BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 22 DECEMBER 2017 – Aaj Baba ne Kaha

To Read 21 December Shiv Baba’s Mahavakya :- Click Here

*Om Shanti*
*22.12.2017*

★【 *आज का पुरुषार्थ* 】★

बच्चे, हम किसी भी आत्मा के बन्धन से अगर छूटना चाहें फिर भी छूट नहीं सकते और किसी भी आत्मा के साथ उतना ही रह सकते हैं जितना कि हमारा हिसाब-किताब है फिर चाहे हम कितना भी चाहें, कि यह आत्मा मुझसे इतना दूर ना जाएं।

यह एक drama का नियम कहो या आपका हिसाब-किताब कहो। इसलिए आपको हर हाल में निश्चिन्त रहना है। यह निश्चिंत स्थिति कहो, साक्षी स्थिति कहो, यह उड़ाने वाली है। इसलिए धीरे-धीरे इस देह से, इस देह के हिसाब-किताब से, संस्कार, सम्बन्ध, वैभव, वस्तु हर चीज़ से साक्षी होते जाओ। जितना आप साक्षी होने का पुरूषार्थ करोगे तो धीरे-धीरे, उन सबका खींचाव भी कम होता जायेगा। इसके लिए अशरीरीपन की drill बार-बार करो और स्वयं को परमधाम निवासी समझो। निमित्त बन कार्य किया और न्यारे हो गये। बिल्कुल थोड़ा-सा drama ऐसा रह गया है कि जिसमें आपको निरसंकल्प हो अर्थात् क्या, क्यों को छोड़ बाप को संग रख चलते जाना है, फिर जल्दी ही drama आपके according चलेगा अर्थात् आपके संकल्पों के आधार पर चलेगा।

*‘जिस आत्मा को बहुत बड़े-बड़े कार्य करने होते हैं, वो छोटी-छोटी बातों में अपने मन को नहीं उलझाती’*

लौकिक में भी बड़े कार्य करने वाला मनुष्य, अपने छोटे-छोटे कार्य अपने assistant को दे देते हैं और यहाँ तो स्वयं भगवान कह रहा है कि तुम्हारे हर कार्य की ज़िम्मेवारी मेरी परन्तु तभी, जब आप अपने मन-बुद्धि को बेहद के कार्य में लगाओ।

इसके लिए स्वयं को स्वीकार करो कि ‘‘मैं ही दुनिया को परिवर्तन करने वाली चमत्कारी आत्मा हूँ…, मेरे संकल्प से ही विश्व-परिवर्तन होगा…, मैं ही दुःखी आत्माओं को सुखी बनाने वाली अर्थात् दुःखहर्ता-सुखकर्ता, मुक्ति-जीवनमुक्ति दाता हूँ…, मैं ही मास्टर भगवान हूँ…’’ ।

जब स्वयं को ऐसा समझोगे तो छोटी-छोटी problem में आप अपना समय व्यर्थ नहीं कर सकते। इसलिए स्वयं के स्मृति स्वरूप बन न्यारे अर्थात् कार्य करने से पहले, कार्य करते समय और कार्य करने के बाद भी कार्य के संकल्पों से निरसंकल्प स्थिति में रहो और बन्धन-रहित आत्मा की महीनता से defination निकालो और लिखो, फिर check करो कि मुझे कौन-कौन से बन्धन है…, जहाँ मेरी मन-बुद्धि जाती है…। फिर बाबा को संग रख, अपने ऊँच स्वमान में स्थित हो अपने कार्य की स्मृति से स्वयं को बन्धन-मुक्त बनाओ।

निर्बन्धन आत्मा ही बेहद का कार्य कर सकती है, बाप की हर श्रीमत का महीनतापूर्वक पालन कर सकती है।

समय को समीप लाना है तो एक-एक second का हिसाब रखना पड़ेगा। चाहे लौकिक, चाहे अलौकिक कार्य हो अर्थात् हर कार्य बाप को संग रख हल्के हो करोगे तो सफलता आपका आह्वान करेगी अर्थात् कदम-कदम में सफलता मिलेगी ।

अच्छा। ओम् शान्ति।

【 *Peace Of Mind TV* 】
Tata Sky # 1065 | Airtel # 678 | Videocon # 497 | Jio TV |

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Font Resize