BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 29 MARCH 2018 – Aaj Ka Purusharth

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*Om Shanti*
*29.03.2018*

★【 *आज का पुरुषार्थ*】★

बच्चे, धर्मराज कोई भी आत्मा वा परमात्मा नहीं है।

जिस तरह रावण पाँच विकारों के रूप को कहा जाता है, इसी तरह हर आत्मा के किये गये पाप कर्म धर्मराज का रूप ले लेते हैं। 
जिस कारण पाप कर्म करने वाली आत्मा सज़ाओं का अनुभव करती है।

बाप तो सभी बच्चों के लिए हमेशा कल्याणकारी रहता है – चाहे लौकिक हो … चाहे अलौकिक …।

स्वयं द्वारा किए गए पापकर्म सभी के आगे प्रत्यक्ष होंगे, पहले स्वयं के आगे फिर अन्य आत्माओं के सामने।

जिस कारण वह बाप के सहयोग का फायदा नहीं उठा पाते अर्थात् उनके पापकर्म ही उनको भगवान से साक्षी कर देते हैं।

और फिर जिस कारण उनकी भोगना और बढ़ जाती है।
और यह वह आत्मायें होती है जो बाप के प्यार के आधार को छोड़ दूसरे-दूसरे आधार पर चलती है।

स्व-परिवर्तन की बजाए अन्य आत्माओं का परिवर्तन करना चाहती है।

सुखकर्ता की बजाए दुःखकर्ता बन जाती है … अर्थात् dis-service के निमित्त बन जाती है…।

यही कर्म उनकी सज़ाओं के निमित्त बनते है और यह कार्य अब शुरू हो चुका है, अर्थात् जो आप कहते हो ना कि सद्गुरू का role शुरू हो जायेगा … वह हो चुका है…।

कोई भी कार्य पहले slow होता है फिर जल्द ही वह प्रत्यक्ष रूप में दिखने लगता है।

अष्ट रत्न … 100 रत्न … अर्थात् सभी माला के दाने स्वयं के पुरूषार्थ अनुसार स्वयं ही प्रत्यक्ष होते है जोकि सभी आत्माओं को मान्य होते है।

बाप का कार्य सभी आत्माओं को केवल प्यार, रहम, कल्याण की भावना से मुक्ति-जीवनमुक्ति देने का है।

सभी अपनी मन्सा-वाचा-कर्मणा द्वारा नम्बरवन और नम्बरवार बनते हैं।

अच्छा । ओम् शान्ति ।

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