Essence of murli today – 13 June 2019

Essence of today’s murli in Hindi

Essence Of Murli 13-06-2019

13-06-2019-Hin

“मीठे बच्चे – देवता बनने के पहले तुम्हें ब्राह्मण जरूर बनना है, ब्रह्मा मुख सन्तान ही सच्चे ब्राह्मण हैं जो राजयोग की पढ़ाई से देवता बनते हैं”

Q- दूसरे सभी सतसंगों से तुम्हारा यह सतसंग किस बात में निराला है?

A- दूसरे सतसंगों में कोई भी एम ऑबजेक्ट नहीं होती है, और ही धन-दौलत आदि सब कुछ गंवा कर भटकते रहते हैं। इस सतसंग में तुम भटकते नहीं हो। यह सतसंग के साथ-साथ स्कूल भी है। स्कूल में पढ़ना होता, भटकना नहीं। पढ़ाई माना कमाई। जितना तुम पढ़कर धारण करते और कराते हो उतनी कमाई है। इस सतसंग में आना माना फ़ायदा ही फ़ायदा।

D- 1) ज्ञान का सिमरण कर स्वदर्शन चक्रधारी बनना है। स्वदर्शन चक्र फिराते पापों को काटना है। डबल अहिंसक बनना है।—--2) अपनी बुद्धि को स्वच्छ पवित्र बनाकर राजयोग की पढ़ाई पढ़नी है और ऊंच पद पाना है। दिल में सदा यही खुशी रहे कि हम सत्य नारायण की सच्ची-सच्ची कथा सुनकर मनुष्य से देवता बनते हैं।

V- प्रत्यक्षफल द्वारा अतीन्द्रिय सुख की अनुभूति करने वाले नि:स्वार्थ सेवाधारी भव—--सतयुग में संगम के कर्म का फल मिलेगा लेकिन यहाँ बाप का बनने से प्रत्यक्ष फल वर्से के रूप में मिलता है। सेवा की और सेवा करने के साथ-साथ खुशी मिली। जो याद में रहकर, नि:स्वार्थ भाव से सेवा करते हैं उन्हें सेवा का प्रत्यक्ष फल अवश्य मिलता है। प्रत्यक्षफल ही ताजा फल है जो एवरहेल्दी बना देता है। योगयुक्त, यथार्थ सेवा का फल है खुशी, अतीन्द्रिय सुख और डबल लाइट की अनुभूति।

S- विशेष आत्मा वह है जो अपनी चलन द्वारा रूहानी रायॅल्टी की झलक और फलक का अनुभव कराये।

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