BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 5 OCTOBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
05.10.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बाबा ने कहा… 
देखो, सतयुग में सभी knowledgeful हैं जिस कारण वहाँ कोई नियम नहीं है और ना ही छोटा-बड़ा, ऊँचा-नीचा, अच्छा-बुरा, काला-गोरा और ना ही कोई number है … ये सब यहाँ है।

परंतु अब हमें वहाँ जाना है, इसलिए अब हमें इन सब चीज़ों से बाहर निकलना है … वहाँ केवल प्रेम है … प्रेम ही system है … प्रेम ही regard है, जिस कारण सब कुछ विधिपूर्वक चलता है…।

बस अब आपके अन्दर केवल प्रेम ही प्रेम हो, प्रेम ही प्रेम हो … प्रेम ही सुख है, प्रेम ही शक्ति है, प्रेम ही शान्ति है, प्रेम ही आनन्द है, प्रेम ही सतयुग की जननी है…।

बस बच्चे, खुश रहो, हल्के रहो और light का अभ्यास करते रहो। यह light परिवर्तन का कार्य कर रही है।

बच्चे, महसूस करो कि एक बहुत अधिक powerful light, जैसेकि एक छतरी की तरह गोलाकार रूप में ऊपर से नीचे तक और चारों तरफ light फैलती जा रही है और यह बहुत अधिक पवित्रतम् light है और यह light एक second में परिवर्तन का कार्य कहो … कर देगी…।

जैसे ही आप बाप-समान संकल्प में स्थित हो जाओगे अर्थात् हर हाल में “कुछ भी नहीं है…” कहते ही आप हल्के हो जाओगे और “सब कुछ अच्छा है…” यह सोचते ही आप खुश हो जाओगे और यही वाला एक second आपका परिवर्तन कर देगा, क्योंकि ये दो संकल्प आपको अशरीरी बनाते है और अशरीरी होते ही आप और सम्पन्न स्वरूप एक हो जाओगे…। तब ही कहा जाएगा निश्चयबुद्धि विजयन्ति अर्थात् flawless diamond … यहीं दो संकल्पों का अभ्यास या attention ही हमें निश्चिन्त और विजयी बनाता है…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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