well. There (at a centre), you listen through a BK. Here, the Supreme Father, the Supreme Soul, says directly through Brahma: O children, you children are not obeying the Father. None of you can say this to anyone. There is not the Father there for He is sitting here. The Father is speaking to you. Children, will you not even listen to the Father? On the path of ignorance too, there is a difference between the explanation given by a father and that given by a brother. What a brother says would not have as much effect as that which a father says, because a father is still senior; so, there is fear of him. The Father explains to you too: Remember Me, your Father! Are you not ashamed that you repeatedly forget Me? The Father tells you directly, and so that affects you quickly. Oh, will you not listen to the Father? The unlimited Father says: Become viceless in this one birth and you will become viceless for 21 births and the masters of the pure world. Do you not believe this? The arrow of what the Father says seems stronger. There is a definitely a difference. It isn’t that Baba will always continue to meet new ones. Many ask all sorts of wrong questions. It doesn’t sit in their intellects because this is something completely new. In the Gita, they mention Krishna’s name, but that cannot be. Now, according to the drama, this sits in your intellects. You children come running to Baba: We want to go to Baba and listen to the murli directly. There (at the centres), we listen to it through the brothers and now we want to listen to it from Baba. When the Father speaks it, it has an impact. He speaks to you whilst saying, “Children, children”. Children, are you not ashamed that you do not remember the Father? Do you not love the Father? How much do you remember Him? Baba, one hour. If you constantly remember Me, your sins will be cut away. You have a burden of the sins of many births on your heads. The Father is explaining to you face to face: You have defamed the Father so much, there should be a case filed against you! When someone libels another in the newspapers, a case is filed against that one. The Father now reminds you of the things that you used to do. The Father explains: According to the drama, all of that happened in the company of Ravan. The path of devotion has now ended; it has become the past. There is no one in the middle to stop you. Day by day, whilst coming down, your intellects have become like a buddhu’s and tamopradhan. You say that the One you worship is in the pebbles and stones! That is called unlimited senselessness. That is the unlimited senselessness of the unlimited children. On the one side, they worship Shiv Baba and on the other side, they call that Father omnipresent. You have now remembered: We behaved so senselessly that we defamed our Father. You children have now understood and so you are now making effort to change from beggars to princes. Shri Krishna was a prince of the golden age, and yet people have said of him that he had 16,108 queens and also children. You would now feel ashamed. When a person commits a sin, he pulls his ears and says in front of God: O God, I made a big mistake. Have mercy! Forgive me! You made such a big mistake. The Father explains: It is like that in the drama. It is only when you become like that that I can then come. The Father now says: You have to benefit those of all religions. Those of all religions say of the Father who grants everyone salvation that He is omnipresent. Where did they learn this? God speaks: I am not omnipresent. Because of you, the condition of others has also become like yours. They call out: “O Purifier!” but they do not understand. When we first came from our home, were we impure? We became impure because of having become body conscious. When someone of any religion comes, ask him: Do you have the introduction of the Supreme Father, the Supreme Soul? Who is He? Where does He reside? He would either say that He is up above or that He is omnipresent. The Father says: The whole world has now become totally bankrupt because of you. You became the instruments for that. This has to be explained to everyone. Although it happens according to the drama, you still became impure. All are sinful souls. You now call out in order to become pure souls. Those of all religions have to return to their home, the land of liberation. They are pure there. It is also predestined in the drama for the Father to come and explain to you. This knowledge is for those of all religions. Baba received some news. An acharya (teacher) said: I consider God to be in all of you and bow down to you. Are there that many Gods? They don’t understand anything. Those who have not performed a lot of devotion do not survive here. Some stay at a centre for some time, and others for another period of time. You should understand from this that they have performed less devotion and as that is why they don’t stay longer. Nevertheless, where would they go? There is no other shop. What method should be created so that people can understand quickly? The message has to be given to everyone. You have to tell them: Remember the Father. If you cannot remember the Father fully yourself, how would the arrows you shoot strike the target? This is why Baba says: Keep your chart. The main thing is to become pure. The purer you become, the more knowledge you will imbibe and you will also have happiness. You children should have a lot of happiness in uplifting everyone. The Father alone comes and grants salvation. There is no question of happiness or sorrow for the Father. This drama is predestined. You should not have any sorrow. You have found the Father, what more do you want? You simply have to follow the Father’s directions. Only at this time do you receive this explanation. You will not receive it in the golden age. There, there is no question of knowledge. You have found the unlimited Father here and so you should have even greater happiness than that of heaven. The Father says: You also have to go abroad and explain this. You have mercy for those of all religions. Everyone says: O God, have mercy! Bless us! Liberate us from sorrow! However, they don’t understand anything. The Father tells you many types of clever ways. You should tell everyone: You are lying in the jail of Ravan. They say that they should have freedom, but no one knows what freedom is. They are all trapped in the jail of Ravan. The Father has now come to give you true freedom. Even then, people are trapped in the jail of Ravan and continue to commit sin. What is true freedom? You have to tell people this. You can even print in the newspapers: There is no freedom here in the kingdom of Ravan. You should write it in short. No one will be able to understand if you give long explanations. Tell them: You don’t have freedom, because you are lying in the jail of Ravan. When your sound spreads abroad, people here will understand quickly. They are all continuously under siege. So, is that freedom? The Father is giving you freedom. He is freeing you from the jail of Ravan. You know that you are very wealthy and have great freedom there. No one’s vision can fall on you. When you became weak at the end, everyone’s vision fell on your wealth. Mahmud Guznavi came and looted your temple and your freedom was lost because you had become dependent in the kingdom of Ravan. You are now at the most auspicious confluence age. You are now receiving true freedom. Those people don’t understand what freedom is and so you have to explain this to them tactfully. Only those who attained freedom in the previous cycle will believe you. When you explain to them, they argue so much, as though they are buddhus. They waste your time, and so you don’t want to speak to them. The Father comes and gives you freedom. There is a lot of sorrow by depending on Ravan; there is limitless sorrow. In the Father’s kingdom, we are so free. Freedom is when we become pure deities, when we become liberated from the kingdom of Ravan. The Father alone comes and gives you true freedom. Now, all are unhappy in the foreign kingdom. This is the most auspicious confluence age when you receive freedom. Those people say that we became independent when the foreign government left. You now know that you cannot be free until you become pure. Then, there will have to be punishment by the demons of death and your status will also be destroyed. The Father comes to take you back home. There, all are free. You can explain to those of all religions: You are souls and have come from the land of liberation to play your parts. You have come from the land of happiness to the land of sorrow, the tamopradhan world. The Father says: You are My child. You are not Ravan’s child. I went away having given you your fortune of the kingdom. You were so free in your own kingdom. You now have to become pure once again in order to go back there. You become so wealthy. There, there is no need to worry about money. Even though they may be poor, they do not need to worry about money; they remain happy. It is here that there is worry. However, status is numberwise in the kingdom. Not everyone will become like the sun-dynasty kings. However much effort you make, you claim a status accordingly. You are those who serve those of all religions. You also have to explain to people abroad: All of you are brothers. Everyone resides in the land of peace. You are now in the kingdom of Ravan. We are now going to show you the way home. Consider yourselves to be souls and remember Me. People say: God liberates everyone. However, they don’t understand how He liberates everyone. When children become confused, they say: Baba, liberate us and take us back home. It is just as when you were confused and lost in the fog and couldn’t find the path. You found the Liberator who showed you the path. You tell the unlimited Father: Baba, liberate us! Come and we will follow You! No one, except the Father, can show you the path. We used to study so many scriptures and stumble along on pilgrimages. However, if we didn’t know God, how could we find Him? If He were omnipresent, how could we find Him? People are in such darkness of ignorance! Only the one Father is the Bestower of Salvation for All. He alone comes and removes you children from the darkness of ignorance. Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. You have found the one Father. Therefore, do not worry about anything. Follow His directions, have unlimited sense and become instruments to uplift everyone with happiness.
  2. In order to be saved from the punishment of the demons of death and receive true independence, you definitely have to become pure. Knowledge is your source of incomeSo imbibe it and become wealthy.
Blessing: May you experience the karmateet stage while engaged in service and become an image of tapasya.
There is very little time and a lot of service to be done. It is only in service that there is a margin for Maya to come. It is only in service that there is the expansion of nature and relationships. If there is selfishness merged in it or there is still a little less balance, Maya adopts many new forms and comes and so practise having a balanceof service and the stage of the self. Be the master and take service from your workers, the physical organs but let there be only one Baba and none other in your mind. When this awareness has emerged in you, then you will be said to be experienced in the karmateet stage and an embodiment of tapasya.
Slogan: Make negativereasons into positive solutions.

*** Om Shanti ***

BRAHMA KUMARIS MURLI TODAY 15 AUGUST 2019 : AAJ KI MURLI

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 15 August 2019

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15-08-2019
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन

 

“मीठे बच्चे – बाप आया है तुम्हें सच्ची स्वतंत्रता देने, जमघटों की सजाओं से मुक्त करने, रावण की परतंत्रता से छुड़ाने”
प्रश्नः- बाप और तुम बच्चों की समझानी में मुख्य अन्तर कौन-सा है?
उत्तर:- बाप जब समझाते हैं तो ‘मीठे बच्चे’ कहकर समझाते हैं, जिससे बाप की बात का तीर लगता है। तुम बच्चे आपस में भाइयों को समझाते हो, ‘मीठे बच्चे’ नहीं कह सकते। बाप बड़ा है इसलिए उनकी बात का असर होता है। वह बच्चों को रियलाइज़ कराते हैं – बच्चों, तुम्हें लज्जा नहीं आती, तुम पतित बन गये, अब पावन बनो।

ओम् शान्ति। बेहद का रूहानी बाप बेहद के रूहानी बच्चों को बैठ समझाते हैं, अब यह बेहद का बाप और बेहद के बच्चे ही जानते हैं। और कोई न बेहद के बाप को जानते हैं, न बेहद के बच्चे अपने को मानते हैं। ब्रह्मा मुख वंशावली ही जानते और मानते हैं। और कोई तो मान भी नहीं सकेंगे। ब्रह्मा भी जरूर चाहिए, जिसको आदि देव कहते हैं, जिसमें बाप की प्रवेशता होती है। बाप आकर क्या करते हैं? कहते हैं पावन बनना है। बाप की श्रीमत है अपने को आत्मा निश्चय करो। बच्चों को आत्मा का परिचय भी दिया है। आत्मा भ्रकुटी के बीच में निवास करती है। बाबा ने समझाया है आत्मा अविनाशी है, इनका तख्त यह विनाशी शरीर है। यह बातें तुम जानते हो कि हम सब आत्मायें आपस में भाई-भाई एक बाप के बच्चे हैं। ईश्वर सर्वव्यापी कहना यह भूल है। तुम अच्छी रीति समझाते हो, हर एक में 5 विकारों की प्रवेशता है तो कई समझते हैं यह ठीक बोलते हैं। हम भाई-भाई हैं तो जरूर बाप से वर्सा मिलना चाहिए। परन्तु यहाँ से बाहर निकलते हैं तो माया के तूफानों में चले जाते हैं। कोई विरले ठहरते हैं। सब जगह यह हाल होता है। कोई थोड़ा अच्छा समझते हैं तो जास्ती समझने की कोशिश करते हैं। अभी तुम सबको समझा सकते हो। अगर कोई जास्ती अटेन्शन नहीं देते हैं तो कहेंगे यह पुराने भक्त नहीं हैं। इन बातों को तो समझने वाले ही समझें। कोई नहीं समझते हैं तो फिर समझा भी नहीं सकते हैं। तुम्हारे पास भी नम्बरवार हैं, कोई अच्छा आदमी होता है तो उनको समझाने के लिए ऐसे अच्छे को भेजा जाता है। शायद कुछ समझ जाय। यह तो जानते हैं, बड़े आदमी इतना जल्दी नहीं समझेंगे। हाँ, ओपीनियन देते हैं – इनकी समझानी बहुत अच्छी है। बाप का परिचय पूरा देते हैं परन्तु खुद को फुर्सत ही कहाँ है। तुम कहते हो बेहद के बाप को याद करो तो विकर्म विनाश हों।

अभी तुम समझते हो बाप डायरेक्ट हम आत्माओं से बात करते हैं। डायरेक्ट सुनने से तीर अच्छा लगता है। वह बी.के. द्वारा सुनते हैं। यहाँ परमपिता परमात्मा ब्रह्मा द्वारा डायरेक्ट समझाते हैं – हे बच्चों, तुम बाप का कहना नहीं मानते हो। तुम सब तो कोई को ऐसे नहीं कह सकेंगे ना। वहाँ तो बाप नहीं है। यहाँ बाप बैठे हैं, बाप बात करते हैं। बच्चे, तुम बाप की भी नहीं मानेंगे! अज्ञान काल में भी बाप की समझानी और भाई की समझानी में फर्क पड़ता है। भाई का इतना असर नहीं पड़ेगा जितना बाप का असर पड़ेगा। बाप फिर भी बड़ा हुआ ना, तो डर रहेगा। तुमको भी बाप समझाते हैं – मुझ अपने बाप को याद करो। तुमको शर्म नहीं आती, तुम घड़ी-घड़ी मुझे भूल जाते हो। बाप डायरेक्ट कहते हैं तो वह असर जल्दी पड़ता है। अरे, बाप का कहना नहीं मानते हो। बेहद का बाप कहते हैं यह जन्म निर्विकारी बनो तो 21 जन्म निर्विकारी बन पवित्र दुनिया का मालिक बनेंगे। यह नहीं मानते हो। बाप के कहने का तीर कड़ा लगता है। फर्क तो रहता है। ऐसे भी नहीं है कि सदैव नये-नये से बाबा मिलते रहेंगे। उल्टे-सुल्टे प्रश्न करते हैं। बुद्धि में नहीं बैठता क्योंकि यह है बिल्कुल नई बात। गीता में कृष्ण का नाम लिख दिया है। वह तो हो नहीं सकता। अभी ड्रामा अनुसार तुम्हारी बुद्धि में बैठा है। तुम बच्चे भागते हो हम बाबा के पास जायें, डायरेक्ट मुरली सुनें। वहाँ तो भाइयों द्वारा सुनते थे, अब बाबा से सुनें। बाप का असर होता है। बच्चे-बच्चे कह बात करते हैं। बच्चे, तुम्हें लज्जा नहीं आती! बाप को याद नहीं करते हो! बाप के साथ तुम्हारा प्यार नहीं है! कितना याद करते हो? बाबा एक घण्टा। अरे, निरन्तर याद करेंगे तो तुम्हारे पाप कट जायेंगे। जन्म-जन्मान्तर के पापों का बोझा सिर पर है। बाप सम्मुख समझाते हैं – तुमने बाप की कितनी ग्लानि की है। तुम्हारे ऊपर तो केस चलना चाहिए। अखबार में कोई के लिए ग्लानि लिखते हैं तो उस पर केस करते हैं ना। अब बाप स्मृति दिलाते हैं – तुम क्या-क्या करते थे। बाप समझाते हैं ड्रामा अनुसार रावण के संग में यह हुआ है। अब भक्ति मार्ग सब पूरा हुआ, पास्ट हो गया, बीच में कोई रोकने वाला तो होता नहीं। दिन-प्रतिदिन उतरते-उतरते तमोप्रधान बुद्धि बुद्धू हो जाते हैं। जिसकी पूजा करते हैं, उनको ठिक्कर-भित्तर में कह देते हैं। इसको कहा जाता है बेहद की बेसमझी। बेहद के बच्चों की बेहद की बेसमझी। एक तरफ शिवबाबा की पूजा करते हैं, दूसरे तरफ उस बाप को ही सर्वव्यापी कहते हैं। अभी तुमको स्मृति आई है इतनी बेसमझी की जो बाप की ग्लानि कर दी है। अब तुम बच्चों ने समझा है तो अब पुरूषार्थ कर रहे हो बेगर टू प्रिन्स बनने का। श्रीकृष्ण सतयुग का प्रिन्स, उनके लिए फिर कहते 16108 रानियाँ थी, बच्चे थे! अभी तुमको तो लज्जा आयेगी। कोई पाप करते हैं तो भगवान के आगे कान पकड़कर कहते हैं – हे भगवान, बड़ी भूल हुई, रहम करो, क्षमा करो। तुमने कितनी बड़ी भूल की है। बाप समझाते हैं – ड्रामा में ऐसा है। जब ऐसे बनो तब तो मैं आऊं।

अब बाप कहते हैं – तुमको सब धर्म वालों का कल्याण करना है। बाप जो सबकी सद्गति करते हैं, उनके लिए सब धर्म वाले कह देते हैं सर्वव्यापी है। यह कहाँ से सीखे। भगवानुवाच, मै सर्वव्यापी नहीं हूँ। तुम्हारे कारण औरों का भी ऐसा हाल हो गया है। पुकारते हैं – हे पतित-पावन…. परन्तु समझते नहीं हैं। हम जब पहले-पहले घर से आये तो पतित थे क्या? देह-अभिमानी बनने के कारण पतित बने। कोई भी धर्म वाला आये, उनसे पूछना है परमपिता परमात्मा का तुमको परिचय है, वह कौन है? कहाँ निवास करते हैं? तो कहेंगे ऊपर में या कहेंगे सर्वव्यापी है। बाप कहते हैं तुम्हारे खातिर सारी दुनिया चट खाते में आ गई है। निमित्त तुम बने हो। सबको समझाना पड़ता है। भल ड्रामा अनुसार होता है परन्तु तुम पतित तो बन गये ना। सभी पाप आत्मायें हैं। अब पुण्य आत्मा बनने के लिए पुकारते हैं। सब धर्म वालों को मुक्तिधाम घर में जाना है। वहाँ पवित्र हैं। यह भी ड्रामा बना हुआ है, जो बाप आकर समझाते हैं। यह ज्ञान सब धर्मों के लिए है। बाबा के पास समाचार आया था, किसी आचार्य ने कहा आप सबको आत्मा में परमात्मा समझ नमस्कार करता हूँ। अब इतने सब परमात्मा हैं क्या? कुछ भी समझ नहीं। जिन्होंने भक्ति जास्ती नहीं की है, वह ठहरते नहीं हैं। सेन्टर्स में भी कोई कितना समय, कोई कितना समय ठहरते हैं। इससे समझना चाहिए कि भक्ति कम की है इसलिए ठहरते नहीं हैं। फिर भी जायेंगे कहाँ। दूसरी कोई हट्टी तो है नहीं। ऐसी क्या युक्ति रचें जो मनुष्य जल्दी समझ लें। अभी तो सबको पैगाम देना है। यह कहना है कि बाप को याद करो। तुम ही पूरा याद नहीं कर सकते हो तो तुम्हारा तीर कैसे लगेगा इसलिए बाबा कहते हैं चार्ट रखो। मुख्य बात है ही पावन बनने की। जितना पावन बनेंगे उतना नॉलेज धारण होगी। खुशी भी होगी। बच्चों को तो बहुत खुशी होनी चाहिए – हम सबका उद्धार करें। बाप ही आकर सद्गति करते हैं। बाप को तो ग़म और खुशी की बात ही नहीं। यह ड्रामा बना हुआ है। तुमको तो कोई ग़म नहीं होना चाहिए। बाप मिला है और क्या, सिर्फ बाप की मत पर चलना है। यह समझानी भी अब मिलती है, सतयुग में नहीं मिलेगी। वहाँ तो ज्ञान की बात ही नहीं। यहाँ तुमको बेहद का बाप मिला है तो तुमको स्वर्ग से भी जास्ती खुशी होनी चाहिए।

बाप कहते हैं विलायत में भी जाकर तुमको यह समझाना है। सभी धर्म वालों पर तुमको तरस पड़ता है। सभी कहते हैं – हे भगवान रहम करो, ब्लिस करो, दु:ख से लिबरेट करो। परन्तु समझते कुछ नहीं। बाप अनेक प्रकार की युक्तियाँ बतलाते हैं। सबको यह बतलाना है कि तुम रावण की जेल में पड़े हो। कहते हैं स्वतंत्रता मिले, परन्तु वास्तव में स्वतंत्रता कहा किसको जाता है, यह कोई जानता नहीं है। रावण की जेल में तो सब फँसे हुए हैं। अभी सच्ची स्वतंत्रता देने के लिए बाप आये हैं। फिर भी रावण की जेल में परतंत्र होकर पाप करते रहते हैं। सच्ची स्वतंत्रता कौन-सी है? यह मनुष्यों को बतलाना है। तुम अखबार में भी डाल सकते हो – यहाँ रावण के राज्य में स्वतंत्रता थोड़ेही है। बहुत शार्ट में लिखना चाहिए। जास्ती तीक-तीक कोई समझ न सके। बोलो, तुमको स्वतत्रता है कहाँ, तुम तो रावण की जेल में पड़े हो। तुम्हारा विलायत में आवाज़ होगा तो फिर यहाँ झट समझ जायेंगे। एक-दो पर घेराव करते रहते हैं। तो यह स्वतंत्रता हुई क्या? स्वतंत्रता तो तुमको बाप दे रहे हैं। रावण की जेल से स्वतंत्र कर रहे हैं। तुम जानते हो वहाँ हम बड़े स्वतंत्र, बड़े धनवान होते हैं। किसकी नज़र भी नहीं पड़ती। पीछे जब कमजोर बनें तब सबकी नज़र पड़ी तुम्हारे धन पर। मुहम्मद गज़नवी ने आकर मन्दिर को लूटा तो तुम्हारी स्वतंत्रता पूरी हो गई। रावण के राज्य में परतंत्र बन गये। अभी तुम पुरूषोत्तम संगमयुग पर हो। अभी सच्ची स्वतत्रता को पा रहे हो। वह तो स्वतंत्रता को समझते ही नहीं। तो यह बात भी युक्ति से समझानी है। जिन्होंने कल्प पहले स्वतंत्रता पाई है, वही मानेंगे। तुम समझाते हो तो कितना आरग्यु करते हैं, जैसे बुद्धू। टाइम वेस्ट करते हैं तो दिल नहीं होती है बात करें।

बाप आकर स्वतंत्रता देते हैं। रावण की परतंत्रता में दु:ख बहुत है। अपरमअपार दु:ख है। बाप के राज्य में हम कितना स्वतंत्र होते हैं। स्वतंत्रता उसको कहा जाता है – जब हम पवित्र देवता बनते हैं तो रावण राज्य से छूट जाते हैं। सच्ची स्वतंत्रता बाप ही आकर देते हैं। अभी तो पराये राज्य में सब दु:खी हैं। स्वतंत्रता मिलने का यह पुरूषोत्तम संगमयुग है। वह तो कहते फॉरेन गवर्मेंन्ट गई तो हम स्वतंत्र बनें। अब तुम जानते हो जब तक पावन नहीं बने हैं तब तक स्वतंत्र नहीं कहेंगे। फिर जमघटों की सजायें खानी पड़ेंगी। पद भी भ्रष्ट हो जायेगा। बाप आते हैं घर ले जाने। वहाँ सब स्वतंत्र होते हैं। तुम सब धर्म वालों को समझा सकते हो – तुम आत्मा हो, मुक्तिधाम से आये हो पार्ट बजाने। सुखधाम से फिर दु:खधाम में तमोप्रधान दुनिया में आ गये हो। बाप कहते हैं तुम मेरी सन्तान हो, रावण की थोड़ेही हो। मैं तुमको राज्य-भाग्य देकर गया था। तुम अपने राज्य में कितने स्वतंत्र थे। अब फिर वहाँ जाने के लिए पावन बनना है। तुम कितने धनवान बनते हो। वहाँ तो पैसे की चिंता नही होती है। भल गरीब हो फिर भी पैसे की चिंता नहीं। सुखी रहते हैं। चिंता यहाँ होती है। बाकी राजधानी में नम्बरवार पद होते हैं। सूर्यवंशी राजाओं जैसे सब थोड़ेही बनेंगे। जितनी मेहनत उतना पद। तुम सब धर्म वालों की सर्विस करने वाले हो। विलायत वालों को भी समझाना है – तुम सब भाई-भाई हो ना। सब शान्तिधाम में रहते हैं। अब रावण राज्य में हो। अब घर जाने का रास्ता आपको बताते हैं, अपने को आत्मा समझ मुझे याद करो। कहते भी हैं भगवान सबको लिबरेट करते हैं। परन्तु यह नहीं समझते कि कैसे लिबरेट करते हैं। बच्चे कहाँ मूंझ पड़ते हैं तो कहेंगे बाबा हमको लिबरेट कर अपने घर ले चलो। जैसे तुम लोग फागी में जंगल में मूंझ गये थे। रास्ते का मालूम नहीं पड़ता था। फिर लिबरेटर मिला, रास्ता बताया। बेहद के बाप को भी कहते हैं – बाबा, हमको लिबरेट करो। आप चलो, हम भी आपके पीछे चलेंगे। सिवाए बाप के और कोई रास्ता नहीं बताते हैं। कितने शास्त्र पढ़ते थे, तीर्थों पर धक्के खाते थे परन्तु भगवान को नहीं जानते तो ढूंढेंगे फिर कहाँ से। सर्वव्यापी है फिर मिलेंगे कैसे। कितना अज्ञान अन्धियारे में हैं। सर्व का सद्गति दाता एक बाप है, वही आकर तुम बच्चों को अज्ञान अन्धेरे से निकालते हैं। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) एक बाप मिला है इसलिए किसी भी बात का ग़म (चिंता) नहीं करना है। उनकी मत पर चलकर, बेहद का समझदार बन खुशी-खुशी सबका उद्धार करने के निमित्त बनना है।

2) जमघटों की सजाओं से बचने वा सच्ची स्वतंत्रता पाने के लिए पावन जरूर बनना है। नॉलेज सोर्स आफ इनकम है, इसे धारण कर धनवान बनना है।

वरदान:- सेवा में रहते कर्मातीत स्थिति का अनुभव करने वाले तपस्वीमूर्त भव
समय कम है और सेवा अभी भी बहुत है। सेवा में ही माया के आने की मार्जिन रहती है। सेवा में ही स्वभाव, संबंध का विस्तार होता है, स्वार्थ भी समाया होता है, उसमें थोड़ा सा बैलेन्स कम हुआ तो माया नया-नया रूप धारण कर आयेगी इसलिए सेवा और स्व-स्थिति के बैलेन्स का अभ्यास करो। मालिक हो कर्मन्द्रियों रूपी कर्मचारियों से सेवा लो, मन में बस एक बाबा दूसरा न कोई – यह स्मृति इमर्ज हो तब कहेंगे कर्मातीत स्थिति के अनुभवी, तपस्वीमूर्त।
स्लोगन:- कारण रूपी निगेटिव को समाधान रूपी पॉजिटिव बनाओ।

TODAY MURLI 15 AUGUST 2018 DAILY MURLI (English)

Today Murli Brahma kumaris : 15 August 2018

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Read Murli 14 August 2018 :- Click Here

15/08/18
Morning Murli
Om Shanti
BapDada
Madhuban
Essence: Sweet children, when you go into the lap of the Father, this world ends. Your next birth will be in the new world and this is why there is the saying, “When you die, the world is dead to you.”
Question: On the basis of which one custom can you prove the incarnation of the Father?
Answer: The custom of feeding departed spirits every year has continued in Bharat. They invoke a soul into a brahmin priest and speak to that soul. They ask the departed soul if he has any desires. The body doesn’t come back, just the soul comes back. This too is fixed in the drama. Just as a soul can enter, in the same way, God’s incarnation takes place. You children can explain and prove this.
Song: To live in Your lane and to die in Your lane. 

Om shanti. This song is of this time and continues on the path of devotion. It is at this time, when you die alive with the Father, that the whole world also truly ends. On the path of ignorance, when human beings die, they take birth in this world. The world exists all the time. There is the saying, “When you die, the world is dead to you.” However, when a person dies, the world isn’t destroyed. That soul has to take birth again in this same world. When you die, this world too will end. You know that you will then go into the new world. Only you Brahmins know this. Because of being children of God, you receive the birthright of the golden age; you receive the sovereignty of heaven; hell comes to an end. There is no effort in this. You simply have to remember the Father. When a person is dying, people tell him to chant the name of Rama. Finally, when they pick up the corpse, they chant, “The name of Rama is the Truth”. They say of God: The name of Rama is the Truth. That is, they take the name of the Supreme Father, the Supreme Soul, who is the Truth. They turn the beads of a rosary whilst chanting the name of Rama. They continuously chant the name of Rama in such a way that it is as though they are playing music. The Father is explaining to you children: You don’t have to make any sound. Simply keep remembrance of Me in your intellects. You know that by your going into God’s lap whilst alive, this world of sorrow ends for you. Baba, I will become a garland around Your neck. The rosary of Rudra is remembered. It is not said, “The rosary of Rama”. You are sitting in this sacrificial fire of knowledge as you did in the previous cycle in order to be threaded in the rosary of Rudra. There is no other spiritual gathering where you would understand that you will become the garland around the neck of God, the Father. You definitely receive the inheritance from the Father. Who says, “Father”? The soul. The intellect is in the soul. Your intellect understands and then says something. First a thought arises and then it is carried out by the physical organs. Truly, I belong to Baba and will remain belonging to Baba. In this last birth, you call Him, “God, the Father  . So, ask them: Do you have knowledge of God, the Father? They would reply: God is omnipresent. Tell them: You, the soul, say, “Supreme Father”, so how can the Father be omnipresent? Did the Father enter the child? To call the Father omnipresent is totally wrong. Understand these things very clearly and then explain to others. The sacrificial fire of the knowledge of Rudra is very well known. Rudra is incorporeal. Krishna is a corporeal being. Ultimately, who would be called God? Krishna cannot be called that. People are very innocent. They say: God is omnipresent. The Father resides in His own home. Where else would He reside? The Father has now come into this unlimited home. He is present here. He says: I have entered this one, just like departed spirits are invoked into brahmin priests. For instance, when the departed spirit of someone’s father is fed, he would say: I have entered this one. I have entered this one, and so if you want to ask anything, you can do so. In earlier days, the system of invoking departed spirits was very popular. A departed spirit is also just a soul. They feed the departed spirit, that is, the soul. They would say: Today, we are feeding everyone because of the departed spirit of my grandfather or of so-and-so. Therefore, the soul is invoked and fed. Someone who loved his wife would call her departed soul back after she had died. He would say: I promised her a diamond nose stud. Therefore, he would invoke her into a brahmin priest and give her a diamond nose stud through him. He would call the soul; the body doesn’t come. This custom only exists in Bharat. It is just as when you go to the subtle region and offer bhog to someone who has died, that soul comes into the subtle region. These things are completely new. Until people understand very clearly, they have doubts as to what they (the brahmins) are doing. Look at the systems and customs of brahmin priests. Bhog is offered in all the temples. They offer bhog to the departed spirits. They offer bhog to the soul of Guru Nanak, but where is he? They cannot understand this. You know that all those who established a religion are here, just as Baba says: I establish the Brahmin religion. He is the Purifier. Pure souls come and establish a religion. However, a satopradhan soul then has to go through the stages of sato, rajo and tamo. At this time, all souls are in the graveyard. Baba is the Purifier. He is never buried in the graveyard. Human beings cannot be called the Purifier. Purifier means the Purifier of the whole world. There cannot be anyone except the one Father who makes the impure world pure. Those people come to establish their own religions. The whole genealogical tree of the Christian religion is up there. Christ came first and then all the others followed him. Expansion continued to take place. He doesn’t purify the impure. His population comes down, numberwise. The Purifier is needed at this time when everyone is buried in the graveyard. He alone is the One who purifies everyone. You understand that, truly, the whole world is totally decayed at this time. The example of the banyan tree is given. The tree is very large; its foundation is decayed but the branches and twigs are still there. This too is a tree. The roots of the foundation of the deity religion have been cut away. All the rest of the tree exists. If the Seed exists, He can carry out establishment once again. The Father says: I come and once again carry out establishment. Establishment takes place through Brahma and destruction takes place through Shankar. There truly was the destruction of the innumerable religions. Those who studied Raja Yoga at the time of the Mahabharat War then established their own kingdom. You know that you will now go to the Father and then come into the new world. The tree will then continue to grow. The deity religion that used to exist has disappeared. The Father says: I come and once again carry out establishment of the original, eternal deity religion. Bharat that was the highest on high is now eclipsed. By sitting on the pyre of lust, you souls have now become ugly. You are now sitting on the pyre of knowledge and are becoming beautiful. You had become ugly. It is the Supreme Father, the Supreme Soul, who makes ugly ones beautiful. You receive His shrimat. The soul of the Supreme Father, the Supreme Soul, is ever pure and beautiful. Alloy is mixed in souls (example of gold). You know that this old world is now to be destroyed and that everyone is to die. There won’t then be anyone left behind to tell you: Chant the name of Rama. Look, when Nehru died, his ashes were scattered all over the fields. It was understood that the fields would receive very good fertiliser. When a tree is full of insects, they use ashes (like an insecticide) on them. This whole world will now receive so many ashes. When great sannyasis or great souls die, their ashes aren’t thrown away. The highest of all are the sannyasis. So many will now die and so much fertiliser will be received. So, why would the earth not give first-class grain? In the golden age, everything is green and fresh. It takes time for this world to be made new. When you go to the subtle region, you are shown such big fruit and you are given mango juice to drink. So, just think how much fertiliser will be received, and specially Bharat will receive that. So many good things will emerge there in the new world. By receiving this fertiliser, the whole world will become new. You are given the mango juice of Paradise in the subtle region. You are granted visions of gardens etc. Some children have had visions of that world. They go there and drink mango juice. Princes and princesses used to fetch fruit from the gardens. However, there cannot be a garden in the subtle region. Surely, they must have gone to Paradise. A vision would not be granted to everyone. Those who become instruments are granted visions. It is possible that if you stay in remembrance, if you remain Baba’s children, then, at the end, you too will have visions. This cow shed first had to be made. You had to be baked in the furnace and so many came then. It has been explained to you children that people will not understand simply by being given literature. A teacher who can explain to them is definitely needed. A teacher would explain in a second: This is your Baba and this is your Dada (elder brother). This unlimited Father is the Creator of heaven. If you just give someone literature, he would look at it and then throw it away. He wouldn’t understand anything. At the very least, you definitely have to explain that the Father has come. It is your duty to beat the drums for this. There are truly the Yadavas and the Kauravas and the great war is also just ahead. There must definitely be someone to teach Raja Yoga. There must also be establishment of heaven. There will be the establishment of the one religion and the destruction of innumerable religions. You know that you are changing from an ordinary man into Narayan and an ordinary woman into Lakshmi. This is our aim and objective. It didn’t take God long to change human beings into deities. Only those of the sun dynasty are called deities. Those of the moon dynasty are called warriors. You first of all have to become deities. By failing, you become warriors. The Father says: Sweetest beloved, long-lost and now-found children. There are so many long-lost and now-found children. Look, when someone’s child is lost and then found after six to eight months, he is greeted with so much love; his father would be so happy. This Father also says: Beloved, long-lost and now-found children, you have come and met Me after 5000 years. Beloved children, you became separated and you have now met Me in order to claim your unlimited inheritance. Deity world sovereignty is your God f atherly birthright. Baba has come to give you the unlimited sovereignty. That One is Heavenly God, the Father. He says: I have brought such a big gift for you children. However, you have to become worthy of it. You have to follow shrimat. If, after saying, “Mama, Baba”, you forget Him or you divorce Him, you won’t be able to become a garland around the neck. Children are loved so much. A father puts his children on his head. This unlimited Father has so many children. Baba places you so high on His head. He places on His head those who have fallen down to the feet. So, you should remain so happy. You should follow shrimat. You have to follow the shrimat of One. If you follow your own dictates, you die. If you follow shrimat you will become the most elevated human beings, that is, deities. Baba asks you, “With which number will you pass?”. The Father also says: Become part of the sun dynasty. Therefore, for this, you have to follow Mama and Baba. You have to make others into spinners of the discus of self-realisation, like yourselves. When you bring others in front of Shiv Baba, He asks you how many others you have made like yourselves. These are such enjoyable things. Only you can understand them. New ones would not be able to understand at all that this is a college for changing from human beings into deities. Some are coloured very well in seven days. Some are not coloured by it at all. A lot of effort has to be made. The first thing that is explained to you children is that you first of all have to ask everyone: Do you know the unlimited Father? They say: Yes, He is in me and in you; He is omnipresent. In that case, there is no need to ask them anything further. Since you say that He is the Father, how is it possible that He is in you and me? An inheritance is received from the Father. So, first of all, explain Alpha. The Father says: My long-lost and now-found children. None of the holy men or sannyasis can say this. You know that you truly are the long-lost and now-found children of Shiv Baba. You have come and met Him again after 5000 years in order to claim your inheritance of heaven. You know that you were the masters of heaven and that you are becoming that again. You definitely have to go to heaven. Then, you have to claim a high status according to your efforts. Achcha.

To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, love, remembrance and good morning from the Mother, the Father, BapDada. The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

Essence for dharna:

  1. Follow the mother and father and do the service of making others like yourselves. Become spinners of the discus of self-realisation and make others the same.
  2. In order to become a garland around the neck of the Father, remember the Father with your intellect. Don’t make any sound. Constantly stay in remembrance.
Blessing: May you be a great, generous-hearted donor and donate fortune by staying in the awareness of your fortune and the Father, the Bestower of Fortune.
When you remember both the Father, the Bestower of Fortune and your fortune you will have the zeal and enthusiasm to make others fortunate. Just as the Father, the Bestower of Fortune, distributes fortune through Brahma, in the same way, you too are the children of the Bestower. Therefore, continue to distributes fortune. Those people distribute clothes, food and also gifts, but no one can become satisfied through those. You distribute fortune and where there is fortune, there are all attainments. In this way, become elevated, great donors and be generous hearted in distributing fortune. Constantly continue to give.
Slogan: Those who belong to the One and are also economical are loved by God.

*** Om Shanti ***

BRAHMA KUMARIS MURLI 15 AUGUST 2018 : DAILY MURLI (HINDI)

Daily Murli Brahma Kumaris Hindi – Today Murli 15 August 2018

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15-08-2018
प्रात:मुरली
ओम् शान्ति
“बापदादा”‘
मधुबन

 

“मीठे बच्चे – जब तुम बाप की गोद में आते हो तो यह दुनिया ही ख़त्म हो जाती है, तुम्हारा अगला जन्म नई दुनिया में होता है इसलिये कहावत है – आप मुये मर गई दुनिया”
प्रश्नः- किस एक रस्म के आधार पर बाप के अवतरण को सिद्ध कर सकते हो?
उत्तर:- भारत में हर वर्ष पित्र खिलाने की रस्म चली आई है, किसी ब्राह्मण में आत्मा को बुलाते हैं, फिर उनसे बातें करते हैं, उसकी आश पूछते हैं। अब शरीर तो आता नहीं, आत्मा ही आती है। यह भी ड्रामा में नूँध है। जैसे आत्मा प्रवेश कर सकती है वैसे ही परमात्मा का भी अवतरण होता है, यह तुम बच्चे सिद्ध कर समझा सकते हो।
गीत:- मरना तेरी गली में….. 

ओम् शान्ति। यह भी गायन है इस समय का, जो फिर भक्ति मार्ग में चला आता है। इस समय जबकि तुम बाप के पास जीते जी मरते हो तो बरोबर सारी दुनिया ही ख़त्म हो जाती है। अज्ञान काल में मनुष्य मरते हैं तो इस ही दुनिया में जन्म लेते हैं। दुनिया कायम है। कहावत है – आप मुये मर गई दुनिया। परन्तु उनके मरने से दुनिया का विनाश तो नहीं हो जाता। इस ही दुनिया में फिर जन्म लेना पड़ता है। तुम मरेंगे तो यह दुनिया भी ख़त्म हो जायेगी। तुम जानते हो हम फिर नई दुनिया में आयेंगे। यह सिर्फ तुम ब्राह्मण ही जानते हो। ईश्वर का बच्चा होने से हमको सतयुग का बर्थ राइट मिलता है, स्वर्ग की बादशाही मिलती है। नर्क ख़त्म हो जाता है। इसमें कोई मेहनत नहीं है। सिर्फ बाप को याद करना है। मनुष्य जब कोई मरते हैं तब उसको कहते हैं राम-राम कहो। पिछाड़ी में उठाते समय कहते हैं – राम नाम सत्य है। यह भगवान् को ही कहते हैं। राम-नाम सत है अर्थात् परमपिता परमात्मा जो सत है, उसका ही नाम लेना चाहिये। माला भी राम-राम कह सिमरते हैं। यह राम नाम की धुनि ऐसी लगाते हैं जैसे कोई साज़ बजता है। तुम बच्चों को बाप समझाते हैं कि कोई भी आवाज़ नहीं करना है, सिर्फ बुद्धि से याद करना है। तुम जानते हो जीते जी ईश्वर की गोद में आने से फिर यह दु:ख रूपी दुनिया ख़त्म हो जाती है। बाबा, हम आपके गले का हार बन जायेंगे। गाया भी जाता है रुद्र माला। राम माला नहीं कहा जाता है। तुम रुद्र माला में पिरोने के लिए इस रुद्र ज्ञान यज्ञ में बैठे हो, कल्प पहले मुआफिक। दूसरा कोई सत्संग नहीं, जहाँ ऐसे समझते हो कि हम ईश्वर बाप के गले में पिरोयेंगे। बाप से तो जरूर वर्सा मिलेगा। बाप कौन कहता है? आत्मा। आत्मा में ही बुद्धि है ना। बुद्धि समझती है फिर कहती है, पहले संकल्प आता है फिर कर्मेन्द्रियों से कहा जाता है। बरोबर हम बाबा के बने हैं, बाबा के ही होकर रहेंगे। इस अन्तिम जन्म में गॉड फादर कहते हैं ना। फिर पूछो तुम्हारे में गॉड फादर की नॉलेज है? तो कहेंगे गॉड तो सर्वव्यापी है। बोलो, तुम्हारी आत्मा कहती है परमपिता, तो पिता सर्वव्यापी कैसे होगा? बच्चे में बाप आ गया क्या? बाप को सर्वव्यापी कहना बिल्कुल रांग है। यह बातें बहुत अच्छी रीति समझकर फिर समझाना है।

रुद्र ज्ञान यज्ञ तो मशहूर है। रुद्र है निराकार। कृष्ण तो साकार है। आखरीन भगवान् किसको कहा जाये? कृष्ण को तो नहीं कह सकते। मनुष्य तो बहुत भोले होते हैं। कह देते हैं – गॉड इज़ ओमनी प्रेजन्ट। बाप तो अपने घर में ही रहता है, और कहाँ रहेगा? अब बाप इस बेहद के घर में आया हुआ है। यहाँ विराजमान है। कहते हैं कि मैंने इसमें प्रवेश किया है। जैसे ब्राह्मणों में पित्रों को बुलाते हैं। समझो, कोई अपने बाप के पित्र को खिलाते हैं तो आत्मा कहेगी कि मैं इनमें आया हुआ हूँ। मैंने इसमें प्रवेश किया हुआ है, कुछ पूछना हो तो पूछो। आगे पित्रों को बुलाने का बहुत रिवाज था। पित्र तो आत्मा है ना। पित्र को यानी आत्मा को खिलाया जाता है। कहेंगे आज हमारे दादे का पित्र है, आज फलाने का पित्र है। तो आत्मा को बुलाया जाता है, खिलाया जाता है। समझो किसका स्त्री से प्यार है, शरीर छोड़ दिया तो उसकी आत्मा को बुलाते हैं। कहते हैं हमने हीरे की फुल्ली पहनाने का वायदा किया था, तो ब्राह्मण को बुलाकर उनको हीरे की फुल्ली पहनाते हैं। बुलाया तो आत्मा को। शरीर थोड़ेही आयेगा। यह रस्म भारत में ही है। जैसे तुम सूक्ष्मवतन में जाते हो, कोई मर गया, उनका भोग लगाते हो तो सूक्ष्मवतन में वह आत्मा आती है। यह है बिल्कुल नई बातें। जब तक कोई अच्छी रीति समझ न जाये तब तक मनुष्यों को संशय पड़ता है कि यह क्या करते हैं?, ब्राह्मणों की रस्म-रिवाज देखो कैसी है! सभी मन्दिरों आदि में भोग लगाते हैं। पित्र को भोग लगाते हैं। गुरुनानक की आत्मा को भोग लगाया, अब वह कहाँ है? यह समझ नहीं सकते। तुम तो जानते हो जिन्होंने धर्म स्थापन किया हुआ है, वह सब यहाँ हैं। जैसे बाबा कहते हैं मैं तो ब्राह्मण धर्म स्थापन करता हूँ। यह तो पतित-पावन है। पावन आत्मा ही आकर धर्म स्थापन करती है। परन्तु सतोप्रधान आत्मा को फिर सतो, रजो, तमो में आना ही है। इस समय सभी आत्मायें कब्रदाखिल हैं। बाबा तो है ही पतित-पावन। वह कभी कब्रदाखिल नहीं होते। मनुष्य को पतित-पावन नहीं कहेंगे। पतित-पावन माना सारी दुनिया का पतित-पावन। पतित दुनिया को पावन बनाने वाला एक बाप के सिवाए कोई हो नहीं सकता। वह तो आते हैं अपने-अपने धर्म स्थापन करने। क्रिश्चियन धर्म का सारा सिजरा वहाँ है। पहले क्राइस्ट आया फिर उनके पिछाड़ी सब आते रहेंगे, वृद्धि को पाते रहेंगे। वह कोई पतित को पावन नहीं बनाते। नम्बरवार उन्हों की संख्या आती है। पतित-पावन तो इस समय चाहिए, जबकि सभी कब्रदाखिल हो जाते हैं। सबको पावन बनाने वाला एक वही है।

यह तुम समझते हो बरोबर इस समय सारी दुनिया जड़जड़ीभूत है। बनेन ट्री का मिसाल देते हैं, बहुत बड़ा झाड़ है, उसका फाउन्डेशन सड़ा हुआ है, बाकी टाल-टालियां सारी खड़ी हैं। यह भी झाड़ है। देवी-देवता धर्म का जो फाउन्डेशन है, उनकी जड़ एकदम कट गई है। बाकी सब हैं। बीज हो तो फिर से स्थापन करे ना। बाप कहते हैं, मैं फिर से आकर स्थापना कराता हूँ। ब्रह्मा द्वारा स्थापना, शंकर द्वारा विनाश। बरोबर अनेक धर्मों का विनाश हुआ था। महाभारत लड़ाई के समय जो राजयोग सीखे, उनकी फिर राजधानी स्थापन हो गई। तुम जानते हो अभी हम बाप के पास जायेंगे फिर नई दुनिया में आयेंगे। फिर झाड़ वृद्धि को पाता जायेगा। देवी-देवता धर्म जो था वह प्राय:लोप हो गया है। बाप कहते हैं मैं फिर से आकर आदि सनातन देवी-देवता धर्म की स्थापना करता हूँ। भारत जो ऊंचे ते ऊंच था उनको अब ग्रहण लगा हुआ है। काम चिता पर बैठने से इस समय तुम्हारी आत्मा काली हो गई है। अब फिर तुम ज्ञान चिता पर बैठ गोरे बनते हो। तुम जो श्याम बन गये थे, श्याम को सुन्दर गोरा बनाने वाला है परमपिता परमात्मा। उनकी श्रीमत मिलती है। परमपिता परमात्मा की आत्मा एवर प्योर गोरी है। आत्मा में ही खाद पड़ती है। (सोने का मिसाल) अभी तुम जानते हो – इस पुरानी दुनिया का विनाश होना है, सभी का मौत है। फिर तुमको कहने वाला कोई नहीं रहेगा कि राम-राम कहो। अब देखो, नेहरू मरा तो उनकी राख को सब जगह गिराया। समझा, अच्छी खाद मिलेगी। झाड़ में कीड़ा आदि पड़ जाता है तो उसमें राख डालते हैं। अभी इस सारी पृथ्वी को कितनी राख मिलेगी। बड़े-बडे सन्यासी-महात्माएं मरते हैं तो उन्हों की राख ऐसे नहीं डालते हैं। सबसे उत्तम हैं सन्यासी। अभी तो कितने मरेंगे! कितनी खाद मिलेगी! तो क्यों नहीं सृष्टि फर्स्ट क्लास अनाज आदि देगी। सतयुग में सब हरे भरे सब्ज होते हैं। इस सृष्टि को नया बनाने में टाइम लगता है। तुम सूक्ष्मवतन में जाते हो, कितने बड़े-बड़े फल तुमको दिखाते हैं, शूबीरस पिलाते हैं। तुम विचार करो – कितनी खाद मिलेगी! सो भी ख़ास भारत को। वहाँ कितनी अच्छी-अच्छी चीजें निकलेंगी नई दुनिया के लिये। खाद पड़कर सारी दुनिया नई हो जायेगी। सूक्ष्मवतन में बैकुण्ठ का शूबीरस तुमको पिलाते हैं। बगीचे आदि का साक्षात्कार कराते हैं। बच्चों ने साक्षात्कार किया है। शूबीरस पीकर आते हैं। प्रिन्स-प्रिन्सेस बगीचे से फल ले आते थे। अब सूक्ष्मवतन में तो बगीचा हो न सके। जरूर बैकुण्ठ में गये होंगे। एक-एक को साक्षात्कार नहीं करायेंगे। जो निमित्त बनते हैं, उनको साक्षात्कार कराते हैं। हो सकता है अगर तुम याद में रहेंगे, बाबा के बच्चे बनकर रहेंगे तो पिछाड़ी में तुमको भी साक्षात्कार होगा। यह तो पहले गऊशाला बननी थी, भट्ठी में पकना था तो बहुत आ गये।

बच्चों को समझाया है सिर्फ कोई को लिटरेचर देने से समझ नहीं सकेंगे। समझाने वाला टीचर जरूर चाहिए। टीचर सेकेण्ड में समझायेगा – यह तुम्हारा बाबा है, यह दादा है, यह बेहद का बाप स्वर्ग का रचयिता है। सिर्फ कोई को लिटरेचर दिया तो देखकर फेंक देंगे, कुछ भी समझेंगे नहीं। इतना जरूर समझाना है कि बाप आया है। यह ढिंढोरा पिटवाना तुम्हारा फ़र्ज है। बरोबर यादव-कौरव भी हैं, महाभारी लड़ाई भी सामने खड़ी है। जरूर राजयोग सिखलाने वाला भी होगा। जरूर स्वर्ग की स्थापना भी होगी। एक धर्म की स्थापना, अनेक धर्मों का विनाश होगा। तुम जानते हो हम नर से नारायण, नारी से लक्ष्मी बनते हैं। यह है हमारी एम ऑब्जेक्ट। मनुष्य से देवता किये करत न लागी वार। देवता सिर्फ सूर्यवंशी को कहा जाता है। चन्द्रवंशी को क्षत्रिय कहा जाता है। पहले तो देवता बनना चाहिए ना। नापास होने से क्षत्रिय हो जाते हैं। तो बाप कहते हैं – मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चे। कितने ढेर सिकीलधे बच्चे हैं! देखो, किसका बच्चा गुम हो जाता है, 6-8 मास के बाद आकर मिलता है तो कितना प्यार से आकर मिलेगा! बाप को कितनी खुशी होगी! यह बाप भी कहते हैं – लाडले सिकीलधे बच्चे, तुम 5 हजार वर्ष के बाद आकर मिले हो। लाडले बच्चे, तुम बिछुड़ गये थे, अब फिर आकर मिले हो बेहद का वर्सा लेने लिये। डीटी वर्ल्ड सावरन्टी इज योर गॉड फादरली बर्थ राइट। बाबा तुमको बेहद की बादशाही देने आया है। यह है हेविनली गॉड फादर। कहते हैं तुम बच्चों के लिये कितनी बड़ी सौगात लाई है! परन्तु इतना लायक बनना है, श्रीमत पर चलना है। मम्मा-बाबा कहकर फिर अगर भूल जाये या फ़ारकती दे तो गले का हार नहीं बनेंगे। बच्चों को कितना प्यार किया जाता है! बाप बच्चों को सिर पर रखते हैं। बेहद के बाप को कितने बच्चे हैं। बाबा कितना ऊंच माथे पर चढ़ाते हैं। पांव में जो गिरे हुए हैं उन्हों को माथे पर चढ़ाते हैं। तो कितना खुशी में रहना चाहिये! और श्रीमत पर चलना चाहिए। एक की श्रीमत पर चलना है। अपनी मनमत पर चला तो यह मरा। श्रीमत पर चलेंगे तो श्रेष्ठ ते श्रेष्ठ मनुष्य अर्थात् देवता बनेंगे। बाबा पूछते हैं ना कि कितने नम्बर में पास होंगे? बाप भी कहते हैं सूर्यवंशी बनो। तो मम्मा-बाबा को फालो करना पड़े। आप समान स्वदर्शन चक्रधारी बनाना है। शिवबाबा के आगे ले आते हैं तो बाबा पूछते हैं कितने को आप समान बनाया है? कितने मजें की बातें हैं। तुम ही समझ सकते हो, नया कोई बिल्कुल ही नहीं समझ सकेगा कि यह कोई मनुष्य से देवता बनने की कॉलेज है। कोई को तो 7 रोज़ में बहुत अच्छा रंग चढ़ जाता है। कोई को बिल्कुल नहीं चढ़ता। बहुत मेहनत करनी पड़ती है। पहली-पहली बात बच्चों को समझाई कि पहले सबको बोलो कि बेहद के बाप को जानते हो? कहते हैं – हाँ, वह मेरे में भी है, सर्वव्यापी है। फिर तो पूछने की दरकार ही नहीं है। जब बाप कहते हो तो बाप तुम्हारे में वा मेरे में कैसे हो सकता है? बाप से तो वर्सा लिया जाता है। तो पहले-पहले अल्फ़ पर समझाओ।

बाप कहते हैं – “मेरे सिकीलधे बच्चे।” ऐसे कोई साधू-सन्यासी कह न सके। तुम जानते हो बरोबर हम शिवबाबा के सिकीलधे बच्चे हैं, 5 हजार वर्ष के बाद फिर आकर मिले हैं स्वर्ग का वर्सा लेने लिये। जानते हो हम ही स्वर्ग के मालिक थे फिर हम ही बनते हैं। स्वर्ग में जाना जरूर है। फिर पुरुषार्थ अनुसार ऊंच पद पाना है। अच्छा!

मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमॉर्निंग। रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।

धारणा के लिए मुख्य सार:-

1) मात-पिता को फालो कर आप समान बनाने की सेवा करनी है। स्वदर्शन चक्रधारी बनना और बनाना है।

2) बाप के गले का हार बनने के लिये बुद्धि से बाप को याद करना है, आवाज़ नहीं करनी है। याद की धुन में रहना है।

वरदान:- भाग्य और भाग्य विधाता बाप की स्मृति में रह भाग्य बांटने वाले फ्राकदिल महादानी भव
भाग्य विधाता बाप और भाग्य दोनों ही याद रहें तब औरों को भी भाग्यवान बनाने का उमंग-उत्साह रहेगा। जैसे भाग्यविधाता बाप ब्रह्मा द्वारा भाग्य बांटते हैं ऐसे आप भी दाता के बच्चे हो, भाग्य बांटते चलो। वे लोग कपड़ा बांटेंगे, अनाज बांटेंगे, कोई गिफ्ट देंगे.. लेकिन उससे कोई तृप्त नहीं हो सकते। आप भाग्य बांटो तो जहाँ भाग्य है वहाँ सब प्राप्तियां हैं। ऐसे भाग्य बांटने में फ्राकदिल, श्रेष्ठ महादानी बनो। सदा देते रहो।
स्लोगन:- जो एकनामी रहते और एकॉनामी से चलते हैं वही प्रभू प्रिय हैं।
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