BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 19 NOVEMBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
19.11.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बाबा ने कहा … बच्चे, आप अपने भाग्य को जानते हो कि आपका भाग्य कितना ऊँचा है…?

देखो, स्वयं भगवान् रोज़ आकर आप बच्चों की विशेष पालना कर रहा है … वो केवल भाग्य बनाने की विधि ही नहीं बता रहा है, बल्कि भाग्य की लकीर लम्बी खिंचने के लिए सहयोगी-साथी भी बन गया है…!

दूसरी तरफ; 
दुनिया में देखो बेचारी, परवश आत्मायें जोकि दूर से ठीक लगती हैं … परन्तु अन्दर से वो दुःख, इच्छाओं और विकारों के कारण खोखली हो गई है…! 
उन्होंने ऐसा रास्ता पकड़ लिया है जो उन्हें दलदल में फँसाने वाला है…।

और आप बच्चों को भाग्य विधाता बाप (निराकार शिव) ने पकड़ लिया, जोकि आपको ऊँच ते ऊँच खुशियों के खज़ाने की तरफ लेकर जा रहा है…।

देखो बच्चे, बाबा हमेशा कहता है अपनी कमी-कमज़ोरी, चिन्तायें … अर्थात् जो भी बोझ हैं वो मुझे दे दो … मैं सम्भाल लूँगा…। 
बस, आप बच्चे बेफिक्र रह अपना भाग्य ऊँचा बनाते रहो…।

यह जो अन्तिम से अन्तिम समय हिसाब-किताब चुक्तु करने का चल रहा है, इसे खुशी-खुशी चुक्तु करो … ज्यादा सोचो मत…।

देखो, जैसे कोई पुरानी बीमारी का इलाज किया जाता है, तो बीच-बीच में जब वो पुरानी बीमारी किसी भी रूप में बाहर आती है, तो वो मनुष्य को हिला देती है…। अगर उस हाल में रोगी दवाई लेता रहे, तो फिर वो बीमारी खत्म हो जाती है…।

इसी तरह, जब आप बच्चों का हिसाब-किताब बड़े रूप में आ जाता है तो वो आपकी स्व-स्थिति को हिला देता है, परन्तु उस समय आप हिम्मत रख बार-बार स्वयं के स्वमान में स्थित रह … बाप को साथ रख … ज्ञान मंथन कर … अर्थात् बाप और बाप की समझानी को सम्मुख रख, पुरूषार्थ करते रहो…, बीमारी के बारे में ज्यादा सोचो मत…।
सब कुछ बाप हवाले कर बिन्दी लगाने का पुरूषार्थ करते रहो, फिर देखना … आत्मा पहले से भी ज्यादा हल्की हो, तीव्र गति से ऊँचा उडे़गी…।

बस, बाप की हर श्रीमत को सामने रख दृढ़तापूर्वक पुरूषार्थ करते रहना है, फिर तो विजय आप बच्चों की ही है ना…!

जिसका साथी भगवान बन जाये, तो अन्तिम विजय उन बच्चों की ही होती है … इतना निश्चय और नशा रखो…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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