Essence of murli today – 11 June 2019

Essence of today’s murli in Hindi

Essence Of Murli 11-06-2019

11-06-2019-Hin

“मीठे बच्चे – सबसे मूल सेवा है बाप की याद में रहना और दूसरों को याद दिलाना, तुम किसी को भी बाप का परिचय दे उनका कल्याण कर सकते हो”

Q- कौन-सी एक छोटी-सी आदत भी बहुत बड़ी अवज्ञा करा देती है? उससे बचने की युक्ति क्या है?

A- अगर किसी में कुछ छिपाने की वा चोरी करने की आदत है तो भी बहुत बड़ी अवज्ञा हो जाती है। कहा जाता है – कख का चोर सो लख का चोर। लोभ के वश भूख लगी तो छिपाकर बिना पूछे खा लेना, चोरी कर लेना – यह बहुत खराब आदत है। इस आदत से बचने के लिए ब्रह्मा बाप समान ट्रस्टी बनो। जो भी ऐसी आदतें हैं, वह बाप को सच-सच सुना दो।

D- 1) स्थूल सेवा के साथ-साथ सूक्ष्म और मूल सेवा भी करनी है। सबको बाप का परिचय देना, आत्माओं का कल्याण करना, याद की यात्रा में रहना यह है सच्ची सेवा। इसी सेवा में बिजी रहना है, अपना समय वेस्ट नहीं करना है।—--2) सेन्सीबुल बन 5 विकारों रूपी भूतों पर विजय प्राप्त करनी है। चोरी वा झूठ बोलने की आदत निकाल देनी है। दान में दी हुई चीज़ वापस नहीं लेनी है।

V- कर्मयोगी बन हर संकल्प, बोल और कर्म श्रेष्ठ बनाने वाले निरन्तर योगी भव—--कर्मयोगी आत्मा का हर कर्म योगयुक्त, युक्तियुक्त होगा। अगर कोई भी कर्म युक्तियुक्त नहीं होता तो समझो योगयुक्त नहीं हैं। अगर साधारण वा व्यर्थ कर्म हो जाता है तो निरन्तर योगी नहीं कहेंगे। कर्मयोगी अर्थात् हर सेकण्ड, हर संकल्प, हर बोल सदा श्रेष्ठ हो। श्रेष्ठ कर्म की निशानी है – स्वयं भी सन्तुष्ट और दूसरे भी सन्तुष्ट। ऐसी आत्मा ही निरन्तर योगी बनती है।

S- स्वयं प्रिय, लोक प्रिय और प्रभू प्रिय आत्मा ही वरदानी मूर्त है।

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