BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 18 DECEMBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
18.12.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बाबा कहते हैं … बच्चे, कभी आपने सागर को देखा है…? 
उसमें इतना कुछ समाया होता है फिर भी वह बिल्कुल शान्त होता है।

इसी तरह आप बच्चों को भी इस दुनिया के बीच रहते हुए भी बिल्कुल शान्त रहना है अर्थात् कोई संकल्प नहीं … और उस स्थिति में आप स्वयं को 100% अनुभव कर पाते हो…।

इसलिए स्वयं (भृकुटि के मध्य चमकती आत्मा…) को देखने का अभ्यास बढ़ाओ…। जितना-जितना स्वयं को अनुभव करोगे, उतना ही दुनिया से detach हो जाओगे, और इस दुनिया में रहते हुए भी आपको ऐसा लगेगा कि आप अपने घर (परमधाम) में हो और आपके चारों तरफ light ही light है।

यही स्थिति सबसे ऊँच स्थिति, बाप-समान स्थिति है…।
जब संकल्प से सृष्टि रची जा सकती है, तो फिर संकल्पों से क्या नहीं हो सकता…! 
परन्तु तब, जब आप केवल स्वयं के अनुभवी स्वरूप होते हो। उस स्थिति में उत्पन्न संकल्प रचनात्मक और सिद्धि स्वरूप होते हैं।

इसलिए, स्वयं को बार-बार एकान्त में ले जाओ। 
देखो, इस दुनिया में मन-बुद्धि लगा, अभी तक आपने क्या प्राप्त किया है और आगे भी मान लो इस दुनिया के हिसाब से हद के सब सुविधा-साधन अर्थात् सुख के साधन मिल भी जाते हैं तो उससे क्या प्राप्ति है…, और कितने समय के लिए…?

जबकि यह अन्त का भी अन्त जा रहा है तो ऐसी श्रेष्ठ वेला पर आप बाप की श्रीमत प्रमाण, अपना ऊँचा भाग्य बना लो।

सभी तरफ से मन-बुद्धि निकाल स्वयं में लगा लो। स्वयं के अनुभव से ही बाप का अनुभव होगा और उस समय की प्राप्ति पूरे कल्प की सबसे ऊँच प्राप्ति होगी…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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