BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 21 FEBRUARY 2018 – Aaj Ka Purusharth

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*Om Shanti*
*21.02.2018*

★【 *आज का पुरुषार्थ*】★

बाबा देख रहा है कि सभी बच्चे विजय माला में आना चाहते हैं और ऊँचे से ऊँचा पुरूषार्थ भी करना चाहते हैं। परन्तु फिर भी नम्बरवार बन जाते हैं, क्यों…? क्योंकि बच्चे अपने संस्कार परिवर्तन में नम्बरवार है।

बच्चे, संस्कार परिवर्तन करना अर्थात् अपना सब कुछ तेरा-तेरा-तेरा कर देना। वैसे तो बच्चे मन से करते भी है अर्थात् सोचते भी है, सब कुछ आपका है। परन्तु जैसे ही कोई भी प्रकार की हलचल को देखते हैं, तो स्वयं ही हलचल में आ जाते हैं। कैसे होगा…, कुछ हो तो रहा नहीं…?

जब बाप को सौंप दिया, ज़िम्मेवारी बाप की हो गई तो क्या बाप पर निश्चय नहीं है…?

निश्चय अर्थात् निश्चिन्त … अगर निश्चिन्त अवस्था नहीं है तो यही कहा जायेगा ना कि या तो मेरा-मेरा है या फिर बाप पर 100% निश्चय नहीं है … 100% निश्चय हो तो रमता योगी बन जाये … उमंग-उत्साह, खुशी में उड़ते रहे।

देखो बच्चे, बाप है जानी-जाननहार, साथ में है सर्वशक्तिवान् अर्थात् वह कुछ भी कर सकता है, परन्तु बच्चों के कल्याण को देख उसी अनुसार अपना part play करता है। बच्चे अपने निश्चय को बढ़ाओ, समर्पण भाव को बढ़ाओ। यह मत सोचो मेरा बच्चा, मेरा तन, मेरा कारोबार, मेरा घर…, नहीं…। यह मेरा-मेरा आप बच्चों को आगे बढ़ने नहीं देगा। यह मेरा-मेरा आपको मंज़िल से दूर कर देता है। बस यही सोचो कि मेरी ज़िम्मेवारी बस स्वयं को सम्पन्न बना विश्व को परिवर्तन करने की है। हलचल को देख हलचल में मत आओ, बाप के समान त्रिकालदर्शी बनो। जब बाप guarantee ले रहा है, तो हर बात में अपना कल्याण समझ आगे बढ़ो। यदि कुछ ऊपर-नीचे हो भी रहा है, तो भी 100% इसमें आपका कल्याण समाया हुआ है। देह, और देह की दुनिया से साक्षी होना अर्थात् विजय माला में आना…। बस बच्चे पूरी रीति बाप के प्यार में समा जाओ…, खो जाओ…, फिर देखना बाप की कमाल।

कमाल अर्थात् जादूगरी … बाप भी आप बच्चों के प्यार में सब कुछ करने को तैयार रहता है, बस थोड़ा-सा धैर्य रखो।

अच्छा। ओम शांति।

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