BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 3 NOVEMBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
03.11.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बाबा ने कहा कि बच्चे अभी भी कई बार साधारणता में आ जाते हैं क्योंकि अपने ऊँच स्वमान, ऊँच पढ़ाई और बाप (परमात्मा शिव) को भूल जाते हैं…!

परन्तु बच्चे यह साधारण बात नहीं है कि स्वयं परमपिता परमात्मा स्वयं भगवान आप बच्चों को पढ़ाने आता है…।

बार-बार साधारणता में आना ठीक नहीं है … यह साधारणता व्यर्थ को भी ले आती है, जिस कारण मंज़िल दूर हो जाती है…।

बाबा बार-बार एक ही बात कह रहा है कि मन-बुद्धि की तरफ attention दो, संस्कार परिवर्तन का समय यही है, दृढ़ता की शक्ति emerge रूप में अपने साथ रखो।

हिम्मत तो रखते हो, साथ-साथ दृढ़ भी रहो…।

जब knowledge मिल गई है कि क्या सोचना है, क्या करना है, किस स्वरूप में स्थित रहना है फिर बार-बार विस्मृत हो साधारणता में क्यों आ जाते हो…?

Attention बढ़ाओ, दृढ़ता कि शक्ति बढ़ाओ … तभी मंज़िल पर पहुँच पाओगे।

लौकिक में भी विशेष आत्माएं अपनी विशेषता को नहीं भूलती और यहाँ तो स्वयं परमात्मा के बच्चे, जिन्हें daily भगवान आकर स्वयं पढ़ाता है … और बच्चे विस्मृत हो साधारणता में आ जाए, इसे क्या कहेंगे…!

ऊँच पद की प्राप्ति करनी है तो हमेशा ऊँच स्वमान में स्थित रह ऊँच पुरूषार्थ करना पड़ेगा…।

यदि स्व-परिवर्तन में ही इतना समय लगाओगे तो विश्व परिवर्तन कब करोगे…? 
स्व-परिवर्तन से ही विश्व परिवर्तन है।

विजय माला का मणका बनना है, तो ऊँच पुरूषार्थ करना पडे़गा … attention, दृढ़ता, उमंग-उत्साह हिम्मत अपने साथ emerge रूप में रखना पड़ेगा … अर्थात् रूहानी नशे में हर पल रहना पड़ेगा। 
अन्यथा समय पर पहुँच नहीं पाओगे…!

“जो करेगा, वो बनेगा” … इसलिए attention please … अब नहीं तो कभी नहीं…।

छोटी-छोटी परिस्थितियों में समय ना गँवा अपने पुरूषार्थ में तत्पर रहो। 
यदि परिस्थितियों के बारे में ज्यादा सोचोगे तो परिस्थितियां बढ़ेगी, कम नहीं होंगी…!

इसलिए परिस्थितियों के बारे में सोचना बंद करो … स्व-स्थिति के पुरूषार्थ को बढ़ाओ…।

बाप का आना और बाप का पढ़ाना साधारण मत समझो…।

जो बच्चे अपने ऊँच भाग्य, ऊँच भाग्य विद्याता, ऊँच पढ़ाई और ऊँच कर्तव्य के स्मृति स्वरूप हैं, वो ही ऊँच पद प्राप्त करेंगे।

साधारणता में रहने वाली आत्मा साधारण पद की अधिकारी है…!

समझदार हो … स्वयं ही स्वयं को समझानी दे अपने हर संकल्प, बोल और कर्म में दृढ़ रहो…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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