BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 2 DECEMBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
02.12.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

यदि विश्व महाराजा वा विश्व महारानी बनना है … तो पुरानी देह, देह के सम्बन्ध, वस्तु, वैभव, पुराने स्वभाव-संस्कार, सबसे मरना पडे़गा…!

अर्थात् हमेशा स्वयं को ऊँच स्वमान में स्थित कर बाप (परमात्मा शिव) के संग रह, निरसंकल्प स्थिति में रहना पड़ेगा…।

इसके लिए एक तो कोई भी कार्य करते हुए अर्थात् कोई भी कर्मइन्द्रिय द्वारा कर्म किया फिर उससे न्यारे हो, निरसंकल्प स्थिति अर्थात् उस कार्य, परिस्थिति, बोल के प्रभाव से न्यारे हो जाओ…।

और दूसरा; 
कार्य को शुरू करने से पहले, वो कार्य बाप को समर्पण कर दो … और कार्य finish कर, कार्य का result भी बाप को सौंप दो…, फिर आपके हर कार्य का ज़िम्मेवार बाप हो जाएगा…।
और जिस कार्य का ज़िम्मेवार बाप होगा, उस कार्य में आप बच्चे विजयी ना बनो … यह तो असम्भव है…!

देखो, आपके देवी-देवता स्वरूप में भी हर्षित और शान्त चेहरा दिखाते हैं … वो केवल ज़रूरत के शब्द बोल, उससे न्यारे हो जाते हैं … क्योंकि उन्हें पता है कि अन्तिम विजय हमारी ही है…। इतना निश्चय आप बच्चों को भी होना चाहिए, तभी आपकी स्थिति अचल-अडोल होगी…।
और जब इस स्वरूप में रहोगे, तभी आप साक्षात्कार मूर्त बनोगे…।

बस, इसके लिए attention वा अभ्यास की ज़रूरत है…।

वैसे भी अब आप बच्चे मंज़िल के समीप हो … इसलिए यह पुरूषार्थ भी सहज ही हो जायेगा। बस बाप के संग रह, अपने ऊँच स्वमान में स्थित रहना है … और यही पुरूषार्थ कम से कम समय में आपको बाप-समान बना देगा…।

बच्चों के अन्दर लगन बहुत अच्छी है, बाबा खुश है … और जिन बच्चों पर बाप खुश हो, उनकी सफलता निश्चित ही है…।

इसी तरह उमंग-उत्साह में रह उड़ते रहो। जब आप बच्चे हर कार्य के प्रभाव से न्यारे हो जाओगे तब आपका प्रभाव निकलेगा। 
बिल्कुल निश्चिन्त स्थिति में स्थित रहना है…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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