BRAHMAKUMARIS Aaj Ka Purusharth 1 JANUARY 2018 – आज का पुरूषार्थ

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Om Shanti
01.01.2019

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बाबा कहते हैं … बाबा बच्चों के पुरूषार्थ को check कर रहे थे। 
तो बाबा ने देखा कि, बच्चों को बाबा से बहुत प्यार है, बच्चे ज्ञानी भी हैं और योगी भी हैं … परन्तु संस्कार परिवर्तन करने में नम्बरवार है…।

स्वयं को परिवर्तन कर नहीं पाते, इसलिए परमात्मा से और अन्य आत्माओं से किसी ना किसी तरह की complaint रहती है। जिस कारण ऐसी आत्मायें अन्दर से ना तो संतुष्ट रहती हैं और ना ही हल्की…, फिर बताओ यह कैसा पुरूषार्थ है…?

देखो बच्चे, बाबा बार-बार कह रहा है…,
• संस्कार परिवर्तन करो।
• स्वयं की checking करो, बाप की श्रीमत प्रमाण…।
• मैं-मेरे में मत फँसो।
• सब कुछ समर्पण कर दो…।

परन्तु जब आप मैं-मेरे में फँस जाते हो, तो जैसेकि आप अज्ञानी आत्मा हो…।

देखो, यह समय फिर नहीं मिलेगा…। अभी आप चाहे कितने भी complaint स्वरूप बनो परन्तु अंत में अपना part देखकर स्वयं ही पश्चाताप करना पड़ेगा…! 
यह ही फिर कल्प-कल्प की बाज़ी बन जायेगी…!

देखो, इस मार्ग में किसी भी तरह की कोई भी complaint ना स्वयं से अर्थात् स्वयं के भाग्य से, ना परमात्मा से और ना ही अन्य आत्माओं से होनी चाहिए।

इसके लिए बाप की हर श्रीमत को महीनता से समझ, अपने जीवन में apply करो।

आप बच्चों की सारी पढ़ाई बाप ने सार में भी और विस्तार में भी अच्छी तरह से पढ़ा दी है, अब त्रिकालदर्शी बन स्वयं को check कर, change करो…।

अभी फिर भी थोड़ा-सा समय बचा है, उसे सफल करो … अन्यथा पश्चाताप की घड़ियां बहुत कड़ी है।

रास्ते में किसी भी तरह की कोई भी परिस्थिति, कोई भी स्वभाव-संस्कार आये, उसे जल्दी से जल्दी अपने स्वमान की seat पर set हो बाप को दे दो।

यदि, उसे थोड़ी देर भी अपने पास रख लोगे तो उसे निकालना मुश्किल हो जायेगा…!

इसलिए, ATTENTION PLEASE…

सहज रीति पुरूषार्थ कर आगे बढ़ो, जब तक हिसाब-किताब clear नहीं होंगे, तब तक सम्पन्न नहीं हो पाओगे…!

इसलिए, हल्के हो हिसाब-किताब clear करो, ना कि भारी होकर…।

बाबा की हर पल नज़र आप बच्चों पर ही है। समय आते ही बाप स्वयं आपको ऊपर उड़ाकर ले जायेगा।

देखो, जब भी कोई पुराना हिसाब-किताब आता है और आप शांति-पूर्वक बाप पर निश्चय रख, सच्चे दिल से पुरूषार्थ करते रहते हो … तो बाप भी जल्दी ही किसी-न-किसी युक्ति के द्वारा आप बच्चों को मुक्ति दिला देता है … और जब आप भारी हो जाते हो, तो वो ही हिसाब किताब लम्बा हो जाता है…!

अच्छा, आप बच्चों को तो पता है कि बाप अभोक्ता है, फिर भी आप भोग स्वीकार करवाते हो…!

परन्तु अब समय अनुसार जबकि बिल्कुल अंतिम घड़ियां चल रही है, ऐसे समय में आपको भोजन के समय full attention रखना है … क्योंकि इस समय सब कुछ तमोप्रधान है और बाप की याद में रह स्वीकार की गई एक-एक bite सतोप्रधान बन, आपके मन और तन को तंदुरूस्त कर देती है…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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