BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 6 DECEMBER 2017 – Aaj Baba ne Kaha

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*Om Shanti*
*06.12.2017*

★【 *आज का पुरुषार्थ* 】★

बच्चे, आप सबको बेहद की सेवा करनी है। आपके हर संकल्प से सेवा हो … ऐसी सेवा कौन-सा बच्चा कर सकता है…?

जो इस देह, देह के सम्बन्ध, देह से सम्बन्धित कर्म, वस्तु, वैभव अर्थात् सम्पूर्ण रीति इस दुनिया से न्यारा हो … कोई भी सूक्ष्म बन्धन ना हो … मन और बुद्धि बिल्कुल स्वतन्त्र, कोई भी सूक्ष्म, सोने की तार का भी बन्धन ना हो। वो ही ऐसी बेहद की सेवा कर सकता है। जब तक सम्पूर्ण बन्धन-मुक्त नहीं बने हैं, तब तक आत्माओं को सम्पूर्ण रीति मुक्ति, जीवन-मुक्ति का रास्ता नहीं बता सकते। यही सारे ज्ञान का अर्थात् चारों ही subjects का सार है … यही है परिवर्तन।

आपका पहला subject है – *ज्ञान* … अर्थात् आत्मा और परमात्मा का ज्ञान। दोनों ही इस दुनिया से न्यारे हैं।

फिर हैं *योग* … अर्थात् स्वयं को आत्मा समझ, शिव बाप से शक्ति ले बाप-समान बनना। बाप जो है ना, वह सम्पूर्ण न्यारा है। वो प्रकृति का आधार ले ज्ञान सुनाते हैं और बेहद की सेवा करते भी एक second से भी काफी कम समय में देह से न्यारे हो जाते हैं।

तीसरा है *धारणा* …. अर्थात् गुण स्वरूप वा शक्ति स्वरूप बनना। और ऐसी आत्मा ही एक second में देह से न्यारी हो सकती है। न्यारी अर्थात् बन्धनमुक्त आत्मा ही विहंग मार्ग की सेवा अर्थात् अन्तिम सेवा कर सकती है। इसलिए अब, आप बच्चों को अपनी checking करनी है कि आपकी मन-बुद्धि कहाँ-कहाँ जाती है…? यदि व्यर्थ में भी जाती है, तो वो कौन-सी बात है, जो उसे व्यर्थ में ले जाती है…? फिर स्वयं ही मन से बात कर व्यर्थ मुक्त बनो।

अब आपका यह अभ्यास natural हो जाना चाहिए, बस अब आपका connection एक बाप के साथ हो।

Order मिला और एक second में *सेवा* के लिए उपस्थित। अब आप बच्चों को इस देह में निमित्त मात्र रहना है। सब कुछ करते हुए भी बिल्कुल न्यारा … और जो न्यारा होता है ना, वो सभी का प्यारा होता है।

इस तरह एक खिले हुए रूहानी फूल की तरह गृहस्थ व्यवहार सम्भालते हुए यह अभ्यास करो

अच्छा। ओम् शान्ति।

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