BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 25 MAY 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
25.05.2018

★【 आज का पुरुषार्थ 】★

बाबा ने कहा कि बच्चे, अब समय अनुसार स्वयं की checking करो की हम कितने percent निश्चिन्त आत्मा बने हैं…? 
अर्थात् संतुष्टमणी … अर्थात् कोई complaint नहीं, कोई question नहीं, कोई इच्छा नहीं अर्थात् minor सा भी … यह तो होना चाहिए या यह सब ठीक हो जायें अर्थात् जिस हाल में भी है बिल्कुल संतुष्ट है, खुश है, उमंग-उत्साह में हैं…।

बाप (परमात्मा पिता) पर इतना निश्चय है कि मेरे हर कदम में कल्याण समाया हुआ है, इसलिए निश्चिन्त, संतुष्ट, हर्षितमुख और उमंग-उत्साह में हैं, और एक ही इच्छा है कि परमात्मा बाप के कर्तव्य को अर्थात् पतित दुनिया को पावन बना सब आत्माओं को मुक्ति-जीवनमुक्ति का वर्सा दे, घर जाएं … अपने बाप से ही अतिन्द्रिय सुख का अनुभव करें…।

देखो बच्चे, संतुष्टता ही सबसे बड़ा गुण है। 
जो knowledgeful हैं, वह संतुष्ट है। 
जो संतुष्ट है, वो त्रिकालदर्शी है…। जहाँ संतुष्टता है, वहाँ धैर्यता, अन्तर्मुखता, हर्षितमुखता, मधुरता, शीतलता, निर्भयता, निर्माणता आदि सारे गुण आ जाते हैं…।

जो अपनी seat पर set है, वो संतुष्ट है … जो संतुष्ट है, वो ज्ञान स्वरूप, प्रेम स्वरूप, शान्ति स्वरूप, शक्ति स्वरूप और सुख स्वरूप है…। 
वो अचल-अडोल, एकरस, स्थिर, हल्का और बाप के समीप होगा…।

जितनी संतुष्टता है उतनी खुशी है … जितनी खुशी है उतना ही आप हल्के रहते हो, फिर अपने सारे हिसाब-किताब चाहे तन के, धन के, सम्बन्ध-सम्पर्क के बड़ी ही सहजता से चुक्तु कर सकते हो…। 
तब अपने पुरूषार्थ से भी आप बहुत संतुष्ट रहते हो और कभी अलबेले या दिलशिकस्त नहीं होते…।

बच्चे, जो आत्मा निश्चिन्त होगी वो एक second से भी कम समय में बिंदु बन बिंदु बाप के संग बैठ विश्व-कल्याण का कार्य कर सकेगी … उसे किसी भी प्रकार की कोई खिंचावट नहीं होगी…। हिसाब-किताब चुक्तु करते भी उस आत्मा से ऐसे अनुभव होगा कि यह एक रमता योगी है … अर्थात संतुष्टता की झलक दिखेगी…।

बस बच्चे, अब आप अपनी स्थिति प्रमाण अपनी checking कर सकते हो कि हमारी परिवर्तन की speed कितनी है और हम कितने समय में बाप-समान बन सकेंगे…? 
अर्थात् आपकी अब निश्चिन्त स्थिति बढ़ती जाएगी … हर हाल में आप शिव बाप के साथ का अनुभव कर खुश और संतुष्ट रहोगे … और यह संतुष्ट रहने का पुरूषार्थ अर्थात् अपनी ज़िम्मेवारी, सारे हिसाब-किताब बाप को समर्पण करने का पुरूषार्थ ही आपको बाप-समान बना देगा…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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