BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 30 JUNE 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
30.06.2018

★【 आज का पुरुषार्थ 】★

बाबा ने कहा… 
बच्चे, ‘‘ना सोचो … ना बोलो’’ … जो हो गया या जो भी हो रहा है हर बात को, हर कारण को, बिंदु लगा, बिंदु बन, बिंदु बाप के संग बैठ जाओ अर्थात् light बन light के साथ बैठ हर जगह light ही light फैला दो…।

इस समय हर चीज़ तमोप्रधान है, इसलिए जो भी चीज़ मुख के अन्दर जाये उसे light बना, परमात्मा बाप की याद में खाओ…। 
तो बाप की याद में खाई गई हर चीज़ 100% positive result देगी…।

बस धैर्यतापूर्वक attention देकर खाओ। 
वो मन-बुद्धि को भी शुद्ध रखेगी और तन को भी…। 
बस हर चीज़ शुद्ध होनी चाहिए चाहे मन-बुद्धि का भोजन हो या तन का..।

शुद्ध अर्थात् परमात्मा बाप की याद में किया गया कर्म…, चाहे वो मन्सा हो, वाचा हो, या कर्मणा…। इसलिए बच्चे, अब अपने कार्य के स्मृति स्वरूप बन जाओ…।
आपका उच्चतम् स्वमान ही आपको अपने कार्य की स्मृति दिलाता है।

बस बच्चे, हर पल अपने ऊँच स्वमान में स्थित हो अपने कार्य में तत्पर रहो … love and light का अभ्यास attention दे करते रहो … जिससे आपका सारा कार्य सहज हो जायेगा…।

बच्चे सोचते है कि स्थूल रूप में कोई विशेष परिवर्तन तो हो नहीं रहा है…! 
परन्तु बच्चे, आपका love and light का अभ्यास सबकुछ परिवर्तन कर देगा…।

बस धैर्यतापूर्वक स्वयं पर attention रख love and light का अभ्यास करते रहो…, love and light के अभ्यास से आपके अन्दर परिवर्तन का वो कार्य हो रहा है जो दुनिया में कोई नहीं कर सकता…। 
बस वो कार्य finish होने वाला ही है। उसके बाद स्थूल परिवर्तन तो आँख झपकते ही हो जायेगा…।

अभी बाहरी रूप से सारा कार्य लौकिक रीति ही चल रहा है…। जैसे पर्दे के अन्दर किसी अति सुन्दर ईमारत को तैयार कर दिया जाता है, उसी तरह आप भी मनुष्य से देवता ही नहीं बल्कि बाप-समान बनकर तैयार हो रहे हो…। 
बाहरी परिवर्तन तो झटके से हो जायेगा…।

इसलिए बच्चे, धैर्यतापूर्वक love and light का अभ्यास करते रहो…। 
मैं हर बच्चे के साथ हूँ। जिन बच्चों को बाप (परमात्मा पिता) की विशेष पालना और पढ़ाई मिल रही है, वो पूरे कल्प अपना विशेष part play करते हैं … और अन्त में विशेष बन बाप के संग ही घर जाते हैं।

बस, निश्चय रख, धैर्यतापूर्वक चलो…। 
(Love and light का अभ्यास अर्थात् अब आपको feel होना चाहिए कि आप light के शरीर में point of light हो और आपसे प्रेम का प्रकाश फैलता चला जा रहा हैं … जोकि सभी आत्माओं के साथ-साथ प्रकृति के पाँचों तत्वों को भी पहुँच रहा है…।)

अच्छा। ओम् शान्ति।

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