BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 22 APRIL 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
22.04.2018

★【 आज का पुरुषार्थ 】★

देखो बच्चे, बाप है त्रिकालदर्शी … फिर भी वो स्वयं धरती पर आ आप बच्चों को मनुष्य से देवता और देवता से आप समान बनाने का कार्य करता है। 
बाप की नज़रों में तो सदा बच्चे ही समाये रहते हैं और बाप वतन में बैठ बच्चों का श्रृंगार करता रहता है ताकि बच्चे जल्दी से जल्दी बाप-समान बन बाप से मिलन मनाये क्योंकि बाप को भी बाप-समान बच्चों से मिलन मनाना अच्छा लगता है…।

अब तो बाप का भी घर जाने का समय समीप आ गया है अर्थात् शान्तिधाम का gate खुलने वाला ही है, परन्तु उससे पहले बाप स्थापना का कार्य पूरा करवा बच्चों के प्यार में बच्चों को full response दे अर्थात् बच्चों को तृप्त कर फिर घर का दरवाज़ा खोलता है।

बच्चे, सूक्ष्मवतन में बाप और बच्चों का मिलन बहुत अनोखा और आनन्दमय मिलन है। इसलिए अभी से ही उस मिलन के आनन्द का अनुभव करो। 
जितना आप बाप (परमात्मा पिता) के प्यार में खोये रहोगे, उतनी ही जल्दी मिलन के आनन्द का अनुभव कर पाओगे।

परन्तु balance का अर्थात् बाप से मिलन और स्थूल सेवा जिसके निमित्त बाप ने आपको बनाया है, उसका विशेष ध्यान रखना क्योंकि बाप से सम्पूर्ण मिलन मनाने के लिए बाप-समान बनना पड़ेगा और जो आत्मा ज्ञान स्वरूप … गुण स्वरूप … और शक्ति स्वरूप होगी, वो ही बच्चा बाप-समान बन, बाप से मिलन का प्रत्यक्ष अनुभव कर, बाप के कर्तव्य को सम्पन्न करेगा।

इसलिए बच्चे, इस मार्ग में balance की अत्यधिक आवश्यकता है … drama में आत्मा के द्वारा किये गये हर संकल्प … बोल … और कर्म में balance चाहिए…।

बस बच्चे, आप स्वयं पर full attention रख इस मार्ग पर चलते चलो, फिर जल्द ही मंज़िल पर पहुँच जाओगे…।

अच्छा । ओम् शान्ति ।

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