BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 15 OCTOBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
15.10.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बच्चों के अन्दर एक ही इच्छा है कि हम बाप-समान बन जायें…। फिर भी बाप-समान बनने में कमी क्या रह जाती है, अर्थात् कारण क्या है..?

कारण हैं – ‘‘वैराग्य की कमी और शक्तियों की कमी’’ … इसलिए ना चाहते हुए भी अपने स्वमान को वा बाप (परमात्मा पिता) को भूल साधारणता में आ जाते हो…।

देखो बच्चे, जब भी कोई वस्तु परिपक्व होती है तो वह सभी जगह से अपने किनारे छोड़ देती है और बिल्कुल न्यारी हो जाती है, इसलिए सबकी प्यारी बन जाती है…।

तो आप भी अपनी checking करो कि आपकी मन-बुद्धि कहाँ-कहाँ जा रही है..? जहाँ जा रही है, वहाँ किसी-न-किसी प्रकार का लगाव है…?

जैसे; आप चाहते हो कि हम वाचा में ना आयें, फिर भी आप आ जाते हो, क्योंकि अभी भी इस दुनिया से प्यार है … वाचा में आने के बाद सोचते हो कि हम कुछ हल्के हो गये…! 
परन्तु नहीं बच्चे…, सूक्ष्म रीति आप भारी हो जाते हो क्योंकि जिस संस्कार को खत्म करने का पुरूषार्थ कर रहे हो और यदि आप बार-बार उस संस्कार को use करोगे, तो आपका वह संस्कार कैसे खत्म होगा…? 
और ना ही आप इस दुनिया से न्यारे हो पाओगे…!

इसलिए अपने आप से बार-बार बात करो कि आप क्या चाहते हो…, और यदि बाप-समान बनना चाहते हो तो रास्ते में जो भी रूकावट है, उसे खत्म तो करना पड़ेगा ना…!

दूसरा, आपको बार-बार अपने मास्टर सर्वशक्तिमान् की seat पर set होना है अर्थात् आपकी जो भी शक्तियाँ हैं – जैसे समाने की शक्ति, दृढ़ता की शक्ति, controlling power, ruling power आदि-आदि…, उन सबको revise करो और बार-बार उन्हें use करो…।

जैसे आप कोई संकल्प चाहते हो कि ना आये तो उस समय समाने की शक्ति को use करके दृढ़तापूर्वक आगे बढ़ो…।

जितना-जितना आप इन शक्तियों को use करोगे, उतना-उतना ही आप अपने आपको मास्टर सर्वशक्तिमान् अनुभव करोगे। इसलिए हर शक्ति को अपनी दिनचर्या में use करो, क्योंकि विजयी रत्न तो आप बच्चों को ही बनना है…।

बाप, आप बच्चों का सच्चा दिल और एक ही इच्छा देख विशेष पालना करने आ गया है, तो पुरूषार्थ भी सच्चे दिल से करो अर्थात् जैसे बाप कहें, वैसा करते जाओ…, तो ऐसा हो ही नहीं सकता कि आपको सफलता ना मिले, पर थोड़ा-सा attention को और बढ़ाओ…।

शिव बाप हर कदम में आप बच्चों के साथ है…।

बच्चे, अब इस दुनिया में आप बच्चों के लिए कुछ भी नहीं रहा है … इसलिए इससे अब सम्पूर्ण रीति वैराग्य लाओ…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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