BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 20 DECEMBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
21.12.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बाबा कहते हैं … बच्चे, क्या आपने बाप से सर्व सम्बन्धों के सुख का अनुभव किया है क्या…?

देखो, लौकिक में भी हर सम्बन्ध में … चाहे कलियुग के अन्त में, स्वार्थवश … सभी सम्बन्ध, बन्धन बन गये हैं…!
फिर भी उनमें अल्पकाल का सुख समाया हुआ है।

परन्तु यहाँ तो बेहद के बाप से अर्थात् भगवान, परमपिता परमात्मा से सर्व सम्बन्धों का अनुभव करना है अर्थात् अतिन्द्रिय सुख का अनुभव करना है। यह अनुभव इस दुनिया से न्यारा और सबसे प्यारा है।

इसलिए इस दुनिया से अर्थात् इस देह की कर्मेन्द्रियों से न्यारा होकर ही हम बेहद के बाप से बेहद का सम्बन्ध निभा, बेहद का प्यार और सुख अनुभव कर सकते हैं।

देखो, आपने पूरे कल्प इस देह में रहने के कारण देह के सम्बन्धों में ही अपनी मन-बुद्धि लगाई है।

अब जबकि बाबा ने आकर आपको सारा ज्ञान दिया है, तो अपनी मन-बुद्धि इस देह से अर्थात् देह की कर्मेन्द्रियों और देह के संसार से निकालनी पड़ेगी, क्योंकि यह अल्प से भी अल्पकाल का सुख, बेहद का सुख प्राप्त करने नहीं देगा…!

जब तक मन-बुद्धि देह में फँसी हुई है तब तक हम सदा के लिए इस परमात्म सुख का अनुभव नहीं कर सकते।

इसलिए बाबा बार-बार कहता है बच्चे न्यारे बनो … क्योंकि यह कुछ ही समय का न्यारापन आपको बाप का प्यारा बना देगा और साथ ही साथ आप अपने पूरे कल्प का ऊँचा भाग्य भी बना लेते हो। 
फिर तो यह पुरानी दुनिया का त्याग नहीं बल्कि अपना ऊँचा भाग्य बनाने की युक्ति है…।

यदि अभी भी आपकी मन-बुद्धि इस पुरानी देह वा देह की दुनिया में थोड़ी-सी भी फँसी रही, तो आप परमात्म प्यार का सम्पूर्ण अनुभव नहीं कर पाओगे…!

फिर बताओ…, बाप (परमात्मा शिव) को पहचाना, ज्ञान को अच्छी तरह समझा और यथा शक्ति धारणा भी की और खूब सेवा भी…, परन्तु सम्पूर्ण परमात्म प्यार को अनुभव नहीं किया…, तो क्या किया…?

इसलिए, परमात्मा की याद के साथ-साथ बाबा से मीठी-मीठी रूह-रिहान करो।
इस देह की दुनिया से अलग हो अपने original स्वरूप अर्थात् अपने गुणों और शक्तियों से भरपूर स्वरूप को अनुभव कर बाप से मिलन मनाओ अर्थात् बाप से सर्व सम्बन्ध निभाओ।

जब सम्बन्धों का थोड़ा भी अनुभव होना शुरू होगा तो जल्दी ही आप बाप-समान बन जाओगे…।

इसलिए हर पल बाप को संग रखो, उनसे प्रेम भरी मीठी-मीठी रूह-रिहान करो अर्थात् परमात्मा के साथ का अनुभव करो…।

परमात्मा के साथ का अनुभव बहुत मीठा और बहुत प्यारा है। बस इसके लिए इस देह में रहते हुए भी इससे अपनी मन-बुद्धि निकालते जाओ क्योंकि इस दुनिया में किसी भी तरह की कोई प्राप्ति नहीं रही…!

इस दुनिया से सम्बन्धित हर प्राप्ति के पीछे दुःख समाया हुआ है। यह दुःख बढ़े, इससे पहले इससे निकल परमात्म प्यार में समा जाओ।

यह समय कल्प में केवल एक ही बार मिलता है, जिसमें प्राप्तियां अपरमअपार है।

बस बच्चे, अब अपने समय और संकल्पों को सफल करो।

देखो, रात से दिन होने में केवल एक second ही लगता है, उस second की value को समझो…।

यह ना हो आप समय का इंतज़ार करो और वो second, रात का अन्तिम second हो…!

अच्छा। ओम् शान्ति।

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