Essence of murli today – 20 June 2019

Essence of today’s murli in Hindi

Essence Of Murli 20-06-2019

20-06-2019-Hin

“मीठे बच्चे – अन्तर्मुखी बनो अर्थात् चुप रहो, मुख से कुछ भी बोलो नहीं, हर कार्य शान्ति से करो, कभी भी अशान्ति नहीं फैलाओ”

Q- तुम बच्चों को कंगाल बनाने वाला सबसे बड़ा दुश्मन कौन है?

A- क्रोध। कहा जाता है जहाँ क्रोध है वहाँ पानी के मटके भी सूख जाते हैं। भारत का मटका जो हीरे-जवाहरों से भरा हुआ था, वह इस भूत के कारण खाली हो गया है। इन भूतों ने ही तुमको कंगाल बनाया है। क्रोधी मनुष्य खुद भी तपता है, दूसरों को भी तपाता है इसलिए अब इस भूत को अन्तर्मुखी बन निकालो।

D- 1) अपने आप से पूछना है – हमारे में कोई भी भूत तो नहीं है?, आंखे क्रिमिनल तो नहीं होती हैं?, ज़ोर से बोलने वा अशान्ति फैलाने का संस्कार तो नहीं है?, लोभ-मोह का विकार सताता तो नहीं है?—--2) किसी भी देहधारी से दिल नहीं लगाना है। देह सहित सब कुछ भूल याद की यात्रा से स्वयं में रूहानी बल भरना है। एक बार भूतों को भगाकर आधाकल्प के लिए छुटकारा पाना है

V- निर्माणता के गुण को धारण कर सबको सुख देने वाले सुख देवा, सुख स्वरूप भव—--आप महान आत्माओं की निशानी है निर्माणता। जितना निर्माण बनेंगे उतना सर्व द्वारा मान प्राप्त होगा। जो निर्माण है वह सबको सुख देंगे। जहाँ भी जायेंगे, जो भी करेंगे वह सुखदायी होगा। तो जो भी सम्बन्ध-सम्पर्क में आये वह सुख की अनुभूति करे इसलिए आप ब्राह्मण आत्माओं का गायन है – सुख के सागर के बच्चे सुख स्वरूप, सुखदेवा। तो सबको सुख देते और सुख लेते चलो। कोई आपको दु:ख दे तो लेना नहीं।

S- सबसे बड़े ज्ञानी वह हैं जो आत्म-अभिमानी रहते हैं।

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