BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 19 DECEMBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
19.12.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बाबा देख रहा था कि सभी बच्चों के एक ही बोल हैं कि मुझे तो बस बाबा चाहिए और कुछ नहीं…।

फिर तो बच्चे, इस पुरानी दुनिया से मन-बुद्धि को 100% बाहर निकालना पड़ेगा … अर्थात् निमित्त बन कर्म-व्यवहार में आना पड़ेगा, ना की किसी भी प्रकार की खिंचावट की वजह से…।

यदि खिंचावट हैं तो इच्छा है … इच्छा हैं, तो और कुछ भी चाहिए अर्थात् मेरा-मेरा है…। 
इसलिए महीनता से checking करो।

देखो, बाबा यह नहीं कहता कि सबकुछ छोड़ दो…, परन्तु सबकुछ करते हुए उनसे न्यारे रहो।
और अगर न्यारे रहना मुश्किल लगता है…, तो एक बार जो कार्य आपको अपनी तरफ खींचता है, उसे छोड़ दो। 
पहले अपनी स्व-स्थिति की तरफ ध्यान दो, अपने आपको शक्तिशाली बना फिर निमित्त बन कार्य करो…।

अभी powerful स्व-स्थिति की बहुत-बहुत ज़रूरत है, क्योंकि दुनिया में दिन-प्रतिदिन हर तरह का आकर्षण अर्थात् खिंचावट और समस्यायें बढ़नी ही है और यदि आपकी स्व-स्थिति powerful ना हुई, तो आप समझदार हो…!

और जो समय आप बच्चों ने किसी भी कारणवश व्यर्थ गँवा दिया, वो तो फिर नहीं आयेगा…, और वो आपके लिए कल्प-कल्प की नूँध हो गई…!

परन्तु अभी फिर भी minor सा समय रहा है, अपना ऊँचा भाग्य बनाने का…, फिर यह भी दोबारा नहीं मिलेगा…!

फिर बताओ भगवान बाप की इतनी ऊँच पालना से भी आपने क्या प्राप्त किया…?

यदि आप कोई काम नहीं करोगे तो काम रूकेगा नहीं … और जिस काम की ज़िम्मेवारी बाप (परमात्मा शिव) की है, वो तो पहले से भी सुसज्जित ढंग से होगा…।
क्योंकि त्रिकालदर्शी बाप आप बच्चों के ही कल्याण के निमित्त बना है।

बाप आपके सारे हिसाब-किताब बहुत अच्छे ढंग से clear करवा, आपकी स्थूल और सूक्ष्म ज़िम्मेवारी सम्भाल लेगा।

बस, एक तो मन-बुद्धि पर controlling power चाहिए, दूसरा बाप पर सम्पूर्ण निश्चय – यही आपकी विजय का आधार है।

देखो … बाबा ने कभी भी, किसी भी आत्मा से गृहस्थी या कर्म छुड़वाया नहीं है। 
बस बाबा ने यही कहा कि ‘‘पवित्र बनो – योगी बनो’’ क्योंकि कल्प के अन्तिम समय में पवित्रता और बाप की याद के बिना इस पुरानी दुनिया में केवल दुःख-ही-दुःख है।

इसलिए पवित्र और योगी बनने में यदि किसी भी तरह की कोई बाधा है, कोई भी आत्मा या कोई भी कार्य आपके रास्ते में रूकावट स्वरूप बन जाता है, तो उसे छोड़ने में आपके कल्याण के साथ-साथ उसका भी कल्याण समाया हुआ है।

क्योंकि, किसी भी तरह का कोई बन्धन वा चिन्ता आत्मा को आगे बढ़ने नहीं देती।

एक निश्चिन्त और निर्बंधन आत्मा ही उड़कर अपनी मंज़िल को प्राप्त कर सकती है … इसलिए check करो, फिर change करो…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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