BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 17 OCTOBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
17.10.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बच्चे, दुनिया में बहुत दुःख-दर्द है और आने वाले समय में बहुत कुछ होने वाला है…।

सभी आत्मायें बुरी तरह से ‘मैं और मेरेपन’ में फँस जायेंगी और विकार भी अपना विकराल रूप ले लेगा और प्रकृति का भी बड़ा खेल शुरू हो जायेगा। 
फिर बताओ, आप बच्चों का क्या कर्तव्य होगा…?

यदि आप अभी भी मैं या मेरेपन या छोटी-छोटी समस्याओं से मुक्त नहीं होंगे, तो उन सभी परेशान आत्माओं को मुक्ति-जीवनमुक्ति का रास्ता कौन बतायेगा…?

इसलिए बच्चे, अपने ऊँच कर्तव्य की स्मृति में रहो। जब आप बेहद के कार्य में busy हो जाओगे, तो आपकी छोटी-छोटी समस्या खुद ही खत्म हो जायेगी – चाहे वह व्यर्थ संकल्पों की है, स्वभाव-संस्कार या सम्बन्धों की है…।

बच्चे, सदा अपने को विश्व-कल्याणकारी समझ, दुःखी आत्माओं का कल्याण करो। अभी इस सेवा की बहुत-बहुत आवश्यकता है।

यदि आप ही अपने आप में फँसे रहोगे, तो इनका कल्याण कौन करेगा…?

देखो, इन सब आत्माओं के कल्याण के निमित्त आप सब बच्चे हो। इसलिए अपने भिन्न-भिन्न ऊँच स्वमान में स्थित हो, शिव बाप को संग रख, विश्व में powerful vibrations फैलाओ…।

भिन्न-भिन्न रूप धारण कर इन आत्माओं का कल्याण करो। अपने कर्तव्य के महत्व को अच्छी रीति समझ, अपनी मन-बुद्धि को चारों तरफ से निकाल, बेहद की सेवा में लग जाओ…।

स्वयं भगवान यहाँ आपका मददगार है … वो आपकी सारी ज़िम्मेवारी सम्भाल, आपको आपके लक्ष्य तक पहुँचा देगा…। बस आप खुदाई-खिदमदगार बन खुदा के कर्तव्य में सहयोगी बन जाओ…।

अपने संकल्प और बोल की value समझ, उन्हें ठीक रीति use करो … क्योंकि महान् आत्माओं का हर कर्तव्य महान् होता है…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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