BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 27 JANUARY 2018 – Aaj Ka Purusharth

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*Om Shanti*
*27.01.2018*

★【 *आज का पुरुषार्थ* 】★

बच्चे, आप बच्चों को हर हाल में हल्के रहना है । हल्के रहना अर्थात् अपने स्वमान के आसन पर स्थित रहना अर्थात् स्मृति-स्वरूप रहना । स्मृति स्वरूप, किसके…? स्वयं के, शिव बाप के, drama के और परिवार के ।

कितनी भी बड़ी बात आ जाये, चाहे तो अपने कमज़ोर संस्कार के कारण वा कोई हिमालय जैसी परिस्थिति के कारण, तो भी आप बच्चों को अचल-अडोल ही रहना है, बिल्कुल हल्के रहना है । हल्की आत्मा ही high jump दे, बाप-समान बन सकती है … knowledgeful आत्मा, powerful आत्मा ही हल्की रह सकती है । कुछ भी हो बिन्दु लगा, बिन्दु बन, बिन्दु बाप के पास जाकर बैठ जाओ, सब सहज हो जायेगा । कोई भी बात आने पर यदि आप थोड़ा-सा भी भारी हो जाते हो तो पुरूषार्थ मुश्किल हो जाता है और मुश्किल कार्य करने से आत्मा थक जाती है, जिससे रास्ता भी लम्बा लगने लग जाता है । फिर बताओ, ऐसे समय से पहले कैसे पहुँचोगे…? इसलिए बुद्धि से सब कुछ शिवबाबा के हवाले कर, हल्के रह पुरूषार्थ करो ।

हल्के रहना अर्थात् उमंग-उत्साह और खुशी में रहना । सदा स्वयं को शुभ संकल्पों से भरपूर रखना फिर सहज ही आप, बाप-समान बन बाप से मिलन मना पाओगे ।

हल्के रहने वाली आत्मा पर व्यर्थ संकल्प वा माया किसी भी तरह का वार नहीं कर सकती । वह आत्मा निर्विघ्न रह आगे-से-आगे कदम बढ़ा अपनी मंज़िल समीप ले आती है, सो attention दे पुरूषार्थ करो । ना ही अलबेला होना है और ना ही दिलशिकस्त । 
आप बच्चे तो शिवबाप के दिलरूबा बच्चे हो, इसलिए बाप के प्यार में खोये रहो । यह बाप का प्यार ही बाप-समान बना देगा ।

ऊँचे-ते-ऊँचे परमात्मा बाप, ऊँचा बनाने वाला समय और ऊँच भाग्य के स्मृति-स्वरूप बनो । कल्याणकारी बाप और यह कल्याणकारी समय, फिर पूरे कल्प में दोबारा नहीं मिलेगा…!

इसलिए इसके महत्व को अच्छी तरह से समझ एक-एक second सफल करो । आप बच्चों को ऊँचा भाग्य बनाने के लिए ऊँच पुरूषार्थ अर्थात् तीव्र पुरूषार्थ करना पड़ेगा । इसलिए अब स्वयं-ही-स्वयं का निर्णय लो कि मुझे क्या करना है अर्थात् अब मुझे क्या चाहिए…? उसी अनुसार अपनी दिनचर्या बनाओ, फिर दृढ़तापूर्वक हिम्मत रख अपनी दिनचर्या के अनुसार चलो । बाप, आप बच्चों के साथ है और साथ रहेगा अर्थात् पूरा सहयोग देगा, परन्तु करना आप बच्चों को ही है…।

जो बच्चा जितना अपना समय सफल करेगा, उतनी ही जल्दी वह मंज़िल पर पहुँच अर्थात् बाप-समान बन, बाप के साथ का, अर्थात् अतिन्द्रिय सुख और आनन्द का अनुभव करेगा ।

अच्छा । ओम् शान्ति ।

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