Murli Essence

Essence of murli today – 22 June 2019

Essence of today’s murli in Hindi

Essence Of Murli 22-06-2019

22-06-2019-Hin

“मीठे बच्चे – तुम सब आपस में रूहानी भाई-भाई हो, तुम्हारा रूहानी प्यार होना चाहिए, आत्मा का प्यार आत्मा से हो, जिस्म से नहीं”

Q- बाप ने अपने घर की वन्डरफुल बात कौन-सी सुनाई है?

A- जो भी आत्मायें मेरे घर में आती हैं, वह अपने-अपने सेक्शन में अपने नम्बर पर फिक्स होती हैं। वह कभी भी हिलती डुलती नहीं। वहाँ पर सभी धर्म की आत्मायें मेरे नज़दीक रहती हैं। वहाँ से नम्बरवार अपने-अपने समय पर पार्ट बजाने आती हैं यह वन्डरफुल नॉलेज इसी समय कल्प में एक बार ही तुम्हें मिलती है। दूसरा कोई यह नॉलेज नहीं दे सकता।

D- 1) सदा याद सहज बनी रहे उसके लिए चलते फिरते यह चिंतन करना कि हम आत्मा हैं, परमधाम निवासी आत्मा यहाँ पार्ट बजाने आई हैं। बाप भी परमधाम में रहते हैं। वह ब्रह्मा तन में आये हैं।—–2) जैसे रूहानी बाप से आत्मा का प्यार है, ऐसे आपस में भी रूहानी प्यार से रहना है। आत्मा का आत्मा से प्यार हो, शरीर से नहीं। आत्म-अभिमानी बनने का पूरा-पूरा अभ्यास करना है।

V- पवित्र प्यार की पालना द्वारा सर्व को स्नेह के सूत्र में बांधने वाले मास्टर स्नेह के सागर भव—–जब स्नेह के सागर और स्नेह सम्पन्न नदियों का मेल होता है तो नदी भी बाप समान मास्टर स्नेह का सागर बन जाती है इसलिए विश्व की आत्मायें स्नेह के अनुभव से स्वत: समीप आती हैं। पवित्र प्यार वा ईश्वरीय परिवार की पालना, चुम्बक के समान स्वत: ही हर एक को समीप ले आता है। यह ईश्वरीय स्नेह सबको सहयोगी बनाए आगे बढ़ने के सूत्र में बांध देता है।

S- संकल्प, बोल, समय, गुण और शक्तियों के खजाने जमा करो तो इनका सहयोग मिलता रहेगा।

Essence of murli today – 20 June 2019

Essence of today’s murli in Hindi

Essence Of Murli 20-06-2019

20-06-2019-Hin

“मीठे बच्चे – अन्तर्मुखी बनो अर्थात् चुप रहो, मुख से कुछ भी बोलो नहीं, हर कार्य शान्ति से करो, कभी भी अशान्ति नहीं फैलाओ”

Q- तुम बच्चों को कंगाल बनाने वाला सबसे बड़ा दुश्मन कौन है?

A- क्रोध। कहा जाता है जहाँ क्रोध है वहाँ पानी के मटके भी सूख जाते हैं। भारत का मटका जो हीरे-जवाहरों से भरा हुआ था, वह इस भूत के कारण खाली हो गया है। इन भूतों ने ही तुमको कंगाल बनाया है। क्रोधी मनुष्य खुद भी तपता है, दूसरों को भी तपाता है इसलिए अब इस भूत को अन्तर्मुखी बन निकालो।

D- 1) अपने आप से पूछना है – हमारे में कोई भी भूत तो नहीं है?, आंखे क्रिमिनल तो नहीं होती हैं?, ज़ोर से बोलने वा अशान्ति फैलाने का संस्कार तो नहीं है?, लोभ-मोह का विकार सताता तो नहीं है?—–2) किसी भी देहधारी से दिल नहीं लगाना है। देह सहित सब कुछ भूल याद की यात्रा से स्वयं में रूहानी बल भरना है। एक बार भूतों को भगाकर आधाकल्प के लिए छुटकारा पाना है

V- निर्माणता के गुण को धारण कर सबको सुख देने वाले सुख देवा, सुख स्वरूप भव—–आप महान आत्माओं की निशानी है निर्माणता। जितना निर्माण बनेंगे उतना सर्व द्वारा मान प्राप्त होगा। जो निर्माण है वह सबको सुख देंगे। जहाँ भी जायेंगे, जो भी करेंगे वह सुखदायी होगा। तो जो भी सम्बन्ध-सम्पर्क में आये वह सुख की अनुभूति करे इसलिए आप ब्राह्मण आत्माओं का गायन है – सुख के सागर के बच्चे सुख स्वरूप, सुखदेवा। तो सबको सुख देते और सुख लेते चलो। कोई आपको दु:ख दे तो लेना नहीं।

S- सबसे बड़े ज्ञानी वह हैं जो आत्म-अभिमानी रहते हैं।

Essence of murli today – 19 June 2019

Essence of today’s murli in Hindi

Essence Of Murli 19-06-2019

19-06-2019-Hin

“मीठे बच्चे – तुम्हें शरीर से अलग होकर बाप के पास जाना है, तुम शरीर को साथ नहीं ले जायेंगे, इसलिए शरीर को भूल आत्मा को देखो”

Q- तुम बच्चे अपनी आयु को योगबल से बढ़ाने का पुरूषार्थ क्यों करते हो?

A- क्योंकि तुम्हारी दिल होती है कि हम बाप द्वारा सब कुछ इस जन्म में जान जायें। बाप द्वारा सब कुछ सुन लें, इसलिए तुम योगबल से अपनी आयु को बढ़ाने का पुरूषार्थ करते हो। अभी ही तुम्हें बाप से प्यार मिलता है। ऐसा प्यार फिर सारे कल्प में नहीं मिल सकता। बाकी जो शरीर छोड़कर चले गये, उनके लिए कहेंगे ड्रामा। उनका इतना ही पार्ट था।

D- 1) बाप का सन्देश सुनाकर सबके दु:ख दूर करने हैं। सबको सुख का रास्ता बताना है। हदों से निकल बेहद में जाना है।—–2) अन्त के सब साक्षात्कार करने के लिए तथा बाप के प्यार की पालना लेने के लिए ज्ञान-योग में मजबूत बनना है। दूसरों का चिन्तन न कर योगबल से अपनी आयु बढ़ानी है।

V- ब्रह्मा बाप समान लक्ष्य को लक्षण में लाने वाले प्रत्यक्ष सेम्पल बन सर्व के सहयोगी भव—–जैसे ब्रह्मा बाप ने स्वयं को निमित्त एक्जैम्पुल बनाया, सदा यह लक्ष्य लक्षण में लाया – जो ओटे सो अर्जुन, इसी से नम्बरवन बनें। तो ऐसे फालो फादर करो। कर्म द्वारा सदा स्वयं जीवन में गुण मूर्त बन, प्रत्यक्ष सैम्पुल बन औरों को सहज गुण धारण करने का सहयोग दो – इसको कहते हैं गुणदान। दान का अर्थ ही है सहयोग देना। कोई भी आत्मा अब सुनने के बजाए प्रत्यक्ष प्रमाण देखना चाहती है। तो पहले स्वयं को गुणमूर्त बनाओ।

S- सर्व की निराशाओं का अंधकार दूर करने वाले ही ज्ञान दीपक हैं।

 

Essence of murli today – 18 June 2019

Essence of today’s murli in Hindi

Essence Of Murli 18-06-2019

18-06-2019-Hin

“मीठे बच्चे – सदा इसी नशे में रहो कि हमारा पद्मापद्म भाग्य है, जो पतित-पावन बाप के हम बच्चे बने हैं, उनसे हमें बेहद सुख का वर्सा मिलता है”

Q- तुम बच्चों को किसी भी धर्म से घृणा वा ऩफरत नहीं हो सकती है – क्यों?

A- क्योंकि तुम बीज और झाड़ को जानते हो। तुम्हें पता है यह मनुष्य सृष्टि रूपी बेहद का झाड़ है इसमें हर एक का अपना-अपना पार्ट है। नाटक में कभी भी एक्टर्स एक-दूसरे से घृणा नहीं करेंगे। तुम जानते हो हमने इस नाटक में हीरो-हीरोइन का पार्ट बजाया। हमने जो सुख देखे, वह और कोई देख नहीं सकता। तुम्हें अथाह खुशी है कि सारे विश्व पर राज्य करने वाले हम हैं।

D- 1) संगमयुग पर डायरेक्ट भगवान् से पढ़ाई पढ़कर, ज्ञानवान आस्तिक बनना और बनाना है। कभी भी बाप वा पढ़ाई में संशय नहीं लाना है।—–2) बाप समान लवली बनना है। भगवान् हमारा श्रृंगार कर रहे हैं, इस खुशी में रहना है। किसी भी एक्टर से घृणा वा ऩफरत नहीं करनी है। हरेक का इस ड्रामा में एक्यूरेट पार्ट है।

V- याद और सेवा के शक्तिशाली आधार द्वारा तीव्रगति से आगे बढ़ने वाले मायाजीत भव—–ब्राह्मण जीवन का आधार याद और सेवा है, यह दोनों आधार सदा शक्तिशाली हों तो तीव्र-गति से आगे बढ़ते रहेंगे। अगर सेवा बहुत है, याद कमजोर है वा याद बहुत अच्छी है, सेवा कमजोर है तो भी तीव्रगति नहीं हो सकती। याद और सेवा दोनों में तीव्रगति चाहिए। याद और नि:स्वार्थ सेवा साथ-साथ हों तो मायाजीत बनना सहज है। हर कर्म में, कर्म की समाप्ति के पहले सदा विजय दिखाई देगी।

S- इस संसार को अलौकिक खेल और परिस्थतियों को अलौकिक खिलौने के समान समझकर चलो।

Essence of murli today – 17 June 2019

Essence of today’s murli in Hindi

Essence Of Murli 17-06-2019

17-06-2019-Hin

“मीठे बच्चे – पक्का-पक्का निश्चय करो कि हम आत्मा हैं, आत्मा समझकर हर काम शुरू करो तो बाप याद आयेगा, पाप नहीं होगा”

Q- कर्मातीत स्थिति को प्राप्त करने के लिए कौन-सी मेहनत हर एक को करनी है? कर्मातीत स्थिति के समीपता की निशानी क्या है?

A- कर्मातीत बनने के लिए याद के बल से अपनी कर्मेन्द्रियों को वश में करने की मेहनत करो। अभ्यास करो मैं निराकार आत्मा निराकार बाप की सन्तान हूँ। सब कर्मेन्द्रियां निर्विकारी बन जायें – यह है जबरदस्त मेहनत। जितना कर्मातीत अवस्था के समीप आते जायेंगे उतना अंग-अंग शीतल, सुगन्धित होते जायेंगे। उनसे विकारी बांस निकल जायेगी। अतीन्द्रिय सुख का अनुभव होता रहेगा।

D- 1) बाप जो सच्ची-सच्ची कहानी सुनाते हैं, वह अटेन्शन से सुननी और धारण करनी है, बाप से कुछ भी मांगना नहीं है। 21 जन्मों के लिए अपनी कमाई जमा करनी है।—–2) वापस घर चलना है, इसलिए योगबल से शरीर की कशिश समाप्त करनी है। कर्मेन्द्रियों को शीतल बनाना है। इस देह का भान छोड़ने का पुरूषार्थ करना है।

V- स्वमान की सीट पर सेट हो हर परिस्थिति को पार करने वाले सदा विजयी भव—–सदा अपने इस स्वमान की सीट पर स्थित रहो कि मैं विजयी रत्न हूँ, मास्टर सर्वशक्तिमान हूँ – तो जैसी सीट होती है वैसे लक्षण आते हैं। कोई भी परिस्थिति सामने आये तो सेकण्ड में अपने इस सीट पर सेट हो जाओ। सीट वाले का ही ऑर्डर माना जाता है। सीट पर रहो तो विजयी बन जायेंगे। संगमयुग है ही सदा विजयी बनने का युग, यह युग को वरदान है, तो वरदानी बन विजयी बनो।

S- सर्व आसक्तियों पर विजय प्राप्त करने वाले शिव शक्ति पाण्डव सेना हैं।

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