BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 19 OCTOBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
19.10.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बच्चे, बन्धन-मुक्त बनो…। यदि कोई सूक्ष्म से सूक्ष्म तार से भी मन-बुद्धि को बाँधा तो उड़ नहीं पाओगे..!

इसलिए खुद को double light आज़ाद पंछी बनाओ … चाहे तो बिन्दी रूप में, चाहे तो फरिश्ता रूप में…।

यदि कहीं भी ज़रा-सा भी फँसें, तो उड़ नहीं पाओगे…! मंज़िल ऊँची हैं, तो पुरूषार्थ भी ऊँचा करना पड़ेगा…!
इसलिए स्वयं को हर बन्धन से मुक्त करो…! कोई छोटा-सा बन्धन भी बाँध सकता है।

देखो, खुदा खुद आया है आप थोड़े से बच्चों के लिए…!
तो अपने ऊँच भाग्य और ऊँच part को समझो और सब कुछ बुद्धि से बाप को समर्पण कर दो।

आप सबके पास है क्या…? कीचड़-पट्टी ही तो है, बस उसे अपना समझ सोचते हो कि समय पर काम आयेगा…! 
लेकिन नहीं…, काम नहीं आयेगा, बल्कि दुःख देगा। 
इसलिए इससे बाहर निकलो।

देखो, खुद खुदा आया है तुम्हें अपने संग, अपने समान बनाकर, घर (परमधाम) ले जाने के लिए…। 
यदि तुम स्वयं ही कहीं फँसे रहोगे तो बाप भी क्या करेगा…? इसलिए स्वयं को स्वयं ही मुक्त कर बाप-समान बन, बाप (परमात्मा पिता) के सभी खज़ानों के अधिकारी बनो। 
यह सब खज़ाने आपके ही हैं।

जितने हल्के रहोगे, उतनी ही तेज़ और ऊँची उड़ान उड़ सकोगे अर्थात् तीव्र पुरूषार्थ कर पाओगे…। अब इस समय के महत्व को समझ समय को सफल करो।

बुद्धिवान बच्चे ही ठीक रीति हर संकल्प को परखकर अपने पर attention रख, ऊँच पुरूषार्थ कर रहे हैं, उन्हें प्राप्तियाँ भी बहुत जल्दी अनुभव होनी शुरू हो जायेंगी … और बाप भी उन्हें ही सहयोग देगा, जो हिम्मत रख बाप की हर श्रीमत का पालन कर रहे हैं।

जिस आत्मा ने स्वयं को किसी भी बन्धन में चाहे कर्म-व्यवहार में, चाहे परिस्थिति में, चाहे स्वभाव-संस्कार के साथ, चाहे सम्बन्ध के साथ बाँधा हुआ है, तो इस बन्धन के कारण फिर भारी हो उसकी हिम्मत कम हो जाती है, जिससे वह बाप की मदद का पात्र भी नहीं बन पाता…!

इसलिए दृढ़ रह सब कुछ बाप हवाले कर पुरूषार्थ करो। फिर परिस्थितियाँ भी हल्की हो जायेगी और आत्मा भी हल्की हो जायेगी…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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