BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 4 OCTOBER 2017

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*Om Shanti*
*04.10.2017*

बच्चे, आप बाप-समान कहाँ तक असोचता बने हो…? 
असोचता अर्थात् कर्म और कर्म करने के बाद उससे प्राप्त result के संकल्पों से मुक्त अर्थात् बिल्कुल हल्का।

बच्चे, कोई भी कर्म करने से पहले आप उस कर्म को बाप को समर्पण कर दो। देखो, जबकि आप बच्चों ने स्वयं को ही शिव बाप को सौंप दिया है तो आप द्वारा किया गया हर कार्य भी बाप का हो गया ना…!

बस इसके लिए बिल्कुल सच्चा दिल चाहिए। सच्चे दिल से जब आप बाप को समर्पण हो जाते हो अर्थात् क्या … क्यों … कैसे … से मुक्त हो जाते हो तो बाप भी आपकी अंगुली पकड़ आपको मंज़िल तक पहुँचा देता है।

देखो, लौकिक में भी जब कोई छोटा बच्चा कोई काम बाप की आज्ञा प्रमाण करता है, चाहे उसे करना ना भी आये, फिर भी लौकिक बाप उसे बार-बार समझानी देकर करवाता है। फिर बच्चे के स्वयं प्रति प्यार और विश्वास को देख खुद ही वह काम कर देता है। 
और यहाँ तो मैं पारलौकिक बाप आपके दिल के हर संकल्प को जानता हूँ, फिर कैसे ना मैं अपने बच्चों की हर इच्छा को पूरी ना करूँ…!

बस आप निश्चय रख निश्चिंत रहो। Drama के हर सीन में कल्याण समझो। आप सच्चे दिल से अपने हर संकल्प को बाप को समर्पण करने का अभ्यास करते रहो अर्थात् बाप की श्रीमत् प्रमाण चलने का पुरूषार्थ करते रहो। कोई भी गलती हो या विस्मृति हो, उसे भी बाप को सौंप हल्के हो जाओ। ना ही स्वयं की गलती पर … ना ही दूसरों की गलती पर समय बरबाद करो … अर्थात् हर बात में अपना कल्याण समझ पुरूषार्थ करने में तत्पर रहो। 
बस अलबेले मत होना … और ना ही मैं और मेरेपन में फँसना …।

आप बच्चों को सच्चे दिल से बाप की श्रीमत् प्रमाण पुरूषार्थ करना है। सम्पूर्ण तो आपको बाप ही बनायेंगा। तब ही तो अचानक और आश्चर्यजनक परिवर्तन होगा। बस बाप पर और स्वयं के विजयी रत्न बनने पर 100% निश्चय रख निश्चिंत रहो अर्थात् क्या … क्यों … कैसे … में मत फँसो।

फिर देखना बाप की कमाल … अर्थात् WAIT & WATCH …।

अच्छा । ओम् शान्ति ।

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