BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 28 MAY 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
28.05.2018

★【 आज का पुरुषार्थ 】★

बाबा ने कहा…
बच्चे, स्वयं के महत्व को समझो…। तुम विश्व की आधारमूर्त आत्माएं हो … अर्थात् तुम्हारी स्व-स्थिति ही विश्व में परिवर्तन करेगी।

तुम्हारे संकल्पों का बहुत महत्व है। जब तुम हलचल में होते हो तो विश्व की आत्माएं हलचल में आ जाती हैं और तुम्हारी शान्त स्थिति से वो शान्त हो जाती है … और उनकी विश्व को परिवर्तन करने की क्षमता बढ़ जाती है अर्थात् वो शान्त हो वा एकाग्र हो अपने कार्य में सफलता प्राप्त कर आगे से आगे नए-नए आविष्कार कर दुनिया को अति की तरफ ले जाने में सफलता प्राप्त करती है … फिर अति के बाद ही अंत होगा…।

इसलिए अपने संकल्पों की एकाग्रता को बढ़ाओ…। 
संकल्पों को एकाग्र करना अर्थात् अपने ऊँच स्वमान में स्थित हो विश्व-परिवर्तन का कार्य सम्पन्न करना।

देखो बच्चे, बाप वा बाप की श्रीमत को महीनता से समझो। जैसे बाबा कहता है कि बालक सो मालिक बन जाओ, अर्थात् पहले बाप के छोटे से बालक बन जाओ, जिस बालक की सारी ज़िम्मेवारी बाप की होती है अर्थात् उसे क्या खिलाना है, क्या पहनाना है अर्थात् वो बच्चा 100% बाप पर depend होता है … और मालिक बन जाओ अर्थात् अपनी कर्मेन्द्रियों के मालिक बन विश्व-परिवर्तन के कार्य की ज़िम्मेवारी समझ अपने एक-एक संकल्प को सफल करो…।

अपने को साधारण मत समझो…। तुम हो परमात्मा बाप के V.V.I.P. बच्चे … इसलिए अपने एक-एक कदम के महत्व को समझ आगे से आगे बढ़ो…।

बच्चे, बाप ने आपको पुरूषार्थ की विभिन्न विधियाँ बताई है, जो आपको ही करनी पड़ेगी…। 
यह समय जो कल्प का अंतिम समय जा रहा है तो हिसाब-किताब, कमी-कमज़ोरी सब बाहर निकल कर आ रही है इसलिए इस पर ज्यादा विचार ना कर विधि से सिद्धि को प्राप्त करो।

आप हो विध्न-विनाशक बच्चे, सारी विश्व की आत्माओं के विध्न हरने वाले … सारी विश्व की आत्माओं को मुक्ति-जीवनमुक्ति का वर्सा देने वाले आप हो मास्टर भगवान…। 
इस तरह अपने विभिन्न ऊँच से ऊँच स्वमान में स्थित हो powerful vibrations फैलाओ जिससे आपका, आपके सम्पर्क में आने वाली आत्माओं का और फिर विश्व की सभी आत्माओं का कल्याण हो…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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