BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 14 MARCH 2018 – Aaj Ka Purusharth

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*Om Shanti*
*14.03.2018*

★【 *आज का पुरुषार्थ*】★

देखो बच्चे, यह drama का अन्त का भी अन्त अर्थात् climax period अर्थात् हिसाब-किताब चुक्तु करने का समय चल रहा है। इसलिए सबसे पहले drama के hero पार्टधारी अर्थात् त्यागी, तपस्वी आत्माओं के हिसाब-किताब किसी भी रूप में चाहे तन, मन, धन, जन, सम्बन्ध-सम्पर्क के द्वारा चुक्तु होने हैं।

परन्तु जितना आपका योग powerful होता जायेगा और जितना आप इस दुनिया से न्यारे हो तेरा-तेरा करते जाओगे, उतना ही आपका हिसाब-किताब हल्का होता जायेगा।

बस आप बच्चों को योग के साथ-साथ संकल्पों द्वारा बाप पर समर्पण होना है।

यदि आप परिस्थितियों को देख परेशान होते हो … अर्थात् आपके अन्दर मैं और मेरा है। जब सबकुछ बाप हवाले हो गया तो परेशान होने की ज़रूरत नहीं…!

देखो बच्चे आपके सम्बन्ध-सम्पर्क में आनेवाली आत्माओं का अपना-अपना हिसाब-किताब है जो उन्हें ही चुक्तु करना पड़ेगा चाहे योग के द्वारा, चाहे भोगना के द्वारा इसलिए आपको उनसे detach रहना है।

जब आप detach रहकर उन्हें सकाश दोगे तो उनका भी कल्याण होगा। नहीं तो मैं-मेरे में फँसी आत्मा किसी को सकाश नहीं दे सकती और ना ही वह स्वयं का कल्याण कर सकती है और ना ही दूसरों का।

न्यारे होकर decision लेना वा समझानी देना अलग बात है परन्तु उनके साथ परेशान हो जाना अर्थात् बाप पर निश्चय की कमी की निशानी है।

देखो आप बच्चों को बाबा ने पहले भी बताया है कि आप बच्चों का तपस्या के द्वारा पुण्य का खाता भरपूर हो रहा है और minor सा बचा पाप का खाता भी खत्म हो रहा है, इसलिए अब अपना हिसाब-किताब हल्के रह तेरा-तेरा करके खत्म करो अन्यथा फिर और-और हिसाब-किताब बनते जायेंगे।

इसलिए हर संकल्प बाप को समर्पण करो। बार-बार मन-बुद्धि पर attention रख मन-बुद्धि को पकड़ बाप के पास ले जाओ।

यही सहज से सहज तरीका है हिसाब-किताब चुक्तु करने का। जब आप हल्के रहोगे तभी तो आप अन्य आत्माओं का कल्याण कर पाओगे।

देखो अभी तो दुनिया की आत्मायें अपना पुण्य का खाता खत्म करने में और पाप का खाता भरपूर करने में लगी हुई है, तो बताओ फिर अन्त का scene कैसा होगा…?

उन आत्माओं के कल्याण के निमित्त तुम ही हो। पहले सभी खज़ानों से स्वयं को भरपूर करो तभी आप बाप के कार्य में सहयोगी बन पाओगे।

जितना इस समय आप बाप के सहयोगी बनेंगे उतने ही बाप के साथ का अर्थात् अन्तिम समय में बाप से मिलन के आनन्द का अनुभव कर पाओगे।

अच्छा। ओम शांति।

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