BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 26 OCTOBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
26.10.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

देखो बच्चे, बाबा तो हर बच्चे को विशेष गुणों और शक्तियों से भर भी रहा है और पढ़ाई भी पढ़ा रहा है, परन्तु बच्चे ठीक रीति पढ़ाई को अर्थात् बाप की श्रीमत को समझ नहीं पा रहे हैं…!

इसलिए बैठते हैं बाप की याद में और बुद्धि भाग जाती है अपने ही हिसाब-किताब में…! 
फिर बाबा भी क्या करेगा…!

क्या बाबा ने कहा है कि अपने सभी बोझ अपने ऊपर रखो…?

बाप तो कहता है … बच्चे, अपने सभी हिसाब-किताब, कमी-कमज़ोरी चाहे तन की, मन की, धन की, जन की है … बाप (परमात्मा पिता) को दे दो और स्वयं हल्के रहो, परन्तु बच्चे क्या करते … एक तरफ तो कहते हैं बाबा आपका है, आपका है … और दूसरी तरफ सोच-सोच कर भारी हो जाते हैं…!

फिर कभी सोचते है; 
हम तो इतना पुरूषार्थ कर रहे हैं, फिर यह हिसाब आया ही क्यों…?

क्या बाबा ने कह दिया है कि आपके paper नहीं होंगे…! बाबा तो कह ही रहा है कि जब तक सम्पूर्ण नहीं बनते तब तक किसी ना किसी रूप में paper आयेंगे, हर बच्चे के पास…।

परन्तु आप बच्चों को अपने सभी papers का बोझ बाप को सौंप, हल्के रह पुरूषार्थ करना है।

जब आप स्वयं सोच-सोच कर भारी हो जाते हो तो बाप भी साक्षी हो जाता है…! इसलिए बाप की श्रीमत को सही रीति समझो … paper means ही मुश्किल होता है, परन्तु आप बच्चे उसी समय वो बोझ बाप को दे दो।

जैसे देखो … आपको कोई तन का हिसाब आया है, चुक्तु तो आपको ही करना है … फिर आप हल्के रह अपने तन को बाप को समर्पण करो … बार-बार करो…। 
बाबा के पास जाकर बैठ जाओ। तन के साथ मन को भारी मत करो…!

ज्यादा बात है, तो गोली खा लो … परन्तु ज्यादा सोचो मत क्या करें, कैसे करें…? रूहानी exercise करते रहो … फिर बहुत जल्द बाप की मदद का अनुभव होगा।

इस तरह मन का, धन का, जन का, कमी-कमज़ोरी का paper हो तो बाप को समर्पण कर दो। यदि आप स्वयं भारी रहोगे तो बाप की मदद नहीं ले पाओगे और अंत में जब result out होगी तो सोचोगे … था बहुत सहज, कईयों ने किया, लेकिन हम नहीं कर पायें…, फिर पश्चाताप भी स्वयं को ही करना पड़ेगा…!

बाप तो आप बच्चों को महीनता से ज्ञान भी समझा रहा है, मदद भी दे रहा है … पर करना तो आप बच्चों को ही पड़ेगा…!

इसलिए पूरे उमंग-उत्साह के साथ, हिम्मत रख, दृढ़ता पूर्वक करो…।

सदा अपने को साक्षी समझने से कर्मभोग के वश नहीं होंगे। हर कर्मभोग सुली से काँटा अनुभव होगा।

भविष्य जन्म-जन्मान्तर कर्मभोग से मुक्त होने की खुशी इस कर्मभोग को चुक्तु करने के लिए औषधि का रूप बन जाती है…। 
खुशी दवाई की खुराक बन जाती है…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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