BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 22 NOVEMBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
22.11.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बाबा ने कहा … बच्चे, आप बच्चों को हर हाल में हल्के रहना है।

हल्के रहना अर्थात् अपने स्वमान के आसन पर स्थित रहना … अर्थात् स्मृति स्वरूप रहना…।

स्मृति स्वरूप किसके…?
स्वयं के … बाप के … drama के और परिवार के…।

कितनी भी बड़ी बात आ जाये, चाहे तो अपने कमज़ोर संस्कार के कारण वा कोई हिमालय जैसी परिस्थिति के कारण … तो भी आप बच्चों को अचल-अडोल रहना है … बिल्कुल हल्के रहना है…।

हल्की आत्मा ही high jump दे, बाप-समान बन सकती है…।

Knowledgeful, powerful आत्मा ही हल्की रह सकती है…।

कुछ भी हो … बिन्दु लगा, बिन्दु बन, बिन्दु बाप के पास जाकर बैठ जाओ, सब सहज हो जायेगा…।

कोई भी बात आने पर यदि आप थोड़ा-सा भी भारी हो जाते हों, तो पुरूषार्थ मुश्किल हो जाता है … और मुश्किल कार्य करने से आत्मा थक जाती है … और जिससे रास्ता भी लम्बा लगने लग जाता है…!

फिर बताओ, समय से पहले कैसे पहुँचोगे…?

इसलिए, सब कुछ बाप हवाले कर, हल्के रह, पुरूषार्थ करो…।

हल्के रहना अर्थात्…
• उमंग, उत्साह और खुशी में रहना…।
• सदा स्वयं को शुभ संकल्पों से भरपूर रखना…।
फिर सहज ही आप, बाप-समान बन, बाप से मिलन मना पाओगे…।

हल्के रहने वाली आत्मा पर व्यर्थ संकल्प वा माया किसी भी तरह का वार नहीं कर सकती।

वो आत्मा निर्विघ्न रह आगे से आगे कदम बढ़ा अपनी मंज़िल समीप ले आती है। 
सो attention दे पुरूषार्थ करो, ना ही अलबेला होना है … और ना ही दिलशिकस्त…।

आप बच्चे तो बाप के दिलरूबा बच्चे हो … इसलिए, बाप (परमात्मा शिव) के प्यार में खोए रहो … यह बाप का प्यार ही बाप-समान बना देगा…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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