BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 8 FEBRUARY 2018 – Aaj Ka Purusharth

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*Om Shanti*
*08.02.2018*

★【 *आज का पुरुषार्थ* 】★

देखो बच्चे, स्वयं भगवान आकर थोड़े से थोड़े, उसमें भी थोड़े से बच्चों को विशेष पालना भी देता है और विशेष स्नेह, सहयोग, शक्ति भी देता है। फिर भी बच्चे नम्बरवार ही बनते हैं।

एक तरफ वह बच्चे हैं जो बाप की श्रीमत को 100% मन-बुद्धि में रखकर चलते हैं अर्थात् उनका केवल परमात्मा बाप ही संसार है, उन बच्चों का अपने ऊपर full attention है और उन बच्चों का परिवर्तन भी speed से हो रहा है अर्थात् वह बच्चे ही बाप-समान बनते हैं और वह बच्चे ही *बाप के मस्तकमणी, दिलतख्तनशीन, नूरे-रत्न बच्चे हैं, बाप की आशाओं को पूरा करने वाले बच्चे* हैं।

फिर वहीं दूसरी तरफ, वह बच्चे हैं जिनका भी अपनी तरफ attention है … उनको भी एक ही लगन है कि बाप-समान बनना ही है … परन्तु कभी-कभी दुनिया में बुद्धि भी जाती है, संस्कारों से भी हार जाते हैं अर्थात् बार-बार connection जोड़ने का अभ्यास करते हैं। पर फिर भी इन बच्चों से बाप को बहुत प्यार है। इसलिए यह बच्चे *बाप के गले की माला अर्थात् सिमरणी माला के दाने* बन जाते हैं।

और फिर तीसरी तरफ वह बच्चे हैं जो पुरूषार्थ तो करने की इच्छा रखते हैं और चाहते भी यहीं है कि हम भी बाप-समान बनें, परन्तु बहुत जल्दी ही हार खा लेते हैं, क्यों…?

क्योंकि, दुनिया से वैराग्य नहीं है । अभी भी बहुत सारी इच्छायें हैं। दुनिया से ही प्राप्ति की इच्छा है, इस कारण भगवान के द्वार पर भी full सम्पन्न नहीं बन पाते और इन बच्चों के एक ही बोल हैं कि सारा दिन थोड़े ना ही योग लग सकता है…!

परन्तु बच्चे, योग क्या है…? *योग है ‘‘प्यार’’* जोकि हमें इस समय केवल एक परमात्मा शिव बाप से करना है अर्थात् सब सम्बन्धों का सुख, वैभव-वस्तुओं का सुख, केवल परमपिता परमात्मा बाप से ही अनुभव करना है और इस सुख, आनन्द, खुशी और सन्तुष्टता के आगे, दुनिया से प्राप्त होने वाला सुख, कुछ भी नहीं है।

बस बच्चे, थोड़ा-सा समय दृढ़ता पूर्वक करना पड़ता है। 
जितना बाप को combined रखोगे, उतनी ही जल्दी प्राप्तियाँ शुरू हो जायेगी, फिर तो सहज हो जायेगा।

इसलिए बच्चे, अब स्वयं ही स्वयं का निर्णय करो कि हमें कौन से number में आना है…? अन्त काल को भी स्मृति में रखना क्योंकि वह scene अति दुःख वाला और full पश्चाताप वाला होगा…। गृहस्थ में रहकर हर कार्य करना है, परन्तु 100% समर्पण बुद्धि अर्थात् न्यारा रहकर करन-करावनहार की स्मृति में रहकर करना है, फिर आपका ज़िम्मेवार बाप है ।

अच्छा । ओम् शान्ति ।

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