BRAHMAKUMARIS Aaj Ka Purusharth 29 DECEMBER 2018 – आज का पुरूषार्थ

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Om Shanti
29.12.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बाबा कहते हैं … बच्चे, इस रंग-मंच पर कर्मों का बहुत सूक्ष्म खेल चलता है, जिसे हर आत्मा पूरी तरह समझ नहीं पाती … जिस कारण वो अपना हिसाब-किताब बना लेती है … फिर उसे ही चुक्तु करना पड़ता है…!

देखो, जब आप किसी भी कर्मेन्द्रिय को use करते हो अर्थात् आँख द्वारा कुदृष्टि होती है, तो वो भी पाप कर्म बन जाता है।

जबकि यह संकल्पों द्वारा किया गया पाप कर्म है जोकि योग द्वारा चुक्तु किया जा सकता है।

दूसरा है वाचा द्वारा…,
जब आप किसी भी विकारों में फँसी हुई कमज़ोर, परवश आत्मा को कुछ ऐसी बात बोलते हो जो उसे चुभ जाए … अर्थात् वो दुःखी हो जाए, तो वो आपका ऐसा हिसाब-किताब बनता है, जिसको आपको शरीर द्वारा चुक्तु करना पड़ता है…!

इसलिए बाबा कहते हैं … बच्चे, अब मुख द्वारा बोलना बन्द करो…। अब ज़रूरत का ही बोलो।

देखो बच्चे, कमज़ोर आत्मा तो पहले से ही अपने संस्कारों से परेशान हैं और वो उसे खत्म करना चाहती है … और यदि आप भी, सभी के बीच हल्की-सी भी कोई चुभती बात बोल देते हो तो वो एक बार दुःखी हो जाती है, जोकि आपका हिसाब-किताब बन जाता है…।

इसलिए किसी आत्मा के शुभचिन्तक बन समझानी देनी भी हैं, तो अकेले में बस एक ही बार दो…, फिर उसे बाप हवाले कर दो अन्यथा आप छोटा-छोटा सा हिसाब-किताब बना लेते हो, जो फिर चुक्तु भी तो करना पड़ेगा…!

अब जो समय जा रहा है वो केवल कमाई का है, इसलिए अब नया हिसाब-किताब बनाना बन्द करो और हर आत्मा के प्रति रहम, प्रेम और कल्याण की भावना रख मन्सा सेवा करो।

इससे आपका दुआओं का खाता जमा होगा और आप जल्दी ही अपनी मंज़िल पर पहुँच जाओगे।

देखो, जब कोई भी पाप कर्म संकल्पों द्वारा होता है, तो वो योग द्वारा चुक्तु हो जाता है … और यदि कर्मणा में आ जाता है, तो शरीर द्वारा और सम्बन्ध-सम्पर्क द्वारा चुक्तु करना पड़ता है…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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