BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 18 OCTOBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

To Read 17 October Shiv Baba’s Mahavakya :- Click Here

Om Shanti
18.10.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

देखो बच्चे, स्वयं भगवान को धरा पर आकर पढ़ाते हुए लगभग 80 साल हो गये हैं और पढ़ाई भी क्या हैं – स्वयं को आत्मा समझ परमात्मा को याद करो…, ताकि आप अपने original स्वरूप में स्थित हो अपने घर (परमधाम) जा सको…।

पढ़ाई का सार तो यहीं है ना, जिसे भिन्न-भिन्न रीति से शिवबाबा पढ़ा रहा है … और यह पढ़ाई है मन-बुद्धि द्वारा अनुभव करने की, कि ‘‘मैं कौन-सी वाली आत्मा हूँ…?’’

देखो बच्चे, यह पढ़ाई इतनी सहज नहीं है, इसलिए स्वयं भगवान को आना पड़ता है, पढ़ाने के लिए…, अर्थात् बच्चों को विस्मृति से स्मृति में लाने के लिए…।

दुनिया में कोटों में कोई और कोई में भी कोई बच्चे इसे समझ पाते हैं … उसमें से भी बहुत थोड़े आप बच्चे हो, जिन्हें special भगवान पढ़ाने आया है और पक्का कराने आया है कि तुम बहुत ऊँच आत्मायें हो…।

बस, इसके लिए बार-बार अभ्यास की ज़रूरत है, क्योंकि 2500 वर्ष के संस्कारों को परिवर्तन करना है…।

आप बार-बार अपने ऊँच स्वमान को, अपने संकल्पों द्वारा, वाणी द्वारा अनुभव करो। बार-बार स्वयं को याद दिलाओ कि मैं कौन हूँ, मुझे पढ़ाने कौन आया है, मेरा इस दुनिया में क्या part है और मुझे किस रीति इस दुनिया में रहना है…? 
बार-बार अभ्यास के द्वारा ही परिवर्तन करना है…।

बस बच्चे, उल्टे को सुल्टा ही तो करना है…। देह समझने के बजाए, जो हम आत्मा हैं, वहीं तो समझना है। चलते-फिरते, उठते-बैठते आपके अन्दर एक जाप सा चलना चाहिए कि ‘‘मैं एक बहुत महान् आत्मा हूँ…, परम पवित्र आत्मा हूँ…, खुदाई-खिदमदगार हूँ…, परमधाम से आई हूँ… और बस अब वापिस जाना है…।

इस तरह से भिन्न-भिन्न अभ्यास आपके अन्दर हर second चलते रहने चाहिए, क्योंकि बार-बार अपने आपको याद दिलाने से ही आप अपने original स्वरूप में स्थित हो सकते हो…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

【 Peace Of Mind TV 】
Dish TV # 1087 | Tata Sky # 1065 | Airtel # 678 | Videocon # 497 |
Jio TV |

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Font Resize