BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 16 OCTOBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
16.10.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बच्चे, विस्तार से सार में आओ…।

अभी भी कभी-कभी आप बहुत विस्तार में चले जाते हो … इसलिए अब आपको मन्सा-वाचा-कर्मणा अर्थात् संकल्पों में भी कोई बात आती है, जिसका आपको निर्णय लेना है तो सार स्वरूप में वह कार्य कर उसे बिन्दु लगा दो।

इसी तरह वाचा में भी उतना ही बोलो जितना आवश्यक है। 
यदि आप किसी से कोई बात कर रहे हो और वो बात लम्बी करता है, तो आप बाबा-बाबा करते रहो। इससे वो आत्मा भी शान्ति की अनुभूति करेगी और धीरे-धीरे चुप हो जायेगी…।

इसी तरह से कर्मणा में भी करना है … जो कार्य आप करने वाले हो अर्थात् आपको लगता है कि मेरे बिना इस कार्य में सफलता नहीं मिलेगी, वह कार्य आप करो, परन्तु अपने समय पर भी attention रखो क्योंकि बच्चे, अब जल्दी ही आपको बिन्दु बन बिन्दु बाप (परमात्मा पिता) के साथ मिलन मनाना है ।

विस्तार को सार में लाने के लिए एक तो परखने की शक्ति और दूसरा समेटने की शक्ति चाहिए। इसलिए इन शक्तियों को use कर आगे बढ़ो।

अभी भी जब कोई पुराना स्वभाव-संस्कार आता है तो बच्चे मूँझ जाते हैं…। 
बच्चे, इसके लिए बार-बार बाप के पास, अपने रूहानी घर (परमधाम) में जाकर बैठ जाओ।

शिवबाबा से आती शक्तियों का स्वयं में अनुभव करो जिससे आप शक्तिशाली हो जाओगे और अपने पुराने स्वभाव-संस्कार पर जीत भी पा लोगे…।

इसका अभ्यास आपको चलते-फिरते करना है। हर समय अपने संकल्पों पर attention हो कि ‘‘मैं कितना समय याद स्वरूप हूँ’’ … यदि attention में कमी होगी तो अलबेलापन आयेगा और आप आगे नहीं बढ़ पाओगे।

हर कार्य में बिन्दु बन बिन्दु बाप को use करो और हमेशा ही अपने भाग्य की स्मृति में रहो जिससे आप थकावट भी महसूस नहीं करोगे और हल्के होकर पुरूषार्थ करते रहोगे…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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