BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 23 OCTOBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

To Read 22 October Shiv Baba’s Mahavakya :- Click Here

Om Shanti
23.10.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बच्चे, अब समय को व्यर्थ करने की margin नहीं है। यह बात गुह्यता से हर बच्चा समझ नहीं पा रहा है…!

दिल भी सच्चा है, लगन भी एक है, फिर भी सारा दिन अपना समय सफल नहीं कर पा रहे हैं…!

देखो, बाबा अपना accurate part play कर रहा है, जबकि बाप स्वयं यज्ञ रचता है तो यज्ञ की रक्षा करना भी बाप का ही फर्ज़ है, इस बात को गुह्यता से समझो…।

जबकि यह climax period चल रहा है, तो हर आत्मा के अभी तक बजाये गये part की reality सामने आ रही है क्योंकि अन्त समय में कोई भी स्वयं को छिपा नहीं पायेगा, सभी transparent रूप में सामने आयेंगे…।

अभी तो फिर भी चला रहे हैं, परन्तु बिल्कुल थोड़े से ही समय में सब कुछ open हो जायेगा…।

परन्तु आप बच्चों को इन सब बातों का संकल्प ना चला, इस drama रूपी film में अपना hero part fix करना है।

चाहे आप राजयोग का अभ्यास करो, drill करो, रूह-रिहान करो, मंसा सेवा … गुणों और शक्तियों का, स्वमान का अनुभव करो, आत्मिक दृष्टि का अभ्यास, ज्ञान मंथन अर्थात् साकार और अव्यक्त मुरली का पढ़ना और चिन्तन करना, चाहे तो स्वयं को समझानी देना, बाप के साथ का स्थूल में भी अनुभव करना…, इस तरह अपने समय को सफल करना…। 
बाप से आप सभी अपनी दिनचर्या की स्थूल बातें भी कर सकते हो, मतलब बाप को अपना साथी बनाना…।

बच्चे, drama के पट्टे पर सीधे चलते चलो … drama पर accurate चलने पर आपकी स्थिति अचल और अडोल बन जायेगी … drama के हर scene में आपका कल्याण समाया हुआ है, यह जान और मान अपने पुरूषार्थ में अपना 100% दो, ताकि आप अपना present और future … bright बना सको।

देखो, बाबा आपको पढ़ा रहा है और सार रूप में आपको सारी पढ़ाई पढ़ा भी दी है, इसलिए स्वयं ही स्वयं की result check करो कि पहले और अब में कितना परिवर्तन हुआ है…? 
और daily की पढ़ाई को अपनी practical life में apply करो … जबकि आप अपने व्यवहार से ही स्वयं को प्रत्यक्ष करोगे, इसलिए खुद को check करो कि मुझसे मेरे सम्बन्ध-सम्पर्क में आने वाले क्या अनुभव करते हैं…?

देखो, समय के समीपता को महीनता से समझो और आगे बढ़ो…।

परिवर्तन तो होना ही है। 
जो बच्चे स्वयं के पुरूषार्थ से बाप की श्रीमत प्रमाण चलकर वा चलने का 100% attention दे परिवर्तन करते हैं, वो नम्बरवन बनते हैं…।
और जिनका परिवर्तन अन्त में बाप (परमात्मा पिता) को करना पड़ता है, अर्थात् जो बच्चे इस समय अपने समय, संकल्प, बोल की अथवा बाप की श्रीमत के महत्व को ना समझ थोड़ा-थोड़ा भी अलबेले रहते है, वो नम्बरवार बन जाते हैं…।

इसलिए हर आत्मा स्वयं ही स्वयं के पुरूषार्थ से स्वयं को प्रत्यक्ष करती है…।

जबकि इस समय भी बाबा स्वयं आकर आप बच्चों को same पढ़ाई पढ़ा रहा है, फिर भी नम्बरवार बन जाते हो…!

जितना स्वयं को बाप-समान समझकर चलोगे, उतना ही बाप के समीप आते जाआगे…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

【 Peace Of Mind TV 】
Dish TV # 1087 | Tata Sky # 1065 | Airtel # 678 | Videocon # 497 |
Jio TV |

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Font Resize