Essence of murli today – 18 June 2019

Essence of today’s murli in Hindi

Essence Of Murli 18-06-2019

18-06-2019-Hin

“मीठे बच्चे – सदा इसी नशे में रहो कि हमारा पद्मापद्म भाग्य है, जो पतित-पावन बाप के हम बच्चे बने हैं, उनसे हमें बेहद सुख का वर्सा मिलता है”

Q- तुम बच्चों को किसी भी धर्म से घृणा वा ऩफरत नहीं हो सकती है – क्यों?

A- क्योंकि तुम बीज और झाड़ को जानते हो। तुम्हें पता है यह मनुष्य सृष्टि रूपी बेहद का झाड़ है इसमें हर एक का अपना-अपना पार्ट है। नाटक में कभी भी एक्टर्स एक-दूसरे से घृणा नहीं करेंगे। तुम जानते हो हमने इस नाटक में हीरो-हीरोइन का पार्ट बजाया। हमने जो सुख देखे, वह और कोई देख नहीं सकता। तुम्हें अथाह खुशी है कि सारे विश्व पर राज्य करने वाले हम हैं।

D- 1) संगमयुग पर डायरेक्ट भगवान् से पढ़ाई पढ़कर, ज्ञानवान आस्तिक बनना और बनाना है। कभी भी बाप वा पढ़ाई में संशय नहीं लाना है।—–2) बाप समान लवली बनना है। भगवान् हमारा श्रृंगार कर रहे हैं, इस खुशी में रहना है। किसी भी एक्टर से घृणा वा ऩफरत नहीं करनी है। हरेक का इस ड्रामा में एक्यूरेट पार्ट है।

V- याद और सेवा के शक्तिशाली आधार द्वारा तीव्रगति से आगे बढ़ने वाले मायाजीत भव—–ब्राह्मण जीवन का आधार याद और सेवा है, यह दोनों आधार सदा शक्तिशाली हों तो तीव्र-गति से आगे बढ़ते रहेंगे। अगर सेवा बहुत है, याद कमजोर है वा याद बहुत अच्छी है, सेवा कमजोर है तो भी तीव्रगति नहीं हो सकती। याद और सेवा दोनों में तीव्रगति चाहिए। याद और नि:स्वार्थ सेवा साथ-साथ हों तो मायाजीत बनना सहज है। हर कर्म में, कर्म की समाप्ति के पहले सदा विजय दिखाई देगी।

S- इस संसार को अलौकिक खेल और परिस्थतियों को अलौकिक खिलौने के समान समझकर चलो।

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