BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 7 JUNE 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
07.06.2018

★【 आज का पुरुषार्थ 】★

बच्चे, बस अब आपको love and light का ही अभ्यास करना है अर्थात् मैं एक point of light, Supreme point of light के नीचे, प्रेम स्वरूप बैठा हूँ…।

बच्चे, सदा बेहद में रहना है अर्थात् आपका हर संकल्प आपके स्वमान के according हो…।

देखो, आप हो आधारमूर्त और उद्धारमूर्त आत्माएं … इसलिए आपके हर संकल्प का प्रभाव सभी आत्माओं पर पड़ता है…। 
तो फिर आपके एक-एक संकल्प कल्याणकारी होने चाहिए…।

बस बच्चे, सर्व समर्पण हो attention देते चले जाओ … फिर तो मंज़िल पर पहुँचे की पहुँचें…।

बच्चे, love and light का पुरूषार्थ करते चले जाओ…। 
यही पुरूषार्थ आपको मंज़िल तक पहुँचाएगा। 
बस alert होकर यह पुरूषार्थ करना है, अलबेले होकर नहीं…।

बच्चे तुम्हारा पुरूषार्थ किसी आधार पर नहीं होना चाहिए, समय को भी अपना आधार नहीं बनाना क्योंकि जब आधार हिलता है तो स्थिति भी हलचल में आती है, जिससे आत्मा भारी हो जाती है।

देखो बच्चे, यह समय अन्त का भी अन्त और उसका भी अन्तिम समय जा रहा है। 
इस समय दुनियावी रीति चलने का मार्ग सहज और ऊँचाई का लगता है और परमात्म मार्ग त्याग का, कठिनाई का और दुनियावी रीति गिरावट का लगता है…। 
इसलिए इस मार्ग में धैर्यता के साथ-साथ सहनशक्ति और सामना करने की शक्ति भी चाहिए…।

जो आत्मायें इस समय दुनिया की चकाचौंध में अर्थात् pomp and show में फँसती जा रही है उन आत्माओं का पुण्य का खाता खत्म हो पाप का खाता भरपूर हो रहा है … और दूसरी ओर आप मुट्ठी भर आत्माओं का पाप खत्म हो पुण्य का खाता भरपूर हो रहा है…, और बहुत जल्द से जल्द और उससे भी जल्द आप अपनी कमाई से भरपूर अर्थात् लक्ष्य सम्पन्न आत्मा बन जाओगे…।

फिर आप तो बाप के मस्तक की मणि, नूरे रतन, दिलतखतनशीन सो साक्षात्कार मूर्त बन जाओगे … और दूसरी तरफ दुनिया की सभी आत्मायें लेवता बन, इस प्यास में होगी कि इन परमात्म तुल्य आत्माओं की एक नज़र हम पर भी पड़ जाये तो हम भी मुक्त हो घर (परमधाम) को जायें…! 
बस यह scene अब तो बाबा के सामने ही है…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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