BRAHMAKUMARIS DAILY MAHAVAKYA 11 JULY 2018 – Aaj Ka Purusharth

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Om Shanti
11.07.2018

★【 आज का पुरूषार्थ】★

बाबा ने कहा… 
बच्चे, आप शरीर नहीं आत्मा हो, और आत्मिक दृष्टि से सारा संसार ही आपका परिवार है। 
अब बस इस अन्तिम जन्म में गृहस्थ व्यवहार में रहते आपको स्वयं पर attention ही रखना है कि मेरी वज़ह से कोई भी आत्मा असंतुष्ट ना हो … और आप जिस परिवार में रहते हो, उन सदस्यों की ज़िम्मेवारी बुद्धि से बाप (परमात्मा पिता) हवाले कर दो…।

देखो, अब सब कुछ सम्भालने परमात्मा बाप आ गया है … और उसे पता है कि किस रीति उसको सम्भालना है…।
यदि आप अपनी ज़िम्मेवारी समझोगे तो आपके सम्बन्ध में आने वाली आत्माओं के साथ-साथ आपका भी हिसाब-किताब बन जायेगा, जो फिर आपको स्वयं ही चुक्तु करना पड़ेगा…!

अब सब कुछ बाप (परमात्मा पिता) हवाले करने में आपका भी कल्याण है और आपके सम्बन्ध में आने वाली आत्माओं का भी…। 
इसलिए बच्चे, आप निश्चिन्त हो जाओ…। आपका बाप स्वयं आ गया है, आप बच्चों की ज़िम्मेवारी संभालने…। 
फिर बार-बार, सोच-सोच कर क्यों भारी हो जाते हो…?

जो थोड़ा बहुत हिसाब-किताब है, वो सहज रीति चुक्तु करो अर्थात् बार-बार बाप को समर्पण कर अपनी seat पर set होने का अभ्यास करो…। 
अब अपना हिसाब-किताब मत बनाओ। यह ना हो कि समय परिवर्तन हो जायें और आपको पश्चाताप करना पड़े…! 
अब बस समय परिवर्तन हुआ की हुआ…।

इसलिए बच्चे, इस समय सबसे अधिक ज़रूरी है अपनी एकरस अर्थात् शांतचित्त स्थिति में स्थित रहना। आपको अपनी यह seat किसी भी कारण से नहीं छोड़नी है … चाहे कुछ भी हो जायें…!

देखो बच्चे, एकरस स्थिति आपकी बाप-समान स्थिति है … इस स्थिति में जब आप स्थित होते हो तो आपके साथ बाप है ही है … और जब आप योग लगाने के लिए वा किसी भी कारणवश संकल्पों में क्या, क्यों, कैसे, ऐसे, वैसे वा कब तक लाते हों, तो आप बाप से दूर अर्थात् अपनी मंज़िल से दूर हो जाते हो…। इसलिए सदा प्रेमस्वरूप बनकर रहो … कोई भी बड़े से बड़ा कारण आपको आपकी स्थिति से ना हिलाये…। 
बस बच्चे, आप मंज़िल के समीप ही हो…।

अच्छा। ओम् शान्ति।

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