BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 14 DECEMBER 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
14.12.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बाबा हम सभी बच्चों के पुरूषार्थ की result check कर रहा था…। 
तो बाबा ने देखा कि … बाबा के कुछ एक बच्चे तो बाप की श्रीमत को 100% follow कर रहे हैं और पुरूषार्थ भी पूरा है कि हम स्वयं के हर संकल्प को बाप को समर्पण कर बाप समान बन जायें…।

बाबा भी उन बच्चों को देख खुश होता है और कहता है – वाह बच्चे वाह … इसी तरह उड़ते रहो…। और बाप भी इन बच्चों की 100% guarantee लेता है।

फिर बाबा ने कुछ एक बच्चे ऐसे देखें … जिन्हें लगन है बाप की श्रीमत को follow करने की, और करते भी हैं, परन्तु बीच-बीच में क्या, क्यों, कैसे आ जाता है…!

बाबा उन बच्चों को कहता है … बच्चे, हिम्मत रख करते चलो तभी आप बाप की मदद के पात्र बन सकते हो…।

ज्यादा सोचो मत, बाप की हर श्रीमत को महीनता से पालन कर, अपना 100% समय सफल करो…।

देखो, लौकिक में भी किसी चीज़ की प्राप्ति की दृढ़ इच्छा हो तो आत्मा दिन-रात एक कर, उस इच्छा को पूरी कर लेती है … और ये तो कल्प कल्प के भाग्य बनाने की इच्छा है…। 
इसलिए दुनिया से न्यारे बन अपनी इस इच्छा को पूरी करो…।

बाबा ने जो अपने तीसरी तरह के बच्चे देखें … वो पुरूषार्थ करते हैं और पाना भी ऊँच पद चाहते हैं परन्तु आज बाबा उन बच्चों को officially समझानी दे रहा है कि बाप की श्रीमत को महीनता से समझो … complaint स्वरूप मत बनो – बाबा हमारी सुनता नहीं, बाबा हमारी मदद नहीं करता…!

सोचो, लौकिक में भी माँ-बाप, अपने बच्चों के साथ ऐसा कर सकते हैं क्या…? 
लौकिक में भी माँ-बाप का ध्यान सदा अपने कमज़ोर बच्चों पर होता है और यहाँ तो मैं बेहद का बाप हूँ, साथ ही भगवान भी, अर्थात् प्यार के सागर के साथ-साथ त्रिकालदर्शी भी हूँ और knowledgeful भी … और मुझे अपने कर्तव्य का पता है … किस तरह, किस problem को solve करना है…!

इसलिए complaint स्वरूप मत बनो…। 
अभी तो बाप से और अपने भाग्य से और अन्य आत्माओं से complaint है … परन्तु अन्त में केवल स्वयं से ही complaint होगी, जोकि पश्चाताप का बहुत भारी रूप होगा…।

क्योंकि दूसरों की गलती तो फिर भी क्षमा की जा सकती है, परन्तु अपनी इतनी बड़ी गलती, जिससे कि हम अपने कल्प-कल्प के भाग्य को कम कर देते हैं…! 
तो स्वयं को कैसे माफ कर पायेंगे…?

इसलिए समझदार बनो, बहादुर बनो … complaint स्वरूप ना बन, complete स्वरूप बनो…।

Complete वही बन सकता है जिसे बाप पर 100% निश्चय है और जिसने शुरू से ही बाप की श्रीमत की पालना की है।

बाप (परमात्मा शिव) की श्रीमत है – इस पुरानी दुनिया से मर जाओ, मेरा-मेरा की बजाए तेरा-तेरा हो जाये, न्यारे हो जाओ…।

तो check करो – हम बाबा की इस श्रीमत का practical स्वरूप बने हैं क्या…?

योग-योग करते हो, योग की result क्या है – ‘‘स्व-परिवर्तन अर्थात् स्वभाव-संस्कार का परिवर्तन…।’’

योग एक अग्नि का कार्य करती है … जोकि कठोर से कठोर चीज़ को परिवर्तन कर देती है। तो फिर स्वयं पर attention दो … बाप की मदद के पात्र बनो…।

हिम्मत रखोगे तभी बाप की मदद मिलेगी। दिलशिकस्त मत बनो, वायुमण्डल के प्रभाव में मत आओ…। शक्तिशाली बन, बाप की मदद के पात्र बन, रास्ते की अपनी हर रूकावट को पार कर अपनी मंज़िल तक पहुँचो…।

ये सारे हिसाब-किताब आप बच्चों के स्वयं के ही बनाये हुए हैं। 
इसलिए चुक्तु भी स्वयं ही करने पड़ेंगे…!

बाप आप बच्चों की मदद के लिए ही आया है, परन्तु हिम्मत का एक कदम तो आपको ही बढ़ाना पड़ेगा…!

इसलिए ज्यादा सोचो मत, निश्चय रख पुरूषार्थ करो…।

बाबा तो शुरू से ही कह रहा है कि हल्के रहो … हल्के रहोगे तो परिस्थिति भी हल्की हो जायेगी।

तो check करो – हम कितने percent बाप की श्रीमत की पालना कर रहे हैं…?

देखो, बाबा तो समय की warning दे रहा है … “अभी-अभी कर लो…।”

यह ना हो कि विश्व की सबसे बड़ी lottery लगती-लगती रह जाये और आप खाली ही रह जाओ…!

इसलिए, check करो … यदि अभी अन्तिम घड़ी आ जाये तो हमारी क्या गति होगी…?

अच्छा। ओम् शान्ति।

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