BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 26 DECEMBER 2017 – Aaj Baba ne Kaha

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*Om Shanti*
*26.12.2017*

★【 *आज का पुरुषार्थ* 】★

देखो बच्चे, बाबा ने आकर बहुत महीनता से आपको विजयी माला का दाना बनने के लिए सार रूप में सारी पढ़ाई पढ़ा दी है। अब तो केवल आपके उमंग-उत्साह के लिए बाबा फिर से वही पढ़ाई रीपिट कर रहा है। बाबा तो आपका उमंग-उत्साह बढ़ा रहा है, परन्तु हिम्मत तो आप बच्चों को ही रखनी पड़ेगी।

आप बच्चे उमंग-उत्साह में तो आते हो, परन्तु बस थोड़े से समय के लिए … फिर दिनचर्या में आते ही हिम्मतहीन हो जाते हो और कहते हो क्या करें…, कैसे करें…, समझ नहीं आता…? अभी तक यह क्वेश्चन मार्क आपको शोभा नहीं देता।

जिन्हें भगवान सर्वशक्तिवान् स्वयं आकर पढ़ा रहा हो तो उन बच्चों के बोल ऐसे होने चाहिए क्या…?

देखो बाप का तो घर जाने का समय हो गया है। वह तो केवल कुछ बच्चों के लिए एक्स्ट्रा रूका हुआ है, फिर भी आखिर कब तक…?

*परमात्मा बाप की पढ़ाई बाप-समान बनाने की है अर्थात् मास्टर सर्वशक्तिवान् बनाने की है, विजय माला का दाना बनाने की है, जिसमें हिम्मतहीन अर्थात् कमज़ोर बच्चे नहीं आ सकेंगे।*

इसलिए खुद ही सोच-विचार कर लो…, अब हमें क्या करना है – बार-बार सोच कर भारी हो जाना है या बाप-समान हल्के रह बाप के संग जाना है…?

भारी हो जाना अर्थात् संकल्पों द्वारा व्यर्थ सोचते रहना और फिर जिस सोच का कोई रिज़ल्ट भी नहीं निकलता…! कभी अपनी परिस्थितियों के बारे में सोचते हो और कभी अपने ही संस्कारों वश की गई गलती के बारे में…!

एक गलती तो संस्कार वश हो गईं … दूसरी गलती, उस गलती को सोच-सोच कर भारी होने की करते हो। अगर बिन्दी लगानी नहीं आती, तो फिर बिन्दु रूप भी नहीं बन पाओगे और ना ही बाप के संग घर जा पाओगे। कई बच्चे दृढ़तापूर्वक, हिम्मत रख बाप की श्रीमत को अपना सौ परसेन्ट दे, फाॅलो कर रहे हैं अर्थात् पेपर तो उन बच्चों के पास भी आते हैं परन्तु बार-बार वो अपना सब कुछ बाप को समर्पण कर आगे बढ़ रहे हैं और उन्हें फिर बाप की भी पूरी-पूरी मदद मिल रही है।

बाप तो बच्चों को ऊँचे-से-ऊँचा स्वमान दिलाता है कि, आप तो मास्टर सर्वशक्तिवान् हो…, कल्प-कल्प के विजयी हो अर्थात् विजयी रत्न हो…, और कहते हैं कि इस ऊँच स्वमान में स्थित रहो । परन्तु बच्चे क्या कहते कि, ‘‘मैं कमज़ोर हूँ…, मुझसे हो नहीं पा रहा है…, क्या करूँ.., कैसे करूँ…? ऐसे कमज़ोर स्वमान में स्थित रहते हैं, ना ही हिम्मत रखते हैं और ना ही दृढ़ता। फिर ऊँच पद कैसे पायेंगे…?

इसलिए अब बाप पर सम्पूर्ण निश्चय रख आगे से आगे बढ़ो।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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